रायपुर: छत्तीसगढ़ की MBBS NEET मेरिट लिस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। 9 अभ्यर्थियों के डोमिसाइल, जाति प्रमाण-पत्र और कैटेगरी से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की गई है। मामले को लेकर NSUI ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। शिकायतकर्ताओं ने पूरी मेरिट लिस्ट में शामिल अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का भी वेरिफिकेशन कराने की मांग की है।
शिकायत में रिद्धि टांडी, मान्या साहू, नेविदिता मंडावी, आहाना बेथशीबा मसीह, लक्ष्य चौरे, आकांक्षा मारिया, शीतल, प्रिंसी एस. बल्लेवार और द्विज सिंह के दस्तावेजों को जांच के लिए सामने रखा गया है।

कुछ मामलों में दो अलग-अलग राज्यों के डोमिसाइल से जुड़े दस्तावेज होने का दावा किया गया है, जबकि कुछ अभ्यर्थियों की जाति और कैटेगरी को लेकर सवाल उठाए गए हैं। एक मामले में 2025 में जनरल कैटेगरी और 2026 में ST कैटेगरी दर्ज होने का दावा भी किया गया है।
हालांकि, अभी किसी भी अभ्यर्थी के खिलाफ कोई अनियमितता प्रमाणित नहीं हुई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी छात्र को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि सक्षम अथॉरिटी से दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराना है।
NSUI के हेमंत पाल के मुताबिक, सामने रखे गए 9 मामले केवल उदाहरण हैं। पूरी मेरिट लिस्ट के दस्तावेजों की जांच होने पर अन्य विसंगतियां भी सामने आ सकती हैं। इसलिए सभी अभ्यर्थियों के डोमिसाइल, जाति प्रमाण-पत्र, कैटेगरी और आवेदन रिकॉर्ड का वेरिफिकेशन कराने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि MBBS एडमिशन प्रक्रिया हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी है। यदि किसी अपात्र अभ्यर्थी को गलत दस्तावेज या कैटेगरी के आधार पर लाभ मिला है, तो उसका असर पात्र विद्यार्थियों पर पड़ सकता है। इसी वजह से समयबद्ध जांच और जरूरत पड़ने पर संशोधित मेरिट लिस्ट जारी करने की मांग की गई है।

