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रायपुर में रेलवे सुरक्षा बल का 42वां स्थापना दिवस:ड्रोन, रोबोट और कमांडो टीम दिखाएंगे दमखम, उत्कृष्ट सेवा करने वाले जवानों को मिलेंगे पदक

रायपुर में 12 अक्टूबर को रेलवे सुरक्षा बल (RPF) का 42वां स्थापना दिवस मनाया जाएगा। रेलवे वर्कशॉप ग्राउंड में आयोजित समारोह में भव्य परेड के साथ आधुनिक सुरक्षा तकनीकों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। कार्यक्रम में महिला दस्ता, कमांडो टीम, डॉग स्क्वॉड और सेगवे दस्ता अपनी कार्यक्षमता का प्रदर्शन करेंगे। समारोह के दौरान उत्कृष्ट सेवा करने वाले अधिकारियों और जवानों को पदक देकर सम्मानित किया जाएगा। तकनीकी प्रदर्शनी में ड्रोन, ह्यूमनॉइड रोबोट ‘अर्जुन’ और डिजिटल सुरक्षा प्रणालियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। RPF की परेड में महिला दस्ता और कमांडो टीम दिखाएंगे दमखम स्थापना दिवस समारोह का प्रमुख आकर्षण RPF की परेड होगी। इसमें महिला दस्ता, कमांडो रैपिड एक्शन टीम (CORAS), डॉग स्क्वॉड और सेगवे दस्ता शामिल होंगे। जवानों के अनुशासन, प्रशिक्षण, गश्त और आपात परिस्थितियों में कार्रवाई करने की क्षमता का प्रदर्शन किया जाएगा। प्रशिक्षित श्वानों के जरिए डॉग स्क्वॉड की कार्यक्षमता दिखाई जाएगी। वहीं, कमांडो टीम विशेष परिस्थितियों में कार्रवाई की तैयारी का प्रदर्शन करेगी। इस आयोजन के माध्यम से रेलवे सुरक्षा में महिला जवानों की भूमिका को भी सामने लाया जाएगा। 34 पदक और एक जीवन रक्षा पदक से होगा सम्मान समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले RPF अधिकारियों और जवानों को कुल 34 पदकों के साथ एक जीवन रक्षा पदक प्रदान किया जाएगा। इनमें विशिष्ट सेवा के लिए 3 राष्ट्रपति पुलिस पदक और सराहनीय सेवा के लिए 30 पुलिस पदक शामिल हैं। इसके अलावा, वर्ष 2024 में एक रेल यात्री की जान बचाने के लिए एक जवान को जीवन रक्षा पदक से सम्मानित किया जाएगा। ये सम्मान स्वतंत्रता दिवस 2025 और गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर घोषित किए गए थे। RPF की स्थापना से अब तक का सफर रेलवे सुरक्षा बल को रेलवे संपत्ति की सुरक्षा और रेल व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया। रेलवे सुरक्षा बल अधिनियम, 1957 के तहत इसे कानूनी आधार मिला और 1959 में इसकी नियमावली बनाई गई। वर्ष 1965 में इसका नाम रेलवे सुरक्षा विशेष बल (RPSF) रखा गया। इसके बाद 20 सितंबर 1985 को कानून में संशोधन के जरिए RPF को संघ के सशस्त्र बल का दर्जा मिला। वर्ष 2003 में हुए बदलावों से यात्रियों और यात्री क्षेत्रों की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों का भी विस्तार हुआ। समय के साथ RPF की भूमिका रेलवे संपत्ति की सुरक्षा के साथ यात्रियों की सहायता, अपराधों की रोकथाम और सुरक्षित रेल यात्रा सुनिश्चित करने तक बढ़ी है। ड्रोन, रोबोट ‘अर्जुन’ और डिजिटल सिस्टम होंगे प्रदर्शित स्थापना दिवस पर आयोजित तकनीकी प्रदर्शनी में रेलवे सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले आधुनिक उपकरणों की जानकारी दी जाएगी। इसमें निगरानी के लिए ड्रोन, ह्यूमनॉइड रोबोट ‘अर्जुन’ और डिजिटल सुरक्षा प्रणालियां प्रमुख आकर्षण होंगी। प्रदर्शनी में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) और नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) जैसे डिजिटल सिस्टम की कार्यप्रणाली भी प्रदर्शित की जाएगी। इन तकनीकों के जरिए अपराध संबंधी जानकारी साझा करने और फिंगरप्रिंट के माध्यम से पहचान करने में तकनीक की भूमिका समझाई जाएगी। वरिष्ठ अधिकारी समारोह में होंगे शामिल कार्यक्रम में RPF की महानिदेशक सोनाली मिश्रा, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश और RPF के महानिरीक्षक मुनावर खुर्शीद सहित छत्तीसगढ़ प्रशासन एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने का कार्यक्रम है। 42वें स्थापना दिवस के माध्यम से रेलवे सुरक्षा बल अपने जवानों की सेवा, साहस और कर्तव्यनिष्ठा को सम्मानित करने के साथ रेलवे सुरक्षा में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल को भी प्रदर्शित करेगा।

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रक्षाबंधन पर यात्रियों को राहत, दुर्ग-रायगढ़ के बीच आज से चलेगी स्पेशल ट्रेन

रक्षाबंधन के त्योहार को देखते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने यात्रियों के लिए विशेष ट्रेन चलाने का फैसला लिया है। दुर्ग से रायगढ़ के बीच रक्षाबंधन पैसेंजर स्पेशल ट्रेन 27 अगस्त से शुरू होगी। यह ट्रेन 29 अगस्त तक कुल तीन फेरे लगाएगी। रेलवे के मुताबिक त्योहार के दौरान ट्रेनों में बढ़ने वाली अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है। गाड़ी संख्या 08834/08833 दुर्ग-रायगढ़-दुर्ग रक्षाबंधन पैसेंजर स्पेशल के संचालन से दुर्ग, भिलाई, रायपुर, भाटापारा, बिलासपुर, जांजगीर-नैला, चांपा, सक्ती, खरसिया और रायगढ़ समेत रास्ते के अन्य स्टेशनों के यात्रियों को अतिरिक्त यात्रा सुविधा मिलेगी। दुर्ग से सुबह 10:30 बजे रवाना होगी गाड़ी संख्या 08834 दुर्ग-रायगढ़ पैसेंजर स्पेशल सुबह 10:30 बजे दुर्ग से रवाना होगी। इसके बाद यह भिलाई नगर, भिलाई पावर हाउस, भिलाई, देवबलोदा चरोदा, कुम्हारी, सरोना, सरस्वती नगर और रायपुर सहित कई स्टेशनों पर रुकेगी। ट्रेन दोपहर में तिल्दा-नेवरा, हथबंद, भाटापारा, बिल्हा और अन्य स्टेशनों से होते हुए बिलासपुर पहुंचेगी। इसके बाद गतौरा, जयरामनगर, अकलतरा, जांजगीर-नैला, चांपा, सक्ती, खरसिया और अन्य स्टेशनों पर ठहराव के बाद शाम करीब 7 बजे रायगढ़ पहुंचेगी। रायगढ़ से रात 7:40 बजे वापसी वापसी में गाड़ी संख्या 08833 रायगढ़-दुर्ग पैसेंजर स्पेशल रात 7:40 बजे रायगढ़ से रवाना होगी। ट्रेन निर्धारित स्टेशनों पर रुकते हुए रात करीब 10:20 बजे बिलासपुर, 11:25 बजे भाटापारा और रात 12:40 बजे रायपुर पहुंचेगी। इसके बाद अगले दिन रात करीब 2 बजे दुर्ग पहुंचेगी। 10 कोच के साथ चलेगी ट्रेन रेलवे ने इस स्पेशल ट्रेन में कुल 10 आईसीएफ कोच लगाए हैं। इनमें 8 जनरल कोच और 2 एसएलआरडी कोच शामिल हैं। त्योहार के दौरान यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे की ओर से यह अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे दुर्ग से रायगढ़ के बीच सफर करने वाले यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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बिलासपुर रेलवे जोन के पानी पर CAG की रिपोर्ट में सवाल, 16 जोन में सबसे ज्यादा कमी स्कोर

बिलासपुर जोन यानी दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के कई स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाले पेयजल की गुणवत्ता को लेकर CAG की रिपोर्ट में गंभीर कमियां सामने आई हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने देश के 16 रेलवे जोन के 512 चयनित स्टेशनों पर पेयजल और न्यूनतम यात्री सुविधाओं का आकलन किया। रिपोर्ट के मुताबिक, कई स्टेशनों के पानी के नमूनों में E. coli और Total Coliform बैक्टीरिया पाए गए। E. coli की मौजूदगी पानी के मल या सीवेज से दूषित होने का संकेत मानी जाती है। कुछ स्थानों पर पानी में क्लोरीन का स्तर भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिला। CAG ने पेयजल व्यवस्था में सामने आई कमियों के आधार पर रेलवे जोन का Deficiency Score तैयार किया। इस स्कोर में संख्या जितनी कम होती है, व्यवस्था उतनी बेहतर मानी जाती है। पेयजल से जुड़े मानकों में SECR का कमी स्कोर 93.35 रहा, जो 16 रेलवे जोन में सबसे ज्यादा है। इसके मुकाबले दक्षिण मध्य रेलवे का कमी स्कोर 17.53 रहा, जो सबसे कम था। इस आधार पर पेयजल व्यवस्था के मामले में दक्षिण मध्य रेलवे का प्रदर्शन बेहतर पाया गया। न्यूनतम यात्री सुविधाओं में भी SECR की स्थिति कमजोर CAG की जांच में पेयजल के अलावा यात्रियों के लिए उपलब्ध अन्य जरूरी सुविधाओं का भी आकलन किया गया। इनमें टॉयलेट, बैठने की व्यवस्था, प्लेटफॉर्म पर शेड और अन्य बुनियादी सुविधाएं शामिल थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, SECR की सामान्य यात्री सुविधाओं में भी कई कमियां सामने आईं। हालांकि, दिव्यांग यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं के मामले में SECR का प्रदर्शन बेहतर रहा। इस श्रेणी में जोन ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया और इसका Deficiency Score 20.97 रहा। 512 स्टेशनों पर हुआ आकलन CAG ने देश के 16 रेलवे जोन के 512 चयनित स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाली पेयजल और न्यूनतम यात्री सुविधाओं की स्थिति की जांच की। तय मानकों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर के आधार पर अलग-अलग जोन का कमी स्कोर तैयार किया गया। रेलवे ने सुधार की योजना बताई CAG की रिपोर्ट सामने आने के बाद रेलवे की ओर से पेयजल व्यवस्था में सुधार की बात कही गई है। बिलासपुर जोन के स्टेशनों पर बेहतर पानी उपलब्ध कराने के लिए वाटर कूलर और Tank-to-Tap Water Filtration System लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके साथ ही पानी की टंकियों की नियमित सफाई, रखरखाव और पानी की गुणवत्ता की समय-समय पर जांच करने की व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

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रायपुर के सरोना रेलवे स्टेशन का 13.57 करोड़ से कायाकल्प, मिलेंगी आधुनिक यात्री सुविधाएं

रायपुर के सरोना रेलवे स्टेशन का अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकास किया गया है। करीब 13.57 करोड़ रुपये की लागत से स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। अब यह स्टेशन यात्रियों के लिए पहले से ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया गया है। पुनर्विकास कार्य के तहत स्टेशन पर 95 वर्गमीटर का नया कॉन्कोर्स भवन तैयार किया गया है। वहीं यात्रियों और वाहनों की बेहतर आवाजाही के लिए स्टेशन के बाहर 1,912 वर्गमीटर का नया सर्कुलेटिंग एरिया विकसित किया गया है। यात्रियों की सुविधा को देखते हुए नया फुटओवर ब्रिज बनाया गया है। बुजुर्ग और दिव्यांग यात्रियों के लिए स्टेशन पर 2 नई लिफ्ट लगाई गई हैं। प्लेटफॉर्म पर शेल्टर की संख्या बढ़ाकर 3 से 7 कर दी गई है और करीब 2,800 वर्गमीटर प्लेटफॉर्म की नई सरफेसिंग की गई है। स्टेशन परिसर में यात्रियों के बैठने के लिए 189 नई बेंच और फर्नीचर लगाए गए हैं। इसके अलावा प्रतीक्षालय का नवीनीकरण किया गया है। स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए स्टेशन परिसर में आकर्षक चित्रकारी भी कराई गई है। यात्रियों की अन्य सुविधाओं के लिए 550 वर्गमीटर पार्किंग क्षेत्र, 10 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट और ट्रेन की जानकारी देने के लिए 4 इंटीग्रेटेड पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम लगाए गए हैं। रात के समय बेहतर रोशनी के लिए सोलर लाइट मास्ट भी स्थापित किए गए हैं। दिव्यांग यात्रियों के लिए रैंप, व्हीलचेयर सुविधा, दिव्यांग अनुकूल शौचालय, कम ऊंचाई वाले टिकट काउंटर और पेयजल जैसी व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं। इसके साथ ही आधुनिक साइनेज, कोच गाइडेंस सिस्टम, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और व्यवस्थित पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। रेलवे के अनुसार, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत हुए इस विकास कार्य से सरोना रेलवे स्टेशन की तस्वीर बदलेगी और यात्रियों को अधिक आरामदायक, सुरक्षित और आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी।

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अब स्लीपर कोच में भी मिलेगी बेडरोल सुविधा, दुर्ग-भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस से शुरुआत

भारतीय रेलवे ने स्लीपर क्लास के यात्रियों के लिए एक नई सुविधा शुरू की है। अब दुर्ग-भोपाल-दुर्ग अमरकंटक एक्सप्रेस में यात्रा करने वाले यात्री भी किराए पर बेडरोल प्राप्त कर सकेंगे। इस सुविधा के संचालन के लिए रेलवे ने एक निजी कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी है, जिसका अनुबंध वर्ष 2031 तक रहेगा। नई व्यवस्था के तहत स्लीपर कोच के यात्री अपनी जरूरत के अनुसार चादर और तकिया किराए पर ले सकेंगे। चादर के लिए 40 रुपये, तकिया के लिए 30 रुपये और दोनों साथ लेने पर 70 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है। यह सुविधा ट्रेन संख्या 12853 (दुर्ग-भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस) और 12854 (भोपाल-दुर्ग अमरकंटक एक्सप्रेस) में उपलब्ध होगी। अब तक बेडरोल की सुविधा मुख्य रूप से एसी कोच के यात्रियों के लिए ही सीमित थी, लेकिन अब स्लीपर क्लास के यात्रियों को भी लंबी दूरी की यात्रा के दौरान अधिक आरामदायक सफर का विकल्प मिलेगा। रेलवे का उद्देश्य यात्रियों की सुविधा बढ़ाना है ताकि उन्हें यात्रा के दौरान चादर और तकिया साथ लेकर चलने की आवश्यकता न पड़े और सफर अधिक आरामदायक बन सके।

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बिलासपुर रेल मंडल में 8 ट्रेनें रद्द, 18 और 19 जुलाई को यात्रियों को होगी परेशानी

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर रेल मंडल में भाटापारा और हथबंध स्टेशनों के बीच तीसरी लाइन सेक्शन पर ऑटो सिग्नलिंग कमीशनिंग का कार्य किया जाएगा। इस वजह से 18 और 19 जुलाई को कई मेमू और पैसेंजर ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। रेलवे ने इस अवधि में कुल 8 ट्रेनों को रद्द करने का निर्णय लिया है। रेलवे प्रशासन के अनुसार, रेल नेटवर्क को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कार्य तेज गति से किए जा रहे हैं। इसी क्रम में ऑटो सिग्नलिंग प्रणाली स्थापित की जा रही है, जिसके चलते कुछ ट्रेनों का परिचालन अस्थायी रूप से प्रभावित होगा। लोकल मेमू और पैसेंजर ट्रेनों के रद्द होने से रोजाना इन ट्रेनों से यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। रद्द रहने वाली ट्रेनें इन ट्रेनों का आंशिक संचालन रहेगा रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा पर निकलने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की पुष्टि कर लें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

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कोरबा-रायपुर हसदेव एक्सप्रेस अब चलेगी रोजाना, यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के लिए राहतभरी खबर सामने आई है। कोरबा और रायपुर के बीच चलने वाली हसदेव एक्सप्रेस ट्रेन अब प्रतिदिन संचालित की जाएगी। इस निर्णय से दोनों शहरों के बीच सफर करने वाले हजारों यात्रियों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को फायदा मिलेगा। अब तक हसदेव एक्सप्रेस सप्ताह के अलग-अलग दिनों में सीमित संचालन के साथ चलती थी, लेकिन नई व्यवस्था के तहत इसे रोजाना चलाने की तैयारी की गई है। ट्रेन को कोरबा से रायपुर और रायपुर से कोरबा के बीच नियमित रूप से संचालित किया जाएगा, जिससे यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी और यात्रा सुविधा मिल सकेगी। हसदेव एक्सप्रेस कोरबा से सुबह रवाना होकर बिलासपुर होते हुए रायपुर पहुंचती है। यह ट्रेन क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण रेल मार्गों में से एक मानी जाती है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री इसका उपयोग करते हैं। रेलवे के इस फैसले से नियमित यात्रियों को टिकट उपलब्धता की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही कोरबा, चांपा, अकलतरा, बिलासपुर और रायपुर के बीच आने-जाने वाले लोगों के लिए यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हो जाएगी। यात्रियों का मानना है कि हसदेव एक्सप्रेस के दैनिक संचालन से क्षेत्रीय संपर्क बेहतर होगा और व्यापारिक व शैक्षणिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। रेलवे द्वारा समय-समय पर ट्रेनों के संचालन और समय सारिणी में बदलाव कर यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

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कोरबा में बड़ा रेल हादसा टला, तेज आंधी में मालगाड़ी का तिरपाल OHE तार में फंसा

छत्तीसगढ़ के Korba में शुक्रवार सुबह तेज आंधी, बारिश और बिजली गिरने के बीच बड़ा रेल हादसा टल गया। मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण कई इलाकों में तेज हवाएं चलीं, जिसका असर कोयला परिवहन पर भी देखने को मिला। जानकारी के अनुसार पवन टॉकीज से दुरपा रोड के पास खदान से कोयला लेकर प्लांट की ओर जा रही एक मालगाड़ी को बीच रास्ते में रोकना पड़ा। ट्रेन में कोयले को ढकने के लिए लगाया गया तिरपाल तेज हवा के कारण उड़कर फट गया और रेलवे के ओएचई तार तथा खंभे में जाकर फंस गया। तिरपाल के ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) लाइन में फंसने से शॉर्ट सर्किट और बड़े हादसे की आशंका पैदा हो गई थी। स्थिति को देखते हुए तुरंत मालगाड़ी को रोका गया और रेलवे कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। समय रहते ट्रेन रोक दिए जाने से बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद कुछ समय तक रेल संचालन प्रभावित रहा, जबकि अधिकारियों ने सुरक्षा जांच के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की। मौसम विभाग के अनुसार अचानक तेज आंधी और बारिश के चलते जिले में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। हालांकि तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर जनजीवन भी प्रभावित हुआ।

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बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर फटा तिरंगा लहराया, रेलवे की लापरवाही पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ के Bilaspur स्थित Bilaspur Railway Station में राष्ट्र सम्मान से जुड़ी एक गंभीर लापरवाही सामने आई है। स्टेशन के वीआईपी गेट नंबर-2 के बाहर लगाया गया विशाल तिरंगा फटा हुआ और गंदगी से भरा हुआ लहराता नजर आया, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। देश की आन-बान और शान माने जाने वाले राष्ट्रीय ध्वज की इस स्थिति को लेकर लोगों ने इसे अपमानजनक बताया है। यह तिरंगा आमतौर पर गौरव और सम्मान का प्रतीक होता है, लेकिन मौजूदा हालात में इसकी स्थिति बदहाल दिखाई दी। झंडे का कपड़ा जगह-जगह से फटा हुआ था और उस पर धूल-मिट्टी भी जमी हुई थी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि इतनी महत्वपूर्ण जगह पर लगे राष्ट्रीय ध्वज की देखरेख में आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई। इस मामले ने South East Central Railway के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर रेलवे “अमृत स्टेशन योजना” जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के तहत आधुनिक सुविधाओं के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय प्रतीकों की इस तरह अनदेखी चिंता का विषय बन गई है। नियमों के अनुसार, Flag Code of India में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि तिरंगे को हमेशा साफ और सम्मानजनक स्थिति में ही फहराया जाना चाहिए। फटा या गंदा झंडा सार्वजनिक स्थान पर लगाना नियमों का उल्लंघन माना जाता है। इसके अलावा, क्षतिग्रस्त झंडे को सम्मानपूर्वक नष्ट करने की भी प्रक्रिया निर्धारित है—या तो उसे एकांत में जलाया जाए या जमीन में दफन किया जाए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही तिरंगे को तुरंत बदलने और भविष्य में ऐसी लापरवाही न होने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की जा रही है।

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बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को गर्मी से राहत, 43 डिग्री में शरबत वितरण और प्लेटफॉर्म-1 पर लगाया गया मिस्टिंग सिस्टम

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर भीषण गर्मी से यात्रियों को राहत देने के लिए रेलवे प्रशासन ने विशेष पहल की है। यहां यात्रियों को शरबत और ठंडा पेयजल वितरित किया गया, जिससे तेज गर्मी में उन्हें राहत मिल सके। जानकारी के अनुसार, यह व्यवस्था 43 डिग्री से अधिक तापमान को देखते हुए की गई। रेलवे के वाणिज्य विभाग के कर्मचारियों, विशेष टीम और स्काउट-गाइड के बच्चों ने मिलकर प्लेटफॉर्म नंबर 2 और 3 पर यात्रियों को शरबत और ठंडा पानी उपलब्ध कराया। इसके अलावा प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर आधुनिक मिस्टिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे लगातार ठंडी फुहारें गिरती रहीं और यात्रियों को गर्मी से राहत मिली। जरूरतमंद यात्रियों के लिए ओआरएस सैशे भी वितरित किए गए। यह पूरी व्यवस्था वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अनुराग कुमार सिंह के मार्गदर्शन में की गई। रेलवे प्रशासन ने बताया कि इस तरह की जनसेवा और मानवीय पहल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर की जा रही है। रेलवे ने यह भी कहा कि भविष्य में भी यात्रियों के लिए इसी तरह की सुविधाएं और राहत उपाय लगातार जारी रहेंगे, ताकि गर्मी के मौसम में सफर को अधिक आरामदायक बनाया जा सके।

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