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कोरबा-रायपुर हसदेव एक्सप्रेस अब चलेगी रोजाना, यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के लिए राहतभरी खबर सामने आई है। कोरबा और रायपुर के बीच चलने वाली हसदेव एक्सप्रेस ट्रेन अब प्रतिदिन संचालित की जाएगी। इस निर्णय से दोनों शहरों के बीच सफर करने वाले हजारों यात्रियों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को फायदा मिलेगा। अब तक हसदेव एक्सप्रेस सप्ताह के अलग-अलग दिनों में सीमित संचालन के साथ चलती थी, लेकिन नई व्यवस्था के तहत इसे रोजाना चलाने की तैयारी की गई है। ट्रेन को कोरबा से रायपुर और रायपुर से कोरबा के बीच नियमित रूप से संचालित किया जाएगा, जिससे यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी और यात्रा सुविधा मिल सकेगी। हसदेव एक्सप्रेस कोरबा से सुबह रवाना होकर बिलासपुर होते हुए रायपुर पहुंचती है। यह ट्रेन क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण रेल मार्गों में से एक मानी जाती है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री इसका उपयोग करते हैं। रेलवे के इस फैसले से नियमित यात्रियों को टिकट उपलब्धता की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही कोरबा, चांपा, अकलतरा, बिलासपुर और रायपुर के बीच आने-जाने वाले लोगों के लिए यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हो जाएगी। यात्रियों का मानना है कि हसदेव एक्सप्रेस के दैनिक संचालन से क्षेत्रीय संपर्क बेहतर होगा और व्यापारिक व शैक्षणिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। रेलवे द्वारा समय-समय पर ट्रेनों के संचालन और समय सारिणी में बदलाव कर यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

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कोरबा में बड़ा रेल हादसा टला, तेज आंधी में मालगाड़ी का तिरपाल OHE तार में फंसा

छत्तीसगढ़ के Korba में शुक्रवार सुबह तेज आंधी, बारिश और बिजली गिरने के बीच बड़ा रेल हादसा टल गया। मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण कई इलाकों में तेज हवाएं चलीं, जिसका असर कोयला परिवहन पर भी देखने को मिला। जानकारी के अनुसार पवन टॉकीज से दुरपा रोड के पास खदान से कोयला लेकर प्लांट की ओर जा रही एक मालगाड़ी को बीच रास्ते में रोकना पड़ा। ट्रेन में कोयले को ढकने के लिए लगाया गया तिरपाल तेज हवा के कारण उड़कर फट गया और रेलवे के ओएचई तार तथा खंभे में जाकर फंस गया। तिरपाल के ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) लाइन में फंसने से शॉर्ट सर्किट और बड़े हादसे की आशंका पैदा हो गई थी। स्थिति को देखते हुए तुरंत मालगाड़ी को रोका गया और रेलवे कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। समय रहते ट्रेन रोक दिए जाने से बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद कुछ समय तक रेल संचालन प्रभावित रहा, जबकि अधिकारियों ने सुरक्षा जांच के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की। मौसम विभाग के अनुसार अचानक तेज आंधी और बारिश के चलते जिले में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। हालांकि तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर जनजीवन भी प्रभावित हुआ।

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बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर फटा तिरंगा लहराया, रेलवे की लापरवाही पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ के Bilaspur स्थित Bilaspur Railway Station में राष्ट्र सम्मान से जुड़ी एक गंभीर लापरवाही सामने आई है। स्टेशन के वीआईपी गेट नंबर-2 के बाहर लगाया गया विशाल तिरंगा फटा हुआ और गंदगी से भरा हुआ लहराता नजर आया, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। देश की आन-बान और शान माने जाने वाले राष्ट्रीय ध्वज की इस स्थिति को लेकर लोगों ने इसे अपमानजनक बताया है। यह तिरंगा आमतौर पर गौरव और सम्मान का प्रतीक होता है, लेकिन मौजूदा हालात में इसकी स्थिति बदहाल दिखाई दी। झंडे का कपड़ा जगह-जगह से फटा हुआ था और उस पर धूल-मिट्टी भी जमी हुई थी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि इतनी महत्वपूर्ण जगह पर लगे राष्ट्रीय ध्वज की देखरेख में आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई। इस मामले ने South East Central Railway के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर रेलवे “अमृत स्टेशन योजना” जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के तहत आधुनिक सुविधाओं के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय प्रतीकों की इस तरह अनदेखी चिंता का विषय बन गई है। नियमों के अनुसार, Flag Code of India में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि तिरंगे को हमेशा साफ और सम्मानजनक स्थिति में ही फहराया जाना चाहिए। फटा या गंदा झंडा सार्वजनिक स्थान पर लगाना नियमों का उल्लंघन माना जाता है। इसके अलावा, क्षतिग्रस्त झंडे को सम्मानपूर्वक नष्ट करने की भी प्रक्रिया निर्धारित है—या तो उसे एकांत में जलाया जाए या जमीन में दफन किया जाए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही तिरंगे को तुरंत बदलने और भविष्य में ऐसी लापरवाही न होने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की जा रही है।

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बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को गर्मी से राहत, 43 डिग्री में शरबत वितरण और प्लेटफॉर्म-1 पर लगाया गया मिस्टिंग सिस्टम

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर भीषण गर्मी से यात्रियों को राहत देने के लिए रेलवे प्रशासन ने विशेष पहल की है। यहां यात्रियों को शरबत और ठंडा पेयजल वितरित किया गया, जिससे तेज गर्मी में उन्हें राहत मिल सके। जानकारी के अनुसार, यह व्यवस्था 43 डिग्री से अधिक तापमान को देखते हुए की गई। रेलवे के वाणिज्य विभाग के कर्मचारियों, विशेष टीम और स्काउट-गाइड के बच्चों ने मिलकर प्लेटफॉर्म नंबर 2 और 3 पर यात्रियों को शरबत और ठंडा पानी उपलब्ध कराया। इसके अलावा प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर आधुनिक मिस्टिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे लगातार ठंडी फुहारें गिरती रहीं और यात्रियों को गर्मी से राहत मिली। जरूरतमंद यात्रियों के लिए ओआरएस सैशे भी वितरित किए गए। यह पूरी व्यवस्था वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अनुराग कुमार सिंह के मार्गदर्शन में की गई। रेलवे प्रशासन ने बताया कि इस तरह की जनसेवा और मानवीय पहल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर की जा रही है। रेलवे ने यह भी कहा कि भविष्य में भी यात्रियों के लिए इसी तरह की सुविधाएं और राहत उपाय लगातार जारी रहेंगे, ताकि गर्मी के मौसम में सफर को अधिक आरामदायक बनाया जा सके।

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गर्मी और शादी सीजन का असर, रायपुर से ट्रेनों में ‘नो रूम’… वेटिंग 150 पार

गर्मी की छुट्टियों और शादी के सीजन की वजह से रायपुर से चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। मई तक ज्यादातर ट्रेनों में सीटें फुल हो चुकी हैं और वेटिंग लिस्ट 100 से 150 के पार पहुंच गई है। कई ट्रेनों में ‘नो रूम’ की स्थिति बन गई है, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रायपुर से मुंबई, दिल्ली और वाराणसी जाने वाली ट्रेनों में सबसे ज्यादा दबाव है। इन रूट्स पर कंफर्म टिकट मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है। ऐसे में यात्रियों के लिए तत्काल टिकट ही आखिरी विकल्प बचता है, लेकिन वह भी राहत नहीं दे पा रहा है। रेलवे के आरक्षण काउंटर पर स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है। मुख्य आरक्षण कार्यालय में सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। काउंटर खुलते ही कुछ ही मिनटों में तत्काल टिकट खत्म हो जा रहा है। कई यात्रियों को घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। लाइन में लगे यात्रियों का कहना है कि वे कई दिनों से लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन हर बार टिकट नहीं मिल पा रहा। छुट्टियों के चलते परिवार के साथ यात्रा करने की मजबूरी है, लेकिन कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल हो गया है। हर साल गर्मी के मौसम में यात्रियों की संख्या बढ़ने से ट्रेनों में दबाव बढ़ता है। इस बार भी स्थिति कुछ ऐसी ही बनी हुई है। हालांकि रेलवे द्वारा समर स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं, लेकिन बढ़ती मांग के सामने ये भी नाकाफी साबित हो रही हैं। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, जिन रूट्स पर यात्रियों की संख्या ज्यादा है, वहां सर्वे किया जा रहा है और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त समर स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना बनाई जा रही है, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके।

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