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दुर्ग में स्कूल सफाई कर्मचारियों ने खोला मोर्चा, शिक्षा मंत्री के घेराव का ऐलान

छत्तीसगढ़ में अंशकालिक स्कूल सफाई कर्मचारियों का आंदोलन एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। अंश-स्कूल सफाई कर्मचारी संघ ने शिक्षा मंत्री पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए आज दुर्ग में उनके निवास का घेराव करने का ऐलान किया है। संघ ने चेतावनी दी है कि 15 दिन के भीतर मांगें पूरी नहीं हुईं तो नया रायपुर में मंत्रालय और संचालनालय का घेराव कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। VO-1:संघ के मुताबिक छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में करीब 43 हजार 301 अंशकालिक सफाई कर्मचारी पिछले 15 से 16 वर्षों से काम कर रहे हैं। नियमानुसार इनका कार्य समय करीब दो घंटे प्रतिदिन है और उन्हें 3 से साढ़े 3 हजार रुपये तक मासिक मानदेय दिया जाता है। कर्मचारियों का कहना है कि कई स्कूलों में भृत्य और चपरासी के पद खाली होने के कारण उनसे सफाई के अलावा स्कूल के दूसरे काम भी कराए जाते हैं। संघ का दावा है कि लंबे समय से काम करने के बावजूद उनकी मांगों पर सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। VO-2:संघ के अनुसार, 15 जून 2025 से कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी। उस दौरान शिक्षा मंत्री की ओर से मानदेय बढ़ाने और हड़ताल अवधि का मानदेय देने का आश्वासन मिलने के बाद 12 सितंबर 2025 को आंदोलन स्थगित कर दिया गया था। अब संघ का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं। इसी को लेकर कर्मचारियों ने दोबारा आंदोलन तेज करने का फैसला लिया है। बाइट: संतोष खांडेकर, प्रांत अध्यक्ष, स्कूल सफाई कर्मचारी संघ VO-3:वहीं, स्कूल सफाई कर्मचारियों के आंदोलन के समर्थन में दुर्ग के पूर्व विधायक अरुण वोरा भी धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों की मांगों को जायज बताते हुए राज्य सरकार से उनकी समस्याओं का समाधान करने और मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की।

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भिलाई में 6 साल की मासूम से दुष्कर्म का मामला, आरोपी गिरफ्तार; महिलाओं ने की कड़ी सजा की मांग

भिलाई के खुर्सीपार इलाके में छह साल की मासूम बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने मकान मालिक दिलावर यादव को गिरफ्तार किया है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय महिलाओं और शिवसेना कार्यकर्ताओं में आक्रोश देखने को मिला। खुर्सीपार क्षेत्र की बड़ी संख्या में महिलाएं सेक्टर-6 स्थित पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचीं और आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। महिलाओं ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर कहा कि आरोपी को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। महिलाओं ने यह भी कहा कि यदि फांसी नहीं दी जा सकती तो आरोपी को उनके हवाले कर दिया जाए। वहीं, शिवसेना कार्यकर्ताओं ने भी पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचकर मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। शिवसेना जिला अध्यक्ष पंकज नायर ने आरोपी पर अन्य गंभीर आरोप लगाए और उसके मकान पर बुलडोजर कार्रवाई की मांग की। फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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दुर्ग में शराब पीने के दौरान विवाद, युवक की हत्या

दुर्ग। जामुल थाना क्षेत्र के वार्ड-22 स्थित कुरूद बाजार चौक में शराब पीने के दौरान हुए विवाद में 40 वर्षीय व्यक्ति की हत्या का मामला सामने आया है। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। मृतक की पहचान पुरण भारती के रूप में हुई है, जो मूल रूप से उतई के रहने वाले बताए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक घटना के समय एक कमरे में मनीष बघेल और उसका भांजा राज जोशी शराब पी रहे थे। इसी दौरान मनीष का दोस्त पुरण भारती भी वहां पहुंच गया। शराब पीने के दौरान किसी बात को लेकर पुरण और राज के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद गाली-गलौज और मारपीट तक पहुंच गया। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर राज जोशी ने पुरण भारती के सिर पर ईंट और पत्थरों से कई वार कर दिए। हमले में गंभीर चोट लगने से पुरण की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी आरोपी के मामा मनीष बघेल ने खुद पुलिस को दी। सूचना मिलते ही जामुल पुलिस मौके पर पहुंची और मामा-भांजे दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। पुलिस ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए कचांदूर मेडिकल कॉलेज भेज दिया है। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और विवाद की वास्तविक वजह का पता लगाया जा रहा है।

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BSP कर्मचारियों और ठेका श्रमिकों ने किया प्रदर्शन, 39 महीने के एरियर्स समेत कई मांगें उठाईं

भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के नियमित कर्मचारियों और ठेका श्रमिकों ने गुरुवार सुबह अपनी लंबित मांगों को लेकर सेल-बीएसपी प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया। सेक्टर-1 स्थित मुर्गा चौक पर सुबह 7:45 से 8:45 बजे तक स्टील एम्प्लाइज यूनियन-इंटक और स्टील ठेका श्रमिक यूनियन-इंटक के नेतृत्व में कर्मचारियों और श्रमिकों ने नारेबाजी की। प्रदर्शन समाप्त होने के बाद यूनियन प्रतिनिधियों ने सेल अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार पंडा के नाम संबोधित मांग पत्र बीएसपी के आईआर विभाग को सौंपा। इस दौरान कर्मचारियों के लंबित एरियर्स, वेज रिवीजन, इंसेंटिव, आवास सुविधा और ठेका श्रमिकों के वेतन सहित कई मुद्दे उठाए गए। 39 महीने के एरियर्स का भुगतान करने की मांग स्टील ठेका श्रमिक यूनियन के अध्यक्ष एवं स्टील एम्प्लाइज यूनियन-इंटक भिलाई के महासचिव संजय कुमार साहू ने कहा कि कर्मचारियों का 39 महीने का एरियर्स अब भी लंबित है। यूनियन ने प्रबंधन से इस मामले में जल्द निर्णय लेकर कर्मचारियों को उनका बकाया भुगतान करने की मांग की। इसके साथ ही 1 जनवरी 2027 से नए वेज रिवीजन को लागू करने की दिशा में प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी रखी गई। हर महीने 10 हजार रुपए इंसेंटिव की मांग यूनियन ने मंथली इंसेंटिव स्कीम में संशोधन कर कर्मचारियों को हर माह 10 हजार रुपए इंसेंटिव देने की मांग की है। इसके अलावा 650 वर्गफीट के आवासों को लाइसेंस पर देने और ‘सब्जेक्ट टू वेकेशन’ व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई गई। ठेका श्रमिकों के लिए 26 हजार रुपए न्यूनतम वेतन प्रदर्शन में ठेका श्रमिकों की वेतन संबंधी समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। यूनियन का आरोप है कि नवंबर 2025 से लागू केंद्रीय न्यूनतम वेतन का लाभ बीएसपी में काम करने वाले ठेका श्रमिकों को अब तक नहीं मिल रहा है। यूनियन ने ठेका श्रमिकों के लिए कम से कम 26 हजार रुपए मासिक न्यूनतम वेतन निर्धारित करने की मांग की है। मेडिकल और छंटनी के नाम पर कार्रवाई का विरोध यूनियन ने मेडिकल जांच और छंटनी के नाम पर ठेका श्रमिकों को काम से हटाए जाने का भी विरोध किया। संगठन का कहना है कि लंबे समय से संयंत्र में सेवाएं दे रहे श्रमिकों की छंटनी पर रोक लगनी चाहिए। संजय साहू के अनुसार, श्रमिकों की समस्याओं का समाधान होने से उनका मनोबल बेहतर होगा और इसका सकारात्मक असर संयंत्र के उत्पादन, उत्पादकता और लाभ पर भी पड़ सकता है। मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी यूनियन नेताओं ने कहा कि मौजूदा प्रदर्शन के जरिए प्रबंधन तक कर्मचारियों और श्रमिकों की समस्याएं पहुंचाई गई हैं। यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। यूनियन ने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों और ठेका श्रमिकों को साथ लेकर बड़े स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है।

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दुर्ग निगम परिसर में महापौर की सरकारी कार में लगी आग, FSL जांच में जुटी

दुर्ग नगर निगम कार्यालय परिसर में गुरुवार दोपहर महापौर अल्का बाघमार की सरकारी कार में अचानक आग लग गई। महापौर के वाहन से उतरने के करीब 5 से 7 मिनट बाद कार से धुआं उठता दिखाई दिया। देखते ही देखते आग ने वाहन के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। जानकारी के मुताबिक, महापौर अल्का बाघमार दोपहर करीब 12 बजे भिलाई स्थित स्टील कॉलोनी आवास से सरकारी कार क्रमांक CG 07 DE 2417 से दुर्ग निगम कार्यालय पहुंची थीं। निगम परिसर में पहुंचने के बाद वह कार से उतरकर अपने कार्यालय चली गईं। कुछ मिनट बाद वाहन से धुआं निकलता देखकर मौके पर मौजूद लोगों ने इसकी सूचना फायर ब्रिगेड को दी। महापौर ने समय रहते निकालीं जरूरी फाइलें महापौर ने बताया कि कार से धुआं उठता देखकर उन्होंने तुरंत वाहन में रखी महत्वपूर्ण फाइलें और अन्य जरूरी सामान बाहर निकाल लिया। इसके कुछ ही देर बाद आग तेजी से फैल गई और कार का काफी हिस्सा इसकी चपेट में आ गया। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। करीब 20 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। समय रहते आग बुझने से इसे निगम परिसर के आसपास के हिस्सों में फैलने से रोक लिया गया। शॉर्ट सर्किट की आशंका महापौर ने शुरुआती तौर पर कार की वायरिंग में खराबी के कारण शॉर्ट सर्किट होने की आशंका जताई है। हालांकि, आग लगने की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही कारण सामने आएगा। FSL टीम ने मौके से जुटाए साक्ष्य घटना की सूचना मिलने के बाद FSL टीम भी निगम परिसर पहुंची। टीम ने जली हुई कार और घटनास्थल का निरीक्षण किया और जरूरी साक्ष्य जुटाए। फिलहाल मामले की जांच जारी है। FSL और तकनीकी जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी थी या इसके पीछे कोई अन्य तकनीकी वजह थी।

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वंदे मातरम् को लेकर विजय शर्मा का कांग्रेस पर हमला, बोले- भाजपा विरोध में देश का विरोध न करें

दुर्ग में भाजपा कोर ग्रुप की बैठक के बाद छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने वंदे मातरम्, नक्सलवाद और जेल में बंद नक्सल मामलों से जुड़े आरोपियों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। वंदे मातरम् के दो पैरा गाने के कांग्रेस के रुख पर उन्होंने कहा कि तुष्टीकरण के कारण पहले इसे सीमित किया गया था। उन्होंने कहा कि देश में जो व्यवस्था तय हुई है, उसका पूरा पालन होना चाहिए। विजय शर्मा ने कहा कि वंदे मातरम् और तिरंगा किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं। भाजपा का विरोध करने के चक्कर में देश का विरोध नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि तिरंगा यात्रा किसी पार्टी की नहीं, बल्कि देश के नागरिकों की यात्रा है। दिमागी नक्सलवाद पर भी साधा निशाना नक्सलवाद के मुद्दे पर गृहमंत्री ने कहा कि नक्सल सिर्फ जंगलों में नहीं, बल्कि विचारों में भी हो सकता है। उन्होंने बस्तर में नक्सली हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि कई जवान और आम नागरिक हिंसा का शिकार हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को लेकर आलोचना करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और हिंसा या अराजकता फैलाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। विजय शर्मा ने कहा कि सरकार ने जंगलों से नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में कार्रवाई की है और अगर किसी के दिमाग में नक्सली सोच है, तो उसे भी खत्म किया जाएगा। 1300 नक्सल मामलों की समीक्षा गृहमंत्री ने बताया कि लंबे समय से जेल में बंद करीब 1300 लोगों से जुड़े नक्सल मामलों की समीक्षा की जा रही है। मामलों को जनहानि, केंद्रीय कानून और अन्य कानूनी प्रावधानों के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल उन मामलों की समीक्षा की जा रही है, जिनमें जनहानि नहीं हुई और केंद्रीय कानून लागू नहीं हैं। सरकार इन प्रकरणों की कानूनी स्थिति का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई पर विचार कर रही है।

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दुर्ग में 16 बच्चों का रेस्क्यू, बाल श्रम की आशंका; कवर्धा से लाए गए 7 नाबालिग, बच्चों को लेने पहुंचा व्यक्ति हिरासत में

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में बाल श्रम और बच्चों को बाहर ले जाने की आशंका के बीच बड़ी कार्रवाई की गई है। राज्य बाल आयोग से मिली सूचना के बाद चाइल्ड हेल्पलाइन, स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU) और पुलिस की संयुक्त टीम ने दुर्ग बस स्टैंड से 16 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया है। शुरुआती जांच में इन बच्चों में 7 नाबालिग और 9 बालिग पाए गए हैं। सभी बच्चे कबीरधाम (कवर्धा) जिले के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं। बताया जा रहा है कि बच्चों को काम दिलाने के नाम पर लाया गया था। रेस्क्यू के समय कई बच्चे भूखे-प्यासे थे। जानकारी के मुताबिक, चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना मिली थी कि रायपुर से आने वाली एक बस में बड़ी संख्या में बच्चों को काम के लिए ले जाया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद पद्मनाभपुर थाना पुलिस और संयुक्त टीम दुर्ग बस स्टैंड पहुंची और बस का इंतजार करने लगी। बस पहुंचते ही टीम ने शुरू की जांच रात करीब साढ़े 8 बजे बस दुर्ग बस स्टैंड पहुंची। टीम ने बस की जांच की तो उसमें 16 बच्चे मिले। सभी बच्चों को सुरक्षित उतारकर चाइल्ड हेल्पलाइन कार्यालय ले जाया गया, जहां उनकी पहचान, दस्तावेजों की जांच और पूछताछ की गई। पूछताछ में बच्चों ने बताया कि उन्हें पहले रायपुर में काम दिलाने की बात कहकर बुलाया गया था, लेकिन बाद में उन्हें दुर्ग भेज दिया गया। कई बच्चों को यह जानकारी भी नहीं थी कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है। कुछ बच्चों ने बताया कि उन्हें उत्तर प्रदेश ले जाकर करीब 15 हजार रुपये महीने की नौकरी दिलाने का झांसा दिया गया था। वहीं कुछ बच्चों ने मशरूम फैक्ट्री में काम कराने की बात कही है। नाबालिग बच्चों को आश्रय गृह भेजा गया चाइल्ड हेल्पलाइन अधिकारियों के अनुसार, जांच में 7 बच्चों की उम्र नाबालिग पाई गई है। कुछ बच्चों के पास आधार कार्ड मिले, जबकि कुछ ने अपनी उम्र मौखिक रूप से बताई। सभी नाबालिग बच्चों को सुरक्षित आश्रय गृह में रखा गया है। रेस्क्यू के बाद बच्चों को सबसे पहले भोजन कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि सभी बच्चों की अलग-अलग काउंसलिंग की जाएगी, जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। बच्चों को लेने पहुंचा व्यक्ति हिरासत में बस स्टैंड पर बच्चों को लेने पहुंचे एक व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में लिया है। आशंका जताई जा रही है कि उसकी भूमिका ठेकेदार या बच्चों को काम पर भेजने वाले व्यक्ति के रूप में हो सकती है। पुलिस उससे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। CWC के सामने पेश होंगे नाबालिग बच्चे अधिकारियों के मुताबिक नाबालिग बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश किया जाएगा। समिति के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी। फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग यह पता लगाने में जुटे हैं कि बच्चों को किसने भेजा, उन्हें कहां ले जाने की योजना थी और इस पूरे मामले में कितने लोग शामिल हैं। जांच में यदि बाल श्रम या मानव तस्करी से जुड़े तथ्य सामने आते हैं तो आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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श्रावणी मेले के लिए बड़ी राहत, दुर्ग-आरा साउथ बिहार एक्सप्रेस मनकठा स्टेशन पर रुकेगी

श्रावणी मेले के दौरान बाबा बैद्यनाथ धाम (बाबाधाम) जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने दुर्ग-आरा-दुर्ग साउथ बिहार एक्सप्रेस (13287/13288) को मनकठा रेलवे स्टेशन पर अस्थायी ठहराव देने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था 30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक लागू रहेगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, श्रावणी मेले के दौरान यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इससे छत्तीसगढ़ समेत इस मार्ग से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को बाबाधाम जाने में अतिरिक्त सुविधा मिलेगी। ट्रेनों का ठहराव समय 13287 दुर्ग–आरा साउथ बिहार एक्सप्रेस 13288 आरा–दुर्ग साउथ बिहार एक्सप्रेस रेलवे का कहना है कि मनकठा स्टेशन पर दो मिनट के इस अस्थायी ठहराव से श्रद्धालुओं को ट्रेन में चढ़ने और उतरने में सुविधा होगी। हर वर्ष श्रावणी मेले के दौरान बड़ी संख्या में भक्त बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं, ऐसे में यह व्यवस्था यात्रियों के लिए राहत साबित होगी।

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भिलाई में पिकअप हटाने की बात पर खूनी हमला, युवक वेंटिलेटर पर; 4 आरोपी गिरफ्तार

भिलाई-3 के डबरापारा में रास्ते से पिकअप हटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया। दो पक्षों के बीच हुई कहासुनी के बाद लोहे की रॉड, हॉकी स्टिक, डंडों और ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया गया। इस हमले में कई लोग घायल हुए, जिनमें नीलेश साहू की हालत बेहद गंभीर है। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है, जबकि तेजराम उर्फ तेजा साहू का आईसीयू में इलाज चल रहा है। घटना पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र की है। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए सोहन वर्मा (31), मोहन वर्मा (43), रामगोपाल वर्मा (72) और राजा राजपूत (22) को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल लोहे की जैक रॉड और हॉकी स्टिक भी बरामद की गई है। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, बुधवार रात करीब 11 बजे पूजा साहू अपने परिवार के साथ कार से घर लौट रही थीं। डबरापारा पुल के नीचे एक पिकअप वाहन सड़क पर खड़ा था, जिससे रास्ता बाधित हो गया। परिवार ने पिकअप चालक से वाहन हटाने को कहा, लेकिन इसी बात पर विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि कुछ ही देर में सोहन वर्मा के साथ उसके परिजन और अन्य लोग भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद गाली-गलौज शुरू हुई और देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने नीलेश साहू और तेजराम साहू पर लोहे की रॉड से सिर और पैरों पर हमला किया, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। बीच-बचाव करने पहुंचीं महिलाओं के साथ भी मारपीट की गई। परिवार का आरोप है कि महिलाओं के साथ अभद्रता की गई और उन्हें भी डंडों तथा हाथ-मुक्कों से पीटा गया, जिससे उन्हें चोटें आईं। घायलों को पहले शास्त्री अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत में नीलेश साहू को वेंटिलेटर पर रखा गया। तेजराम साहू का आईसीयू में उपचार जारी है, जबकि अन्य घायलों का भी इलाज चल रहा है। घटना की सूचना मिलते ही पुरानी भिलाई थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

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दुर्ग स्टेशन पर चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश में एरिया मैनेजर की मौत, CCTV VIDEO वायरल

छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश एक यात्री के लिए जानलेवा साबित हुई। संतुलन बिगड़ने से यात्री ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच ट्रैक पर गिर गया, जिससे उसकी मौके पर ही गंभीर हालत हो गई। इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना का सीसीटीवी वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मृतक की पहचान 58 वर्षीय संदीप कुमार सिन्हा के रूप में हुई है, जो ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की रायपुर शाखा में एरिया मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। वे रोजाना की तरह ट्रेन से रायपुर आने-जाने के लिए दुर्ग रेलवे स्टेशन पहुंचे थे और उनके पास रेलवे का मासिक पास भी था। लोकल छोड़ सुपरफास्ट ट्रेन पकड़ने की कोशिश जानकारी के अनुसार, 23 जुलाई की सुबह करीब 5:45 बजे दुर्ग-रायपुर लोकल ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर-4 पर खड़ी थी। इसी दौरान पुणे-हटिया सुपरफास्ट एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म नंबर-3 से रवाना होने लगी। संदीप कुमार सिन्हा ने समय बचाने के लिए लोकल ट्रेन छोड़कर सुपरफास्ट ट्रेन पकड़ने का प्रयास किया। वे दौड़ते हुए चलती ट्रेन में चढ़ने लगे, लेकिन उनके हाथ में मौजूद लैपटॉप बैग फिसल गया। बैग के खिसकने से उनका संतुलन बिगड़ गया और ट्रेन के दरवाजे की रॉड पर उनकी पकड़ छूट गई। इसके बाद वे प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच ट्रैक पर गिर पड़े। अधिक खून बहने से गई जान हादसे में ट्रेन की चपेट में आने से उनका दायां पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी हालत नाजुक हो गई। सूचना मिलते ही आरपीएफ, जीआरपी और रेलवे प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। जवानों ने उन्हें तत्काल ट्रैक से निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। मृतक की पहचान उनके पास मिले दस्तावेजों से की गई। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है। दो दिन बाद सामने आया CCTV वीडियो घटना के दो दिन बाद हादसे का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश के दौरान संतुलन बिगड़ने से यह हादसा हुआ। रेलवे लगातार यात्रियों से अपील करता है कि चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने का प्रयास कभी न करें। कुछ सेकंड बचाने की जल्दबाजी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। प्रारंभिक जांच में भी रेल पुलिस ने संतुलन बिगड़ने को हादसे की मुख्य वजह माना है।

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