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महंगे बिजली बिल और स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस का राज्यव्यापी विरोध अभियान शुरू

छत्तीसगढ़ में बिजली बिलों में बढ़ोतरी, स्मार्ट मीटर और बिजली दरों को लेकर कांग्रेस ने राज्यभर में तीन दिवसीय विरोध अभियान की शुरुआत की है। अभियान के पहले दिन सभी जिला मुख्यालयों में जिला कांग्रेस अध्यक्ष मीडिया से बातचीत कर पार्टी का पक्ष रखेंगे और सरकार की बिजली नीति पर सवाल उठाएंगे। दूसरे दिन कांग्रेस कार्यकर्ता विभिन्न क्षेत्रों में घर-घर जाकर उपभोक्ताओं से संपर्क करेंगे। इस दौरान महंगे बिजली बिल और स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों के आवेदन भी एकत्र किए जाएंगे। अभियान के अंतिम दिन 3 अगस्त को रायपुर में मुख्यमंत्री निवास के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें प्रदेश के अलग-अलग जिलों से कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का कहना है कि बिजली उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिल और स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी का उद्देश्य इन मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाकर सरकार तक लोगों की शिकायतें पहुंचाना है।

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महंगी बिजली के विरोध में कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन, 3 अगस्त को सीएम हाउस घेराव का ऐलान

छत्तीसगढ़ में बढ़ते बिजली बिल और स्मार्ट मीटर के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रेसवार्ता कर बताया कि पार्टी 1 अगस्त से 3 अगस्त तक चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में बिजली दरों में बढ़ोतरी और स्मार्ट मीटर व्यवस्था के कारण आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। पार्टी अब इस मुद्दे को लेकर प्रदेशभर में लोगों के बीच जाएगी और उपभोक्ताओं की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाएगी। आंदोलन के पहले चरण में 1 अगस्त को सभी जिला मुख्यालयों में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष प्रेसवार्ता करेंगे। इस दौरान बढ़े हुए बिजली बिल, महंगी बिजली और स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों को उठाया जाएगा। इसके बाद 2 अगस्त को कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जाकर बिजली उपभोक्ताओं से संपर्क करेंगे और उनकी समस्याओं से जुड़े आवेदन एकत्र करेंगे। पार्टी इन आवेदनों के माध्यम से सरकार से बिजली दरों में राहत और व्यवस्था की समीक्षा की मांग करेगी। आंदोलन के अंतिम चरण में 3 अगस्त को प्रदेशभर से कांग्रेस कार्यकर्ता रायपुर पहुंचेंगे और मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे। कांग्रेस ने दावा किया है कि इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और आम बिजली उपभोक्ता शामिल होंगे। दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस महंगी बिजली और बढ़ते बिलों के खिलाफ जनता की आवाज बनकर संघर्ष कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने बिजली दरों और उपभोक्ताओं की समस्याओं पर कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

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28 जुलाई को रायपुर आएंगे कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट, NEET मुद्दे पर प्रदर्शन में हो सकते हैं शामिल

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट 28 जुलाई को रायपुर पहुंचेंगे। माना जा रहा है कि वे NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन में हिस्सा ले सकते हैं। हालांकि, उनके दौरे का आधिकारिक कार्यक्रम अभी प्रदेश कांग्रेस की ओर से जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार, रायपुर प्रवास के दौरान सचिन पायलट की प्रदेश कांग्रेस नेताओं के साथ महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठकों की भी संभावना है। पार्टी संगठन में संभावित बदलाव और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए उनके इस दौरे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जून में भी आए थे रायपुर इससे पहले 25 जून को सचिन पायलट रायपुर आए थे, जहां उन्होंने कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर में भाग लिया था। उस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि भाजपा को कांग्रेस के प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर टिप्पणी करने के बजाय अपनी सरकार और संगठन की आंतरिक चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस एक पुरानी और मजबूत संगठनात्मक परंपरा वाली पार्टी है, जो नए जिला अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। सचिन पायलट ने यह भी कहा था कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने के अभियान पर काम कर रही है। देशभर में आयोजित प्रशिक्षण शिविरों में सामाजिक, राजनीतिक और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ भाजपा सरकार की नीतियों को जनता तक पहुंचाने की रणनीति भी तैयार की जा रही है।

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CM विष्णुदेव साय का राहुल गांधी पर हमला, बोले- लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ है ऐसा आचरण

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हालिया प्रदर्शन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर किया गया प्रदर्शन लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं था और इस तरह का व्यवहार संवैधानिक पद की गरिमा के विपरीत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा की जाती है। उनके अनुसार, राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मर्यादाओं का सम्मान बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री साय ने NEET पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही पेपर लीक को गंभीर अपराध बता चुके हैं और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। उनके अनुसार, परीक्षा दोबारा पारदर्शी तरीके से आयोजित की गई और उसके परिणाम भी घोषित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे को राजनीतिक रूप देने का प्रयास कर रही है और युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास के बाहर किया गया प्रदर्शन लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि देश की जनता लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मर्यादाओं का सम्मान करती है तथा इस प्रकार की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी।

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छत्तीसगढ़ कैबिनेट का बड़ा फैसला: अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण, किसानों के लिए बनेगी खाद निगरानी समिति

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में किसानों और अग्निवीरों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में खरीफ और रबी सीजन के दौरान किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने तथा अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई। कैबिनेट ने किसानों को खाद की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मंत्री-मंडलीय उप समिति के गठन को स्वीकृति दी है। यह समिति खाद की आपूर्ति, वितरण और प्रबंधन की नियमित समीक्षा करेगी तथा आवश्यक सुझाव सरकार को देगी। समिति की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री करेंगे, जबकि कृषि, सहकारिता और वित्त मंत्री इसके सदस्य होंगे। कृषि उत्पादन आयुक्त समिति के संयोजक रहेंगे। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों, अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों को भी बैठक में आमंत्रित किया जा सकेगा। इसके अलावा कैबिनेट ने राज्य में अग्निवीर सैनिकों के लिए तृतीय श्रेणी की सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला लिया है। इसके लिए “छत्तीसगढ़ अग्निवीर सैनिक आरक्षण नियम-2026” के गठन को मंजूरी दी गई है। यह आरक्षण पुलिस विभाग में आरक्षक, वन विभाग में वनरक्षक और जेल विभाग में प्रहरी के पदों पर होने वाली सीधी भर्ती में लागू होगा। सरकार के अनुसार, आरक्षण का लाभ केवल उन अग्निवीरों को मिलेगा जिन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों में चार वर्ष की निर्धारित सेवा पूरी कर वैध सेवा प्रमाण पत्र के साथ सेवामुक्ति प्राप्त की हो। यह निर्णय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा 26 जुलाई 2024 को विधानसभा में की गई घोषणा के अनुरूप लिया गया है। सरकार का मानना है कि इस पहल से अग्निवीरों को सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिलेंगे और उनके प्रशिक्षण, अनुशासन तथा अनुभव का लाभ पुलिस, वन एवं जेल विभागों की कार्यप्रणाली को भी मिलेगा।

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दिल्ली में सक्रिय छत्तीसगढ़ कांग्रेस के आदिवासी नेता, PCC अध्यक्ष को लेकर चर्चाओं ने पकड़ी रफ्तार

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष के पद को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। संगठन में संभावित बदलाव की अटकलों के बीच पार्टी के कई वरिष्ठ आदिवासी नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व आगामी विधानसभा और संगठनात्मक रणनीति को ध्यान में रखते हुए बड़े फैसले की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी में इस बार प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी किसी आदिवासी नेता को दिए जाने की चर्चा जोरों पर है। इसी वजह से कई वरिष्ठ नेताओं की दिल्ली में सक्रियता बढ़ी है और हाईकमान से मुलाकातों का दौर जारी है। संभावित दावेदारों में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, विधायक लखेश्वर बघेल, विधायक जनक ध्रुव सहित कई आदिवासी नेताओं के नाम चर्चा में हैं। वहीं, आबकारी घोटाला मामले में जमानत पर बाहर आए वरिष्ठ कांग्रेस नेता कवासी लखमा भी दिल्ली में मौजूद बताए जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस केवल प्रदेश अध्यक्ष ही नहीं, बल्कि संगठन के अन्य अहम पदों पर भी बदलाव कर सकती है। इसी कारण दिल्ली में नेताओं की बढ़ती गतिविधियों को संगठनात्मक पुनर्गठन से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से अब तक किसी भी नाम या संगठनात्मक बदलाव को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि अंतिम निर्णय कांग्रेस हाईकमान ही करेगा। फिलहाल, दिल्ली में चल रही बैठकों और नेताओं की मौजूदगी ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

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‘वोटर नहीं हो तो नहीं सुनूंगा’ बयान पर विवाद, विधायक की जन चौपाल में हंगामा

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक विधायक के कथित बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। करैरा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जन चौपाल के दौरान उस समय हंगामा हो गया, जब पोहरी विधानसभा क्षेत्र से अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे ग्रामीणों की शिकायतें सुनने से इनकार करने का आरोप विधायक पर लगा। जानकारी के अनुसार, नरवर तहसील स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर भवन में बुधवार को करैरा विधायक की ओर से जन चौपाल आयोजित की गई थी। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं और आवेदन लेकर पहुंचे थे। इसी बीच पोहरी विधानसभा क्षेत्र के नानकपुर और बरखाड़ी गांव के करीब 8 से 10 ग्रामीण भी पेयजल और बिजली जैसी समस्याओं को लेकर विधायक के पास पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि विधायक ने उनकी शिकायतें सुनने से यह कहते हुए मना कर दिया कि वे उनके विधानसभा क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं। विधायक के इस कथित बयान के बाद ग्रामीण नाराज हो गए और मौके पर विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि वे निजी काम के लिए नहीं बल्कि सरकारी समस्याओं के समाधान के लिए जनप्रतिनिधि के पास पहुंचे हैं। उनका तर्क था कि जनता की परेशानियां विधानसभा क्षेत्र की सीमा से अलग नहीं होतीं। विरोध के दौरान मामला और बढ़ गया। इसी बीच एक ग्रामीण ने अपनी नाराजगी जताने के लिए अपने छोटे बच्चे को विधायक की गाड़ी के गर्म बोनट पर रख दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है। जहां कुछ लोग जनप्रतिनिधियों से जनता की समस्याएं सुनने की उम्मीद जता रहे हैं, वहीं कई लोगों ने बच्चे को गर्म गाड़ी पर रखने की घटना को उसकी सुरक्षा के लिहाज से गलत बताया है। फिलहाल इस पूरे मामले पर विधायक की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वायरल वीडियो के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

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सुप्रीम कोर्ट से क्रांति सेना प्रमुख अमित बघेल और डॉ. अजय यादव को जमानत

क्रांति सेना के प्रमुख अमित बघेल और संगठन के अध्यक्ष डॉ. अजय यादव को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। दोनों पिछले करीब साढ़े आठ महीने से जेल में बंद थे। सुप्रीम कोर्ट की डिविजन बेंच ने दोनों की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद राहत प्रदान की। अमित बघेल को 5 दिसंबर 2025 को एक टिप्पणी से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 3 फरवरी 2026 को उन्हें बलौदाबाजार हिंसा मामले में भी गिरफ्तार किया गया था। दोनों मामलों में वे न्यायिक हिरासत में थे। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध किया गया। सरकारी पक्ष के वकील ने अदालत में दलील दी कि अमित बघेल के खिलाफ 32 आपराधिक मामले दर्ज हैं और उन्हें बलौदाबाजार मामले का कथित मास्टरमाइंड बताया। इसके आधार पर जमानत याचिका खारिज करने की मांग की गई। हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की डिविजन बेंच ने अमित बघेल और डॉ. अजय यादव को जमानत दे दी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले करीब तीन महीने पहले दोनों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से भी जमानत मिल चुकी थी।

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छत्तीसगढ़ विधानसभा: नकटी बुलडोजर कार्रवाई, इंद्रावती टाइगर शिकार और सड़क-दवा खरीद जैसे मुद्दों पर गरमाया सदन

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को कई अहम मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई, इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार, अमानक दवाइयों की खरीद और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़कों की स्थिति को लेकर सरकार से सवाल पूछे गए। नकटी बुलडोजर कार्रवाई पर हंगामा विपक्ष ने नकटी गांव में मकानों को हटाने की कार्रवाई को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि गरीब परिवारों को पर्याप्त पुनर्वास के बिना बेदखल किया गया और इसे “बुलडोजर कल्चर” का उदाहरण बताया। विपक्ष ने पूरे मामले पर सदन में चर्चा की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायक सदन के गर्भगृह में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे, जिसके बाद नियमों के तहत वे स्वतः निलंबित हो गए। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि नकटी में की गई कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई। सभी संबंधित लोगों को पूर्व सूचना और नोटिस दिए गए थे। उन्होंने बताया कि प्रभावित परिवारों का पुनर्वास भी किया गया और कार्रवाई के दौरान किसी के घरेलू सामान को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार का मामला ध्यानाकर्षण के माध्यम से नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरफ्तार किए गए आईबी जवान का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया और पूरे मामले में राजनीतिक संरक्षण की आशंका जताई। महंत ने दावा किया कि दो बाघों के शिकार से करोड़ों रुपये का अवैध लाभ कमाया गया। वन मंत्री केदार कश्यप ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि किसी भी आरोपी को बचाने का प्रयास नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि टाइगर रिजर्व में निगरानी व्यवस्था सक्रिय है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। मंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 के आकलन के अनुसार इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पांच बाघों की पुष्टि हुई थी और रिजर्व के संचालन पर प्रतिवर्ष लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। अमानक दवाइयों की खरीद पर सरकार का जवाब सदन में CGMSC द्वारा दवाइयों की खरीद को लेकर भी सवाल उठे। विपक्ष ने गुजरात में प्रतिबंधित दवाइयों से जुड़े मामले का हवाला देते हुए छत्तीसगढ़ में खरीद प्रक्रिया पर सवाल किए। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्पष्ट किया कि जिस दवा पर प्रतिबंध लगाया गया था, उसकी खरीद राज्य में नहीं की गई। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में गुणवत्ता परीक्षण में असफल रहने वाली 24 दवाइयों की पहचान की गई है और चार कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना पर चर्चा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़कों की मरम्मत को लेकर भी कई विधायकों ने सवाल उठाए। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि अधिकांश सड़कों का पहले ही नवीनीकरण किया जा चुका है और जिन मार्गों को मरम्मत की आवश्यकता है, उन पर चरणबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अब सड़कों की स्थिति का आकलन पारंपरिक तरीके की बजाय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक की मदद से किया जाएगा। सड़क का वीडियो रिकॉर्ड कर AI गड्ढों और मरम्मत की आवश्यकता का स्वतः विश्लेषण करेगा, जिससे निरीक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सकेगी।

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छत्तीसगढ़ मानसून सत्र: कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी में, कल विधायक दल की बैठक में होगा अंतिम फैसला

छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से पहले प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस राज्य सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है। इस संबंध में अंतिम निर्णय रविवार शाम होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक में लिया जाएगा। जानकारी के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष के सरकारी निवास पर शाम 5 बजे कांग्रेस विधायक दल की बैठक आयोजित की गई है। बैठक में विधानसभा सत्र की रणनीति तय करने के साथ यह भी फैसला होगा कि सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जाए या नहीं। यदि प्रस्ताव लाया जाता है, तो कांग्रेस सरकार को कई अहम मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। इनमें नकटी गांव में कथित प्रधानमंत्री आवास तोड़े जाने का मामला, प्रदेश की कानून-व्यवस्था, जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग, किसानों को खाद की कमी, बिजली दरों में वृद्धि, महिलाओं की सुरक्षा, बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रिया में देरी जैसे विषय शामिल हैं। कांग्रेस का कहना है कि इन मुद्दों पर सरकार से सदन में जवाब मांगा जाएगा और पूरे मानसून सत्र के दौरान इन विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और सभी विधायकों की मौजूदगी में रविवार की बैठक में विधानसभा की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होगा। सत्र भले ही अवधि में छोटा हो, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है, जबकि सत्ता पक्ष भी अपने जवाब और रणनीति को अंतिम रूप दे रहा है। इस बार विधानसभा सचिवालय में कुल 1033 प्रश्न जमा किए गए हैं। इनमें 36 विधायकों ने नियमों के अनुसार अधिकतम 20-20 प्रश्न लगाए हैं। खास बात यह है कि प्रश्न पूछने वालों में विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायक भी शामिल हैं। ऐसे में सत्र के दौरान विभिन्न विभागों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। अविश्वास प्रस्ताव क्या होता है? अविश्वास प्रस्ताव पूरी सरकार के खिलाफ लाया जाता है, किसी एक मंत्री या विभाग के खिलाफ नहीं। यदि विपक्ष इसे सदन में प्रस्तुत करता है, तो सरकार के कामकाज, कानून-व्यवस्था, किसानों, रोजगार, भ्रष्टाचार और अन्य प्रमुख विषयों पर व्यापक चर्चा होती है। अंत में मतदान के माध्यम से यह तय किया जाता है कि सरकार के पास सदन का बहुमत और विश्वास कायम है या नहीं।

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