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बिरगांव को विकास की सौगात देने आए CM साय, महापौर नंदलाल देवांगन को नहीं मिला बोलने का मौका, बीच में ही कार्यक्रम छोड़कर चले गए, गरमाई सियासत

रायपुर/बिरगांव। बिरगांव के शहीद नंदकुमार पटेल शासकीय महाविद्यालय में आयोजित मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कार्यक्रम को लेकर स्थानीय राजनीति गरमा गई है। कार्यक्रम के दौरान बिरगांव नगर निगम के महापौर नंदलाल देवांगन के कथित तौर पर बीच में कार्यक्रम छोड़कर चले जाने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। नगर निगम के एमआईसी सदस्य इकराम अहमद ने आरोप लगाया कि महापौर को बिरगांव नगर निगम क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं और जनहित से जुड़े मुद्दों को मुख्यमंत्री के सामने रखने का अवसर नहीं दिया गया। उनका दावा है कि इसी वजह से महापौर कार्यक्रम से बीच में चले गए। पेयजल, सड़क और सफाई जैसे मुद्दे उठाने का था दावा इकराम अहमद के मुताबिक बिरगांव क्षेत्र में पेयजल, सड़क, नाली, सफाई, स्वास्थ्य और विकास से जुड़ी कई समस्याएं हैं। उनका कहना है कि इन मुद्दों को मुख्यमंत्री के सामने रखने के लिए महापौर को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि बिरगांव की जनता द्वारा चुने गए महापौर को यदि अपने निगम क्षेत्र की समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखने का मौका नहीं मिलता, तो स्थानीय समस्याओं को शासन तक पहुंचाने का माध्यम क्या होगा। ‘यह सिर्फ महापौर का नहीं, जनता का सवाल’ एमआईसी सदस्य इकराम अहमद ने कहा कि यह मामला केवल महापौर से जुड़ा नहीं है, बल्कि बिरगांव के नागरिकों से जुड़े जनहित के मुद्दों का भी है। उन्होंने मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि बिरगांव की आवाज को मंच पर रखने का अवसर क्यों नहीं दिया गया और महापौर को अपनी बात रखने का मौका क्यों नहीं मिला।

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Birgaon, Chhattisgarh, Political, Raipur, Uncategorized

भूपेश बघेल का CM साय पर पलटवार, बोले भाजपा वाले ‘काले अंग्रेज’; प्रभारी बदलने पर भी साधा निशाना

छत्तीसगढ़ की राजनीति में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। पंजाब कांग्रेस प्रभारी के पद से भूपेश बघेल को हटाए जाने को लेकर मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस पर तंज कसा था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ वाली नीति पर काम करती है। सीएम के बयान पर पलटवार करते हुए भूपेश बघेल ने भाजपा नेताओं को ‘काले अंग्रेज’ बताया। उन्होंने कहा कि समाज को बांटने की राजनीति भाजपा कर रही है। बघेल ने आरोप लगाया कि हिंदू-मुसलमान के नाम पर लोगों को बांटने की कोशिश की जाती है और आदिवासी समाज में भी अलग-अलग पहचान के जरिए विभाजन की राजनीति होती है। दुर्ग में आयोजित कांग्रेस के तीन दिवसीय संगठन प्रशिक्षण शिविर के दौरान बघेल ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा में भी समय-समय पर प्रभारी बदले जाते रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ‘हंटर वाली’ से लेकर ‘हाफ पैंट-चड्ढी वाले’ तक कई लोग प्रभारी बन चुके हैं। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने भी भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति पर काम करती है, जबकि कांग्रेस देश को जोड़ने की राजनीति करती है। झीरम घाटी मामले पर भी सरकार को घेरा भूपेश बघेल ने झीरम घाटी मामले को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि घटना के पीछे साजिश की बात सामने आने के बावजूद अब तक इसके पीछे शामिल लोगों की पूरी पहचान नहीं हो पाई है। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था में हुई कथित चूक का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि अब तक किसी प्रशासनिक या पुलिस अधिकारी को इसके लिए सजा मिली है या नहीं। बघेल ने जांच और एफआईआर में नक्सली नेताओं के नामों को लेकर भी सवाल खड़े किए और सरकार से मामले की पारदर्शी जांच की मांग की।

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वंदे मातरम् को लेकर विजय शर्मा का कांग्रेस पर हमला, बोले- भाजपा विरोध में देश का विरोध न करें

दुर्ग में भाजपा कोर ग्रुप की बैठक के बाद छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने वंदे मातरम्, नक्सलवाद और जेल में बंद नक्सल मामलों से जुड़े आरोपियों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। वंदे मातरम् के दो पैरा गाने के कांग्रेस के रुख पर उन्होंने कहा कि तुष्टीकरण के कारण पहले इसे सीमित किया गया था। उन्होंने कहा कि देश में जो व्यवस्था तय हुई है, उसका पूरा पालन होना चाहिए। विजय शर्मा ने कहा कि वंदे मातरम् और तिरंगा किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं। भाजपा का विरोध करने के चक्कर में देश का विरोध नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि तिरंगा यात्रा किसी पार्टी की नहीं, बल्कि देश के नागरिकों की यात्रा है। दिमागी नक्सलवाद पर भी साधा निशाना नक्सलवाद के मुद्दे पर गृहमंत्री ने कहा कि नक्सल सिर्फ जंगलों में नहीं, बल्कि विचारों में भी हो सकता है। उन्होंने बस्तर में नक्सली हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि कई जवान और आम नागरिक हिंसा का शिकार हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को लेकर आलोचना करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और हिंसा या अराजकता फैलाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। विजय शर्मा ने कहा कि सरकार ने जंगलों से नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में कार्रवाई की है और अगर किसी के दिमाग में नक्सली सोच है, तो उसे भी खत्म किया जाएगा। 1300 नक्सल मामलों की समीक्षा गृहमंत्री ने बताया कि लंबे समय से जेल में बंद करीब 1300 लोगों से जुड़े नक्सल मामलों की समीक्षा की जा रही है। मामलों को जनहानि, केंद्रीय कानून और अन्य कानूनी प्रावधानों के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल उन मामलों की समीक्षा की जा रही है, जिनमें जनहानि नहीं हुई और केंद्रीय कानून लागू नहीं हैं। सरकार इन प्रकरणों की कानूनी स्थिति का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई पर विचार कर रही है।

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Bhilai / Durg, Political

महंगे बिजली बिल और स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस का राज्यव्यापी विरोध अभियान शुरू

छत्तीसगढ़ में बिजली बिलों में बढ़ोतरी, स्मार्ट मीटर और बिजली दरों को लेकर कांग्रेस ने राज्यभर में तीन दिवसीय विरोध अभियान की शुरुआत की है। अभियान के पहले दिन सभी जिला मुख्यालयों में जिला कांग्रेस अध्यक्ष मीडिया से बातचीत कर पार्टी का पक्ष रखेंगे और सरकार की बिजली नीति पर सवाल उठाएंगे। दूसरे दिन कांग्रेस कार्यकर्ता विभिन्न क्षेत्रों में घर-घर जाकर उपभोक्ताओं से संपर्क करेंगे। इस दौरान महंगे बिजली बिल और स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों के आवेदन भी एकत्र किए जाएंगे। अभियान के अंतिम दिन 3 अगस्त को रायपुर में मुख्यमंत्री निवास के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें प्रदेश के अलग-अलग जिलों से कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का कहना है कि बिजली उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिल और स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी का उद्देश्य इन मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाकर सरकार तक लोगों की शिकायतें पहुंचाना है।

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GOVERNMENT, Political, Raipur

महंगी बिजली के विरोध में कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन, 3 अगस्त को सीएम हाउस घेराव का ऐलान

छत्तीसगढ़ में बढ़ते बिजली बिल और स्मार्ट मीटर के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रेसवार्ता कर बताया कि पार्टी 1 अगस्त से 3 अगस्त तक चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में बिजली दरों में बढ़ोतरी और स्मार्ट मीटर व्यवस्था के कारण आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। पार्टी अब इस मुद्दे को लेकर प्रदेशभर में लोगों के बीच जाएगी और उपभोक्ताओं की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाएगी। आंदोलन के पहले चरण में 1 अगस्त को सभी जिला मुख्यालयों में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष प्रेसवार्ता करेंगे। इस दौरान बढ़े हुए बिजली बिल, महंगी बिजली और स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों को उठाया जाएगा। इसके बाद 2 अगस्त को कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जाकर बिजली उपभोक्ताओं से संपर्क करेंगे और उनकी समस्याओं से जुड़े आवेदन एकत्र करेंगे। पार्टी इन आवेदनों के माध्यम से सरकार से बिजली दरों में राहत और व्यवस्था की समीक्षा की मांग करेगी। आंदोलन के अंतिम चरण में 3 अगस्त को प्रदेशभर से कांग्रेस कार्यकर्ता रायपुर पहुंचेंगे और मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे। कांग्रेस ने दावा किया है कि इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और आम बिजली उपभोक्ता शामिल होंगे। दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस महंगी बिजली और बढ़ते बिलों के खिलाफ जनता की आवाज बनकर संघर्ष कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने बिजली दरों और उपभोक्ताओं की समस्याओं पर कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

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28 जुलाई को रायपुर आएंगे कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट, NEET मुद्दे पर प्रदर्शन में हो सकते हैं शामिल

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट 28 जुलाई को रायपुर पहुंचेंगे। माना जा रहा है कि वे NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन में हिस्सा ले सकते हैं। हालांकि, उनके दौरे का आधिकारिक कार्यक्रम अभी प्रदेश कांग्रेस की ओर से जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार, रायपुर प्रवास के दौरान सचिन पायलट की प्रदेश कांग्रेस नेताओं के साथ महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठकों की भी संभावना है। पार्टी संगठन में संभावित बदलाव और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए उनके इस दौरे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जून में भी आए थे रायपुर इससे पहले 25 जून को सचिन पायलट रायपुर आए थे, जहां उन्होंने कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर में भाग लिया था। उस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि भाजपा को कांग्रेस के प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर टिप्पणी करने के बजाय अपनी सरकार और संगठन की आंतरिक चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस एक पुरानी और मजबूत संगठनात्मक परंपरा वाली पार्टी है, जो नए जिला अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। सचिन पायलट ने यह भी कहा था कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने के अभियान पर काम कर रही है। देशभर में आयोजित प्रशिक्षण शिविरों में सामाजिक, राजनीतिक और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ भाजपा सरकार की नीतियों को जनता तक पहुंचाने की रणनीति भी तैयार की जा रही है।

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CM विष्णुदेव साय का राहुल गांधी पर हमला, बोले- लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ है ऐसा आचरण

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हालिया प्रदर्शन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर किया गया प्रदर्शन लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं था और इस तरह का व्यवहार संवैधानिक पद की गरिमा के विपरीत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा की जाती है। उनके अनुसार, राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मर्यादाओं का सम्मान बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री साय ने NEET पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही पेपर लीक को गंभीर अपराध बता चुके हैं और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। उनके अनुसार, परीक्षा दोबारा पारदर्शी तरीके से आयोजित की गई और उसके परिणाम भी घोषित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे को राजनीतिक रूप देने का प्रयास कर रही है और युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास के बाहर किया गया प्रदर्शन लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि देश की जनता लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मर्यादाओं का सम्मान करती है तथा इस प्रकार की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी।

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छत्तीसगढ़ कैबिनेट का बड़ा फैसला: अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण, किसानों के लिए बनेगी खाद निगरानी समिति

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में किसानों और अग्निवीरों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में खरीफ और रबी सीजन के दौरान किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने तथा अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई। कैबिनेट ने किसानों को खाद की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मंत्री-मंडलीय उप समिति के गठन को स्वीकृति दी है। यह समिति खाद की आपूर्ति, वितरण और प्रबंधन की नियमित समीक्षा करेगी तथा आवश्यक सुझाव सरकार को देगी। समिति की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री करेंगे, जबकि कृषि, सहकारिता और वित्त मंत्री इसके सदस्य होंगे। कृषि उत्पादन आयुक्त समिति के संयोजक रहेंगे। आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों, अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों को भी बैठक में आमंत्रित किया जा सकेगा। इसके अलावा कैबिनेट ने राज्य में अग्निवीर सैनिकों के लिए तृतीय श्रेणी की सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला लिया है। इसके लिए “छत्तीसगढ़ अग्निवीर सैनिक आरक्षण नियम-2026” के गठन को मंजूरी दी गई है। यह आरक्षण पुलिस विभाग में आरक्षक, वन विभाग में वनरक्षक और जेल विभाग में प्रहरी के पदों पर होने वाली सीधी भर्ती में लागू होगा। सरकार के अनुसार, आरक्षण का लाभ केवल उन अग्निवीरों को मिलेगा जिन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों में चार वर्ष की निर्धारित सेवा पूरी कर वैध सेवा प्रमाण पत्र के साथ सेवामुक्ति प्राप्त की हो। यह निर्णय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा 26 जुलाई 2024 को विधानसभा में की गई घोषणा के अनुरूप लिया गया है। सरकार का मानना है कि इस पहल से अग्निवीरों को सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिलेंगे और उनके प्रशिक्षण, अनुशासन तथा अनुभव का लाभ पुलिस, वन एवं जेल विभागों की कार्यप्रणाली को भी मिलेगा।

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दिल्ली में सक्रिय छत्तीसगढ़ कांग्रेस के आदिवासी नेता, PCC अध्यक्ष को लेकर चर्चाओं ने पकड़ी रफ्तार

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष के पद को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। संगठन में संभावित बदलाव की अटकलों के बीच पार्टी के कई वरिष्ठ आदिवासी नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व आगामी विधानसभा और संगठनात्मक रणनीति को ध्यान में रखते हुए बड़े फैसले की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी में इस बार प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी किसी आदिवासी नेता को दिए जाने की चर्चा जोरों पर है। इसी वजह से कई वरिष्ठ नेताओं की दिल्ली में सक्रियता बढ़ी है और हाईकमान से मुलाकातों का दौर जारी है। संभावित दावेदारों में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, विधायक लखेश्वर बघेल, विधायक जनक ध्रुव सहित कई आदिवासी नेताओं के नाम चर्चा में हैं। वहीं, आबकारी घोटाला मामले में जमानत पर बाहर आए वरिष्ठ कांग्रेस नेता कवासी लखमा भी दिल्ली में मौजूद बताए जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस केवल प्रदेश अध्यक्ष ही नहीं, बल्कि संगठन के अन्य अहम पदों पर भी बदलाव कर सकती है। इसी कारण दिल्ली में नेताओं की बढ़ती गतिविधियों को संगठनात्मक पुनर्गठन से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से अब तक किसी भी नाम या संगठनात्मक बदलाव को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि अंतिम निर्णय कांग्रेस हाईकमान ही करेगा। फिलहाल, दिल्ली में चल रही बैठकों और नेताओं की मौजूदगी ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

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‘वोटर नहीं हो तो नहीं सुनूंगा’ बयान पर विवाद, विधायक की जन चौपाल में हंगामा

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक विधायक के कथित बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। करैरा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जन चौपाल के दौरान उस समय हंगामा हो गया, जब पोहरी विधानसभा क्षेत्र से अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे ग्रामीणों की शिकायतें सुनने से इनकार करने का आरोप विधायक पर लगा। जानकारी के अनुसार, नरवर तहसील स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर भवन में बुधवार को करैरा विधायक की ओर से जन चौपाल आयोजित की गई थी। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं और आवेदन लेकर पहुंचे थे। इसी बीच पोहरी विधानसभा क्षेत्र के नानकपुर और बरखाड़ी गांव के करीब 8 से 10 ग्रामीण भी पेयजल और बिजली जैसी समस्याओं को लेकर विधायक के पास पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि विधायक ने उनकी शिकायतें सुनने से यह कहते हुए मना कर दिया कि वे उनके विधानसभा क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं। विधायक के इस कथित बयान के बाद ग्रामीण नाराज हो गए और मौके पर विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि वे निजी काम के लिए नहीं बल्कि सरकारी समस्याओं के समाधान के लिए जनप्रतिनिधि के पास पहुंचे हैं। उनका तर्क था कि जनता की परेशानियां विधानसभा क्षेत्र की सीमा से अलग नहीं होतीं। विरोध के दौरान मामला और बढ़ गया। इसी बीच एक ग्रामीण ने अपनी नाराजगी जताने के लिए अपने छोटे बच्चे को विधायक की गाड़ी के गर्म बोनट पर रख दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है। जहां कुछ लोग जनप्रतिनिधियों से जनता की समस्याएं सुनने की उम्मीद जता रहे हैं, वहीं कई लोगों ने बच्चे को गर्म गाड़ी पर रखने की घटना को उसकी सुरक्षा के लिहाज से गलत बताया है। फिलहाल इस पूरे मामले पर विधायक की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वायरल वीडियो के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

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