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बिलासपुर में नकली (एनालॉग) पनीर पर सख्ती, होटल-रेस्टोरेंट संचालकों को प्रशासन की चेतावनी

बिलासपुर में प्रतिबंधित एनालॉग (नकली) पनीर के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर रोक को सख्ती से लागू करने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। रविवार को जिले के होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की बैठक आयोजित कर उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी स्थिति में एनालॉग पनीर का उपयोग या कारोबार न करें। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त के निर्देश पर प्रदेशभर में इस अभियान को चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में बिलासपुर में अधिकारियों ने होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को बताया कि प्रतिबंधित पनीर की खरीद, बिक्री, भंडारण और उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि किसी प्रतिष्ठान में इसका उपयोग पाया गया तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने व्यापारियों से अपील की कि वे केवल प्रमाणित और गुणवत्तायुक्त पनीर ही खरीदें तथा अपने सप्लायरों की भी जांच करें। उनका कहना है कि जब तक बाजार में इसकी सप्लाई पूरी तरह बंद नहीं होगी, तब तक इस पर प्रभावी रोक लगाना संभव नहीं होगा। बैठक के दौरान होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को स्वच्छता, खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण, गुणवत्ता बनाए रखने, लाइसेंस संबंधी नियमों और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश भी दिए गए। विभाग ने साफ किया कि समय-समय पर निरीक्षण जारी रहेगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। बैठक के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने शहर के कई होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य प्रतिष्ठानों में औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान विशेष रूप से एनालॉग पनीर की उपलब्धता की पड़ताल की गई। विभाग के अनुसार फिलहाल किसी भी प्रतिष्ठान में प्रतिबंधित पनीर नहीं मिला, लेकिन आगे भी नियमित जांच जारी रहेगी। प्रशासन ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है। यदि किसी होटल, रेस्टोरेंट, डेयरी या अन्य प्रतिष्ठान में एनालॉग पनीर का निर्माण, बिक्री, भंडारण या उपयोग होता दिखाई दे तो इसकी शिकायत विभाग की आधिकारिक वेबसाइट, हेल्पलाइन नंबर 9340597097 या संबंधित कार्यालय में की जा सकती है। जिला खाद्य एवं औषधि अधिकारी आर.आर. देवांगन ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। सभी खाद्य कारोबारियों को इसके उपयोग और कारोबार पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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मेकाहारा में फायर सेफ्टी सिस्टम पर सवाल: AC ब्लास्ट से आग, स्प्रिंकलर नहीं चला; धुएं से मचा हड़कंप

मेकाहारा अस्पताल में आग के बाद फायर सेफ्टी व्यवस्था पर उठे सवाल रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) के मेडिसिन इमरजेंसी वार्ड में मंगलवार दोपहर एसी में खराबी के चलते आग लग गई। घटना के बाद फॉल सीलिंग और प्लास्टिक सामग्री के जलने से कुछ ही समय में पूरे वार्ड में धुआं भर गया। मरीजों और उनके परिजनों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सबसे बड़ी चिंता की बात यह रही कि अस्पताल में लगाए गए फायर फाइटिंग सिस्टम और स्प्रिंकलर सिस्टम जरूरत के समय सक्रिय नहीं हुए। धुआं निकालने के लिए कर्मचारियों को कूलर और अन्य संसाधनों का सहारा लेना पड़ा। AC से निकला धुआं, फिर लगी आग प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मेडिसिन इमरजेंसी वार्ड में लगे एसी से अचानक धुआं निकलना शुरू हुआ। कुछ देर बाद तेज आवाज के साथ आग भड़क गई। बताया जा रहा है कि एसी के आसपास लगी प्लास्टिक सामग्री और फॉल सीलिंग ने आग को तेजी से फैलाने का काम किया। हालांकि आग लगने की वास्तविक वजह का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा। डॉक्टरों और कर्मचारियों ने किया मरीजों का रेस्क्यू आग लगने के बाद अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों ने तुरंत मोर्चा संभाला। वार्ड में भर्ती मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ऑक्सीजन पाइपलाइन को देखते हुए सबसे पहले ऑक्सीजन सप्लाई बंद की गई, इसके बाद गंभीर मरीजों को दूसरे वार्ड और ICU में शिफ्ट किया गया। रेस्क्यू के दौरान कई डॉक्टर और कर्मचारी धुएं की चपेट में आए, जिससे उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई। स्प्रिंकलर सिस्टम नहीं चला, फायर सेफ्टी पर सवाल घटना के दौरान अस्पताल में लगे स्प्रिंकलर सिस्टम के काम नहीं करने की बात सामने आई है। वहीं धुआं बाहर निकालने के लिए हाई कैपेसिटी स्मोक एग्जॉस्ट सिस्टम उपलब्ध नहीं होने की भी जानकारी मिली। कर्मचारियों ने कूलर लगाकर धुआं बाहर निकालने का प्रयास किया। देर शाम तक वार्ड और आसपास के क्षेत्र में जले हुए प्लास्टिक की गंध बनी रही। कई फायर एक्सटिंग्विशर की वैधता पर सवाल ग्राउंड रिपोर्ट में अस्पताल के कुछ हिस्सों में ऐसे फायर एक्सटिंग्विशर मिलने की बात सामने आई, जिनकी रिफिलिंग अवधि समाप्त हो चुकी थी। इससे अस्पताल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और नियमित मेंटेनेंस को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब जांच का विषय यह है कि अस्पताल में लगे फायर सिस्टम का समय पर निरीक्षण और रखरखाव किया गया था या नहीं। SDRF ने दिए सुरक्षा सुधार के निर्देश फायर अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन को फायर सेफ्टी व्यवस्था मजबूत करने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि फॉल सीलिंग और प्लास्टिक सामग्री आग लगने की स्थिति में तेजी से जलती है और ज्यादा धुआं पैदा करती है। अस्पताल प्रबंधन ने कहा- कोई जनहानि नहीं अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनवानी ने बताया कि आग पर समय रहते नियंत्रण पा लिया गया। सभी मरीजों, उनके परिजनों और स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। प्रभावित वार्ड की व्यवस्था दूसरे स्थान पर की गई है। पहले भी हो चुकी है आग की घटना मेकाहारा अस्पताल में आग लगने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले नवंबर 2024 में भी ट्रॉमा ऑपरेशन थिएटर परिसर में आग लगी थी। उस घटना में शॉर्ट सर्किट के कारण उपकरण और मशीनें प्रभावित हुई थीं। पुरानी घटनाओं के बावजूद फायर सेफ्टी सिस्टम में पर्याप्त सुधार नहीं होने के आरोप एक बार फिर सामने आए हैं। अब इस घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग उठ रही है।

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रायपुर मेकाहारा अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लगी आग, मरीजों को सुरक्षित स्थान पर किया गया शिफ्ट

रायपुर। राजधानी रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति अस्पताल (मेकाहारा) के मेडिसिन विभाग स्थित इमरजेंसी वार्ड में मंगलवार दोपहर अचानक आग लगने से अस्पताल में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की जानकारी मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी प्रयास के बाद आग पर नियंत्रण पा लिया गया। आग के कारण इमरजेंसी वार्ड में धुआं भर गया, जिसके चलते मरीजों और उनके परिजनों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और सुरक्षा कर्मियों ने मिलकर राहत एवं बचाव कार्य को तेजी से अंजाम दिया, जिससे किसी बड़े हादसे को टाला जा सका। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इमरजेंसी वार्ड में लगे एयर कंडीशनर (एसी) में तकनीकी खराबी आने या उसके फटने की वजह से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, आग लगने के वास्तविक कारणों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस और संबंधित विभाग मामले की जांच कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आग लगने की सही वजह स्पष्ट हो सकेगी।

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आयुष्मान योजना में गड़बड़ी पर रायपुर का मित्तल हॉस्पिटल 3 महीने के लिए सस्पेंड, ₹90 हजार लौटाने के आदेश

आयुष्मान भारत योजना के नियमों के उल्लंघन के मामले में रायपुर स्थित मित्तल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस पर बड़ी कार्रवाई की गई है। राज्य नोडल एजेंसी ने अस्पताल को तीन महीने के लिए आयुष्मान योजना से निलंबित कर दिया है। साथ ही मरीज के परिजनों से सर्जरी के नाम पर ली गई ₹90 हजार की राशि वापस करने के निर्देश भी दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार, मरीज अल्बर्ट एक्का के परिजनों ने शिकायत की थी कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल ने इलाज के लिए अतिरिक्त पैसे वसूले। शिकायत मिलने के बाद रायपुर संभाग के संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य सेवाओं द्वारा मामले की जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि अस्पताल ने दवाइयों के नाम पर ₹15,226 और सर्जरी के लिए ₹90 हजार अतिरिक्त वसूले थे। जांच के बाद अस्पताल ने दवाइयों के लिए ली गई ₹15,226 की राशि चेक के माध्यम से वापस कर दी, लेकिन सर्जरी के लिए ली गई ₹90 हजार की राशि अब तक लौटाई नहीं गई। इसी आधार पर राज्य नोडल एजेंसी ने अस्पताल को आयुष्मान भारत योजना से तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया। इस अवधि के दौरान अस्पताल योजना के तहत नए मरीजों को भर्ती नहीं कर सकेगा। हालांकि, पहले से भर्ती मरीजों का इलाज पूरा कर उन्हें डिस्चार्ज किया जा सकेगा। एजेंसी ने अस्पताल को निर्देश दिए हैं कि आयुष्मान योजना से संबंधित सभी प्रचार सामग्री अस्पताल परिसर से हटाई जाए। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की अनियमितता दोबारा पाए जाने पर और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

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सिम्स बिलासपुर में पहली बार VATS तकनीक से फेफड़ों की जटिल सर्जरी, मरीजों को मिली बड़ी राहत

बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में पहली बार आधुनिक वीडियो असिस्टेड थोरास्कोपिक सर्जरी (VATS) तकनीक के जरिए टीबी जनित प्लूरल इफ्यूजन (फेफड़ों के आसपास पानी भरने) से पीड़ित 57 वर्षीय मरीज का सफल ऑपरेशन किया गया। इस उपलब्धि के बाद अब फेफड़ों और छाती से जुड़ी कई जटिल बीमारियों का इलाज सिम्स में ही संभव होगा। जानकारी के अनुसार, 57 वर्षीय मरीज पिछले तीन महीने से लगातार बुखार से पीड़ित था। शुरुआती इलाज निजी अस्पताल में किया गया, जहां उसे टाइफाइड की दवाइयां दी गईं, लेकिन बाद की जांच में दाहिने फेफड़े के आसपास पानी जमा होने की पुष्टि हुई। सिम्स के टीबी विभाग में भर्ती करने पर मरीज में टीबी जनित प्लूरल इफ्यूजन की पहचान हुई और उपचार शुरू किया गया। बार-बार पानी निकालने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने पर उसे जनरल सर्जरी विभाग भेजा गया। इसके बाद टीबी, जनरल सर्जरी और एनेस्थीसिया विभाग की संयुक्त टीम ने पहली बार VATS तकनीक का उपयोग करते हुए सफल ऑपरेशन किया। सर्जरी के दौरान फेफड़े के आसपास जमा तरल पदार्थ निकाला गया, डिकॉर्टिकेशन किया गया और बायोप्सी भी की गई। ऑपरेशन सफल रहा और मरीज अब तेजी से स्वस्थ होकर नियमित फॉलो-अप पर है। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि VATS मशीन उपलब्ध होने के बाद यह संस्थान की पहली सफल सर्जरी है। पहले इस तरह के 10 से 12 मरीजों को हर महीने बड़े चिकित्सा संस्थानों में रेफर करना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा बिलासपुर में ही उपलब्ध रहेगी। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह के अनुसार, निजी अस्पतालों में इस सर्जरी पर लगभग 1 से 2 लाख रुपये तक का खर्च आता है, जबकि सिम्स में यह सुविधा शासकीय शुल्क पर तथा आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों को उपलब्ध कराई जाएगी। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि लगातार बुखार, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या फेफड़ों में पानी भरने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर जांच कराएं। इस सफल सर्जरी को जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. कोमल प्रसाद देवांगन, डॉ. विनोद तमकनंद और डॉ. सुशील पात्रे ने अंजाम दिया। उनके साथ जूनियर रेजिडेंट डॉ. ऋतेश, डॉ. गरिमा शर्मा, टीबी विभाग के डॉ. अनिल डरसेना एवं उनकी टीम तथा एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति और उनकी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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एम्स रायपुर में लैब टेस्ट हुआ पूरी तरह पेपरलेस, अब बिना पर्ची सीधे सैंपल दे सकेंगे मरीज

एम्स रायपुर ने मरीजों की सुविधा बढ़ाने के लिए लैब टेस्ट की प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस कर दिया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब ओपीडी में आने वाले मरीजों को लैब जांच के लिए प्रिंटेड पर्ची लेकर अलग-अलग काउंटरों पर जाने की जरूरत नहीं होगी। डॉक्टर जैसे ही कंप्यूटर सिस्टम में जांच लिखेंगे, उसकी जानकारी तुरंत लैब के सिस्टम तक पहुंच जाएगी। नई व्यवस्था के तहत मरीज सीधे डोम-1 स्थित फलेबोटोमी जोन पहुंचकर अपना रजिस्ट्रेशन कराएंगे। वहां बारकोड जनरेट होने के बाद ब्लड या अन्य आवश्यक सैंपल लिए जाएंगे। इससे जांच प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, आसान और सुविधाजनक हो जाएगी। फलेबोटोमी जोन अस्पताल का वह सैंपल कलेक्शन सेंटर होता है, जहां मरीजों के खून और अन्य लैब सैंपल एकत्र किए जाते हैं। एम्स प्रशासन का कहना है कि इस डिजिटल व्यवस्था से मरीजों को पर्ची खोने की चिंता नहीं रहेगी, इंतजार का समय कम होगा और पूरी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनेगी। साथ ही कागज की खपत कम होने से पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डोम-1 में अलग से चाइल्ड-फ्रेंडली सैंपल कलेक्शन रूम तैयार किया गया है। इस कक्ष में ऑडियो-वीडियो की व्यवस्था की गई है, ताकि ब्लड सैंपल देते समय बच्चे सहज महसूस करें और उन्हें डर या घबराहट न हो। एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल ने कहा कि संस्थान मरीजों को बेहतर और सरल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार डिजिटल तकनीक को अपनाने की दिशा में काम कर रहा है। वहीं मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रो. (डॉ.) डी.के. त्रिपाठी के अनुसार, नई पेपरलेस व्यवस्था से प्रतिदिन आने वाले हजारों मरीजों को तेजी से सेवाएं मिलेंगी और अस्पताल की कार्यप्रणाली भी अधिक प्रभावी होगी। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि यह नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। अब ओपीडी के जिन मरीजों को लैब टेस्ट कराना होगा, वे सीधे डोम-1 फलेबोटोमी जोन पहुंचकर अपना सैंपल दे सकेंगे।

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रायपुर में बदले कचरा प्रबंधन के नियम: अब गीला-सूखा ही नहीं, 4 तरह का कचरा अलग करना होगा

राजधानी रायपुर में कचरा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 के तहत नई व्यवस्था लागू करने की शुरुआत कर दी है। इसके लिए जोन-1 की साम्राज्य और अनुग्रह रेसिडेंसी सोसायटियों को मॉडल के रूप में चुना गया है। यहां रहने वाले परिवारों को अब गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे को अलग-अलग करके ही नगर निगम की एजेंसी को देना होगा। नगर निगम के अनुसार, दोनों सोसायटियों में 200 से अधिक परिवार रहते हैं। स्वच्छता दीदियों और रामकी कंपनी के कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे घर-घर जाकर लोगों को नए नियमों की जानकारी दें। जागरूकता अभियान पूरा होने के बाद यदि कोई परिवार मिश्रित कचरा देगा तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। जिन क्षेत्रों में कचरा वाहन सीधे नहीं पहुंच सकते, वहां ‘व्हील गैंग’ के माध्यम से कचरा एकत्र कर मुख्य वाहनों तक पहुंचाया जाएगा। नगर निगम 100 किलो से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले बल्क वेस्ट जनरेटरों का ऑनलाइन पंजीयन भी करा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मॉडल सोसायटियों में सफलता मिलने के बाद यह चार-स्तरीय कचरा पृथक्करण व्यवस्था पूरे रायपुर में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।

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News22 Bharat की रिपोर्ट का असर: बिरगांव की Analogue Paneer यूनिट पर खाद्य विभाग की कार्रवाई, लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया शुरू

रायपुर। बिरगांव स्थित एक Analogue Paneer निर्माण इकाई के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम News22 Bharat द्वारा प्रसारित की गई ग्राउंड रिपोर्ट के बाद उठाया गया, जिसमें फैक्ट्री की कार्यप्रणाली और खाद्य सुरक्षा मानकों से जुड़े कई सवाल सामने आए थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारी संतोष ध्रुव द्वारा किए गए निरीक्षण और जांच के आधार पर संबंधित इकाई के लाइसेंस को निलंबित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता व्यवस्था और उत्पादन प्रक्रिया से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर अनियमितताएं दर्ज की गईं। उल्लेखनीय है कि News22 Bharat की टीम ने मौके पर पहुंचकर फैक्ट्री की स्थिति का जायजा लिया था। रिपोर्ट में उत्पादन क्षेत्र की साफ-सफाई, खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन तथा निर्माण प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया था। रिपोर्ट सामने आने के बाद विभाग ने मामले का संज्ञान लेते हुए विस्तृत जांच शुरू की। खाद्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि खाद्य पदार्थों के निर्माण और वितरण में निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिल सकें। फिलहाल विभागीय जांच और नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। मामले से जुड़ी आगामी अपडेट और विभागीय निर्णय पर सभी की नजर बनी हुई है।

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इबोला संक्रमण को लेकर छत्तीसगढ़ में अलर्ट, रायपुर एयरपोर्ट पर बढ़ाई गई निगरानी

वैश्विक स्तर पर इबोला वायरस को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। राजधानी रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है। एयरपोर्ट पर विशेष जांच काउंटर बनाए गए हैं, जहां देश-विदेश से आने वाले यात्रियों की स्वास्थ्य जांच के साथ उनकी ट्रैवल हिस्ट्री भी खंगाली जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने एयरपोर्ट प्रशासन और मेडिकल टीम को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग, स्वास्थ्य परीक्षण और संदिग्ध लक्षणों की निगरानी अनिवार्य कर दी गई है। किसी यात्री में इबोला जैसे लक्षण मिलने पर तुरंत आइसोलेशन और इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी की गई है। अफ्रीकी देशों, विशेष रूप से कांगो और युगांडा में इबोला संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चिंता जाहिर की है। इसके बाद भारत सहित कई देशों ने अपने एयरपोर्ट और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी है। फिलहाल देश में इबोला संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियात के तौर पर केंद्र और राज्य सरकारें अलर्ट मोड में हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने हाल ही में कहा था कि भारत में अभी इबोला का कोई पुष्ट मामला नहीं है, लेकिन एयरपोर्ट, बंदरगाहों और सीमावर्ती इलाकों में स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है। साथ ही ICMR और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियों को सर्विलांस, टेस्टिंग और आपात तैयारी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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पाली में चमगादड़ों की मौत पर प्रशासन का बड़ा खुलासा, बीमारी नहीं भीषण गर्मी बनी वजह

कोरबा जिले के पाली क्षेत्र में बड़ी संख्या में चमगादड़ों की मौत के बाद फैली अफवाहों पर जिला प्रशासन और पशुधन विकास विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। प्रशासन ने कहा है कि चमगादड़ों की मौत किसी बीमारी, वायरस या संक्रमण से नहीं बल्कि भीषण गर्मी और हीट स्ट्रोक के कारण हुई है। जानकारी के अनुसार नगर पंचायत पाली के नौकोनिया तालाब के पास पिछले कुछ दिनों में करीब 200 प्रवासी चमगादड़ों की मौत हुई थी। घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की भ्रामक खबरें फैलने लगी थीं, जिसके बाद प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी किया। पशुधन विकास विभाग की प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अत्यधिक तापमान को मौत का मुख्य कारण बताया गया है। विभाग ने साफ किया कि किसी भी प्रकार के संक्रमण या अज्ञात वायरस के लक्षण नहीं मिले हैं। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और पशुधन विकास विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची थी। सभी मृत चमगादड़ों को सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत दफनाया गया और जांच के लिए नमूने फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक अब चमगादड़ों की मृत्यु दर में कमी आई है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें और न ही उसे सोशल मीडिया पर साझा करें। साथ ही यदि किसी वन्यजीव की असामान्य गतिविधि या मौत दिखाई दे तो तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दें।

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