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News22 Bharat की रिपोर्ट का असर: बिरगांव की Analogue Paneer यूनिट पर खाद्य विभाग की कार्रवाई, लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया शुरू

रायपुर। बिरगांव स्थित एक Analogue Paneer निर्माण इकाई के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम News22 Bharat द्वारा प्रसारित की गई ग्राउंड रिपोर्ट के बाद उठाया गया, जिसमें फैक्ट्री की कार्यप्रणाली और खाद्य सुरक्षा मानकों से जुड़े कई सवाल सामने आए थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारी संतोष ध्रुव द्वारा किए गए निरीक्षण और जांच के आधार पर संबंधित इकाई के लाइसेंस को निलंबित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता व्यवस्था और उत्पादन प्रक्रिया से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर अनियमितताएं दर्ज की गईं। उल्लेखनीय है कि News22 Bharat की टीम ने मौके पर पहुंचकर फैक्ट्री की स्थिति का जायजा लिया था। रिपोर्ट में उत्पादन क्षेत्र की साफ-सफाई, खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन तथा निर्माण प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया था। रिपोर्ट सामने आने के बाद विभाग ने मामले का संज्ञान लेते हुए विस्तृत जांच शुरू की। खाद्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि खाद्य पदार्थों के निर्माण और वितरण में निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिल सकें। फिलहाल विभागीय जांच और नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। मामले से जुड़ी आगामी अपडेट और विभागीय निर्णय पर सभी की नजर बनी हुई है।

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इबोला संक्रमण को लेकर छत्तीसगढ़ में अलर्ट, रायपुर एयरपोर्ट पर बढ़ाई गई निगरानी

वैश्विक स्तर पर इबोला वायरस को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। राजधानी रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है। एयरपोर्ट पर विशेष जांच काउंटर बनाए गए हैं, जहां देश-विदेश से आने वाले यात्रियों की स्वास्थ्य जांच के साथ उनकी ट्रैवल हिस्ट्री भी खंगाली जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने एयरपोर्ट प्रशासन और मेडिकल टीम को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग, स्वास्थ्य परीक्षण और संदिग्ध लक्षणों की निगरानी अनिवार्य कर दी गई है। किसी यात्री में इबोला जैसे लक्षण मिलने पर तुरंत आइसोलेशन और इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी की गई है। अफ्रीकी देशों, विशेष रूप से कांगो और युगांडा में इबोला संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चिंता जाहिर की है। इसके बाद भारत सहित कई देशों ने अपने एयरपोर्ट और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी है। फिलहाल देश में इबोला संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियात के तौर पर केंद्र और राज्य सरकारें अलर्ट मोड में हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने हाल ही में कहा था कि भारत में अभी इबोला का कोई पुष्ट मामला नहीं है, लेकिन एयरपोर्ट, बंदरगाहों और सीमावर्ती इलाकों में स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है। साथ ही ICMR और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियों को सर्विलांस, टेस्टिंग और आपात तैयारी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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पाली में चमगादड़ों की मौत पर प्रशासन का बड़ा खुलासा, बीमारी नहीं भीषण गर्मी बनी वजह

कोरबा जिले के पाली क्षेत्र में बड़ी संख्या में चमगादड़ों की मौत के बाद फैली अफवाहों पर जिला प्रशासन और पशुधन विकास विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। प्रशासन ने कहा है कि चमगादड़ों की मौत किसी बीमारी, वायरस या संक्रमण से नहीं बल्कि भीषण गर्मी और हीट स्ट्रोक के कारण हुई है। जानकारी के अनुसार नगर पंचायत पाली के नौकोनिया तालाब के पास पिछले कुछ दिनों में करीब 200 प्रवासी चमगादड़ों की मौत हुई थी। घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की भ्रामक खबरें फैलने लगी थीं, जिसके बाद प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी किया। पशुधन विकास विभाग की प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अत्यधिक तापमान को मौत का मुख्य कारण बताया गया है। विभाग ने साफ किया कि किसी भी प्रकार के संक्रमण या अज्ञात वायरस के लक्षण नहीं मिले हैं। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और पशुधन विकास विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची थी। सभी मृत चमगादड़ों को सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत दफनाया गया और जांच के लिए नमूने फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक अब चमगादड़ों की मृत्यु दर में कमी आई है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें और न ही उसे सोशल मीडिया पर साझा करें। साथ ही यदि किसी वन्यजीव की असामान्य गतिविधि या मौत दिखाई दे तो तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दें।

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AIIMS रायपुर की बड़ी उपलब्धि: 10 महीने के मासूम की दुर्लभ हार्ट सर्जरी सफल, नई जिंदगी मिली

AIIMS Raipur ने बाल हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है। यहां डॉक्टरों ने 10 महीने के एक मासूम बच्चे की बेहद जटिल और दुर्लभ हृदय सर्जरी सफलतापूर्वक की, जिससे उसे नई जिंदगी मिली। बच्चा ‘एएलसीएपीए’ (Anomalous Left Coronary Artery from the Pulmonary Artery) नाम की गंभीर और जन्मजात हृदय बीमारी से पीड़ित था। यह बीमारी लगभग 3 लाख नवजात शिशुओं में से किसी एक में पाई जाती है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती है। रायपुर जिले के इस मासूम की हालत बेहद नाजुक थी। गंभीर जोखिम के कारण कई अस्पतालों ने इलाज करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उसे AIIMS रायपुर रेफर किया गया। यह जटिल ऑपरेशन कई विभागों की संयुक्त टीम ने मिलकर किया, जिसमें कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी, कार्डियोलॉजी, कार्डियक एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी और पीडियाट्रिक्स विभाग शामिल रहे। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे का हृदय कार्य (Left Ventricular Ejection Fraction) केवल 20 प्रतिशत रह गया था, साथ ही गंभीर माइट्रल रिगर्जिटेशन ने स्थिति को और कठिन बना दिया था। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नाइक के मुताबिक यह बीमारी जन्मजात हृदय रोगों में सबसे जटिल मानी जाती है और इसका इलाज दुनिया के चुनिंदा बड़े मेडिकल संस्थानों में ही संभव हो पाता है। सर्जरी के दौरान और बाद में क्रिटिकल केयर टीम ने लगातार निगरानी रखी। शुरुआती 24 घंटे बच्चे के लिए बेहद महत्वपूर्ण थे, जिसमें उसे विशेष जीवन रक्षक सहायता दी गई। ऑपरेशन के बाद बच्चे की हालत में तेजी से सुधार हुआ। दूसरे ही दिन उसे वेंटिलेटर से हटा दिया गया और 9वें दिन उसे पूरी तरह स्वस्थ और स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

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रायपुर में एंटी-रेबीज वैक्सीन की भारी कमी: डॉग बाइट मरीजों को नहीं मिल रहा पूरा इलाज

रायपुर में आवारा कुत्तों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर के अलग-अलग इलाकों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग रोजाना डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की भारी कमी से मरीजों की परेशानी और बढ़ गई है। स्थिति यह है कि कई सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को केवल पहला डोज लगाया जा रहा है, जबकि बाद के जरूरी डोज के लिए उन्हें मना कर दिया जाता है। वजह है वैक्सीन का बेहद सीमित स्टॉक। ऐसे में लोगों को मजबूरी में निजी मेडिकल स्टोर्स से 600 से 1200 रुपए तक खर्च कर इंजेक्शन खरीदना पड़ रहा है। जांच में कई स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी डॉक्टरों ने माना कि लगातार वैक्सीन की मांग भेजी जा रही है, लेकिन पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल रही। अधिकारियों के मुताबिक डिमांड भेजने के 15 से 20 दिन बाद भी जरूरत का सिर्फ 15 से 20 प्रतिशत स्टॉक ही उपलब्ध कराया जा रहा है। डॉग बाइट के मामलों में समय पर सभी डोज लगना बेहद जरूरी होता है। लेकिन वैक्सीन की कमी के कारण मरीज अधूरा इलाज करवाने को मजबूर हैं, जिससे रेबीज संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। शहर के कई स्वास्थ्य केंद्रों में वैक्सीन की स्थिति गंभीर बनी हुई है। गुढ़ियारी केंद्र में हर महीने 600 डोज की जरूरत होती है, लेकिन केवल 60 से 70 डोज उपलब्ध हैं। बीरगांव में 450 डोज की जरूरत के मुकाबले सिर्फ 100 डोज मौजूद हैं। वहीं भाठागांव, रामनगर और खोखोपारा केंद्रों में भी जरूरत की तुलना में बहुत कम वैक्सीन उपलब्ध है। रायपुर जिला स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी Dr. Sarthak Nanda ने बताया कि कुत्तों को एक इलाके से हटाकर दूसरे इलाके में छोड़ने से उनका व्यवहार आक्रामक हो सकता है। उन्होंने कहा कि कुत्तों के बधियाकरण और सही प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है। वहीं Dr. Mithilesh Chaudhary ने कहा कि एंटी-रेबीज इंजेक्शन की मांग उच्च कार्यालय को भेज दी गई है और जिन केंद्रों में स्टॉक नहीं है, वहां जल्द सप्लाई उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

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छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी का कहर: बिलासपुर में बुजुर्ग की मौत, अगले 5 दिन हीटवेव का अलर्ट

छत्तीसगढ़ में गर्मी लगातार लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही है। मौसम विभाग ने मध्य छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में अगले 5 दिनों तक हीटवेव चलने की चेतावनी जारी की है। प्रदेशभर में तापमान फिलहाल इसी स्तर पर बने रहने की संभावना जताई गई है। इस बीच बिलासपुर से एक दुखद मामला सामने आया है, जहां लू लगने से एक 75 वर्षीय बुजुर्ग की मौत की आशंका जताई जा रही है। जोंधरा गांव में बुजुर्ग का शव बाजार स्थित एक जूता दुकान के बाहर मिला। जानकारी के मुताबिक वह पिछले दो महीनों से गांव में भीख मांगकर जीवन यापन कर रहा था और पिछले कुछ दिनों से बीमार भी था। तेज गर्मी के बीच वह अक्सर बाजार इलाके में ही पड़ा रहता था। विशेषज्ञों ने लोगों को सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है। इस दौरान UV रेज का स्तर एक्सट्रीम कैटेगरी में पहुंच सकता है, जिससे त्वचा और आंखों को गंभीर नुकसान होने का खतरा रहता है। मेकाहारा अस्पताल के डर्मेटोलॉजी विभाग के HOD डॉ. Mrityunjay Singh ने बताया कि तेज धूप में कुछ ही मिनटों के भीतर सनबर्न, आंखों में जलन, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सुबह 10 बजे के बाद UV रेज तेजी से बढ़ने लगती हैं। 11 से 12 बजे के बीच इसका स्तर सबसे ज्यादा रहने की संभावना है। ऐसे में जरूरी काम होने पर ही दोपहर बाद बाहर निकलने की सलाह दी गई है। प्रदेश में शुक्रवार को सबसे अधिक तापमान दुर्ग में 44.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 23.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। मौसम विभाग के मुताबिक रायपुर में भी तापमान 45 डिग्री तक पहुंच सकता है और अगले दो दिनों तक मौसम शुष्क बना रहेगा। बिलासपुर स्वास्थ्य विभाग ने भी एडवाइजरी जारी कर लोगों से ज्यादा पानी पीने, धूप से बचने और शरीर को हाइड्रेट रखने की अपील की है। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। वहीं रायगढ़ में भी तेज गर्मी से लोग परेशान हैं। तापमान 44 डिग्री पहुंचने के कारण पंखे और कूलर भी असर नहीं दिखा रहे। हल्की बूंदाबांदी के बावजूद उमस और गर्म हवाओं से राहत नहीं मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती गर्मी का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। ज्यादा तापमान से चिड़चिड़ापन, तनाव, नींद की समस्या और मूड स्विंग जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

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जहरीली मांगुर मछली को मोंगरी बताकर बेचने का आरोप, प्रदेशभर में बिक्री पर सवाल |

छत्तीसगढ़ में बाजारों में मछली की बिक्री को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। दावा किया जा रहा है कि प्रतिबंधित और कथित रूप से जहरीली मांगुर मछली को “मोंगरी मछली” बताकर खुलेआम बेचा जा रहा है। इस मामले ने खाद्य सुरक्षा और मछली बाजार की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, रायपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में यह मछली माफिया द्वारा गलत पहचान के साथ बेची जा रही है। आरोप है कि प्रतिबंध के बावजूद मांगुर मछली का पालन ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे तालाबों और जलाशयों में किया जा रहा है और फिर इसे बाजारों में मोंगरी मछली के नाम से सप्लाई किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि रायपुर, दुर्ग, अभनपुर, माना, डुंडा-सेजबहार, धमतरी, कांकेर, जगदलपुर, बसना, सरायपाली, बलौदाबाजार, मंदिर हसौद, खरोरा और तिल्दा-नेवरा जैसे क्षेत्रों में इसके पालन और बिक्री की गतिविधियां सामने आ रही हैं। मामले को लेकर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि मत्स्य विभाग और स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण इस पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार मांगुर मछली को लेकर लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं जताई जाती रही हैं, इसी कारण कई जगहों पर इसके पालन और बिक्री पर प्रतिबंध या नियंत्रण की स्थिति रही है। वहीं मोंगरी मछली के नाम पर गलत लेबलिंग से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर जोखिम की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले की जांच और निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है ताकि बाजार में बिकने वाले उत्पादों की सही पहचान सुनिश्चित की जा सके।

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पोलियो वैक्सीन की 8500 शीशियां टूटीं, बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा, लाखों का नुकसान | बस्तर-रायपुर

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के सरकारी अस्पतालों में ओरल पोलियो वैक्सीन की बड़ी खेप में गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। सप्लाई के दौरान करीब 8500 से अधिक वैक्सीन वायल्स टूटी और चटकी हुई हालत में पाई गईं, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। यह वैक्सीन नवजात और छोटे बच्चों को पोलियो से सुरक्षा देने के लिए भेजी गई थी, जिससे लगभग 1.71 लाख बच्चों को लाभ मिल सकता था, लेकिन खराब स्थिति के कारण पूरी खेप को इस्तेमाल से रोक दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सभी क्षतिग्रस्त वायल्स को बायो-मेडिकल वेस्ट गाइडलाइंस के तहत तुरंत नष्ट किया जाए। प्रारंभिक जांच में इस नुकसान के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं, जिनमें अत्यधिक ठंड के कारण फ्रीजिंग स्ट्रेस, ट्रांसपोर्टेशन के दौरान खराब सड़कों पर झटकों से कांच का टूटना और निर्माण स्तर पर ग्लास क्वालिटी में संभावित तकनीकी खराबी शामिल हैं। बस्तर क्षेत्र में जर्जर सड़कों और डिलीवरी के दौरान सुरक्षा पैकेजिंग की कमी को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान बस्तर संभाग में दर्ज किया गया है, जहां करीब 40,000 खुराक की खेप में से लगभग 7000 वायल टूटी हुई पाई गईं। दंतेवाड़ा जिले में भेजी गई 5000 खुराक में से 1500 वायल खराब मिलीं, जबकि सुकमा में केवल 50 वायल क्षतिग्रस्त पाई गईं जिन्हें नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकारी अनुमान के अनुसार एक वायल की कीमत लगभग 220 से 250 रुपये है, ऐसे में हजारों वायल के नष्ट होने से सरकार को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। ओरल पोलियो वैक्सीन का उत्पादन देश की प्रमुख राष्ट्रीय लैब्स जैसे हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक और अन्य केंद्रों में किया जाता है। इसके बाद इसे कोल्ड-चेन सिस्टम के तहत विशेष रेफ्रिजरेटेड वाहनों से रायपुर स्टेट वैक्सीन स्टोर और फिर अलग-अलग जिलों तक पहुंचाया जाता है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और स्वास्थ्य विभाग ने सप्लाई और स्टोरेज सिस्टम की समीक्षा के निर्देश दिए हैं।

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10 साल से खांसी में खून आने से परेशान युवक की मेकाहारा में सफल सर्जरी, फेफड़े का संक्रमित हिस्सा निकालकर बचाई जान

छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur स्थित Dr. Bhimrao Ambedkar Memorial Hospital में डॉक्टरों ने एक 25 वर्षीय युवक की जटिल सर्जरी कर उसकी जान बचाई। युवक पिछले करीब 10 वर्षों से खांसी के साथ खून आने की गंभीर समस्या से जूझ रहा था। हाल के दिनों में उसकी स्थिति और बिगड़ गई थी। हर बार खांसने पर अधिक मात्रा में खून निकलने लगा था, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच के दौरान डॉक्टरों को पता चला कि युवक के दाएं फेफड़े के निचले हिस्से में गंभीर संक्रमण फैल चुका है और वहां कैविटी बन गई है। अस्पताल के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ Dr. Krishnakant Sahu ने बताया कि मरीज के फेफड़े में “एस्परजिलोमा” नाम का फंगल इंफेक्शन पाया गया। यह संक्रमण अक्सर पुराने टीबी मरीजों के फेफड़ों में विकसित हो जाता है और समय के साथ खून आने जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। डॉक्टरों के अनुसार खांसी के साथ खून आने की स्थिति को मेडिकल भाषा में “हीमोप्टाइसिस” कहा जाता है। यह कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है, जिनमें टीबी, फेफड़ों का संक्रमण और कैंसर जैसी बीमारियां शामिल हैं। मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने “लोबेक्टॉमी” सर्जरी करने का फैसला लिया। इस प्रक्रिया में फेफड़े के संक्रमित और खराब हिस्से को निकाल दिया जाता है ताकि संक्रमण शरीर के बाकी हिस्सों में न फैले और स्वस्थ फेफड़ा सुरक्षित रह सके। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने आधुनिक “लंग स्टेपलर” तकनीक का इस्तेमाल किया। यह तकनीक सर्जरी के बाद खून और हवा के रिसाव को कम करने में मदद करती है और मरीज की रिकवरी तेज होती है। सफल सर्जरी के बाद युवक की हालत में तेजी से सुधार हुआ और कुछ दिनों बाद उसे स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक पूरा इलाज आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क किया गया। Dr. Vivek Choudhary ने बताया कि समय पर इलाज और सर्जरी से मरीज को नई जिंदगी मिल सकी। वहीं Dr. Santosh Sonkar ने कहा कि अस्पताल जरूरतमंद मरीजों को आधुनिक और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रहा है।

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हमर अस्पताल में एक्सपायरी दवाओं की सप्लाई का आरोप: कांग्रेस ने सरकार और CGMSC पर उठाए सवाल

रायपुर के गुढ़ियारी स्थित हमर अस्पताल में एक्सपायरी और कम अवधि वाली दवाइयों की सप्लाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता Vikas Upadhyay ने अस्पताल और CGMSC वेयरहाउस का निरीक्षण करने के बाद दावा किया कि वहां बड़ी मात्रा में संदिग्ध दवाइयां मिली हैं। उन्होंने इस मामले में FIR दर्ज कराने और प्रदेशभर में जांच की मांग की है। विकास उपाध्याय ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में ऐसी दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं जिनकी एक्सपायरी डेट नजदीक है या जो उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं हैं। उनका कहना है कि इससे मरीजों की जान को खतरा हो सकता है और यदि पूरे प्रदेश में जांच की जाए तो कई और मामले सामने आ सकते हैं। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जिन दवाइयों पर सवाल उठ रहे हैं उनमें नवजात शिशुओं और बच्चों को दी जाने वाली दवाइयां भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कम अवधि या एक्सपायरी दवाओं का उपयोग गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले CGMSC के जरिए सप्लाई की गई कैल्शियम दवाओं, मेडिकल किट, दस्ताने, सिरिंज और अन्य सर्जिकल सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ चुके हैं। कांग्रेस ने सरकार और दवा सप्लाई एजेंसियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर दिए जा रहे हैं। विकास उपाध्याय ने दावा किया कि कुछ कंपनियों में भाजपा नेताओं और उनके परिजनों की भूमिका होने के कारण कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि इस मामले पर सरकार या CGMSC की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कांग्रेस ने राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। साथ ही संबंधित अधिकारियों और कंपनियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की बात कही है।

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