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बस्तर में आवारा कुत्तों का आतंक, रोज 25 लोग हो रहे डॉग बाइट का शिकार

बस्तर। जिले में बढ़ती गर्मी के साथ आवारा कुत्तों का आतंक भी तेजी से बढ़ रहा है। गली-मोहल्लों में झुंड बनाकर घूम रहे कुत्ते राहगीरों पर हमला कर रहे हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। महारानी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में रोजाना 20 से 25 डॉग बाइट के मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक गर्मी के मौसम में जानवरों का व्यवहार अधिक आक्रामक हो जाता है। शरीर से पसीना बाहर नहीं निकल पाने की वजह से वे चिड़चिड़े हो जाते हैं और लोगों पर हमला कर देते हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पालतू जानवरों को समय-समय पर वैक्सीन लग जाती है, लेकिन सड़कों पर घूमने वाले आवारा कुत्ते ज्यादा खतरा पैदा कर रहे हैं। शहर के 48 वार्डों में खासकर रात के समय लोगों में डर का माहौल है। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि कुत्ते के काटने पर तुरंत घाव को साबुन और पानी से साफ करें और बिना देरी किए एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाएं।

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पुलिस लाइन में 541 जवानों की जनरल परेड, एसपी ने लिया अनुशासन और फिटनेस का निरीक्षण

पुलिस लाइन में आयोजित जनरल परेड में जिले के विभिन्न थाना, शाखा और इकाइयों से कुल 541 अधिकारी और जवान शामिल हुए। परेड के दौरान पुलिस अधीक्षक ने जवानों की वर्दी, अनुशासन, शारीरिक दक्षता, टर्न आउट और परेड संचालन का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने सभी अधिकारियों और जवानों को अनुशासन, समय पालन, फिटनेस और कर्तव्यनिष्ठा बनाए रखने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने तथा आम जनता के साथ संवेदनशील और सौहार्दपूर्ण व्यवहार अपनाने पर जोर दिया। पुलिस अधीक्षक ने ड्यूटी के दौरान सतर्क रहने, नियमित शारीरिक प्रशिक्षण करने और बेहतर समन्वय व टीम भावना के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पुलिस बल की कार्यक्षमता और शारीरिक फिटनेस बनाए रखने के लिए नियमित परेड और प्रशिक्षण बेहद जरूरी है। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक Akshay Sabadra, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक Sushil Nayak, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक Aishwarya Chandraakar सहित जिले के सभी उप पुलिस अधीक्षक, थाना प्रभारी, रक्षित निरीक्षक और अन्य पुलिस अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

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पोलियो वैक्सीन की 8500 शीशियां टूटीं, बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा, लाखों का नुकसान | बस्तर-रायपुर

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के सरकारी अस्पतालों में ओरल पोलियो वैक्सीन की बड़ी खेप में गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। सप्लाई के दौरान करीब 8500 से अधिक वैक्सीन वायल्स टूटी और चटकी हुई हालत में पाई गईं, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। यह वैक्सीन नवजात और छोटे बच्चों को पोलियो से सुरक्षा देने के लिए भेजी गई थी, जिससे लगभग 1.71 लाख बच्चों को लाभ मिल सकता था, लेकिन खराब स्थिति के कारण पूरी खेप को इस्तेमाल से रोक दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सभी क्षतिग्रस्त वायल्स को बायो-मेडिकल वेस्ट गाइडलाइंस के तहत तुरंत नष्ट किया जाए। प्रारंभिक जांच में इस नुकसान के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं, जिनमें अत्यधिक ठंड के कारण फ्रीजिंग स्ट्रेस, ट्रांसपोर्टेशन के दौरान खराब सड़कों पर झटकों से कांच का टूटना और निर्माण स्तर पर ग्लास क्वालिटी में संभावित तकनीकी खराबी शामिल हैं। बस्तर क्षेत्र में जर्जर सड़कों और डिलीवरी के दौरान सुरक्षा पैकेजिंग की कमी को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान बस्तर संभाग में दर्ज किया गया है, जहां करीब 40,000 खुराक की खेप में से लगभग 7000 वायल टूटी हुई पाई गईं। दंतेवाड़ा जिले में भेजी गई 5000 खुराक में से 1500 वायल खराब मिलीं, जबकि सुकमा में केवल 50 वायल क्षतिग्रस्त पाई गईं जिन्हें नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकारी अनुमान के अनुसार एक वायल की कीमत लगभग 220 से 250 रुपये है, ऐसे में हजारों वायल के नष्ट होने से सरकार को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। ओरल पोलियो वैक्सीन का उत्पादन देश की प्रमुख राष्ट्रीय लैब्स जैसे हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक और अन्य केंद्रों में किया जाता है। इसके बाद इसे कोल्ड-चेन सिस्टम के तहत विशेष रेफ्रिजरेटेड वाहनों से रायपुर स्टेट वैक्सीन स्टोर और फिर अलग-अलग जिलों तक पहुंचाया जाता है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और स्वास्थ्य विभाग ने सप्लाई और स्टोरेज सिस्टम की समीक्षा के निर्देश दिए हैं।

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अमित शाह का बड़ा ऐलान: बस्तर बनेगा देश का सबसे विकसित संभाग, डेयरी नेटवर्क से लेकर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल तक की तैयारी

छत्तीसगढ़ के बस्तर में पहली बार आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने बस्तर के विकास और नक्सलवाद को लेकर कई बड़े ऐलान किए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने दावा किया कि 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। गृहमंत्री ने कहा कि बस्तर अब तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ेगा और आने वाले समय में इसे देश का सबसे विकसित संभाग बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित इलाकों में बनाए गए करीब 70 सुरक्षा कैंपों में से एक-तिहाई कैंपों को “वीर शहीद गुंडाधर सेवा डेरा” के रूप में विकसित किया जाएगा। Amit Shah ने कहा कि बस्तर में आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पशुपालन से जोड़ने की योजना तैयार की गई है। इसके तहत हर आदिवासी परिवार को एक गाय और एक भैंस उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही अगले छह महीनों में पूरे बस्तर क्षेत्र में बड़ा डेयरी नेटवर्क तैयार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, मॉडल स्कूल और अन्य जरूरी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा ताकि क्षेत्र के लोगों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। वहीं नक्सल उन्मूलन में सहयोग नहीं मिलने को लेकर कांग्रेस सरकार पर लगाए गए आरोपों पर पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि “अमित शाह से बड़ा झूठा कोई नहीं है। नक्सलवाद के खिलाफ जो काम हुआ, वह हमारी सरकार के समय हुआ और अब उसका श्रेय लिया जा रहा है।”

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जगदलपुर में अमित शाह की बड़ी बैठक: 4 राज्यों के मुख्यमंत्रियों संग नक्सलवाद, विकास और कनेक्टिविटी पर मंथन

बस्तर के जगदलपुर में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक आयोजित की जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की अध्यक्षता में हो रही इस अहम बैठक में Chhattisgarh, Madhya Pradesh, Uttarakhand और Uttar Pradesh के मुख्यमंत्री शामिल हुए हैं। बैठक में नक्सल उन्मूलन, राज्यों के बीच बेहतर इंटेलिजेंस साझा करने, आदिवासी कल्याण, डिजिटल प्रशासन और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। इसके साथ ही रेल और सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों को देश के अन्य हिस्सों से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके। बस्तर की नई पहचान दिखाने की कोशिश कभी नक्सल हिंसा के कारण सुर्खियों में रहने वाला बस्तर अब विकास और प्रशासनिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में पेश किया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा यहां इतनी बड़ी बैठक आयोजित करना केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक रणनीतिक और राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। जिस क्षेत्र में पहले सुरक्षा कारणों से बड़े नेताओं के दौरे सीमित रहते थे, वहां अब एक साथ कई राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मौजूद हैं। इसे सरकार नक्सल विरोधी अभियानों की सफलता और बदलते हालात के संकेत के रूप में देख रही है। नक्सलवाद पर सख्त रुख गृह मंत्री अमित शाह पहले भी कई बार कह चुके हैं कि केंद्र सरकार नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही है। हाल के महीनों में बस्तर संभाग में सुरक्षाबलों ने कई बड़े अभियान चलाए, जिनमें कई नक्सली कमांडर मारे गए या गिरफ्तार किए गए। सरकार का दावा है कि 31 मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सलवाद मुक्त घोषित कर दिया गया है। अब फोकस विकास योजनाओं और स्थायी शांति स्थापित करने पर रखा जा रहा है। विकास और राज्यों के समन्वय पर चर्चा बैठक में राज्यों के बीच कानून व्यवस्था, सीमा विवाद, बिजली, जल संसाधन, परिवहन और आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हो रहा है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित इलाकों में संयुक्त रणनीति और बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दी जा रही है। बस्तर को पर्यटन और निवेश केंद्र बनाने की तैयारी सरकार अब बस्तर को केवल संघर्ष वाले क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि पर्यटन, निवेश और विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहती है। माना जा रहा है कि बैठक के बाद गृह मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बस्तर को लेकर केंद्र सरकार का आगे का विजन भी सामने आ सकता है। गुंडाधुर की धरती को मिलेगा नया स्वरूप बस्तर दौरे के दौरान अमित शाह ने कहा कि पिछले 50 वर्षों में बस्तर को जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई आने वाले कुछ वर्षों में की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक बस्तर पूरी तरह विकसित नहीं होगा, तब तक सरकार का संकल्प अधूरा रहेगा। उन्होंने अमर शहीद Gunda Dhur को याद करते हुए कहा कि इसी धरती से अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष की शुरुआत हुई थी। शाह ने कहा कि पहले यहां हिंसा, स्कूलों पर हमले और आम लोगों में डर का माहौल था, लेकिन अब सरकार ने कड़े कदम उठाकर हालात बदल दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर की इस ऐतिहासिक धरती को भविष्य में एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। कांग्रेस ने उठाए खर्च पर सवाल इस बैठक को लेकर Deepak Baij ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध है, तब इस बैठक को वर्चुअल तरीके से भी आयोजित किया जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग विशेष विमानों से नेताओं के आने-जाने में लाखों रुपए खर्च होंगे और ईंधन की भी खपत बढ़ेगी। उनके अनुसार, यह बैठक ऑनलाइन माध्यम से भी की जा सकती थी।

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अमित शाह ने रायपुर में डायल-112 के 400 नए वाहनों को किया रवाना, अब क्राइम, मेडिकल और फायर इमरजेंसी के लिए एक ही नंबर

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रायपुर के माना स्थित पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में डायल-112 सेवा के तहत 400 नए हाईटेक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस नई व्यवस्था के जरिए अब अपराध, मेडिकल इमरजेंसी और आगजनी जैसी घटनाओं के लिए लोगों को केवल एक ही नंबर पर सहायता मिलेगी। कार्यक्रम के बाद अमित शाह बस्तर के जगदलपुर रवाना हो गए। वहां पहुंचकर वे सबसे पहले अमर वाटिका में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद वे वीर शहीद गुंडाधुर के गांव नेतानार जाकर जन सुविधा केंद्र का उद्घाटन करेंगे। डायल-112 सेवा को ‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ थीम के साथ शुरू किया गया है। इस सिस्टम में पुलिस, फायर ब्रिगेड और मेडिकल सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। सेवा के लिए शामिल किए गए वाहनों में GPS, डैश कैमरा, PTZ कैमरा, वायरलेस रेडियो और सोलर बैकअप जैसी आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। इससे घटनास्थल की लाइव मॉनिटरिंग और तेजी से रिस्पॉन्स संभव हो सकेगा। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि अब तक यह सेवा केवल 16 जिलों तक सीमित थी, लेकिन अब इसे पूरे छत्तीसगढ़ में लागू किया जाएगा। राज्य के सभी थानों को डायल-112 नेटवर्क से जोड़ा जाएगा ताकि आपात स्थिति में लोगों को तेजी से सहायता मिल सके। राज्य सरकार अपराध जांच व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी 33 जिलों में आधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट्स भी शुरू करने जा रही है। इन वाहनों में वैज्ञानिक जांच से जुड़े अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिनकी मदद से घटनास्थल पर ही शुरुआती जांच की जा सकेगी। नेतानार में कार्यक्रम के बाद अमित शाह जगदलपुर लौटेंगे और अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के साथ विकास कार्यों, सुरक्षा अभियानों और जनकल्याण योजनाओं की समीक्षा करेंगे। बादल अकादमी में आयोजित बैठकों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। शाम को वे भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे और ‘बस्तर के संग’ नामक लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम में बस्तर की पारंपरिक कला और संस्कृति की प्रस्तुति दी जाएगी। 19 मई को जगदलपुर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक आयोजित होगी, जिसकी अध्यक्षता अमित शाह करेंगे। बैठक में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इसमें अंतरराज्यीय समन्वय, क्षेत्रीय विकास, सुरक्षा व्यवस्था और नक्सल प्रभावित इलाकों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर में सुरक्षा कैंपों को अब जन सुविधा केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा और इसकी शुरुआत नेतानार से हो रही है। वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने इस दौरे और बैठक को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध है, तब इतनी बड़ी बैठक वर्चुअल तरीके से भी आयोजित की जा सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस आयोजन में अनावश्यक रूप से करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। बैठक के बाद अमित शाह प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, जिसमें सुरक्षा, विकास और परिषद की बैठक से जुड़े अहम फैसलों की जानकारी साझा किए जाने की संभावना है। इसके बाद वे विशेष विमान से दिल्ली रवाना होंगे।

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बस्तर में आकाशीय बिजली का कहर, बीजापुर और जगदलपुर में 21 मवेशियों की मौत

Jagdalpur और Bijapur जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से बड़ा नुकसान हुआ है। अलग-अलग घटनाओं में कुल 21 मवेशियों की मौत हो गई, जिससे ग्रामीण पशुपालकों को भारी आर्थिक क्षति हुई है। जगदलपुर शहर से लगे चिलकुटी गांव के सुरंगियापारा में शनिवार रात बारिश के दौरान 11 मवेशी पेड़ के नीचे बैठे थे। इसी दौरान अचानक बिजली गिरने से सभी मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पशुपालकों में नुकसान को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी तरह बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक के पोन्दुम गांव में भी आकाशीय बिजली गिरने की घटना हुई, जहां 10 मवेशियों की मौत हो गई। यह घटना शनिवार शाम करीब साढ़े 7 बजे की बताई जा रही है। उस समय मवेशी खुले मैदान में थे और मौसम खराब होने के बाद बिजली गिर गई। ग्रामीणों के अनुसार, पशुपालन ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है, ऐसे में मवेशियों की मौत से कई परिवारों पर आर्थिक संकट गहरा गया है। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से सर्वे कर मुआवजा देने की मांग की है।

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बस्तर में सल्फी से बनेगा गुड़ और साबूदाना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई ताकत

बस्तर में पारंपरिक रूप से नशीले पेय के रूप में पहचानी जाने वाली सल्फी अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का नया माध्यम बन सकती है। वैज्ञानिक नाम केरियोटा यूरेंस और सामान्य रूप से फिश टेल पाम कहलाने वाले इस वृक्ष का उपयोग अब प्राकृतिक गुड़ और साबूदाना बनाने के लिए किए जाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बस्तर में बड़े स्तर पर सल्फी के पौधों का संरक्षण और रोपण किया जाए, तो यह क्षेत्र आने वाले समय में प्राकृतिक गुड़ उत्पादन का बड़ा केंद्र बन सकता है। पीजी कॉलेज के प्राणी शास्त्र विशेषज्ञ प्रोफेसर सुशील कुमार दत्ता के अनुसार, सल्फी के रस से गुड़ तैयार करने की परंपरा काफी पुरानी है। श्रीलंका समेत कई देशों में इसके मीठे रस से उच्च गुणवत्ता वाला गुड़ लंबे समय से बनाया जाता रहा है। सल्फी से गुड़ बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक होती है। सूर्यास्त के बाद पेड़ की पुष्प शाखा से मीठा रस एकत्र किया जाता है। इस रस को सूर्योदय से पहले इकट्ठा करना जरूरी होता है, क्योंकि धूप पड़ते ही इसमें फरमेंटेशन शुरू हो जाता है और यह नशीला बनने लगता है। ताजा रस को बड़े बर्तनों में लगातार उबालकर गाढ़ा किया जाता है। कुछ समय बाद यह सुनहरे रंग के प्राकृतिक गुड़ में बदल जाता है, जिसे जगेरी भी कहा जाता है। सल्फी का उपयोग केवल गुड़ तक सीमित नहीं है। इसके तने के बीच वाले हिस्से, जिसे पिथ कहा जाता है, में स्टार्च की मात्रा अधिक होती है। इस हिस्से को प्रोसेस करके साबूदाना भी तैयार किया जा सकता है। दक्षिण भारत और पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में फिश टेल पाम का उपयोग खाद्य उत्पादों के निर्माण में पहले से किया जा रहा है। बस्तर के जंगलों में सल्फी के पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं, लेकिन अब तक इनका उपयोग मुख्य रूप से स्थानीय पेय तक ही सीमित था। अब जैविक और प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए सल्फी आधारित उत्पादों को नए बाजार से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और वन आधारित अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक बाजार के मेल से सल्फी भविष्य में बस्तर की नई पहचान बन सकती है।

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47 नक्सलियों ने तेलंगाना में किया सरेंडर: साउथ बस्तर के बड़े कैडर शामिल, हथियार-गोला बारूद जमा

तेलंगाना में साउथ बस्तर से जुड़े 47 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है। ये सभी पहले बस्तर के अलग-अलग इलाकों में सक्रिय थे। पुलिस के अनुसार इन पर कुल मिलाकर करीब 1.5 करोड़ रुपए का इनाम था। सरेंडर करने वालों में बड़े स्तर के नक्सली भी शामिल हैं। इनमें DKSZCM के सदस्य हेमला इथु उर्फ विज्जा और प्लाटून कमांडर पोडियम लच्छु उर्फ मनोज जैसे नाम शामिल हैं। इन नक्सलियों ने सरेंडर करते समय 32 हथियार और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद भी पुलिस को सौंपा। इसमें LMG, AK-47, SLR, इंसास राइफल, पिस्टल और अन्य हथियार शामिल हैं। साथ ही सैकड़ों जिंदा कारतूस भी जमा किए गए। पुलिस का कहना है कि तेलंगाना सरकार की पुनर्वास योजना और लगातार चल रहे ऑपरेशन के कारण नक्सलियों पर दबाव बना, जिससे उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। इस सरेंडर को पुलिस बड़ी सफलता मान रही है। अधिकारियों के मुताबिक इससे नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि कई बड़े और सक्रिय सदस्य अब संगठन से बाहर हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, सरेंडर करने वाले नक्सलियों में अलग-अलग स्तर के कैडर शामिल हैं। इनमें टॉप लीडर से लेकर प्लाटून स्तर तक के सदस्य शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों को सरकार की योजना के तहत मदद दी जाएगी, ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें। इससे पहले भी बस्तर क्षेत्र में कई बड़े सरेंडर हो चुके हैं, जिनमें नक्सलियों ने हथियार, कैश और सोना तक पुलिस को सौंपा था।

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सचिन तेंदुलकर का पहला बस्तर दौरा, CM साय का कार्यक्रम रद्द; अब सिर्फ छिंदनार में करेंगे बच्चों से मुलाकात

क्रिकेट के दिग्गज Sachin Tendulkar बुधवार को पहली बार बस्तर दौरे पर आ रहे हैं। वे दंतेवाड़ा जिले के छिंदनार गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होंगे और वहां स्थानीय बच्चों, खासकर खेल से जुड़े युवाओं से मुलाकात करेंगे। इस कार्यक्रम में Vishnu Deo Sai को भी शामिल होना था, लेकिन अपरिहार्य कारणों के चलते उनका दौरा पहले ही रद्द कर दिया गया। सचिन तेंदुलकर के कार्यक्रम में भी बदलाव किया गया है। पहले उनका दौरा छिंदनार के साथ-साथ गीदम के जावंगा और पनेड़ा मैदान तक प्रस्तावित था, लेकिन अब वे केवल छिंदनार में ही कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस बदलाव की वजह मौसम की अनिश्चितता बताई जा रही है। हाल ही में दंतेवाड़ा क्षेत्र में तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि हुई थी, जिससे कई घरों को नुकसान पहुंचा और फसलें भी प्रभावित हुईं। हालांकि, कुछ सूत्र सुरक्षा कारणों की भी चर्चा कर रहे हैं, लेकिन अधिकारियों ने इस पर आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। इंद्रावती नदी के किनारे स्थित छिंदनार गांव में सचिन तेंदुलकर के आगमन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गांव में उत्साह का माहौल है और बच्चे व ग्रामीण उनके आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। नक्सल प्रभावित रहे इस क्षेत्र के लिए यह दौरा एक सकारात्मक संकेत और नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है, जहां खेल और प्रेरणा के जरिए बदलाव की दिशा में कदम बढ़ते नजर आ रहे हैं।

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