BASTAR

सचिन तेंदुलकर का पहला बस्तर दौरा, CM साय का कार्यक्रम रद्द; अब सिर्फ छिंदनार में करेंगे बच्चों से मुलाकात

क्रिकेट के दिग्गज Sachin Tendulkar बुधवार को पहली बार बस्तर दौरे पर आ रहे हैं। वे दंतेवाड़ा जिले के छिंदनार गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होंगे और वहां स्थानीय बच्चों, खासकर खेल से जुड़े युवाओं से मुलाकात करेंगे। इस कार्यक्रम में Vishnu Deo Sai को भी शामिल होना था, लेकिन अपरिहार्य कारणों के चलते उनका दौरा पहले ही रद्द कर दिया गया। सचिन तेंदुलकर के कार्यक्रम में भी बदलाव किया गया है। पहले उनका दौरा छिंदनार के साथ-साथ गीदम के जावंगा और पनेड़ा मैदान तक प्रस्तावित था, लेकिन अब वे केवल छिंदनार में ही कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस बदलाव की वजह मौसम की अनिश्चितता बताई जा रही है। हाल ही में दंतेवाड़ा क्षेत्र में तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि हुई थी, जिससे कई घरों को नुकसान पहुंचा और फसलें भी प्रभावित हुईं। हालांकि, कुछ सूत्र सुरक्षा कारणों की भी चर्चा कर रहे हैं, लेकिन अधिकारियों ने इस पर आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। इंद्रावती नदी के किनारे स्थित छिंदनार गांव में सचिन तेंदुलकर के आगमन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गांव में उत्साह का माहौल है और बच्चे व ग्रामीण उनके आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। नक्सल प्रभावित रहे इस क्षेत्र के लिए यह दौरा एक सकारात्मक संकेत और नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है, जहां खेल और प्रेरणा के जरिए बदलाव की दिशा में कदम बढ़ते नजर आ रहे हैं।

सचिन तेंदुलकर का पहला बस्तर दौरा, CM साय का कार्यक्रम रद्द; अब सिर्फ छिंदनार में करेंगे बच्चों से मुलाकात Read Post »

BASTAR, Chhattisgarh, Sports, State, Top News

अबूझमाड़ में बदलाव की शुरुआत: नक्सल प्रभाव खत्म होने के बाद 239 गांवों में पहली बार पहुंचा प्रशासन

बस्तर का Abujhmad क्षेत्र, जो कभी नक्सल गतिविधियों का गढ़ माना जाता था, अब धीरे-धीरे मुख्यधारा से जुड़ रहा है। केंद्र सरकार द्वारा इस क्षेत्र को नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किए जाने के बाद यहां प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पहली बार यहां के 239 गांवों में सरकारी सर्वे शुरू किया गया है। इस सर्वे के जरिए गांवों में रहने वाले परिवारों की संख्या, सदस्यों का विवरण, खेती करने वाले लोगों की जानकारी और जमीन के उपयोग का आकलन किया जा रहा है। राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम इस काम में जुटी हुई है। सर्वे को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए Indian Institute of Technology Roorkee की मदद से पूरे क्षेत्र का सैटेलाइट मैप तैयार किया जा रहा है। सैटेलाइट इमेज के आधार पर गांवों और आबादी का प्रारंभिक नक्शा बनाया जा रहा है, जिसके बाद फील्ड टीम मौके पर जाकर हर घर और जमीन का सत्यापन करेगी। सर्वे पूरा होने के बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके आधार पर जो परिवार जहां निवास कर रहा है और जिस जमीन पर खेती कर रहा है, उसे उसी के अनुसार मालिकाना हक प्रदान किया जाएगा। इससे लंबे समय से बिना अधिकार के रह रहे वनवासियों को कानूनी पहचान और जमीन का अधिकार मिल सकेगा। नारायणपुर जिले का ओरछा ब्लॉक, जिसे अबूझमाड़ के नाम से जाना जाता है, दशकों तक प्रशासन की पहुंच से बाहर रहा। आजादी के बाद भी यहां कई गांव सड़क और संचार सुविधाओं से कटे हुए थे। जैसे ही सड़क निर्माण शुरू हुआ, नक्सली गतिविधियां बढ़ गईं, जिससे यह इलाका उनका सुरक्षित ठिकाना बन गया। इसी वजह से यहां गांवों, आबादी और जमीन का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार नहीं हो पाया था। अब सुरक्षा बलों की मौजूदगी और सड़क विस्तार के बाद हालात बदल रहे हैं और प्रशासन पहली बार गांवों तक पहुंच पा रहा है। करीब 3 लाख हेक्टेयर में फैले इस घने जंगल क्षेत्र में वन विभाग की गतिविधियां भी दोबारा शुरू की जा रही हैं। जिन इलाकों में वर्षों पहले नक्सलियों द्वारा वन विभाग के भवनों को नष्ट कर दिया गया था, वहां फिर से काम शुरू हो रहा है। प्रशासन के अनुसार, सर्वे के साथ-साथ ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा। नक्शा और खसरा तैयार होने के बाद जमीन के अधिकार देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह पहल न केवल विकास को गति देगी, बल्कि क्षेत्र के लोगों को स्थायी पहचान और अधिकार भी दिलाएगी।

अबूझमाड़ में बदलाव की शुरुआत: नक्सल प्रभाव खत्म होने के बाद 239 गांवों में पहली बार पहुंचा प्रशासन Read Post »

BASTAR, Chhattisgarh, Development, GOVERNMENT, State, Tech, Top News

बस्तर में इंद्रावती पर 930 मीटर का पुल फिर शुरू: नक्सल बाधा के बाद री-टेंडर जारी, सुरक्षा में होगा निर्माण

बस्तर के संवेदनशील इलाके में विकास की एक बड़ी परियोजना फिर पटरी पर लौटती दिख रही है। इंद्रावती नदी पर बेदरे में बन रहा 930 मीटर लंबा अंतरराज्यीय पुल, जो नक्सली दहशत के कारण वर्षों से रुका हुआ था, अब दोबारा शुरू होने जा रहा है। ब्रिज कॉर्पोरेशन ने इसके लिए 28 करोड़ रुपए का नया टेंडर जारी किया है। यह प्रोजेक्ट 2020-21 में शुरू हुआ था और शुरुआती चरण में 8 पिलर तैयार भी हो चुके थे, लेकिन नक्सलियों द्वारा ठेकेदार के कर्मचारियों के अपहरण और धमकी के बाद काम पूरी तरह बंद हो गया था। इसके बाद कोई भी ठेकेदार इस हाई-रिस्क जोन में काम करने के लिए तैयार नहीं था। अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में सुरक्षा बलों की मजबूत तैनाती के चलते भरोसा लौटा है और इंद्रावती नदी किनारे जवानों का स्थायी कैंप भी स्थापित किया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस बार कड़ी सुरक्षा के बीच हर हाल में पुल निर्माण पूरा किया जाएगा। यह पुल बीजापुर जिले को सीधे महाराष्ट्र से जोड़ेगा। बेदरे से महाराष्ट्र के भंवरागढ़ की दूरी मात्र 20 किलोमीटर है। पुल बनते ही बीजापुर से नागपुर और आगे मुंबई तक का सफर आसान हो जाएगा, जिससे अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। अबूझमाड़ क्षेत्र में बन रहा यह पुल विकास के लिहाज से टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। इसके बनने से शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। साथ ही सड़क, मोबाइल नेटवर्क और परिवहन सुविधाओं के विस्तार को भी गति मिलेगी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह पुल उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाएगा और नदी पार करने का जोखिम खत्म होगा। इंद्रावती नदी पर बनने वाला यह अब तक का सबसे लंबा पुल होगा, जो बस्तर और महाराष्ट्र के बीच संपर्क को नई दिशा देगा।

बस्तर में इंद्रावती पर 930 मीटर का पुल फिर शुरू: नक्सल बाधा के बाद री-टेंडर जारी, सुरक्षा में होगा निर्माण Read Post »

BASTAR, Chhattisgarh, GOVERNMENT, State, Top News

कांग्रेस की मांग: बस्तर के हर गांव को मिले 1 करोड़, सरकार से वादा निभाने की अपील

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बस्तर के विकास को लेकर राज्य सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए कहा है कि सरकार अपने वादे के मुताबिक हर ग्राम पंचायत को तुरंत 1 करोड़ रुपए की राशि जारी करे। पार्टी का कहना है कि सरकार ने पहले घोषणा की थी कि जो गांव नक्सल मुक्त होंगे, उन्हें यह आर्थिक सहायता दी जाएगी। अब जब सरकार खुद प्रदेश को नक्सल मुक्त बताने का दावा कर रही है, तो इस घोषणा को जमीन पर उतारना जरूरी है। कांग्रेस के संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि इस फैसले से बस्तर के गांवों में विकास को गति मिलेगी और लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा। उन्होंने “डबल इंजन” सरकार से बस्तर के लिए विशेष आर्थिक पैकेज घोषित करने की मांग भी की है, ताकि क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिल सकें। पार्टी ने यह भी कहा कि वनोपज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना जरूरी है, जिससे बस्तर के लोगों की आजीविका मजबूत हो सके। इसके साथ ही युवाओं के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है, ताकि उन्हें बाहर पलायन न करना पड़े। कांग्रेस ने NMDC Limited का मुख्यालय बस्तर में स्थापित करने की मांग उठाते हुए कहा कि यहां से निकलने वाले लौह अयस्क से कंपनी को बड़ा लाभ होता है, लेकिन उसका मुख्यालय हैदराबाद में है। पार्टी का मानना है कि अब बस्तर में बुनियादी सुविधाएं बेहतर हो चुकी हैं, ऐसे में मुख्यालय यहां शिफ्ट किया जाना चाहिए, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही पार्टी ने बस्तर के लोगों में बढ़ रही उस चिंता का भी जिक्र किया, जिसमें खनिज संपदा और जंगलों के निजीकरण का डर जताया जा रहा है। कांग्रेस ने सरकार से साफ तौर पर आश्वासन देने की मांग की है कि क्षेत्र के संसाधनों को निजी हाथों में नहीं सौंपा जाएगा और स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा की जाएगी। रेल कनेक्टिविटी को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि दल्लीराजहरा से जगदलपुर तक रेल लाइन परियोजना में लगातार देरी हो रही है। इस परियोजना को 2021 तक पूरा करने का दावा किया गया था, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो सका, जिससे बस्तर के लोगों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है।

कांग्रेस की मांग: बस्तर के हर गांव को मिले 1 करोड़, सरकार से वादा निभाने की अपील Read Post »

BASTAR, Chhattisgarh, GOVERNMENT, Political, State, Top News

मूंदगांव में सिलेंडर ब्लास्ट के बाद उजड़े परिवार को मिली मदद, उदयाचल परिवार ने बढ़ाया सहयोग

Moondgaon में 30 मार्च को हुए गैस सिलेंडर ब्लास्ट ने एक परिवार की जिंदगी पूरी तरह बदल दी। धमाका इतना जोरदार था कि आग ने पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया और सारा घरेलू सामान जलकर राख हो गया। इस हादसे में परिवार का मुखिया और एक पड़ोसी झुलस गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद पीड़ित परिवार के सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया। ऐसे में Udayachal Parivar ने मानवता का परिचय देते हुए तुरंत मदद पहुंचाई। संस्था के सदस्य 31 मार्च को मौके पर पहुंचे और परिवार को 15 दिनों का राशन, कपड़े, बर्तन, पलंग और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया। संस्था ने आश्वासन दिया है कि आगे भी जरूरत पड़ने पर हर संभव सहयोग किया जाएगा। इस सेवा कार्य के दौरान Dr. Pukhraj Bafna, उत्तमचंद जैन, राजेंद्र बाफना, अशोक मोदी, प्रकाश रंगारी, संतोष शुक्ला, गौरव साहू और ग्राम सरपंच भूमिका सिन्हा मौजूद रहे। संस्था के पीआरओ गुरदीप बग्गा ने बताया कि हादसे की जानकारी मिलते ही उदयाचल परिवार सबसे पहले सहायता के लिए पहुंचा और पीड़ितों को तत्काल राहत उपलब्ध कराई।

मूंदगांव में सिलेंडर ब्लास्ट के बाद उजड़े परिवार को मिली मदद, उदयाचल परिवार ने बढ़ाया सहयोग Read Post »

Accident, BASTAR, Chhattisghar, State, Top News

पूर्व मंत्री के फॉलो वाहन ने बाइक को टक्कर मारी, 2 युवकों की मौत | VIDEO

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर-रायपुर NH-30 पर एक भयानक सड़क हादसा हुआ, जिसमें पूर्व मंत्री महेश गागड़ा के काफिले की फॉलो वाहन ने बाइक सवार दो युवकों को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे का लाइव वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दोनों युवक टक्कर लगते ही करीब 50 मीटर दूर तक उछलते नजर आए। घटना इतनी भयानक थी कि दोनों की जान चली गई। जानकारी के मुताबिक, यह हादसा बुधवार, 25 मार्च को बालेंगा पेट्रोल पंप के पास हुआ। बताया जा रहा है कि फॉलो वाहन की रफ्तार लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटा थी। बोलेरो वाहन के चालक हिमांशु चक्रवर्ती को पूर्व मंत्री के काफिले में शामिल होना था, लेकिन समय पर नहीं पहुँच पाए। काफिले को कवर करने की जल्दी में उन्होंने वाहन की रफ्तार बढ़ा दी। इसी दौरान सामने से बाइक पर कमलेश उइके (40) और राम प्रसाद चिरम (30) आ रहे थे। दोनों मिस्त्री अपने निर्माण कार्य के लिए जा रहे थे। अचानक बाइक को मोड़ते ही तेज रफ्तार बोलेरो ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और दोनों युवक सड़क पर बिखर गए। हादसे के तुरंत बाद ग्रामीणों ने गुस्से में वाहन चालक को घेर लिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में किया। एक युवक की मौत मौके पर ही हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। पुलिस ने बताया कि मृतक दुबेगांव, जगदलपुर के रहने वाले थे। प्राथमिक जांच में पुलिस ने तेज रफ्तार और वाहन का संतुलन बिगड़ने को हादसे की मुख्य वजह बताया है। बालेंगा इलाके में निर्माण कार्य और सड़क पर बढ़ी भीड़ भी हादसे को और गंभीर बना रही थी। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और मामले में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के वीडियो और तस्वीरों से यह साफ नजर आ रहा है कि सड़क पर तेज रफ्तार वाहन कितनी जानलेवा हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि काफिले में वाहन तेज चलाने से जान का जोखिम बढ़ जाता है। इस हादसे ने इलाके में सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद परिवार और स्थानीय लोग शोक में हैं। मृतकों के परिजनों को नुकसान की भरपाई और न्याय दिलाने की मांग की जा रही है। प्रशासन और पुलिस इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह सक्रिय हैं। यह दुखद हादसा यह याद दिलाता है कि सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहन नियंत्रित करना कितना महत्वपूर्ण है। काफिले और बड़े वाहन चालक को सड़क नियमों का पालन करना चाहिए ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं से बचा जा सके।

पूर्व मंत्री के फॉलो वाहन ने बाइक को टक्कर मारी, 2 युवकों की मौत | VIDEO Read Post »

Accident, BASTAR, Chhattisgarh, JAGDALPUR, Political, State, Top News

बस्तर में सेंट्रल फोर्स हटेंगी, पुलिस कैंप होंगे विकास और स्वास्थ्य केंद्र: गृह मंत्री विजय शर्मा का ऐलान

छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने बस्तर क्षेत्र के लिए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद खत्म होने के बाद भी पुलिस और अर्धसैनिक बलों के कैंप बंद नहीं होंगे, बल्कि इन्हें पूरी तरह विकास और प्रशासनिक केंद्र के रूप में बदला जाएगा। गृह मंत्री ने बताया कि नक्सल ऑपरेशन में लगी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की वापसी तुरंत शुरू हो जाएगी और राज्य की कानून-व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ पुलिस संभालेगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि 31 मार्च बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित करने की अंतिम तारीख है और इसमें कोई विस्तार नहीं होगा। सबसे महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला फैसला पुलिस कैंपों को लेकर है। अब तक खूनी संघर्ष का गवाह रहे ये कैंप भविष्य में स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रोसेसिंग यूनिट जैसी सुविधाओं के केंद्र में बदल दिए जाएंगे। इस योजना के तहत हर कैंप में अस्पताल और विकास केंद्र खोले जाएंगे, ताकि क्षेत्र में प्रशासनिक और विकासात्मक कार्यों को तेजी से बढ़ाया जा सके।

बस्तर में सेंट्रल फोर्स हटेंगी, पुलिस कैंप होंगे विकास और स्वास्थ्य केंद्र: गृह मंत्री विजय शर्मा का ऐलान Read Post »

BASTAR, Chhattisgarh, Political, State, Top News

20 साल तक अपनी मौत की झूठी खबरें फैलाकर बचता रहा कुख्यात नक्सली पापा राव, अब करेगा आत्मसमर्पण

दक्षिण बस्तर के घने जंगलों में लंबे समय तक सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बना रहा कुख्यात नक्सली कमांडर “पापा राव” अब हथियार डालने की तैयारी में है। Jagdalpur से लेकर Sukma और Bijapur तक फैले नक्सली नेटवर्क में उसका नाम बड़े नेताओं में गिना जाता रहा है। उसका सरेंडर बस्तर में माओवाद के एक लंबे और हिंसक दौर के खत्म होने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। बताया जाता है कि उसकी सबसे बड़ी ताकत हथियार नहीं, बल्कि रणनीति और छल था। पिछले लगभग दो दशकों में उसने कई बार अपनी मौत की अफवाहें फैलाकर सुरक्षाबलों को भ्रमित किया। कभी सांप के काटने से मौत की खबर फैलाई गई, तो कभी बीमारी से मरने की बात कही गई। जांच में सामने आया कि ये सारी कहानियां खुद उसी ने गढ़ीं, ताकि सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश धीमी कर दें और वह छिपकर संगठन को मजबूत करता रहे। बस्तर में नेटवर्क खड़ा करने में अहम भूमिका पापा राव ने सुकमा और बीजापुर के दुर्गम इलाकों में माओवादी संगठन की जड़ें मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसने तथाकथित “जनताना सरकार” के नाम पर समानांतर व्यवस्था खड़ी की, नए कैडरों की भर्ती और प्रशिक्षण कराया तथा ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन का विस्तार किया। पुलिस को मिल सकता है बड़ा इंटेलिजेंस सुरक्षा एजेंसियों के लिए उसका आत्मसमर्पण बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, क्योंकि उसके पास नक्सली संगठन के वित्तीय नेटवर्क, शहरी संपर्कों और भविष्य की रणनीतियों से जुड़ी अहम जानकारी होने की संभावना है। अधिकारियों को उम्मीद है कि उसके खुलासों से कई छिपे समर्थकों और सक्रिय कैडरों तक पहुंच बन सकेगी। कब-कब फैली मौत की अफवाह • जुलाई 2016 — Sukma में सांप काटने से मौत की खबर• मई 2020 — किडनी फेल होने से मृत्यु की अफवाह• जनवरी 2026 — Bijapur में मुठभेड़ में मारे जाने की सूचना कई बड़े हमलों से जुड़ा नाम उस पर दक्षिण बस्तर में कई घातक हमलों की साजिश रचने, सुरक्षा बलों पर एंबुश कराने, सड़क निर्माण और विकास कार्यों को बाधित करने, हथियार व रसद आपूर्ति संभालने और भर्ती अभियान चलाने के आरोप रहे हैं। घटती गई ताकत पापा राव स्टेट जोनल कमेटी का सदस्य और पश्चिम बस्तर डिवीजन का प्रभारी था। कभी उसके साथ 30–35 हथियारबंद नक्सली रहते थे, लेकिन हाल के वर्षों में यह संख्या घटकर लगभग आधी रह गई थी। सूत्रों के अनुसार वह लंबे समय से Indravati National Park के दुर्गम जंगलों में छिपा हुआ था। अब ‘केशा’ सबसे बड़ा सक्रिय चेहरा पापा राव के सरेंडर के बाद अब Sukma जिले का इनामी नक्सली सोढ़ी केशा सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित है और उसके साथ 25 से 30 हथियारबंद कैडरों के होने की जानकारी है। बताया जा रहा है कि वह लगातार ठिकाना बदल रहा है और संभव है कि वह पड़ोसी राज्य तेलंगाना की ओर निकल गया हो।

20 साल तक अपनी मौत की झूठी खबरें फैलाकर बचता रहा कुख्यात नक्सली पापा राव, अब करेगा आत्मसमर्पण Read Post »

BASTAR, Chhattisgarh

गैस की किल्लत से बढ़ी लकड़ी पर निर्भरता, होटल-आश्रमों में जल रहे चूल्हे; रोज 100 क्विंटल खपत

दंतेवाड़ा जिले में व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की कमी अब पर्यावरण के लिए बड़ी चिंता बनती जा रही है। गैस आपूर्ति बाधित होने के कारण होटल, रेस्टोरेंट, आश्रम-छात्रावास और पोटाकेबिनों में फिर से लकड़ी के चूल्हों का इस्तेमाल शुरू हो गया है। इससे जहां कारोबार प्रभावित हो रहा है, वहीं जंगलों पर दबाव बढ़ने के साथ अवैध कटाई भी तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार पिछले करीब 20 दिनों से जिले में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई लगभग बंद है। इसका सबसे ज्यादा असर होटल व्यवसाय पर पड़ा है। कई छोटे होटल बंद हो चुके हैं, जबकि कुछ संचालक मजबूरी में लकड़ी जलाकर भोजन बना रहे हैं। होटल संचालकों का कहना है कि गैस उपलब्ध नहीं है और जो मिल रही है वह महंगी है, इसलिए 4 से 5 हजार रुपये में मिलने वाली एक ट्रैक्टर लकड़ी उनके लिए सस्ता विकल्प बन गई है। जंगलों पर बढ़ा दबाव इस स्थिति का फायदा उठाकर जंगलों में अवैध कटाई बढ़ रही है। कुआकोंडा और कटेकल्याण क्षेत्रों में खुलेआम लकड़ी काटकर लाई जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निगरानी कमजोर होने के कारण यह गतिविधियां बिना रोक-टोक जारी हैं। संस्थानों में भी लकड़ी का उपयोग बढ़ा आश्रम, छात्रावास, जेल और अस्पतालों में घरेलू गैस सिलेंडर उपयोग की अनुमति होने के बावजूद लकड़ी पर निर्भरता बढ़ना चिंता का विषय बन गया है। इससे पर्यावरण को नुकसान होने के साथ नियमों की अनदेखी भी हो रही है। वन विभाग और प्रशासन की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं। आश्रम-छात्रावासों में सबसे ज्यादा असर जिले में लगभग 128 आश्रम-छात्रावास और 17 पोटाकेबिन संचालित हैं, जहां 20 हजार से अधिक छात्रों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। पहले यहां गैस और लकड़ी दोनों का उपयोग होता था, लेकिन अब पूरी तरह लकड़ी पर निर्भरता बढ़ गई है। कई संस्थानों में गैस सिलेंडरों का स्टॉक खत्म हो चुका है। स्थिति यह है कि प्रत्येक आश्रम-छात्रावास में औसतन 100 क्विंटल तक लकड़ी जमा की गई है और रोजाना करीब 100 क्विंटल लकड़ी की खपत हो रही है। यह लकड़ी अधिकृत डिपो से नहीं, बल्कि जंगलों से अवैध रूप से लाई जा रही बताई जा रही है। तत्काल समाधान की मांग स्थानीय लोगों ने प्रशासन से व्यावसायिक गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने और जंगलों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो वन क्षेत्र को भारी नुकसान हो सकता है और पर्यावरण पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा।

गैस की किल्लत से बढ़ी लकड़ी पर निर्भरता, होटल-आश्रमों में जल रहे चूल्हे; रोज 100 क्विंटल खपत Read Post »

BASTAR, Chhattisgarh, State, Top News

दंतेवाड़ा रेलवे क्रॉसिंग पर अंडर/ओवर ब्रिज नहीं, ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित

दंतेवाड़ा जिले में रेलवे लाइन के विस्तार के बावजूद बुनियादी आवागमन सुविधाओं की कमी ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बनी हुई है। कांवड़, कुपेर सहित एक दर्जन से अधिक गांवों में रेलवे क्रॉसिंग पर अंडर ब्रिज या ओवर ब्रिज न होने के कारण ग्रामीणों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई गांव रेल पटरी के दोनों ओर बंट गए हैं, जिससे लोगों को सुरक्षित रास्ते के अभाव में जोखिम उठाकर पटरी पार करनी पड़ती है। हादसों के बावजूद रेलवे प्रशासन की ओर से अभी तक इस समस्या के समाधान में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। लोक निर्माण विभाग (PWD) को जरूरी स्थानों का सर्वे करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन यह प्रक्रिया अब तक केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रही है। जिले में अंडर ब्रिज और ओवर ब्रिज निर्माण का कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है। ग्रामीण प्रशासन से जल्द सर्वे पूरी कर, आवागमन के लिए अंडर ब्रिज या ओवर ब्रिज निर्माण की मांग कर रहे हैं।

दंतेवाड़ा रेलवे क्रॉसिंग पर अंडर/ओवर ब्रिज नहीं, ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित Read Post »

BASTAR, Chhattisgarh, State
Scroll to Top