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आरंग में महानदी किनारे झाड़ियों में मिले दो शव, एक महिला का; पहचान की कोशिश में जुटी पुलिस

रायपुर। रायपुर से लगे आरंग क्षेत्र के चिखली गांव में महानदी किनारे झाड़ियों में दो शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों की नजर नदी किनारे पड़े शवों पर पड़ी, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को बाहर निकलवाकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, बरामद शवों में से एक महिला का है, जबकि दूसरे शव की पहचान अभी नहीं हो सकी है। दोनों शव काफी खराब स्थिति में हैं, जिसके कारण उनकी शिनाख्त करने में परेशानी हो रही है। पुलिस फिलहाल महानदी से लगे आसपास के जिलों के थानों से संपर्क कर रही है। हाल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्टों की जानकारी भी जुटाई जा रही है, ताकि बरामद शवों की पहचान की जा सके। नदी के तेज बहाव में बहकर आने की आशंका हाल में हुई भारी बारिश के चलते महानदी का जलस्तर बढ़ा था और कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी थी। पुलिस को प्रारंभिक तौर पर आशंका है कि दोनों शव नदी के तेज बहाव में बहकर चिखली गांव तक पहुंचे होंगे। हालांकि, इस संभावना की अभी पुष्टि नहीं हुई है। डूबने से मौत या अन्य कारण, दोनों पहलुओं पर जांच पुलिस डूबने से मौत की संभावना के साथ अन्य सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। शवों को नदी में बहाए जाने की आशंका को भी जांच के दायरे में रखा गया है। CSP लंबोदर पटेल के मुताबिक, शुरुआती जांच में शवों के नदी के बहाव के साथ बहकर आने की आशंका नजर आ रही है। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है और आसपास के जिलों से लापता लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस के अनुसार, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस शवों की पहचान और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच में जुटी हुई है।

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पखांजूर में जंगल की जमीन पर अतिक्रमण की कोशिश, ग्रामीणों और वन विभाग ने मौके पर पकड़ा

पखांजूर। वन परिक्षेत्र पश्चिम परोलकोट बांदे क्षेत्र में रात के अंधेरे में जंगल की जमीन पर कथित रूप से अतिक्रमण की कोशिश का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि कुछ लोग बड़े झाड़ के जंगल क्षेत्र में जमीन पर कब्जे की तैयारी के लिए पहुंचे थे। मामले की जानकारी मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों ने सतर्कता दिखाते हुए इसकी सूचना वन विभाग को दी। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और वहां मौजूद लोगों को पकड़ लिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल की जमीन पर इस तरह अतिक्रमण की कोशिश गंभीर मामला है। वहीं, घटना के सामने आने के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि जंगल क्षेत्र में रात के समय इस तरह की गतिविधियां कैसे संचालित हो रही थीं और क्या इसके पीछे किसी तरह का संरक्षण था। हालांकि, संरक्षण या किसी व्यक्ति की संलिप्तता को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। अब देखने वाली बात होगी कि वन विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की जाती है। मामला वन परिक्षेत्र पश्चिम परोलकोट बांदे क्षेत्र का बताया जा रहा है।

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शिवराज सिंह चौहान कल पहुंचेंगे छत्तीसगढ़, सक्ती में 122 करोड़ के विकास कार्यों की देंगे सौगात

रायपुर। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान 11 सितंबर को छत्तीसगढ़ के दौरे पर रहेंगे। अपने प्रवास के दौरान वे सक्ती जिले में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां करीब 122 करोड़ रुपए की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया जाएगा। कार्यक्रम में आवास योजना के लाभार्थियों के लिए भी विशेष आयोजन होगा। इस दौरान करीब 2 लाख परिवारों के गृह प्रवेश का कार्यक्रम प्रस्तावित है। बड़ी संख्या में लाभार्थियों और स्थानीय लोगों के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। विकास परियोजनाओं की मिलेगी सौगात सक्ती में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पूर्ण हो चुके विकास कार्यों का लोकार्पण किया जाएगा, जबकि नई परियोजनाओं के लिए भूमिपूजन होगा। इन कार्यों से क्षेत्र में सड़क, आवास, बुनियादी सुविधाओं और अन्य विकास गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री के दौरे को लेकर स्थानीय प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित विभागों को जिम्मेदारियां दी गई हैं। 2 लाख परिवारों के गृह प्रवेश पर फोकस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण करीब 2 लाख परिवारों का गृह प्रवेश होगा। आवास योजना के तहत घर मिलने वाले हितग्राही इस आयोजन में शामिल होंगे। गृह प्रवेश कार्यक्रम के जरिए लाभार्थियों को उनके नए आवास का औपचारिक रूप से प्रवेश कराया जाएगा। शिवराज सिंह चौहान के छत्तीसगढ़ दौरे को राज्य में विकास और केंद्र की योजनाओं के क्रियान्वयन से जोड़कर भी देखा जा रहा है। सक्ती में होने वाले कार्यक्रम में प्रदेश के जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के भी मौजूद रहने की संभावना है।

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22 सितंबर से छत्तीसगढ़ में बसों के थम सकते हैं पहिए, किराया बढ़ाने की मांग पर महासंघ ने दी हड़ताल की चेतावनी

छत्तीसगढ़ में यात्री बसों का संचालन 22 सितंबर से प्रभावित हो सकता है। बस ऑपरेटरों ने यात्री किराया बढ़ाने समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी है। छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने कहा है कि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 22 सितंबर से प्रदेशभर में यात्री बसों का संचालन बंद कर दिया जाएगा। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनवर अली के मुताबिक बस संचालक लंबे समय से किराया बढ़ाने और दूसरी समस्याओं को लेकर सरकार और परिवहन विभाग के सामने अपनी मांगें रखते रहे हैं। उनका दावा है कि पिछले करीब तीन साल से अधिकारियों और महासंघ के बीच मांगों को लेकर कोई बैठक नहीं हुई है। चार महीने पहले भेजा था किराया बढ़ाने का प्रस्ताव अनवर अली ने बताया कि यात्री बसों का किराया बढ़ाने समेत अन्य मांगों को लेकर करीब चार महीने पहले परिवहन विभाग को प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन अब तक इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इससे बस संचालकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ऑपरेटरों का कहना है कि डीजल समेत बस संचालन से जुड़े दूसरे खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि यात्री किराए में लंबे समय से अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में वर्तमान किराए पर बसों का संचालन करना आर्थिक रूप से मुश्किल हो रहा है। बस ऑपरेटरों की 9 सूत्रीय मांगें महासंघ ने सरकार के सामने 9 सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें यात्री किराए में बढ़ोतरी सबसे प्रमुख मांग है। इसके अलावा बसों में सिंगल स्लीपर सीट पर सिंगल टैक्स लागू करने और ई-बसों के संचालन को शहर की सीमा तक सीमित रखने की मांग की गई है। महासंघ ने ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली बसों के ग्रामीण इलाकों और बस स्टैंड से संचालन पर भी रोक लगाने की मांग की है। VLTD शुल्क कम करने की मांग बस संचालकों ने स्टेज कैरिज बसों के समयचक्र में दो बसों के बीच उचित अंतर रखने की मांग भी की है। इसके साथ ही VLTD डिवाइस के रिन्यूअल शुल्क को कम करने और मैनुअल फिटनेस की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग रखी गई है। इसके अलावा दूसरे जिले या राज्य में बस संचालन के लिए परमिट पर दोबारा मंजूरी लेने की प्रक्रिया को सरल बनाने और सभी बसों के लिए ऑनलाइन परमिट की व्यवस्था शुरू करने की मांग की गई है। हड़ताल हुई तो यात्रियों की बढ़ सकती है परेशानी अगर महासंघ अपनी घोषणा के मुताबिक 22 सितंबर से बसों का संचालन बंद करता है, तो रोजाना यात्री बसों से सफर करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर ग्रामीण और दूसरे जिलों के बीच नियमित बस सेवा पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और परिवहन विभाग बस ऑपरेटरों की मांगों पर हड़ताल की तारीख से पहले क्या फैसला लेते हैं।

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रायपुर में साइबर जागरूकता अभियान, 1200 विद्यार्थियों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति किया जागरूक

छत्तीसगढ़ पुलिस के साइबर जागृति अभियान के तहत रायपुर कमिश्नरेट सेंट्रल जोन के विभिन्न थाना क्षेत्रों में स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थानों में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से करीब 1200 विद्यार्थियों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार, साइबर हाइजीन और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव की जानकारी दी गई। अभियान के दौरान सिविल लाइन थाना क्षेत्र के सालेम इंग्लिश मीडियम स्कूल, तेलीबांधा थाना क्षेत्र के जे.आर. नायडू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रविग्राम, देवेंद्र नगर के बालाजी स्कूल, कालीबाड़ी स्थित शासकीय पोस्ट मैट्रिक गर्ल्स हॉस्टल, मौदहापारा स्थित शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज और गंज थाना क्षेत्र के विवेक कॉन्वेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में APK फाइल से होने वाले साइबर फ्रॉड को लेकर विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई। पुलिस ने बताया कि सरकारी योजना, नौकरी, KYC, शुभकामना संदेश या निमंत्रण के नाम पर WhatsApp के जरिए संदिग्ध फाइल भेजी जा सकती है। किसी भी फाइल को खोलने या इंस्टॉल करने से पहले उसका पूरा नाम और extension जांचने की सलाह दी गई। पुलिस ने लोगों को अनजान APK फाइल इंस्टॉल नहीं करने और परिचित व्यक्ति के WhatsApp नंबर से आई संदिग्ध फाइल को भी बिना पुष्टि किए नहीं खोलने की समझाइश दी, क्योंकि साइबर अपराधी किसी के compromised account का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इसके अलावा Digital Arrest Scam को लेकर भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। पुलिस, CBI, ED या NCB अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के जरिए डराने और पैसे ट्रांसफर कराने वाले ठगों से सावधान रहने की सलाह दी गई। ऐसे मामलों में कॉल काटकर संबंधित विभाग से स्वतंत्र रूप से सत्यापन करने को कहा गया। कार्यक्रम में OTP और UPI PIN साझा नहीं करने, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने, WhatsApp Two-Step Verification सक्रिय रखने, सोशल मीडिया Privacy Settings का ध्यान रखने तथा Gaming Apps में Age Rating और Parental Controls का इस्तेमाल करने जैसे जरूरी साइबर सुरक्षा उपाय बताए गए। अभियान का मुख्य संदेश रहा: STOP, THINK, ACT यानी किसी भी डिजिटल गतिविधि में जल्दबाजी न करें, पहले रुकें, सोचें और जांच करने के बाद ही कार्रवाई करें।

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छत्तीसगढ़ में अंतरधार्मिक निकाह के लिए वक्फ बोर्ड की अनुमति अनिवार्य, अगस्त 2026 से लागू होंगे नए नियम

छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने निकाह प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। प्रस्तावित नियमों के तहत यदि कोई मुस्लिम युवक या युवती किसी गैर-मुस्लिम से निकाह करना चाहता है, तो पहले वक्फ बोर्ड से अनुमति लेना आवश्यक होगा। यह नई व्यवस्था अगस्त 2026 से पूरे प्रदेश में लागू की जाएगी। बोर्ड के अनुसार, अंतरधार्मिक निकाह से पहले दोनों पक्षों की सहमति, पहचान संबंधी दस्तावेज और सभी कानूनी औपचारिकताओं की जांच की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ तो धर्म परिवर्तन से जुड़े दस्तावेजों का भी सत्यापन किया जाएगा। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने और बोर्ड की अनुमति मिलने के बाद ही निकाह कराया जा सकेगा। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में निकाह कराने वाले सभी मौलानाओं का पंजीयन भी अनिवार्य किया जाएगा। केवल पंजीकृत मौलाना ही निकाह संपन्न करा सकेंगे। यदि कोई मौलाना बिना आवश्यक अनुमति के अंतरधार्मिक निकाह कराता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। वक्फ बोर्ड का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य निकाह प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल को रोकना और भविष्य में उत्पन्न होने वाले कानूनी विवादों को कम करना है। इसके तहत हर निकाह का रिकॉर्ड बोर्ड के पास सुरक्षित रहेगा और प्रमाणपत्र भी बोर्ड की ओर से जारी किया जाएगा। साथ ही निकाहनामा एक समान प्रारूप में तैयार किया जाएगा। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज ने बताया कि वर्तमान में कई स्थानों पर बिना किसी केंद्रीय रिकॉर्ड के निकाह कराए जाते हैं, जिससे बाद में पहचान, वैवाहिक स्थिति और सरकारी दस्तावेजों से जुड़े विवाद सामने आते हैं। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से सरकारी दस्तावेज बनवाने की प्रक्रिया भी अधिक सरल होगी। बोर्ड के पदाधिकारियों के अनुसार, आदिवासी क्षेत्रों से महिलाओं को बहला-फुसलाकर विवाह करने और संपत्ति विवाद से जुड़ी कुछ शिकायतें मिली हैं। इन्हीं मामलों को ध्यान में रखते हुए अंतरधार्मिक निकाह की निगरानी बढ़ाने और सभी निकाह का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्णय लिया गया है। बोर्ड का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य किसी धर्म विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि निकाह प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और कानूनी रूप से व्यवस्थित बनाना है।

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छत्तीसगढ़ में माइक्रो ब्रुअरी को मिली मंजूरी, अब स्थानीय स्तर पर मिलेगी फ्रेश क्राफ्ट बीयर

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में माइक्रो ब्रुअरी खोलने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद अब प्रदेश में स्थानीय स्तर पर तैयार की जाने वाली फ्रेश क्राफ्ट बीयर उपलब्ध हो सकेगी। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को बढ़ावा मिलेगा तथा राज्य के राजस्व में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। सरकार की मंजूरी के बाद अब माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने के लिए आबकारी विभाग लाइसेंस जारी करेगा। देश के कई राज्यों जैसे कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा और गोवा में यह व्यवस्था पहले से लागू है। खासतौर पर बेंगलुरु अपनी क्राफ्ट बीयर संस्कृति के लिए काफी प्रसिद्ध माना जाता है। माइक्रो ब्रुअरी में सीमित मात्रा में बीयर तैयार की जाती है, जिसे मुख्य रूप से होटल और रेस्टोरेंट में परोसा जाता है। लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदक को 10 लाख रुपये की लाइसेंस फीस जमा करनी होगी और कम से कम 4 हजार वर्ग फीट भूमि उपलब्ध करानी होगी। क्राफ्ट बीयर पारंपरिक फैक्ट्री में बनने वाली बीयर से अलग होती है। इसे छोटे बैच में उच्च गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स और अन्य प्राकृतिक सामग्री से तैयार किया जाता है। इसी कारण इसका स्वाद अधिक ताज़ा और अलग-अलग फ्लेवर में उपलब्ध होता है। सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी में बनने वाली क्राफ्ट बीयर पर 60 रुपये प्रति बल्क लीटर उत्पाद शुल्क निर्धारित किया है। वहीं एक गिलास क्राफ्ट बीयर की अनुमानित कीमत 250 से 300 रुपये के बीच हो सकती है।

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जहरीली मांगुर मछली को मोंगरी बताकर बेचने का आरोप, प्रदेशभर में बिक्री पर सवाल |

छत्तीसगढ़ में बाजारों में मछली की बिक्री को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। दावा किया जा रहा है कि प्रतिबंधित और कथित रूप से जहरीली मांगुर मछली को “मोंगरी मछली” बताकर खुलेआम बेचा जा रहा है। इस मामले ने खाद्य सुरक्षा और मछली बाजार की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, रायपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में यह मछली माफिया द्वारा गलत पहचान के साथ बेची जा रही है। आरोप है कि प्रतिबंध के बावजूद मांगुर मछली का पालन ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे तालाबों और जलाशयों में किया जा रहा है और फिर इसे बाजारों में मोंगरी मछली के नाम से सप्लाई किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि रायपुर, दुर्ग, अभनपुर, माना, डुंडा-सेजबहार, धमतरी, कांकेर, जगदलपुर, बसना, सरायपाली, बलौदाबाजार, मंदिर हसौद, खरोरा और तिल्दा-नेवरा जैसे क्षेत्रों में इसके पालन और बिक्री की गतिविधियां सामने आ रही हैं। मामले को लेकर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि मत्स्य विभाग और स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण इस पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार मांगुर मछली को लेकर लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं जताई जाती रही हैं, इसी कारण कई जगहों पर इसके पालन और बिक्री पर प्रतिबंध या नियंत्रण की स्थिति रही है। वहीं मोंगरी मछली के नाम पर गलत लेबलिंग से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर जोखिम की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले की जांच और निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है ताकि बाजार में बिकने वाले उत्पादों की सही पहचान सुनिश्चित की जा सके।

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कवर्धा में युवती से गैंगरेप का मामला, दो आरोपी गिरफ्तार, पुलिस जांच जारी

Kawardha के चिल्फी थाना क्षेत्र में एक गंभीर आपराधिक मामला सामने आया है, जहां छट्ठी कार्यक्रम से घर लौट रही एक युवती के साथ कथित रूप से सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई। घटना के बाद पीड़िता को बेहोशी की हालत में अर्धनग्न अवस्था में जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया गया। जानकारी के अनुसार, पीड़िता शुक्रवार-शनिवार की रात एक परिचित के घर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने गई थी। कार्यक्रम के बाद वह देर रात घर लौट रही थी, तभी ग्राम सरोदादादर और रानीदहरा मार्ग के बीच जंगल इलाके में रास्ते में दो परिचित युवकों ने उसे रोक लिया। आरोप है कि दोनों ने युवती को जबरन शराब पिलाई और उसके साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया। वारदात के बाद दोनों आरोपी उसे मौके पर बेहोशी की हालत में छोड़कर फरार हो गए। सुबह स्थानीय लोगों ने जंगल में युवती को देखा और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और गंभीर हालत में पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़िता के बयान और शुरुआती जांच के आधार पर पुलिस ने मामले में दो आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस आगे की जांच में जुटी हुई है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

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कवर्धा में चक्काजाम से थमा ट्रैफिक, गृहमंत्री विजय शर्मा का काफिला भी फंसा

कवर्धा जिले के पोंडी क्षेत्र में शराब भट्ठी हटाने की मांग को लेकर शुक्रवार को बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं और स्कूली छात्रों ने रायपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे-30 पर चक्काजाम कर दिया, जिससे कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लंबे समय से शराब भट्ठी को हटाने की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी नाराजगी के चलते छात्र और कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और हाईवे जाम कर विरोध जताया। धरना और चक्काजाम का असर इतना ज्यादा रहा कि प्रदेश के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री Vijay Sharma का काफिला भी जाम में फंस गया। मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास करती रही। हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यात्री बसों समेत कई वाहन घंटों तक जाम में फंसे रहे, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि शराब भट्ठी के कारण आसपास का माहौल प्रभावित हो रहा है और इसका गलत असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है।

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