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कोरबा में हाईवे पर मवेशियों के शव रखकर अवैध वसूली, राहगीरों में दहशत

कोरबा। भारतमाला परियोजना के तहत निर्माणाधीन उरगा–बिलासपुर मार्ग पर असामाजिक तत्वों द्वारा खुलेआम अवैध वसूली का मामला सामने आया है। टोल टैक्स शुरू न होने के बावजूद कुछ लोगों द्वारा रास्ता रोककर वाहन चालकों से जबरन पैसे वसूले जाने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। रविवार को स्थिति और गंभीर हो गई जब कुछ लोगों ने सड़क पर मृत मवेशियों के शव रखकर मार्ग अवरुद्ध कर दिया और वहां से गुजरने वाले वाहनों से अवैध रूप से पैसे वसूलने लगे। इस घटना के दौरान रायपुर जा रही महाराणा प्रताप नगर की पूर्व पार्षद आशा जायसवाल की बेटी भी इस वसूली का शिकार बनी। उन्होंने इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें हाईवे पर हो रही अवैध वसूली और यात्रियों की परेशानी को उजागर किया गया है। वीडियो सामने आने के बाद निर्माणाधीन मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क पर पहले भी इस तरह की अवैध वसूली की कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं और इसके वीडियो भी वायरल हुए हैं, लेकिन अब तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। इस मार्ग का उपयोग रायपुर और बिलासपुर के बीच तेज़ आवागमन के लिए बड़ी संख्या में लोग कर रहे हैं, लेकिन असामाजिक गतिविधियों के कारण यात्रियों की सुरक्षा पर लगातार खतरा बना हुआ है। अब लोगों की नजर प्रशासन की सख्त कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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महासमुंद में अवैध रेत खनन पर बड़ी कार्रवाई: 2 मशीनें और 7 वाहन जब्त

छत्तीसगढ़ में अवैध रेत खनन और परिवहन के खिलाफ खनिज विभाग लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। इसी कड़ी में महासमुंद जिले में केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता और जिला खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 2 चैन माउंटेन मशीनों और 7 वाहनों को जब्त किया है। 23 मई 2026 की सुबह महासमुंद जिले की पिथौरा तहसील के ग्राम बल्दीडीह स्थित जोंक नदी में औचक निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान 2 चैन माउंटेन मशीनें अवैध रेत उत्खनन करते मिलीं। वहीं मौके पर 3 हाइवा और 4 ट्रैक्टर रेत परिवहन में लगे पाए गए। निरीक्षण के दौरान संबंधित पक्ष वैध अनुमति, अभिवाहन पास या अन्य जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। साथ ही स्वीकृत खदान क्षेत्र के बाहर खनन किए जाने की बात भी सामने आई। इसके बाद अधिकारियों ने तत्काल अवैध खनन कार्य बंद कराया। कार्रवाई के दौरान दोनों मशीनों को जब्त कर सील कर दिया गया और अगले आदेश तक खदान मुंशी की निगरानी में रखा गया है। वहीं 3 हाइवा और 4 ट्रैक्टरों को जब्त कर साकरा थाना परिसर में खड़ा कराया गया है। संबंधित खदान संचालक को नोटिस भी जारी किया गया है। इससे पहले भी खनिज विभाग ने मंदिर हसौद इलाके में कार्रवाई करते हुए दो चूना पत्थर खदानों को सील किया था और अवैध परिवहन में लगे 7 हाइवा वाहनों को जब्त किया गया था। अधिकारियों ने साफ कहा है कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद खनन कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।

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महासमुंद गैस घोटाले में बड़ा खुलासा, खाद्य अधिकारी निकला सिंडिकेट का मास्टरमाइंड

महासमुंद जिले में जब्त एलपीजी गैस कैप्सूल ट्रकों से करोड़ों रुपए की गैस गायब होने के मामले में पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव इस पूरे गैस सिंडिकेट का मुख्य संचालक था। पुलिस का दावा है कि अधिकारियों, गैस एजेंसी संचालकों और कारोबारियों की मिलीभगत से करीब 92 टन एलपीजी गैस का गबन किया गया। पुलिस के अनुसार खाद्य अधिकारी अजय यादव ने गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर, रायपुर निवासी मनीष चौधरी और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर करीब डेढ़ करोड़ रुपए कीमत की गैस का अवैध कारोबार किया। मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर समेत अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। जांच में सामने आया कि दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। सुरक्षा कारणों से इन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग को दी गई थी। इसी दौरान गैस निकालने की योजना तैयार की गई। पुलिस के मुताबिक 23 मार्च 2026 को आरंग के एक ढाबे में आरोपियों की बैठक हुई, जहां गैस बेचने की डील तय की गई। इसके बाद 26 मार्च को ट्रकों में मौजूद गैस का आकलन किया गया। ट्रकों में करीब 102 से 105 मीट्रिक टन एलपीजी होने की जानकारी सामने आई थी। जांच में पता चला कि ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के साथ करीब 80 लाख रुपए में सौदा तय हुआ। 30 मार्च को खाद्य विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में छह गैस कैप्सूल ट्रकों को सुपुर्दनामा पर लेकर अभनपुर स्थित प्लांट पहुंचाया गया। पुलिस का कहना है कि इसके बाद सुनियोजित तरीके से ट्रकों से गैस निकाली गई। 31 मार्च, 1 अप्रैल और 5 अप्रैल की रात अलग-अलग कैप्सूलों से गैस खाली की गई और तीन दिनों में करीब 92 टन एलपीजी गायब कर दी गई। यह गैस निजी टैंकरों, बुलेट टैंकों और विभिन्न एजेंसियों में सप्लाई की गई। जांच में यह भी सामने आया कि ट्रकों का वजन जानबूझकर देर से कराया गया ताकि गैस पहले ही निकाली जा सके। पांच ट्रकों का वजन 6 अप्रैल और आखिरी ट्रक का वजन 8 अप्रैल को कराया गया, तब तक अधिकांश कैप्सूल खाली हो चुके थे। दस्तावेजों की जांच में पुलिस को कालाबाजारी के सबूत भी मिले हैं। रिकॉर्ड के अनुसार ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स ने अप्रैल में केवल 47 टन गैस खरीदी, जबकि बिक्री 107 टन दिखाई गई। इससे साफ हुआ कि बड़ी मात्रा में बिना वैध खरीदी के गैस बेची गई। पुलिस ने यह भी दावा किया कि आरोपियों ने जांच को गुमराह करने और पूरे मामले का ठीकरा पुलिस पर फोड़ने की योजना बनाई थी। अप्रैल महीने के रिकॉर्ड और एंट्री रजिस्टर गायब पाए गए, जिससे साक्ष्य मिटाने की कोशिश की पुष्टि हुई। महासमुंद पुलिस की 40 सदस्यीय टीम ने 15 दिनों तक तकनीकी जांच, कॉल डिटेल, दस्तावेज विश्लेषण और पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। फिलहाल मामले में बीएनएस और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई जारी है।

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रायपुर में ग्लोबल हॉस्पिटल पर निगम की कार्रवाई, नाले पर बने अवैध कब्जे पर चला बुलडोजर

राजधानी रायपुर में नाले पर अवैध कब्जा करने के मामले में नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्लोबल हॉस्पिटल परिसर के पास बने अवैध निर्माण को हटाया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर वार्ड क्रमांक-40 में निगम की टीम ने जेसीबी की मदद से नाले पर बनाए गए अवैध पाटे को तोड़ दिया। कार्रवाई के दौरान अस्पताल प्रबंधन पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। बताया जा रहा है कि नगर निगम को इस संबंध में जनशिकायत मिली थी, जिसके बाद जांच कर कार्रवाई की गई। जोन कमिश्नर क्षीरसागर नायक के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और शिकायत सही पाई। इसके बाद तत्काल बुलडोजर बुलाकर नाले के ऊपर करीब 50 मीटर तक बनाए गए अवैध पाटे को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान नाले से लगभग दो ट्रक मलबा भी निकाला गया। निगम अधिकारियों का कहना है कि अवैध निर्माण के कारण नाले की सफाई और जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। मौके पर जोन स्वास्थ्य अधिकारी संदीप वर्मा, स्वच्छता निरीक्षक दिलीप साहू और प्रेम मानिकपुरी सहित निगम की टीम मौजूद रही। अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन को भविष्य में दोबारा इस तरह का अतिक्रमण नहीं करने की चेतावनी दी है। नगर निगम ने साफ किया है कि शहर में नालों और सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। जनशिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी ताकि सफाई और जल निकासी व्यवस्था प्रभावित न हो।

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सूदखोरी और हथियार केस में वीरेंद्र तोमर का पलटवार, LIVE आकर लगाए साजिश के आरोप

सूदखोरी और अवैध हथियार रखने के मामले में जेल से बाहर आने के बाद आरोपी वीरेंद्र सिंह तोमर ने पहली बार सोशल मीडिया पर लाइव आकर अपनी सफाई दी। राजस्थान से किए गए इस LIVE में उन्होंने पूरे मामले को साजिश बताते हुए पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक हस्तक्षेप पर गंभीर सवाल उठाए। LIVE के दौरान तोमर करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखावत के साथ दिखाई दिए। इस दौरान उन्होंने सीधे तौर पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने खुद उनके घर में दस्तावेज और हथियार रखे, ताकि उन्हें फंसाया जा सके। तोमर ने दावा किया कि वे खारुन गंगा आरती का आयोजन करवा रहे थे, जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ रही थी और यही बात कुछ नेताओं और लोगों को पसंद नहीं आई। उन्होंने कहा कि इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके घर से बरामद बताए जा रहे हथियार और कागजात पूरी तरह से झूठे हैं और यह सब पहले से योजना बनाकर किया गया। उनके अनुसार, उन्हें बदनाम करने और खत्म करने की साजिश रची गई थी, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। तोमर ने यह भी दावा किया कि जेल में रहते हुए उनकी जान को खतरा था। उन्होंने कहा कि अगर सच सामने नहीं आता तो उनकी हत्या तक हो सकती थी। इस LIVE वीडियो के सामने आने के बाद मामला फिर से चर्चा में आ गया है और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है और पक्ष-विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। वीरेंद्र तोमर ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि हाल ही में उन्हें हत्या के एक मामले में अदालत से राहत मिली है और अब वे सूदखोरी और हथियार मामले में कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के नाम सार्वजनिक कर कानूनी कदम उठाएंगे।

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समीक्षा बैठक में डिप्टी सीएम अरुण साव का सख्त संदेश, अवैध प्लॉटिंग पर अफसरों पर भी कार्रवाई तय

छत्तीसगढ़ में नगर पंचायत क्षेत्रों में अवैध प्लॉटिंग, अतिक्रमण और अव्यवस्थित निर्माण को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। मंगलवार को उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नगर पंचायतों के कामकाज की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन गतिविधियों पर हर हाल में रोक लगाई जाए। बैठक में मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा गया कि यदि कहीं भी लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही 31 मई तक नई संपत्तियों पर कर लगाने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नई कार्य प्रणाली अपनाने और रोजाना सुबह अपने-अपने क्षेत्रों का निरीक्षण करने को कहा। क्षेत्रीय संयुक्त संचालकों को भी हर तिमाही सभी निकायों का निरीक्षण कर सीधे मुख्यालय को रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा सके। बरसात को ध्यान में रखते हुए 31 मई तक नालों और नालियों की सफाई पूरी करने के आदेश दिए गए हैं, ताकि जलभराव की समस्या न हो। इसके अलावा हर भवन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सुनिश्चित करने, पाइपलाइन लीकेज सुधारने और सभी घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने पर जोर दिया गया है। आने वाले 10 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पेयजल योजनाएं तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। बैठक में निकाय कर्मचारियों को समय पर वेतन देने और बिजली बिल का नियमित भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही गई। संपत्ति कर, जल कर और यूजर चार्ज की वसूली सख्ती से करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही एनर्जी ऑडिट कर अनावश्यक बिजली कनेक्शन हटाने की बात कही गई। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत स्वीकृत मकानों को एक साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आवास स्वीकृति के एक सप्ताह के भीतर भवन निर्माण की अनुमति जारी करें और लाभार्थियों को योजना की पूरी जानकारी दें। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब कागजी कार्यवाही के बजाय जमीनी स्तर पर काम दिखना चाहिए और सभी योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।

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भिलाई में जुआ पर पुलिस की रेड, 15 जुआरी गिरफ्तार, 1.14 लाख नकद जब्त

छत्तीसगढ़ के भिलाई में पुलिस ने जुआ खेल रहे 15 लोगों को पकड़कर बड़ी कार्रवाई की है। यह छापा सुपेला थाना क्षेत्र में भिलाई नगर रेलवे स्टेशन के सामने कोसनाला इलाके में मारा गया। गिरफ्तार आरोपियों में जुआ संचालित करने वाले गिरोह से जुड़ा एक पार्टनर भी शामिल है। पुलिस को मौके से कुल 1 लाख 14 हजार रुपये नकद बरामद हुए हैं। इसके अलावा 15 मोबाइल फोन और 5 दोपहिया वाहन भी जब्त किए गए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब साढ़े चार लाख रुपये बताई जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने अचानक दबिश दी, जिसमें सभी आरोपी जुआ खेलते हुए पकड़े गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह जुए का फड़ काफी समय से संचालित हो रहा था। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ जुआ अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया है। अधिकारियों का कहना है कि जिले में अवैध जुए के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस अन्य जगहों पर चल रहे जुए के अड्डों की भी तलाश कर रही है और लगातार निगरानी रखी जा रही है।

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बिलासपुर में नकली गोल्ड फ्लैक सिगरेट का भंडाफोड़: ITC टीम ने ग्राहक बनकर पकड़ा 5 लाख का माल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नकली सिगरेट के बड़े कारोबार का खुलासा हुआ है। व्यापार विहार क्षेत्र के मालधक्का इलाके में डुप्लीकेट गोल्ड फ्लैक सिगरेट की सप्लाई की जा रही थी। इस पूरे मामले का पर्दाफाश दिल्ली से आई आईटीसी की टीम ने किया, जिन्होंने ग्राहक बनकर कार्रवाई को अंजाम दिया। जानकारी के अनुसार, टीम को पहले से ही सूचना मिल चुकी थी कि शहर में नकली सिगरेट बेची जा रही है। इसके बाद टीम बिलासपुर पहुंची और अलग-अलग पान दुकानों से सैंपल लेकर जांच की। जांच में सामने आया कि कई दुकानों पर नकली सिगरेट बेची जा रही थी। इसके बाद टीम ने ग्राहक बनकर थोक सप्लायर से संपर्क किया। सप्लायर ने उन्हें महाराणा प्रताप चौक के पास स्थित निगम कॉलोनी बुलाया, जहां रोशन चंदानी की फर्म से सिगरेट सप्लाई की जा रही थी। टीम वहां पहुंची और माल की जांच की, जिसमें सिगरेट नकली पाई गई। इसके बाद पुलिस को बुलाकर करीब 5 लाख रुपए कीमत की 4 कार्टन सिगरेट जब्त की गई। पूरा मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने माल जब्त कर आगे की जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि यह अवैध कारोबार रोजाना करीब 2 लाख रुपए का था और शहर के कई छोटे-बड़े दुकानदारों को सप्लाई की जाती थी। विशेषज्ञों के अनुसार, असली और नकली सिगरेट की पहचान पैकेजिंग की प्रिंटिंग, होलोग्राम, कंपनी के लोगो, कोड, सिगरेट स्टिक की बनावट और तंबाकू की गुणवत्ता से की जा सकती है। नकली सिगरेट का स्वाद और धुआं भी अलग होता है। घटना की जानकारी मिलते ही कई व्यापारी सिविल लाइन थाने पहुंच गए और देर रात तक वहां भीड़ लगी रही। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

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हमसफर एक्सप्रेस में अटेंडेंट शराब परोसते पकड़ा, दुर्ग स्टेशन पर कार्रवाई

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में निजामुद्दीन-दुर्ग हमसफर एक्सप्रेस के एसी कोच में तैनात एक अटेंडेंट को अवैध रूप से शराब रखने और यात्रियों को परोसने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई आरपीएफ और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने की। सूचना के मुताबिक, आरपीएफ को पहले ही जानकारी मिल गई थी कि ट्रेन में एक अटेंडेंट बड़ी मात्रा में शराब लेकर चल रहा है। इसके बाद दुर्ग स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचते ही टीम ने कोच नंबर B-7 में तैनात अटेंडेंट रीमन दास को चिन्हित कर उसके बैग की जांच की। तलाशी के दौरान उसके पास से अलग-अलग ब्रांड की विदेशी शराब बरामद हुई। जब उससे संबंधित दस्तावेज मांगे गए, तो वह कोई वैध कागज नहीं दिखा सका। इसके बाद मौके पर ही शराब जब्त कर उसे हिरासत में ले लिया गया। बरामद शराब में व्हिस्की, वोडका और बियर शामिल हैं, जिसकी कुल मात्रा करीब 12.236 बल्क लीटर बताई गई है। जब्त सामग्री की कीमत लगभग 4 हजार रुपए आंकी गई है। आबकारी विभाग ने आरोपी के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि वह शराब कहां से लाया और क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं। आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, ट्रेनों में अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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बिलासपुर में दो सगी बहनें गांजा तस्करी में गिरफ्तार, 6 किलो गांजा और लाखों कैश बरामद

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस ने गांजा तस्करी के मामले में दो महिलाओं को गिरफ्तार किया है, जो आपस में सगी बहनें हैं। दोनों अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर शहर के अलग-अलग इलाकों में गांजा बेचने का काम कर रही थीं। पुलिस ने उनके पास से करीब 6 किलो गांजा, 5.98 लाख रुपये नकद, एक कार और दो स्कूटी जब्त की हैं। मामला सामने तब आया जब पुलिस को सूचना मिली कि मोपका के पाटलीपुत्र नगर और राजकिशोर नगर क्षेत्र में दो महिलाएं नशीले पदार्थ की बिक्री कर रही हैं। इसके बाद एसीसीयू और सरकंडा थाना पुलिस ने संयुक्त रूप से योजना बनाकर छापेमारी की और दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान महिलाएं वाहन में गांजा रखकर सप्लाई करते हुए मिलीं। तलाशी में उनके पास से नकदी, मोबाइल फोन, घड़ियां और वाहन भी बरामद किए गए। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 15.78 लाख रुपये आंकी गई है। गिरफ्तार महिलाओं की पहचान मानकी केंवट उर्फ विनिता जोशी (30) और सुदामा केंवट उर्फ रानी यादव (40) के रूप में हुई है। दोनों मूल रूप से मस्तूरी क्षेत्र के जयराम नगर की रहने वाली हैं और फिलहाल सरकंडा इलाके में रह रही थीं। पूछताछ में सामने आया कि वे अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग नामों का इस्तेमाल करती थीं। पुलिस के अनुसार, दोनों पहले भी एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई झेल चुकी हैं। गांजा बिक्री से कमाए पैसों से उन्होंने स्कूटी खरीदी थी, जिसका इस्तेमाल सप्लाई के लिए किया जाता था। फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर

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