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रायपुर में रेलवे सुरक्षा बल का 42वां स्थापना दिवस:ड्रोन, रोबोट और कमांडो टीम दिखाएंगे दमखम, उत्कृष्ट सेवा करने वाले जवानों को मिलेंगे पदक

रायपुर में 12 अक्टूबर को रेलवे सुरक्षा बल (RPF) का 42वां स्थापना दिवस मनाया जाएगा। रेलवे वर्कशॉप ग्राउंड में आयोजित समारोह में भव्य परेड के साथ आधुनिक सुरक्षा तकनीकों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। कार्यक्रम में महिला दस्ता, कमांडो टीम, डॉग स्क्वॉड और सेगवे दस्ता अपनी कार्यक्षमता का प्रदर्शन करेंगे। समारोह के दौरान उत्कृष्ट सेवा करने वाले अधिकारियों और जवानों को पदक देकर सम्मानित किया जाएगा। तकनीकी प्रदर्शनी में ड्रोन, ह्यूमनॉइड रोबोट ‘अर्जुन’ और डिजिटल सुरक्षा प्रणालियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। RPF की परेड में महिला दस्ता और कमांडो टीम दिखाएंगे दमखम स्थापना दिवस समारोह का प्रमुख आकर्षण RPF की परेड होगी। इसमें महिला दस्ता, कमांडो रैपिड एक्शन टीम (CORAS), डॉग स्क्वॉड और सेगवे दस्ता शामिल होंगे। जवानों के अनुशासन, प्रशिक्षण, गश्त और आपात परिस्थितियों में कार्रवाई करने की क्षमता का प्रदर्शन किया जाएगा। प्रशिक्षित श्वानों के जरिए डॉग स्क्वॉड की कार्यक्षमता दिखाई जाएगी। वहीं, कमांडो टीम विशेष परिस्थितियों में कार्रवाई की तैयारी का प्रदर्शन करेगी। इस आयोजन के माध्यम से रेलवे सुरक्षा में महिला जवानों की भूमिका को भी सामने लाया जाएगा। 34 पदक और एक जीवन रक्षा पदक से होगा सम्मान समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले RPF अधिकारियों और जवानों को कुल 34 पदकों के साथ एक जीवन रक्षा पदक प्रदान किया जाएगा। इनमें विशिष्ट सेवा के लिए 3 राष्ट्रपति पुलिस पदक और सराहनीय सेवा के लिए 30 पुलिस पदक शामिल हैं। इसके अलावा, वर्ष 2024 में एक रेल यात्री की जान बचाने के लिए एक जवान को जीवन रक्षा पदक से सम्मानित किया जाएगा। ये सम्मान स्वतंत्रता दिवस 2025 और गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर घोषित किए गए थे। RPF की स्थापना से अब तक का सफर रेलवे सुरक्षा बल को रेलवे संपत्ति की सुरक्षा और रेल व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया। रेलवे सुरक्षा बल अधिनियम, 1957 के तहत इसे कानूनी आधार मिला और 1959 में इसकी नियमावली बनाई गई। वर्ष 1965 में इसका नाम रेलवे सुरक्षा विशेष बल (RPSF) रखा गया। इसके बाद 20 सितंबर 1985 को कानून में संशोधन के जरिए RPF को संघ के सशस्त्र बल का दर्जा मिला। वर्ष 2003 में हुए बदलावों से यात्रियों और यात्री क्षेत्रों की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों का भी विस्तार हुआ। समय के साथ RPF की भूमिका रेलवे संपत्ति की सुरक्षा के साथ यात्रियों की सहायता, अपराधों की रोकथाम और सुरक्षित रेल यात्रा सुनिश्चित करने तक बढ़ी है। ड्रोन, रोबोट ‘अर्जुन’ और डिजिटल सिस्टम होंगे प्रदर्शित स्थापना दिवस पर आयोजित तकनीकी प्रदर्शनी में रेलवे सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले आधुनिक उपकरणों की जानकारी दी जाएगी। इसमें निगरानी के लिए ड्रोन, ह्यूमनॉइड रोबोट ‘अर्जुन’ और डिजिटल सुरक्षा प्रणालियां प्रमुख आकर्षण होंगी। प्रदर्शनी में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) और नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) जैसे डिजिटल सिस्टम की कार्यप्रणाली भी प्रदर्शित की जाएगी। इन तकनीकों के जरिए अपराध संबंधी जानकारी साझा करने और फिंगरप्रिंट के माध्यम से पहचान करने में तकनीक की भूमिका समझाई जाएगी। वरिष्ठ अधिकारी समारोह में होंगे शामिल कार्यक्रम में RPF की महानिदेशक सोनाली मिश्रा, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश और RPF के महानिरीक्षक मुनावर खुर्शीद सहित छत्तीसगढ़ प्रशासन एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने का कार्यक्रम है। 42वें स्थापना दिवस के माध्यम से रेलवे सुरक्षा बल अपने जवानों की सेवा, साहस और कर्तव्यनिष्ठा को सम्मानित करने के साथ रेलवे सुरक्षा में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल को भी प्रदर्शित करेगा।

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छत्तीसगढ़ में MBBS की 206 और BDS की 225 सीटें खाली, 15 अक्टूबर तक प्रवेश का मौका

छत्तीसगढ़ में NEET UG काउंसिलिंग के तीसरे चरण यानी मॉप-अप राउंड की सीट आवंटन सूची जारी कर दी गई है। इस चरण में प्रदेश के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की कुल 431 सीटें खाली हैं। इनमें MBBS की 206 और BDS की 225 सीटें शामिल हैं। सीट आवंटित होने वाले अभ्यर्थियों को 15 अक्टूबर तक प्रवेश की सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। निर्धारित समय में दस्तावेजों का सत्यापन और कॉलेज में प्रवेश नहीं लेने पर अभ्यर्थी एडमिशन के अवसर से चूक सकते हैं। 15 अक्टूबर शाम 5 बजे तक पूरी करनी होगी प्रवेश प्रक्रिया मॉप-अप राउंड के तहत आवंटित सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया 12 अक्टूबर सुबह 10 बजे से शुरू हो चुकी है। अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के लिए 15 अक्टूबर शाम 4 बजे तक का समय दिया गया है। वहीं, संबंधित कॉलेज में प्रवेश की अंतिम समय-सीमा शाम 5 बजे निर्धारित की गई है। अभ्यर्थियों को तय सत्यापन केंद्र पर स्वयं उपस्थित होकर आवश्यक दस्तावेजों की जांच करानी होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, अवकाश के दिनों में भी संबंधित केंद्रों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी रहेगी। सरकारी और निजी कॉलेजों के लिए अलग-अलग सत्यापन केंद्र सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में सीट पाने वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन संबंधित कॉलेज में किया जाएगा। निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आवंटित अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन हेतु नवा रायपुर के उपरवारा स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान भवन में पहुंचना होगा। वहीं, निजी डेंटल कॉलेजों में सीट पाने वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर में की जाएगी। एडमिशन नहीं लेने या सीट छोड़ने पर हो सकती है कार्रवाई सीट आवंटित होने के बाद प्रवेश नहीं लेने अथवा एडमिशन के बाद सीट छोड़ने पर निर्धारित नियमों के तहत अभ्यर्थी की सिक्योरिटी या पंजीयन राशि जब्त की जा सकती है। इसके साथ ही, ऐसे अभ्यर्थियों को चालू शैक्षणिक सत्र की आगे की काउंसिलिंग प्रक्रिया में शामिल होने से भी रोका जा सकता है। इसलिए अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे सीट आवंटन से संबंधित नियमों, दस्तावेज सत्यापन और प्रवेश की समय-सीमा का ध्यान रखें। आधिकारिक वेबसाइट पर मिलेगी पूरी जानकारी काउंसिलिंग प्रक्रिया, दस्तावेज सत्यापन केंद्र और प्रवेश से जुड़े दिशा-निर्देशों की जानकारी के लिए अभ्यर्थी चिकित्सा शिक्षा संचालनालय की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। आधिकारिक वेबसाइट: https://cgdme.admissions.nic.in/

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ITSA अस्पताल में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम, 150 से अधिक लोगों को यातायात नियमों की दी गई जानकारी

रायपुर। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और लोगों को सुरक्षित यातायात व्यवहार के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ITSA अस्पताल में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें 150 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया और यातायात नियमों के पालन की आवश्यकता के बारे में जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम में सहायक पुलिस आयुक्त (यातायात) श्रीमती सीमा अहिरवार ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रत्येक व्यक्ति को वाहन चलाते समय अपनी सुरक्षा के साथ-साथ सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना चाहिए। हेलमेट, सीट बेल्ट और गति सीमा पर जोर कार्यक्रम के दौरान लोगों को दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने, चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने और निर्धारित गति सीमा का पालन करने की समझाइश दी गई। इन नियमों का पालन सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण माना गया। ITSA निदेशक ने की नियमों के पालन की अपील ITSA अस्पताल के निदेशक सुनील बलानी ने लोगों से सुरक्षित यातायात व्यवहार को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने और यातायात नियमों का जिम्मेदारीपूर्वक पालन करने की अपील की। इस जागरूकता कार्यक्रम में सुरक्षित भवः फाउंडेशन के सदस्यों के साथ ITSA अस्पताल के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और सुरक्षित यातायात व्यवहार को बढ़ावा देना रहा।

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जांजगीर-चांपा में पुलिसकर्मियों से सफाई कराने का आरोप, वर्दी में झाड़ू लगाते वीडियो वायरल

जांजगीर-चांपा में पुलिसकर्मियों से सफाई कराने का आरोप सामने आया है। मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है। वायरल वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी वर्दी में झाड़ू लगाते हुए नजर आ रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि रक्षित निरीक्षक के निर्देश पर पुलिसकर्मियों से सफाई कराई गई। वीडियो सामने आने के बाद रक्षित निरीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठ रही है। हालांकि, वायरल वीडियो की वास्तविक परिस्थितियों और पुलिसकर्मियों से सफाई कराए जाने के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। अब सवाल यह है कि क्या पुलिस विभाग वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की जांच कराएगा और अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

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एमसीबी के स्वास्थ्य केंद्रों में BP मशीनों से पारा चोरी, उपकरणों की सुरक्षा पर उठे सवाल

जिला अस्पताल एमसीबी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खड़गवां समेत अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में मरकरी वाली बीपी मशीनों से पारा चोरी किए जाने के मामले सामने आए हैं। घटनाओं के बाद स्वास्थ्य संस्थानों में रखे चिकित्सा उपकरणों की निगरानी और बाहरी तकनीशियनों के सत्यापन की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के मुताबिक, जिला अस्पताल एमसीबी में एक व्यक्ति कथित तौर पर टेक्नीशियन बनकर पहुंचा और बीपी मशीनों की मरम्मत करने के नाम पर उनमें मौजूद पारा निकाल लिया। बाद में संबंधित कंपनी से सत्यापन कराने पर उसके अधिकृत तकनीशियन नहीं होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद मामले में पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई। इसी तरह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खड़गवां सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में भी बीपी मशीनों से पारा चोरी होने की शिकायत पुलिस थाने में दर्ज कराई गई है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बाद अस्पतालों में उपकरणों की निगरानी, रखरखाव और बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश व सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब पुलिस के सामने चुनौती है कि स्वास्थ्य केंद्रों से पारा चोरी करने वाले आरोपी या आरोपियों की पहचान कर उन्हें कब तक गिरफ्तार किया जाता है। साथ ही जांच के बाद यह भी स्पष्ट होगा कि इन घटनाओं के पीछे केवल एक व्यक्ति की भूमिका है या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा है।

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छत्तीसगढ़ में नए सॉलिड वेस्ट नियम लागू, 6 महीने बाद भी तय नहीं हुई जुर्माने की दर

छत्तीसगढ़ में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नए नियम लागू हुए करीब छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन नियमों का उल्लंघन करने वालों से कितनी पेनाल्टी वसूली जाएगी, यह अब तक तय नहीं हो पाया है। जुर्माने की स्पष्ट दर नहीं होने से नगरीय निकायों के सामने नियमों का प्रभावी तरीके से पालन कराने की चुनौती बनी हुई है। केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 27 जनवरी 2026 को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 का नोटिफिकेशन जारी किया था। नए नियमों ने 2016 के नियमों की जगह ली और 1 अप्रैल 2026 से देशभर में लागू किए गए। इन नियमों के तहत घरों, दुकानों, संस्थानों और अन्य जगहों से निकलने वाले कचरे को स्रोत स्तर पर चार श्रेणियों में अलग करना जरूरी किया गया है। इसमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी वेस्ट और स्पेशल केयर वेस्ट शामिल हैं। नियम लागू, लेकिन स्थानीय पेनाल्टी अभी तय नहीं नए प्रावधानों के मुताबिक स्थानीय निकायों को अलग-अलग श्रेणी के कचरे का संग्रहण, परिवहन और वैज्ञानिक तरीके से निपटान सुनिश्चित करना है। कचरा फैलाने और खुले में कचरा फेंकने जैसी गतिविधियों पर कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है। हालांकि छत्तीसगढ़ में इन नियमों के उल्लंघन पर लागू होने वाली पेनाल्टी की दर और स्थानीय स्तर पर कार्रवाई की विस्तृत व्यवस्था अभी अधिसूचित नहीं हुई है। ऐसे में निकायों के सामने यह स्पष्ट नहीं है कि घर से अलग-अलग कचरा नहीं देने, खुले में कचरा फेंकने या कचरा जलाने जैसे मामलों में कितनी राशि का जुर्माना लगाया जाए। चार श्रेणियों में कचरा अलग करना जरूरी नए नियमों में कचरे को स्रोत पर ही अलग करने पर जोर दिया गया है। घरों और संस्थानों से निकलने वाले कचरे को गीला, सूखा, सैनिटरी और स्पेशल केयर वेस्ट के रूप में अलग करना होगा। सूखे कचरे में प्लास्टिक, कागज, धातु, कांच, लकड़ी और रबर जैसी सामग्री को अलग कर रीसाइक्लिंग के लिए भेजने की व्यवस्था है। वहीं रसोई के कचरे, फल-सब्जियों के छिलकों, फूल और अन्य जैविक कचरे को कम्पोस्टिंग या बायोमीथेनेशन के जरिए प्रोसेस करने का प्रावधान किया गया है। लैंडफिल में सिर्फ अंतिम अवशेष भेजने पर जोर नए नियमों में लैंडफिल के इस्तेमाल को ऐसे कचरे तक सीमित करने की दिशा में प्रावधान किए गए हैं, जिसे रीसाइकिल नहीं किया जा सकता, ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता या जो निष्क्रिय अवशेष है। इसका उद्देश्य ऐसी सामग्री को लैंडफिल में जाने से रोकना है, जिससे दोबारा उपयोगी सामग्री, खाद या ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। बल्क वेस्ट जनरेटर की भी जिम्मेदारी प्रतिदिन 100 किलो या उससे अधिक कचरा उत्पन्न करने वाली संस्थाओं समेत निर्धारित मानकों के बल्क वेस्ट जनरेटर को अपने कचरे के संग्रहण, परिवहन और प्रोसेसिंग की पर्यावरणीय व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। इसके अलावा स्थानीय निकायों को कचरा प्रबंधन से जुड़े कार्यों के जरिए कार्बन क्रेडिट हासिल करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है। पुराने कचरा डंप साइटों की मैपिंग और मूल्यांकन के बाद बायोमाइनिंग और बायोरेमेडिएशन करने का प्रावधान भी नए नियमों में शामिल है। अब तैयार होगा पेनाल्टी का ड्राफ्ट संचालक, नगरीय प्रशासन नीलेश महादेव क्षीरसागर के अनुसार, नियमों के तहत पेनाल्टी तय करने के लिए ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। ड्राफ्ट तैयार होने और उसका नोटिफिकेशन जारी होने के बाद प्रदेश के नगरीय निकायों में उसी के आधार पर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल नए नियम लागू होने के बावजूद जुर्माने की दर तय नहीं होने से नगरीय निकायों में इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर की पेनाल्टी व्यवस्था का इंतजार है।

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छत्तीसगढ़ में बढ़ सकते हैं मतदाताओं के नाम, छूटे वोटरों और नए युवाओं के लिए चलेगा विशेष अभियान

छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची से छूटे पात्र लोगों और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद पात्र मतदाताओं का नाम सूची में शामिल करने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अभियान के दौरान बूथ लेवल अधिकारी (BLO) वर्तमान मतदाता सूची का प्री-SIR सूची से मिलान करेंगे। इस प्रक्रिया में ऐसे मतदाताओं की पहचान की जाएगी, जिनका नाम पहले की मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन मौजूदा सूची में नहीं है। पहचान के बाद BLO संबंधित लोगों के घर पहुंचकर उनके नाम और पात्रता की स्थिति का सत्यापन करेंगे। पात्र पाए जाने पर फॉर्म-6 से जुड़ेगा नाम सत्यापन में पात्र पाए जाने वाले लोगों का नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 के माध्यम से आवेदन कराया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने BLO को प्रत्येक सप्ताह करीब 20 से 25 ऐसे मतदाताओं तक पहुंचने और लगभग एक महीने के भीतर इस प्रक्रिया को पूरा करने का लक्ष्य दिया है। 18 साल पूरे कर चुके युवाओं पर भी रहेगा ध्यान घर-घर सत्यापन के दौरान उन युवाओं की भी पहचान की जाएगी, जो 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं और मतदान के लिए पात्र हैं, लेकिन अभी तक उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं हुआ है। ऐसे नए मतदाताओं से भी फॉर्म-6 भरवाकर पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। निर्वाचन आयोग के अनुसार मतदाता पंजीकरण एक निरंतर प्रक्रिया है। पात्र व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत कभी भी अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। राजनीतिक दलों के बूथ एजेंटों को भी मिलेगी जानकारी BLO द्वारा तैयार की जाने वाली बूथवार जानकारी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) के साथ भी साझा की जाएगी। फॉर्म-6 और सत्यापन से संबंधित रिपोर्ट निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) को भेजी जाएगी, जहां नियमानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी होगी। विशेष कैंप और वंचित वर्गों पर रहेगा फोकस अभियान के तहत बूथ स्तर पर विशेष शिविर भी आयोजित किए जाएंगे। रैन बसेरों, मजदूर बस्तियों, बेघर लोगों और अन्य वंचित वर्गों के पात्र व्यक्तियों को मतदाता सूची में शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अभियान को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्वीप गतिविधियों के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जाएगा। वहीं मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा करेंगे।

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बिलासपुर में 1618 शिक्षक गैरहाजिर मिले, अब डिजिटल निगरानी से होगी हाजिरी

बिलासपुर। जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर डिजिटल निगरानी में बड़ी संख्या में शिक्षक गैरहाजिर पाए गए हैं। विद्या समीक्षा केंद्र के जरिए की गई निगरानी में बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर और कोटा ब्लॉक के स्कूलों में कुल 1618 शिक्षक बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित मिले। आंकड़ों के मुताबिक, सबसे अधिक 659 शिक्षक बिल्हा ब्लॉक में गैरहाजिर पाए गए। वहीं मस्तूरी में 384, तखतपुर में 323 और कोटा ब्लॉक में 252 शिक्षक अनुपस्थित मिले। डिजिटल निगरानी के दौरान सामने आए आंकड़ों के बाद स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति को लेकर सवाल उठे हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ने की बात सामने आई है। निगरानी में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में भी कुछ शिक्षक अनुपस्थित पाए गए। अब ऐप के जरिए दर्ज होगी हाजिरी जिला शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार पांडेय के अनुसार, अब शिक्षकों की उपस्थिति डिजिटल माध्यम से दर्ज करने की व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके तहत स्कूल की निर्धारित 100 मीटर की सीमा में पहुंचने पर ही ऐप के माध्यम से हाजिरी दर्ज की जा सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक, शिक्षकों की उपस्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और इसी रिकॉर्ड के आधार पर वेतन भुगतान की प्रक्रिया की जाएगी। यदि निर्धारित प्रक्रिया के तहत हाजिरी दर्ज नहीं होती है, तो संबंधित शिक्षक के वेतन पर कार्रवाई की जा सकती है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति की निगरानी करना और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने से रोकना बताया गया है।

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शिवराज सिंह चौहान कल पहुंचेंगे छत्तीसगढ़, सक्ती में 122 करोड़ के विकास कार्यों की देंगे सौगात

रायपुर। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान 11 सितंबर को छत्तीसगढ़ के दौरे पर रहेंगे। अपने प्रवास के दौरान वे सक्ती जिले में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां करीब 122 करोड़ रुपए की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया जाएगा। कार्यक्रम में आवास योजना के लाभार्थियों के लिए भी विशेष आयोजन होगा। इस दौरान करीब 2 लाख परिवारों के गृह प्रवेश का कार्यक्रम प्रस्तावित है। बड़ी संख्या में लाभार्थियों और स्थानीय लोगों के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। विकास परियोजनाओं की मिलेगी सौगात सक्ती में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पूर्ण हो चुके विकास कार्यों का लोकार्पण किया जाएगा, जबकि नई परियोजनाओं के लिए भूमिपूजन होगा। इन कार्यों से क्षेत्र में सड़क, आवास, बुनियादी सुविधाओं और अन्य विकास गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री के दौरे को लेकर स्थानीय प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित विभागों को जिम्मेदारियां दी गई हैं। 2 लाख परिवारों के गृह प्रवेश पर फोकस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण करीब 2 लाख परिवारों का गृह प्रवेश होगा। आवास योजना के तहत घर मिलने वाले हितग्राही इस आयोजन में शामिल होंगे। गृह प्रवेश कार्यक्रम के जरिए लाभार्थियों को उनके नए आवास का औपचारिक रूप से प्रवेश कराया जाएगा। शिवराज सिंह चौहान के छत्तीसगढ़ दौरे को राज्य में विकास और केंद्र की योजनाओं के क्रियान्वयन से जोड़कर भी देखा जा रहा है। सक्ती में होने वाले कार्यक्रम में प्रदेश के जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के भी मौजूद रहने की संभावना है।

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बिलासपुर में सरकारी जमीन पर बने दो मंजिला मकान पर चला बुलडोजर, 3 नोटिस के बाद निगम की कार्रवाई

बिलासपुर में सरकारी जमीन पर किए गए कथित अवैध कब्जे के खिलाफ नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई की है। अरपा पार बंधवापारा स्थित सतबहिनया मंदिर के पास सरकारी जमीन पर बने दो मंजिला मकान को नगर निगम की टीम ने बुलडोजर चलाकर ढहा दिया। नगर निगम के अनुसार, मकान मालिक रंजीत कश्यप को निर्माण से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तीन बार नोटिस जारी किया गया था। तय समय के भीतर आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं किए गए और नोटिस का संतोषजनक जवाब भी नहीं मिला। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर निगम ने निर्माण हटाने की कार्रवाई की। जोन कमिश्नर रंजना अग्रवाल के मुताबिक, सतबहिनया मंदिर बंधवापारा क्षेत्र में सरकारी जमीन पर दो मंजिला मकान का निर्माण किया गया था। निगम की ओर से लगातार नोटिस देकर जमीन और निर्माण से जुड़े दस्तावेज मांगे गए, लेकिन दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे के निर्देश पर जोन क्रमांक-8 और अतिक्रमण शाखा की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। टीम ने बुलडोजर की मदद से दो मंजिला निर्माण को पूरी तरह ढहा दिया और जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया। नगर निगम अधिकारियों ने कहा कि सरकारी जमीन या निगम की संपत्ति पर अवैध कब्जा और बिना अनुमति निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शहर में ऐसे मामलों की जांच कर नियमों के अनुसार कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। निगम ने अधिकारियों को सरकारी जमीन पर होने वाले अवैध निर्माण और अतिक्रमण की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य मामलों में भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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