Religion

रायपुर में हनुमान मंदिर तोड़ने पर बवाल, निगम कार्रवाई के विरोध में जोन कार्यालय पहुंचे लोग; पार्षद के खिलाफ नारेबाजी

रायपुर के कांपा-मोवा क्षेत्र में वर्षों पुराने हनुमान मंदिर को नगर निगम द्वारा हटाए जाने को लेकर विवाद बढ़ गया है। मंदिर हटाने की कार्रवाई के विरोध में स्थानीय नागरिकों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने नगर निगम जोन कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने मंदिर हटाने की कार्रवाई का विरोध जताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। इस दौरान कुछ लोगों ने स्थानीय वार्ड पार्षद के खिलाफ नारेबाजी भी की। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर लंबे समय से क्षेत्र के लोगों की आस्था का केंद्र रहा है। अचानक की गई कार्रवाई से लोगों में नाराजगी है और वे मंदिर को लेकर प्रशासन से पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। फिलहाल नगर निगम जोन कार्यालय में विरोध प्रदर्शन जारी है। मौके पर स्थिति को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की निगरानी बनी हुई है।

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GOVERNMENT, Raipur, Religion

रायपुर में युवती ने लगाया पहचान छिपाकर शादी का आरोप, धर्म परिवर्तन के दबाव और प्रताड़ना की शिकायत

रायपुर में एक युवती ने युवक पर अपनी पहचान छिपाकर प्रेम संबंध बनाने, शादी करने और बाद में धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है। युवती की शिकायत के बाद पुलिस मामले की जांच कर रही है। यह मामला पंडरी थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पीड़िता के अनुसार, उसकी मुलाकात इंस्टाग्राम पर खुद को “सोनू” बताने वाले युवक से हुई थी। दोनों के बीच बातचीत के बाद संबंध बने और बाद में शादी हुई। युवती का आरोप है कि शादी के बाद उसे पता चला कि युवक का नाम “सुफरान” है और उसने पहले अपनी धार्मिक पहचान छिपाई थी। युवती ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद उस पर बुर्का पहनने, नमाज पढ़ने, आधार कार्ड में नाम बदलवाने और धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया गया। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई और मंदिर जाने तथा हिंदू त्योहार मनाने से रोका गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि ससुराल पक्ष ने उसके हाथ पर बने टैटू को मिटाने के लिए उसे जलाने और एसिड जैसी सामग्री से रगड़ने की कोशिश की। युवती ने यह भी दावा किया कि बेटे के जन्म के दिन उसे फिनाइल पिलाई गई थी। पीड़िता का कहना है कि बाद में आरोपी एक अन्य मामले में जेल चला गया। जेल से बाहर आने के बाद उसने फिर साथ रहने का दबाव बनाया और मना करने पर सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक पोस्ट करने तथा जान से मारने की धमकी दी। युवती ने 7 जुलाई 2026 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और अपनी व अपने बच्चे की सुरक्षा के साथ न्याय की मांग की है। वहीं, आरोपी पक्ष ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि युवती ने अपनी इच्छा से शादी की थी और उस पर किसी प्रकार का धर्म परिवर्तन का दबाव नहीं बनाया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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Crime, Raipur, Religion

रामभद्राचार्य पर बयान से विवाद गरमाया, बिलासपुर में चरणदास महंत का पुतला दहन

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत द्वारा जगद्गुरु रामभद्राचार्य को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक माहौल तनावपूर्ण हो गया है। मामले के विरोध में शनिवार को हिंदू सेना के कार्यकर्ताओं ने देवकीनंदन चौक पर प्रदर्शन करते हुए महंत का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सूरजपुर में आयोजित रामभद्राचार्य की कथा को लेकर चरणदास महंत ने आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे हिंदू समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस पर संतों और धार्मिक गुरुओं के अपमान का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। हिंदू सेना के पदाधिकारियों ने कहा कि राजनीतिक दलों के नेता हिंदू समाज के वोट से सत्ता में आते हैं, लेकिन संतों का अपमान स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता लगातार सनातन धर्म के संतों को निशाना बनाते हैं। हिंदूवादी नेता राम सिंह ठाकुर ने चेतावनी देते हुए कहा कि चरणदास महंत को रामभद्राचार्य से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि महंत बिलासपुर आते हैं तो उनका काले झंडों से विरोध किया जाएगा और शहर में प्रवेश का विरोध किया जाएगा। वहीं, यह विवाद तब और बढ़ गया जब चरणदास महंत ने कहा था कि वे रामभद्राचार्य को जगद्गुरु नहीं मानते और कुछ कथावाचकों को उन्होंने फर्जी बताया था, जो लोगों को गुमराह कर रहे हैं। इस बयान के बाद मामला और अधिक राजनीतिक व धार्मिक बहस का विषय बन गया है।

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भूपेश बघेल का तंज- धीरेंद्र शास्त्री से पेट्रोल-डीजल सस्ता कराने की पर्ची निकलवाएं

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं और धर्म संतों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और जगद्गुरु रामभद्राचार्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। बिलासपुर दौरे के दौरान भूपेश बघेल ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू का जिक्र करते हुए कहा कि वे गौमांस खाते हैं, फिर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या रामभद्राचार्य इसे सही मानते हैं। भूपेश बघेल ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर तंज कसते हुए कहा कि अगर पर्ची निकालकर लोगों की समस्याएं बताई जाती हैं, तो पेट्रोल-डीजल के दाम कम कराने की भी पर्ची निकलवानी चाहिए। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने भी रामभद्राचार्य को भाजपा का प्रचारक बताते हुए कहा था कि वे उन्हें जगद्गुरु नहीं मानते। वहीं कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत ने कहा कि धर्म की आड़ में राजनीति नहीं होनी चाहिए और जनता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने चिरमिरी में आयोजित रामकथा के दौरान कहा कि संत समाज और अखाड़ों ने उन्हें जगद्गुरु की मान्यता दी है। उन्होंने कहा कि कोई भी उनके जगद्गुरुत्व को चुनौती देगा तो वह उसे स्वीकार नहीं करेंगे। रामभद्राचार्य ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्हें भगवान राम से प्रेम करने वालों से परेशानी है, उन्हें यह सब अच्छा नहीं लग रहा। उन्होंने यह भी कहा कि जो राम से प्रेम करेगा, उसे उनका आशीर्वाद मिलेगा।

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Political, Religion

संतों पर कांग्रेस नेताओं के बयान से छिड़ा सियासी विवाद, रामभद्राचार्य से लेकर धीरेंद्र शास्त्री तक गरमाई राजनीति

छत्तीसगढ़ में संतों और कथावाचकों को लेकर एक बार फिर राजनीति तेज हो गई है। Charan Das Mahant के बयान के बाद धर्म और राजनीति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कोरिया जिले के चिरमिरी में आयोजित रामकथा के दौरान Jagadguru Rambhadracharya ने मंच से कहा कि यदि कोई उनके जगद्गुरु होने पर सवाल उठाएगा तो वे उसे स्वीकार नहीं करेंगे। उनका यह बयान नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें महंत ने कहा था कि वे रामभद्राचार्य को जगद्गुरु नहीं मानते और उन्हें भाजपा का प्रचारक मानते हैं। इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। भाजपा ने इसे सनातन संस्कृति और संत समाज का अपमान बताया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने कहा कि टिप्पणी राजनीतिक संदर्भ में की गई थी। छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह पहला अवसर नहीं है जब किसी संत या कथावाचक को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो। इससे पहले भी कई धार्मिक मंच राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन चुके हैं। साल 2025 में भिलाई में आयोजित Dhirendra Krishna Shastri की कथा के दौरान भी बड़ा विवाद सामने आया था। पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने धीरेंद्र शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू समाज को जोड़ने की बात कही थी। बाद में भूपेश बघेल ने उन्हें भाजपा का एजेंट बताया था। हालांकि इससे पहले 2023 में रायपुर में आयोजित बागेश्वर धाम कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने सार्वजनिक मंच से धीरेंद्र शास्त्री को भगवान स्वरूप बताया था। कांग्रेस और संत समाज के रिश्ते हमेशा टकरावपूर्ण नहीं रहे हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए भूपेश बघेल कई धार्मिक आयोजनों में शामिल हुए थे। वे Pradeep Mishra की शिव महापुराण कथा में भी पहुंचे थे और मंच साझा किया था। इसके अलावा वे Riteshwar Maharaj से भी मुलाकात कर चुके हैं। इधर, सांसद Jyotsna Mahant ने कहा कि धर्म की आड़ में राजनीति नहीं होनी चाहिए और जनप्रतिनिधियों का सबसे बड़ा धर्म जनता की सेवा है। वहीं भाजपा सांसद Santosh Pandey ने चरणदास महंत के बयान को सनातन विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े संतों का अपमान कांग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है। भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि धार्मिक मंचों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए नहीं होना चाहिए।

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Religion

डोंगरगढ़ बम्लेश्वरी मंदिर में मुर्गे की बलि से विवाद गहराया, बैगा समाज के राज बैगा गिरफ्तार, आंदोलन की चेतावनी

डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर एक बार फिर विवादों में घिर गया है। कथित तौर पर मंदिर परिसर में मुर्गे की बलि और बैगा परंपरा से पूजा को लेकर हुए विवाद के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना में राज बैगा किशोर नेताम की गिरफ्तारी के बाद आदिवासी समाज में नाराज़गी बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार 19 मई को मंदिर के ऊपरी परिसर में पुराने रोपवे के पास एक चट्टान को ‘गढ़ माता’ मानकर बैगा परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की गई थी। इसी दौरान मुर्गे की बलि देने का आरोप सामने आया, जिसके बाद स्थिति विवादित हो गई। घटना के बाद मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष Manoj Agrawal ने डोंगरगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि इस घटना से मंदिर की धार्मिक मर्यादा भंग हुई है और श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर परिसर में केवल सनातन वैदिक परंपरा के अनुसार ही पूजा की अनुमति है और किसी भी प्रकार की बलि प्रथा स्वीकार नहीं की जा सकती। वहीं दूसरी ओर आदिवासी और गोंड समाज ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। समाज का कहना है कि मां बम्लेश्वरी धाम से उनकी आस्था और बैगा परंपरा सदियों से जुड़ी हुई है और इसे अपराध मानकर कार्रवाई करना गलत है। आदिवासी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस पूरे मामले पर डोंगरगढ़ एसडीओपी Kesari Nandan Nayak ने बताया कि 19 मई को अनुमति लेकर आदिवासी समाज के कुछ लोगों ने पूजा की थी। प्रशासन की अनुमति के बाद चट्टान को गढ़ माता मानकर पूजा शुरू की गई थी। इसी दौरान कथित रूप से मुर्गे की बलि दी गई। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट समिति की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आरोपी किशोर नेताम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है। फिलहाल गिरफ्तारी के बाद विवाद और गहरा गया है और आदिवासी समाज में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

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157 साल पुराने बांके बिहारी मंदिर में भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव, शोभायात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur के नयापारा स्थित ऐतिहासिक Banke Bihari Temple में गुरुवार को भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान सुबह पुराने मंदिर परिसर से भगवान की विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भक्त भजन-कीर्तन करते हुए पूरे उत्साह के साथ यात्रा में शामिल नजर आए। शोभायात्रा एडवर्ड रोड, चिकनी मंदिर, कोतवाली चौक और सदर बाजार मार्ग से होते हुए पेठा लाइन स्थित नव-निर्मित मंदिर परिसर पहुंची। यहां वैदिक रीति-रिवाज और मंत्रोच्चार के साथ भगवान बांके बिहारी समेत सात विग्रहों की विधिवत स्थापना की गई। कार्यक्रम में यज्ञाचार्य Om Prakash Joshi के मार्गदर्शन में भगवान बांके बिहारी, शिव पंचायतन, भवानी शंकर, दुर्गा माता, बजरंगबली, लक्ष्मी माता और अग्रसेन माधवी देवता की प्रतिमाओं का जलाभिषेक किया गया। इसके साथ ही 56 प्रकार के द्रव्यों से विशेष अभिषेक भी संपन्न कराया गया। नेत्रोन्मीलन और आकर्षक श्रृंगार के बाद मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर ट्रस्ट की ओर से विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष Ashok Agrawal ने बताया कि यह मंदिर करीब 157 वर्ष पुराना है और इसकी स्थापना वर्ष 1870 में बैजू अग्रवाल ने कराई थी। उन्होंने कहा कि मंदिर का पुनर्निर्माण राजस्थानी वास्तुकला शैली में कराया गया है। भगवान बांके बिहारी की लगभग 5 फीट ऊंची प्रतिमा सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां मकराना के सफेद संगमरमर से जयपुर में तैयार कराई गई हैं। मंदिर के निर्माण और सौंदर्यीकरण का कार्य पिछले दो वर्षों से लगातार चल रहा था। महोत्सव के दौरान राजस्थान के सालासर धाम से विशेष लड्डू मंगवाकर भगवान को भोग लगाया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं को ड्राई फ्रूट और फलों से युक्त प्रसाद वितरित किया गया। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत कलश यात्रा, बेदी पूजा, अधिवास और शोभायात्रा जैसे धार्मिक कार्यक्रम 8 मई से लगातार आयोजित किए जा रहे थे। मंदिर ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से मंदिर में नियमित दर्शन और धार्मिक आयोजनों में शामिल होने की अपील की है।

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कोरबा में मंदिर में तोड़फोड़ और आगजनी, शिवलिंग उखाड़कर तालाब में फेंका, आरोपी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक युवक द्वारा मंदिर परिसर में तोड़फोड़ और आगजनी की गंभीर घटना सामने आई है। आरोपी ने शिव मंदिर में आग लगाने के बाद हनुमान मंदिर का ताला तोड़कर वहां भी आगजनी की और शिवलिंग को उखाड़कर तालाब में फेंक दिया। यह मामला कटघोरा थाना क्षेत्र के जटगा चौकी इलाके का है। जानकारी के अनुसार, युवक ने पहले शिव मंदिर को निशाना बनाया और वहां आग लगा दी। इसके बाद वह पास में स्थित हनुमान मंदिर पहुंचा, जहां ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया और वहां भी नुकसान पहुंचाया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इससे पहले भी कुछ महीनों पूर्व मंदिर परिसर में इसी तरह की तोड़फोड़ की घटना हो चुकी है, जिससे इलाके में चिंता का माहौल बना हुआ है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को घटनास्थल से ही गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान बैकुंठपुर निवासी रोहित खैरवार के रूप में हुई है, जो जटगा में अपने रिश्तेदार के यहां आया हुआ था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। प्रारंभिक जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि घटना के समय आरोपी नशे में था या उसकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी। फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

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GGU में लॉ स्टूडेंट्स के बीच हिंसक झड़प: आपत्तिजनक चैट्स वायरल, 4 छात्रों पर FIR

गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी (GGU) में लॉ विभाग के छात्रों के बीच विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद मामला इतना बढ़ गया कि छात्रों के बीच मारपीट हो गई। यह घटना बिलासपुर के कोनी थाना क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार, कुछ छात्रों के बीच इंस्टाग्राम पर हुई बातचीत में भगवान भगवान राम, परशुराम और डॉ. भीमराव अंबेडकर को लेकर विवादित टिप्पणियां की गईं। इसके बाद कैंपस में तनाव बढ़ गया। शुक्रवार रात जैसे ही ये चैट्स सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, बड़ी संख्या में छात्र स्वामी विवेकानंद हॉस्टल के सामने इकट्ठा हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति बिगड़ गई और छात्रों के बीच हाथापाई होने लगी। घटना के दौरान यूनिवर्सिटी के सुरक्षा कर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक झड़प हो चुकी थी। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें छात्र आपस में मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। मामले में चार छात्रों—प्रियांशु सिंह, कौस्तुभ मणि पांडेय, अंशुमान सिंह और तूफान चंद्रनायक—के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने भी इस मामले में थाने में शिकायत दी है। साथ ही सभी आरोपित छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया है। इस घटना के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी परिसर का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बताया कि अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेते हुए जांच समिति गठित कर दी गई है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि हाल के समय में कैंपस में कई विवाद सामने आ चुके हैं, जिससे व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।

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रायपुर में लेंसकार्ट शोरूम पर हंगामा, कर्मचारियों को लगाया तिलक; विवाद के बाद कंपनी की सफाई

रायपुर में एक लेंसकार्ट शोरूम के भीतर कथित तौर पर एक धार्मिक संगठन के कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर कर्मचारियों के साथ विवाद खड़ा कर दिया। बताया जा रहा है कि कार्यकर्ताओं ने स्टाफ से उनके नाम पूछे और फिर उन्हें तिलक लगाने के लिए कहा। साथ ही कर्मचारियों से यह भी कहा गया कि वे तिलक लगाकर काम करें और अपनी धार्मिक पहचान सार्वजनिक रूप से बताएं। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक महिला शोरूम के अंदर कर्मचारियों से बातचीत करते हुए दिखाई देती है और धार्मिक पहचान को लेकर अपनी बात रखती है। उसने यह भी कहा कि अगर अन्य धर्मों के लोग अपने प्रतीकों का पालन करते हैं, तो हिंदू कर्मचारियों को भी ऐसा करना चाहिए। मामले को लेकर यह भी दावा किया गया कि संबंधित कंपनी में कुछ धार्मिक प्रतीकों को पहनने पर रोक थी, जिसे लेकर विरोध जताया गया। महिला ने खुद को कंपनी की ग्राहक बताते हुए कहा कि वह अब इस ब्रांड का बहिष्कार करेंगी। विवाद बढ़ने के बाद कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रतिक्रिया जारी की। कंपनी ने स्पष्ट किया कि वह सभी धर्मों और सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान करती है। नई गाइडलाइन के अनुसार, तिलक, बिंदी, सिंदूर, कलावा, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे प्रतीकों की अनुमति दी गई है। कंपनी ने यह भी कहा कि वायरल हुआ दस्तावेज पुराना था और वर्तमान नीति को नहीं दर्शाता। कंपनी के संस्थापक ने भी इस भ्रम के लिए खेद जताते हुए कहा कि किसी भी धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं है। दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब कंपनी की एक पुरानी ग्रूमिंग पॉलिसी का दस्तावेज सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें कुछ धार्मिक प्रतीकों को लेकर निर्देश दिए गए थे। इसके बाद ऑनलाइन बहिष्कार की मांग उठने लगी। कंपनी का कहना है कि वह भारत में संचालित एक ब्रांड है, जहां विभिन्न परंपराओं और संस्कृतियों का सम्मान किया जाता है। साथ ही भविष्य में नीतियों को और स्पष्ट और समावेशी बनाने का आश्वासन भी दिया गया है। कॉर्पोरेट जगत में ग्रूमिंग पॉलिसी का उद्देश्य कर्मचारियों के पहनावे और व्यवहार के लिए एक समान मानक तय करना होता है, लेकिन भारत जैसे विविधता वाले देश में इसमें सभी धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान बनाए रखना जरूरी माना जाता है।

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