संतों पर कांग्रेस नेताओं के बयान से छिड़ा सियासी विवाद, रामभद्राचार्य से लेकर धीरेंद्र शास्त्री तक गरमाई राजनीति

छत्तीसगढ़ में संतों और कथावाचकों को लेकर एक बार फिर राजनीति तेज हो गई है। Charan Das Mahant के बयान के बाद धर्म और राजनीति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

कोरिया जिले के चिरमिरी में आयोजित रामकथा के दौरान Jagadguru Rambhadracharya ने मंच से कहा कि यदि कोई उनके जगद्गुरु होने पर सवाल उठाएगा तो वे उसे स्वीकार नहीं करेंगे। उनका यह बयान नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें महंत ने कहा था कि वे रामभद्राचार्य को जगद्गुरु नहीं मानते और उन्हें भाजपा का प्रचारक मानते हैं।

इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। भाजपा ने इसे सनातन संस्कृति और संत समाज का अपमान बताया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने कहा कि टिप्पणी राजनीतिक संदर्भ में की गई थी।

छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह पहला अवसर नहीं है जब किसी संत या कथावाचक को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो। इससे पहले भी कई धार्मिक मंच राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन चुके हैं।

साल 2025 में भिलाई में आयोजित Dhirendra Krishna Shastri की कथा के दौरान भी बड़ा विवाद सामने आया था। पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने धीरेंद्र शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू समाज को जोड़ने की बात कही थी। बाद में भूपेश बघेल ने उन्हें भाजपा का एजेंट बताया था।

हालांकि इससे पहले 2023 में रायपुर में आयोजित बागेश्वर धाम कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने सार्वजनिक मंच से धीरेंद्र शास्त्री को भगवान स्वरूप बताया था।

कांग्रेस और संत समाज के रिश्ते हमेशा टकरावपूर्ण नहीं रहे हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए भूपेश बघेल कई धार्मिक आयोजनों में शामिल हुए थे। वे Pradeep Mishra की शिव महापुराण कथा में भी पहुंचे थे और मंच साझा किया था। इसके अलावा वे Riteshwar Maharaj से भी मुलाकात कर चुके हैं।

इधर, सांसद Jyotsna Mahant ने कहा कि धर्म की आड़ में राजनीति नहीं होनी चाहिए और जनप्रतिनिधियों का सबसे बड़ा धर्म जनता की सेवा है।

वहीं भाजपा सांसद Santosh Pandey ने चरणदास महंत के बयान को सनातन विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े संतों का अपमान कांग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है।

भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि धार्मिक मंचों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए नहीं होना चाहिए।

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