Janjgir Champa

मुर्दाघर में चोरी का सनसनीखेज मामला, मासूम के शव से गायब हुआ सोने का लॉकेट

जांजगीर-चांपा जिले में एक दर्दनाक हादसे के बाद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बिर्रा-शिवरीनारायण मार्ग स्थित केरा गांव में तेज रफ्तार कैप्सूल वाहन की चपेट में आने से तीन वर्षीय हर्ष श्रीवास की मौत हो गई। दुर्घटना के बाद चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया। बताया जा रहा है कि हर्ष अपने पिता मनोज कुमार श्रीवास की सैलून दुकान के बाहर खड़ा था, तभी तेज गति से आ रहे वाहन ने उसे टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल बच्चे को तत्काल नवागढ़ सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को रातभर अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि जब बच्चे को अस्पताल लाया गया था, तब उसके गले में सोने का लॉकेट मौजूद था, लेकिन पोस्टमार्टम के समय वह गायब मिला। इस घटना से परिवार में आक्रोश और दुख का माहौल है। परिजनों को शक है कि अस्पताल या मोर्चरी परिसर में किसी ने लॉकेट चोरी कर लिया। पुलिस ने सड़क हादसे का मामला दर्ज कर फरार वाहन और चालक की तलाश शुरू कर दी है। साथ ही लॉकेट गायब होने के मामले में अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

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जांजगीर में दिल दहला देने वाली वारदात, एक ही परिवार के 4 लोगों की कुल्हाड़ी से हत्या

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के भंवतरा गांव से एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां अज्ञात हमलावरों ने एक ही परिवार के चार सदस्यों की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी। इस वारदात ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। जानकारी के अनुसार, बुधवार देर रात यह घटना उस समय हुई जब परिवार के सदस्य अपने निर्माणाधीन मकान में खाट पर सो रहे थे। मृतकों में 70 वर्षीय मेदनी प्रसाद कश्यप, उनकी पत्नी कांति बाई (65), नातिन मोगरा (25) और नाती पीतांबर (17) शामिल हैं। चारों के शव खून से लथपथ हालत में खाट पर पड़े मिले। घटना का खुलासा गुरुवार सुबह हुआ जब मकान में काम करने वाला मिस्त्री वहां पहुंचा। उसने चारों को मृत अवस्था में देखा और तुरंत गांव के सरपंच को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस को जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने घटनास्थल से वारदात में इस्तेमाल कुल्हाड़ी भी बरामद कर ली है। शुरुआती जांच में संपत्ति विवाद को हत्या की वजह माना जा रहा है। पुलिस ने शक के आधार पर परिवार के कुछ सदस्यों और पड़ोसियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि मृतक परिवार के एक सदस्य की करीब 16-17 साल पहले भी हत्या हो चुकी थी, जिससे पुरानी रंजिश की आशंका और मजबूत हो रही है। पुलिस का कहना है कि इस वारदात में एक से ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है। फिलहाल पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश जारी है। इस दिल दहला देने वाली घटना से पूरा गांव सदमे में है।

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जांजगीर में फूड पॉइजनिंग का मामला: तरबूज और चिकन खाने के बाद बच्चे की मौत, 3 अस्पताल में भर्ती

जांजगीर-चांपा जिले में कथित फूड पॉइजनिंग का गंभीर मामला सामने आया है। तरबूज और चिकन खाने के बाद एक ही परिवार के चार बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इलाज के दौरान एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चों का अस्पताल में इलाज जारी है। घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम घुरकोट की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, पोड़ी दलहा निवासी अखिलेश धीवर (15), अवरीद निवासी श्री धीवर (4), खटोला निवासी पिंटू धीवर (12) और कोटगढ़ निवासी हितेश धीवर (13) अपने परिजनों के साथ मामा के घर शादी समारोह में शामिल होने घुरकोट आए हुए थे। परिवार शादी के बाद पिछले तीन-चार दिनों से वहीं रुका हुआ था। बताया जा रहा है कि रविवार सुबह तरबूज काटकर रखा गया था, जिसे बच्चों ने दोपहर में खाया। इसके बाद रात में सभी ने घर में बना चिकन भी खाया। कुछ समय बाद चारों बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें उल्टी, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी जैसी शिकायतें होने लगीं। अखिलेश धीवर की हालत सबसे ज्यादा खराब हो गई। सांस लेने में दिक्कत और लगातार तबीयत बिगड़ने पर परिजन पहले उसे गांव के एक निजी डॉक्टर के पास ले गए। हालत में सुधार नहीं होने पर सोमवार सुबह एम्बुलेंस से जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। वहीं, बाकी तीन बच्चों को भी जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। सिविल सर्जन डॉ. कुजूर के अनुसार, काफी देर तक रखा हुआ कटा तरबूज खाने से संक्रमण फैलने की आशंका है। प्रारंभिक जांच में फूड पॉइजनिंग की बात सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन मामले की जांच कर रहे हैं ताकि बीमारी की असली वजह का पता लगाया जा सके।

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सक्ती वेदांता प्लांट हादसा: अपनों की तलाश में रातभर भटके परिजन, 22 घंटे बाद जारी हुई मृतकों की सूची

सक्ती स्थित वेदांता प्लांट में हुए भीषण बॉयलर विस्फोट के बाद हालात बेहद दर्दनाक रहे। हादसे में 17 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। घटना के बाद सबसे ज्यादा परेशानी उन परिजनों को झेलनी पड़ी, जो अपने अपनों की तलाश में पूरी रात अस्पतालों और सड़कों पर भटकते रहे। जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा ब्लॉक के हरदी विशाल गांव निवासी सनी कुमार अनंत अपने भाई की तलाश में शाम से लेकर देर रात तक कई अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे। रात के करीब साढ़े तीन बजे तक उन्होंने 5 से 6 अस्पतालों में खोजबीन की, यहां तक कि ICU तक जाकर देखा, लेकिन कहीं भी उनके भाई का पता नहीं चला। सनी के भाई रामेश्वर महिलांगे वेदांता प्लांट में बॉयलर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे। उनकी उम्र करीब 28-29 साल थी और वे शादीशुदा थे, उनके एक छोटा बच्चा भी है। हादसे के दिन उनका फोन बंद आ रहा था, जिसके बाद उनके साथियों से घटना की जानकारी मिली। परिजन प्लांट भी पहुंचे, लेकिन वहां गेट बंद मिला और प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बाहर भीड़ जमा थी, लेकिन किसी अधिकारी ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट नहीं की। करीब 12 घंटे तक भूखे-प्यासे परिजन अस्पतालों में अपने परिजनों को ढूंढते रहे। जिंदल अस्पताल में अधिक घायलों के होने की सूचना मिली, लेकिन वहां भी शुरू में अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। काफी अनुरोध के बाद ICU में जाकर देखने की इजाजत मिली, लेकिन वहां भी सनी को अपने भाई का कोई सुराग नहीं मिला। अस्पताल में भर्ती ज्यादातर लोग गंभीर रूप से झुलसे हुए थे, जिनकी पहचान करना भी मुश्किल था। आखिरकार बुधवार सुबह सनी को उनके भाई की मौत की सूचना मिली, जबकि मृतकों की आधिकारिक सूची दोपहर में जारी की गई। इस दौरान एक और समस्या सामने आई, जब प्लांट प्रबंधन की ओर से ठहरने की व्यवस्था के नाम पर होटल भेजे गए परिजनों से वहां पैसे मांगे गए। काफी बहस के बाद ही उन्हें कमरा मिल पाया। हादसे के बाद प्रशासन और प्रबंधन की लापरवाही भी उजागर हुई। मृतकों की पहचान और सूची जारी करने में करीब 22 घंटे का समय लगा, जिससे परिजन लगातार परेशान होते रहे। इतना ही नहीं, रात करीब 12 बजे तक प्लांट परिसर में एंबुलेंस में शव रखे होने की बात भी सामने आई। आशंका जताई गई कि बाहर मौजूद भीड़ के उग्र होने के डर से शवों को तुरंत बाहर नहीं लाया गया। बाद में भीड़ कम होने पर उन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। यह हादसा न केवल औद्योगिक सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि आपदा प्रबंधन और सूचना व्यवस्था की गंभीर कमियों को भी उजागर करता है।

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