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CGPSC भर्ती घोटाले में जांच तेज, पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी न्यायिक हिरासत में

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले की जांच में नया मोड़ आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी को विशेष अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब जांच एजेंसी कथित मनी लॉन्ड्रिंग, वित्तीय लेन-देन और मनी ट्रेल से जुड़े पहलुओं की विस्तृत जांच करेगी। इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में टामन सोनवानी और एक कारोबारी को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान कुछ अभ्यर्थियों तक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचाया गया। आरोप है कि इस प्रक्रिया में सरकारी आवास और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। इन आरोपों की जांच अभी जारी है और अदालत में इनका परीक्षण होना बाकी है। CGPSC की 2021 राज्य सेवा परीक्षा के तहत 171 पदों पर भर्ती की गई थी। अंतिम चयन सूची जारी होने के बाद चयन प्रक्रिया में अनियमितता, पक्षपात और प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे थे। मामले की जांच अब CBI और ED दोनों एजेंसियां अलग-अलग पहलुओं से कर रही हैं। आने वाले दिनों में कई लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए जाने की संभावना है।

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छत्तीसगढ़ में 57 हजार शिक्षक पद खाली, जर्जर स्कूल भवनों को लेकर कांग्रेस का सरकार पर हमला

छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का कहना है कि नया शिक्षा सत्र शुरू हुए लगभग दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल पर्याप्त शिक्षकों और आवश्यक संसाधनों के बिना संचालित हो रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि इसका सबसे अधिक असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने आरोप लगाया कि राज्य में करीब 57 हजार शिक्षकों के पद रिक्त हैं। उनका कहना है कि भाजपा सरकार ने अपने ढाई साल के कार्यकाल में नियमित रूप से एक भी नए शिक्षक की भर्ती नहीं की। कांग्रेस के अनुसार, संविलियन प्रक्रिया के दौरान कई शिक्षक पद समाप्त कर दिए गए और 10,400 से अधिक स्कूल भी बंद कर दिए गए। कांग्रेस ने शिक्षक भर्ती को लेकर सरकार की घोषणाओं पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने विधानसभा में 35 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की थी, जबकि वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने वर्ष 2025 के बजट में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती का ऐलान किया था। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी 5 हजार शिक्षकों की भर्ती जल्द शुरू करने की बात कही थी, लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि नया शिक्षा सत्र शुरू होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी। कांग्रेस का यह भी दावा है कि हर महीने सैकड़ों शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन उनकी जगह नियमित नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं। पार्टी नेता शुक्ला ने कहा कि केवल रायपुर जिले के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में ही 250 से अधिक शिक्षक पद खाली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम के कई स्कूलों में सहायक शिक्षक ही व्याख्याता की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। पार्टी ने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया है। कांग्रेस के अनुसार, प्रदेश के 12,560 से अधिक स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं और बारिश के दौरान कई स्कूलों की छतों से पानी टपकता है। इसके अलावा अनेक स्कूलों में स्वच्छ पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी अभाव है। कांग्रेस का कहना है कि इन समस्याओं के कारण कई छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और कुछ मामलों में छात्राओं को पढ़ाई छोड़ने तक की नौबत आ रही है। कांग्रेस ने राज्य सरकार से शिक्षकों के रिक्त पदों पर जल्द नियमित भर्ती करने, जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत कराने और सभी सरकारी स्कूलों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। नोट: इस समाचार में कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए आरोप और दावे शामिल हैं। सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना चाहिए।

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छत्तीसगढ़ में 2027 से बदलेगा स्कूलों का शैक्षणिक सत्र, पहली कक्षा में प्रवेश के लिए न्यूनतम उम्र 6 वर्ष अनिवार्य

छत्तीसगढ़ सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप स्कूल शिक्षा व्यवस्था में अहम बदलाव करने का निर्णय लिया है। नए नियमों के अनुसार वर्ष 2027 से प्रदेश के सभी स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चे की न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित की गई है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही वर्ष 2027 से राज्य में नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू होगा। पहले जहां स्कूल 16 जून से खुलते थे, वहीं अब अप्रैल के पहले दिन से प्रवेश प्रक्रिया और शैक्षणिक गतिविधियां शुरू हो जाएंगी। इस दौरान विद्यार्थियों को किताबें, यूनिफॉर्म और पात्र छात्रों को साइकिल भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद 1 मई से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा। शैक्षणिक सत्र में होगा बदलाव नई व्यवस्था के तहत पूरे प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से 31 मार्च तक संचालित होगा। यह प्रणाली केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप लागू की जाएगी, जिससे सीजी बोर्ड और सीबीएसई स्कूलों के बीच सत्र का अंतर समाप्त हो सके। बदलाव की वजह वर्तमान व्यवस्था में स्कूल जून के मध्य में खुलते हैं और शुरुआती कई सप्ताह तक प्रवेश, पुस्तक वितरण, यूनिफॉर्म और अन्य योजनाओं का लाभ देने की प्रक्रिया चलती रहती है। इससे नियमित पढ़ाई देर से शुरू होती है और कई स्कूलों में जुलाई तक पढ़ाई प्रभावित रहती है। शिक्षा विभाग का मानना है कि नए कैलेंडर से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अधिक समय मिलेगा, पाठ्यक्रम समय पर पूरा होगा और बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में भी सुधार देखने को मिलेगा। आयु सीमा में विशेष छूट यदि कोई बच्चा 1 अप्रैल तक निर्धारित 6 वर्ष की आयु पूरी नहीं करता, लेकिन 1 जुलाई तक उसकी आयु 6 वर्ष हो जाती है, तो उसे अधिकतम तीन महीने की विशेष छूट देकर पहली कक्षा में प्रवेश दिया जा सकेगा। सभी स्कूलों में लागू होगा नियम नई आयु सीमा और शैक्षणिक सत्र की व्यवस्था सरकारी, निजी तथा अनुदान प्राप्त सभी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगी। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर होने वाले प्रवेश भी इसी नियम के अनुसार किए जाएंगे। इन विद्यार्थियों को मिलेगी छूट जो छात्र किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय की प्री-प्राइमरी या केजी शिक्षा पूरी करके पहली कक्षा में प्रवेश ले रहे हैं, उन पर नई आयु सीमा लागू नहीं होगी। ऐसे मामलों में विद्यालय द्वारा जारी टीसी, अंकसूची या स्कोर कार्ड में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। शिक्षा विभाग का उद्देश्य स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से विद्यार्थियों को समय पर किताबें और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा सकेगी तथा सत्र की शुरुआत से ही नियमित पढ़ाई सुनिश्चित होगी।

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रायपुर: IGKV के शिवम छात्रावास में छत का प्लास्टर गिरा, कई छात्र घायल, सुरक्षा पर उठे सवाल

रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के शिवम छात्रावास में शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक कमरे की छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे में कुछ छात्र घायल हो गए, जबकि कमरे में रखा सामान भी क्षतिग्रस्त हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्लास्टर गिरते ही कमरा मलबे और धूल से भर गया। छात्र किसी तरह बाहर निकले, जिससे बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, कई छात्रों का निजी सामान इस घटना में खराब हो गया। घटना के बाद हॉस्टल में रहने वाले छात्रों ने भवन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि छात्रावास की इमारत काफी समय से जर्जर हालत में है और इसकी जानकारी कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन को दी जा चुकी थी। इसके बावजूद समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई। छात्रों ने इस घटना को प्रशासन की लापरवाही बताते हुए पूरे हॉस्टल भवन का तकनीकी निरीक्षण कराने और जल्द से जल्द मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पहले ही आवश्यक कदम उठाए गए होते तो इस तरह की घटना से बचा जा सकता था। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच कराने की बात कही है। साथ ही छात्रावास की स्थिति का निरीक्षण किया जा रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।

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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कम अंक वाले छात्रों को प्रवेश से इनकार? शिक्षक संघ ने सरकार से की हस्तक्षेप की मांग

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दिए जाने के आरोप सामने आए हैं। इस मुद्दे को लेकर शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। शिक्षक संघ का कहना है कि बोर्ड परीक्षा के कमजोर परिणामों के बाद कई प्राचार्यों के तबादले और प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। इसी दबाव के कारण कुछ स्कूल अब कम अंक लाने वाले विद्यार्थियों का दाखिला लेने से बच रहे हैं। संघ के अनुसार, कुछ सरकारी स्कूल पिछले वर्ष के बोर्ड परीक्षा परिणाम के आधार पर छात्रों का चयन कर रहे हैं। इससे कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश से वंचित किया जा रहा है, जबकि सरकारी स्कूल सभी छात्रों के लिए खुले होने चाहिए। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बेहतर परीक्षा परिणाम दिखाने के दबाव का असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। संघ का दावा है कि कार्रवाई के डर से कुछ स्थानों पर बोर्ड परीक्षाओं में नकल जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं। उनका कहना है कि केवल अच्छे रिजल्ट पर जोर देने से शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। शिक्षक संघ ने यह भी सवाल उठाया कि राज्य सरकार एक ओर स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) की संख्या कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर यदि पढ़ने के इच्छुक छात्रों को ही प्रवेश नहीं मिलेगा तो यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। संघ ने सरकार से मांग की है कि सभी सरकारी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं ताकि हर पात्र विद्यार्थी को बिना किसी भेदभाव के प्रवेश मिल सके और किसी भी छात्र को केवल कम अंक होने के आधार पर दाखिले से वंचित न किया जाए।

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CBSE का बड़ा फैसला: अब छात्र रीजनल ऑफिस में जाकर कर सकेंगे उत्तर पुस्तिका की जांच

सीबीएसई ने बोर्ड परीक्षा के परिणामों को लेकर छात्रों की शंकाओं को दूर करने के लिए एक नई व्यवस्था शुरू की है। अब ऐसे छात्र, जिन्होंने अंकों के वेरिफिकेशन के लिए आवेदन किया था लेकिन जांच के बाद भी उनके अंकों में कोई बदलाव नहीं हुआ, वे अपनी उत्तर पुस्तिका की फिजिकल जांच करवा सकेंगे। बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, यह सुविधा केवल उन विद्यार्थियों को मिलेगी जिनके वेरिफिकेशन रिजल्ट में “नो चेंज” आया है। ऐसे छात्र सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचकर अपनी उत्तर पुस्तिका का निरीक्षण कर सकेंगे। इसके लिए बोर्ड जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश और शेड्यूल जारी करेगा। सीबीएसई के इतिहास में यह पहली बार है जब छात्रों को वेरिफिकेशन प्रक्रिया के बाद उत्तर पुस्तिका की फिजिकल जांच का अवसर दिया जा रहा है। पहले वेरिफिकेशन के बाद यदि अंक नहीं बदलते थे, तो छात्रों के पास आगे कोई विकल्प नहीं होता था। बोर्ड का मानना है कि इस नई पहल से मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी। साथ ही छात्रों को अपनी कॉपी की जांच को लेकर किसी भी प्रकार की शंका दूर करने का अवसर मिलेगा। इसी बीच सीबीएसई ने कक्षा 12वीं के री-इवैल्यूएशन परिणाम भी जारी करने शुरू कर दिए हैं। बोर्ड के अनुसार अब तक प्राप्त कुल आवेदनों में से 87 प्रतिशत से अधिक के नतीजे घोषित किए जा चुके हैं, जबकि शेष आवेदनों की प्रक्रिया तेजी से जारी है।

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दुर्ग में आज NEET री-एग्जाम, 19 परीक्षा केंद्रों पर हाई अलर्ट; जैमर, CCTV और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग की व्यवस्था

दुर्ग जिले में आज आयोजित होने वाली NEET री-एग्जाम को लेकर प्रशासन और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। परीक्षा को निष्पक्ष, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए जिले के सभी 19 परीक्षा केंद्रों पर विशेष व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। प्रशासन के अनुसार प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दुरुपयोग को रोकने के लिए जैमर लगाए गए हैं, जबकि हर परीक्षा कक्ष में CCTV कैमरे स्थापित किए गए हैं। परीक्षा के दौरान कंट्रोल रूम से इन कैमरों की लाइव निगरानी की जाएगी। इस बार परीक्षा के नियमों में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। परीक्षा की अवधि 180 मिनट से बढ़ाकर 195 मिनट कर दी गई है। साथ ही अभ्यर्थियों को रफ वर्क के लिए पहले की तुलना में अधिक रफ शीट्स उपलब्ध कराई जाएंगी। परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को नया री-नीट एडमिट कार्ड की दो प्रिंटेड प्रतियां, एक अतिरिक्त पासपोर्ट साइज फोटो और एक वैध फोटो पहचान पत्र साथ लाना अनिवार्य होगा। ड्रेस कोड के तहत अभ्यर्थियों को हल्के रंग के और आधी बांह वाले कपड़े पहनकर आने की सलाह दी गई है। अधिक जेब वाले कपड़े, फुल स्लीव शर्ट, भारी आभूषण, हाई हील वाले जूते और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं से बचने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा जांच को आसान बनाने के लिए चप्पल या लो-हील सैंडल पहनने की सलाह दी गई है। परीक्षा केंद्रों में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर सहित किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी। प्रवेश से पहले सभी अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन और फ्रिस्किंग की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोपहर 1:30 बजे के बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। छात्रों को एडमिट कार्ड में दिए गए समय के अनुसार केंद्र पहुंचने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा चार एंबुलेंस भी रिजर्व रखी गई हैं। प्रश्न पत्रों की सुरक्षा के लिए मजिस्ट्रेट, ऑब्जर्वर और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है, जो पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के लिए अलग टीम बनाई गई है। यह टीम इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर लगातार नजर रखेगी। पेपर लीक या भ्रामक जानकारी से जुड़ी किसी भी पोस्ट पर तत्काल जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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PTRSU में परीक्षा शुल्क में भारी बढ़ोतरी, ABVP ने जताया विरोध, आंदोलन की दी चेतावनी

रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PTRSU) द्वारा परीक्षा और अन्य शैक्षणिक शुल्कों में की गई बढ़ोतरी को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठन का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालते हुए फीस में एकमुश्त बड़ी वृद्धि कर दी है। ABVP के अनुसार, सेमेस्टर परीक्षा शुल्क को ₹1075 से बढ़ाकर ₹1580 कर दिया गया है, जबकि वार्षिक परीक्षा शुल्क ₹1085 से बढ़कर ₹1580 हो गया है। परिषद का कहना है कि यह लगभग 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी है, जिसका सीधा असर आर्थिक रूप से कमजोर, ग्रामीण और मध्यमवर्गीय छात्रों पर पड़ेगा। इसके अलावा विश्वविद्यालय ने मार्कशीट और सिलेबस वेरिफिकेशन के लिए ₹5000 शुल्क निर्धारित किया है। विद्यार्थी परिषद का कहना है कि नौकरी, उच्च शिक्षा में प्रवेश या अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं के लिए दस्तावेज सत्यापन कराने वाले छात्रों और पूर्व छात्रों के लिए यह राशि काफी अधिक है। ABVP के रायपुर महानगर मंत्री सुजल गुप्ता ने कहा कि एक ओर शिक्षा को सुलभ और किफायती बनाने की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर लगातार फीस बढ़ाकर छात्रों पर आर्थिक दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के हर वर्ष 5 प्रतिशत शुल्क वृद्धि के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से परीक्षा शुल्क में की गई बढ़ोतरी वापस लेने, वार्षिक 5 प्रतिशत फीस वृद्धि के निर्णय को रद्द करने और वेरिफिकेशन शुल्क में कमी करने की मांग की है। ABVP ने चेतावनी दी है कि यदि छात्रों की मांगों पर विचार नहीं किया गया तो व्यापक छात्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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UPSC Prelims 2026: छत्तीसगढ़ में 13 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा, फेस स्कैन के बाद मिली एंट्री

संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 आज 24 मई को छत्तीसगढ़ में शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित की गई। परीक्षा के लिए रायपुर और बिलासपुर में केंद्र बनाए गए थे, जहां कुल 13 हजार 319 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। रायपुर के 22 परीक्षा केंद्रों में 8 हजार 449 उम्मीदवारों ने परीक्षा दी, जबकि बिलासपुर के 14 केंद्रों में 4 हजार 870 परीक्षार्थी शामिल हुए। परीक्षा दो पालियों में आयोजित हुई। पहली पाली सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक चली। इस बार परीक्षा में पहली बार फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम लागू किया गया। परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले सभी अभ्यर्थियों का फेस स्कैन किया गया। पहचान सत्यापित होने के बाद ही उन्हें अंदर प्रवेश दिया गया। प्रशासन ने परीक्षा को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। सभी केंद्रों पर मेटल डिटेक्टर से जांच की गई और पुलिस पेट्रोलिंग टीम लगातार निगरानी करती रही। रायपुर कलेक्टर Gaurav Singh ने पहले ही अभ्यर्थियों को समय से पहले केंद्र पहुंचने की अपील की थी। निर्धारित समय के बाद किसी को भी एंट्री नहीं दी गई। रायपुर में परीक्षा केंद्रों के आसपास 500 मीटर के दायरे में ध्वनि प्रदूषण और अव्यवस्था रोकने के निर्देश भी जारी किए गए थे। गोपनीय परीक्षा सामग्री का वितरण जिला कोषालय से किया गया। बिलासपुर में कई सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों को परीक्षा केंद्र बनाया गया था, जिनमें शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज कोनी, सीएमडी कॉलेज, बिलासा गर्ल्स कॉलेज और स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल सहित कई संस्थान शामिल रहे।

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12वीं बोर्ड पेपर लीक कांड: PTI शिक्षक ने 3000 रुपये में बेचा प्रश्न पत्र, जांच में बड़ा खुलासा | रायपुर

छत्तीसगढ़ में 12वीं बोर्ड हिंदी परीक्षा पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। रायपुर कोतवाली पुलिस की जांच में सामने आया है कि बेमेतरा जिले के एक सरकारी स्कूल में पदस्थ PTI शिक्षक ने कथित तौर पर हाथ से लिखकर तैयार किया गया प्रश्न पत्र एक NSUI नेता को मात्र 3000 रुपये में उपलब्ध कराया। इस मामले में पुलिस ने PTI शिक्षक जवाहर लाल और विकास सेन को गिरफ्तार किया है। इससे पहले मास्टरमाइंड के रूप में NSUI नेता वेणु कुमार जंघेल की गिरफ्तारी हो चुकी है। आरोप है कि लीक किया गया प्रश्न पत्र आगे टेलीग्राम और सोशल मीडिया के जरिए हजारों छात्रों तक पहुंच गया। जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे मामले में कई स्तरों पर लापरवाही और संभावित मिलीभगत हो सकती है। इसी आधार पर अब बेमेतरा जिले के परीक्षा केंद्र प्रभारी और एग्जाम कंट्रोलर भी जांच के दायरे में आ गए हैं। पुलिस के अनुसार 13 मार्च की रात टेलीग्राम पर प्रश्न पत्र की तस्वीर वायरल हुई थी, जो परीक्षा से लगभग 10 घंटे पहले छात्रों तक पहुंच गई थी। इसे बड़ी संख्या में लोगों ने डाउनलोड और शेयर किया। फिलहाल पुलिस इस पूरे पेपर लीक नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

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