Education

दुर्ग में स्कूल सफाई कर्मचारियों ने खोला मोर्चा, शिक्षा मंत्री के घेराव का ऐलान

छत्तीसगढ़ में अंशकालिक स्कूल सफाई कर्मचारियों का आंदोलन एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। अंश-स्कूल सफाई कर्मचारी संघ ने शिक्षा मंत्री पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए आज दुर्ग में उनके निवास का घेराव करने का ऐलान किया है। संघ ने चेतावनी दी है कि 15 दिन के भीतर मांगें पूरी नहीं हुईं तो नया रायपुर में मंत्रालय और संचालनालय का घेराव कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। VO-1:संघ के मुताबिक छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में करीब 43 हजार 301 अंशकालिक सफाई कर्मचारी पिछले 15 से 16 वर्षों से काम कर रहे हैं। नियमानुसार इनका कार्य समय करीब दो घंटे प्रतिदिन है और उन्हें 3 से साढ़े 3 हजार रुपये तक मासिक मानदेय दिया जाता है। कर्मचारियों का कहना है कि कई स्कूलों में भृत्य और चपरासी के पद खाली होने के कारण उनसे सफाई के अलावा स्कूल के दूसरे काम भी कराए जाते हैं। संघ का दावा है कि लंबे समय से काम करने के बावजूद उनकी मांगों पर सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। VO-2:संघ के अनुसार, 15 जून 2025 से कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी। उस दौरान शिक्षा मंत्री की ओर से मानदेय बढ़ाने और हड़ताल अवधि का मानदेय देने का आश्वासन मिलने के बाद 12 सितंबर 2025 को आंदोलन स्थगित कर दिया गया था। अब संघ का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं। इसी को लेकर कर्मचारियों ने दोबारा आंदोलन तेज करने का फैसला लिया है। बाइट: संतोष खांडेकर, प्रांत अध्यक्ष, स्कूल सफाई कर्मचारी संघ VO-3:वहीं, स्कूल सफाई कर्मचारियों के आंदोलन के समर्थन में दुर्ग के पूर्व विधायक अरुण वोरा भी धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों की मांगों को जायज बताते हुए राज्य सरकार से उनकी समस्याओं का समाधान करने और मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की।

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छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल परीक्षा के लिए 10 अक्टूबर तक आवेदन, लेट फीस के साथ भी मिलेगा मौका

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की नवंबर 2026 सत्र की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया चल रही है। हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थी निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रवेश एवं परीक्षा आवेदन जमा कर सकते हैं। सामान्य शुल्क के साथ आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। जो विद्यार्थी इस अवधि में आवेदन नहीं कर पाएंगे, उन्हें बाद में विलंब शुल्क के साथ फॉर्म भरने का अवसर दिया जाएगा। 500 रुपए लेट फीस के साथ 17 अक्टूबर तक आवेदन निर्धारित तारीख तक आवेदन नहीं कर पाने वाले परीक्षार्थी 13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर 2026 तक विलंब शुल्क के साथ आवेदन कर सकेंगे। इस अवधि में फॉर्म जमा करने के लिए 500 रुपए अतिरिक्त विलंब शुल्क देना होगा। विद्यार्थियों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और समय रहते आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर लें। मान्यता प्राप्त अध्ययन केंद्र से मिलेगी जानकारी प्रवेश और परीक्षा आवेदन से संबंधित जानकारी के लिए विद्यार्थी अपने नजदीकी मान्यता प्राप्त अध्ययन केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। यहां उन्हें आवेदन भरने की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और परीक्षा से जुड़ी अन्य जरूरी जानकारी मिल सकेगी। वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं आवेदन फॉर्म परीक्षा के लिए आवेदन फॉर्म छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकते हैं। फॉर्म में आवश्यक जानकारी भरने के बाद संबंधित दस्तावेज संलग्न कर उसे निर्धारित अध्ययन केंद्र में जमा करना होगा। विद्यार्थियों को आवेदन जमा करने से पहले फॉर्म में दर्ज जानकारी और जरूरी दस्तावेजों की जांच कर लेने की सलाह दी गई है।

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छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूलों की मान्यता के नियम बदले, Essentiality Certificate की अनिवार्यता खत्म

छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूल खोलने और मान्यता लेने के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 7 सितंबर 2026 को नई गाइडलाइन जारी की है, जो शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी। इससे पहले स्कूलों के लिए 2018 के नियम लागू थे। नई गाइडलाइन के तहत अब प्राइवेट स्कूल खोलने के लिए Essentiality Certificate यानी अनिवार्यता प्रमाण पत्र जरूरी नहीं होगा। न्यूनतम Corpus Fund की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है। हालांकि स्कूल संचालकों को Self Certification देना होगा। इसमें बिल्डिंग की सुरक्षा, लैब, लाइब्रेरी, खेल मैदान, योग्य शिक्षकों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी देनी होगी। गलत जानकारी देने पर मान्यता निलंबित या रद्द की जा सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। नए नियमों के मुताबिक एक क्लासरूम में अधिकतम 45 बच्चे बैठ सकेंगे। कम से कम 300 वर्गफीट के कमरे में प्रत्येक बच्चे के लिए 6 वर्गफीट जगह जरूरी होगी। हाईस्कूल के लिए कम से कम 7 क्लासरूम और मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के लिए Structural Safety Certificate जरूरी होगा। स्कूल की मान्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। बिना मान्यता कक्षा 9वीं से 12वीं तक संचालित नहीं की जा सकेगी। हिंदी और इंग्लिश मीडियम के लिए अलग जमीन, बिल्डिंग, प्रिंसिपल और शिक्षकों की व्यवस्था करनी होगी। स्कूल में साफ पेयजल, अलग-अलग टॉयलेट, CCTV, पर्याप्त फर्नीचर और बच्चों की सुरक्षा के जरूरी इंतजाम अनिवार्य होंगे। स्कूल बसों का हर साल तकनीकी निरीक्षण और ड्राइवर-कंडक्टर का हेल्थ चेकअप भी जरूरी होगा। नई गाइडलाइन में स्कूल के नाम को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। निजी स्कूल National, International, Navodaya, Eklavya, Kendriya, PM Shri, Swami Atmanand और Swami Vivekananda Utkrisht जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। मंडल ने स्पष्ट किया है कि ये स्कूलों के लिए न्यूनतम मानक हैं। नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों की अगले वर्ष मान्यता पर विचार नहीं किया जाएगा।

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MBBS NEET मेरिट लिस्ट पर उठे सवाल, 9 अभ्यर्थियों के डोमिसाइल और कैटेगरी की जांच की मांग

रायपुर: छत्तीसगढ़ की MBBS NEET मेरिट लिस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। 9 अभ्यर्थियों के डोमिसाइल, जाति प्रमाण-पत्र और कैटेगरी से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की गई है। मामले को लेकर NSUI ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। शिकायतकर्ताओं ने पूरी मेरिट लिस्ट में शामिल अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का भी वेरिफिकेशन कराने की मांग की है। शिकायत में रिद्धि टांडी, मान्या साहू, नेविदिता मंडावी, आहाना बेथशीबा मसीह, लक्ष्य चौरे, आकांक्षा मारिया, शीतल, प्रिंसी एस. बल्लेवार और द्विज सिंह के दस्तावेजों को जांच के लिए सामने रखा गया है। कुछ मामलों में दो अलग-अलग राज्यों के डोमिसाइल से जुड़े दस्तावेज होने का दावा किया गया है, जबकि कुछ अभ्यर्थियों की जाति और कैटेगरी को लेकर सवाल उठाए गए हैं। एक मामले में 2025 में जनरल कैटेगरी और 2026 में ST कैटेगरी दर्ज होने का दावा भी किया गया है। हालांकि, अभी किसी भी अभ्यर्थी के खिलाफ कोई अनियमितता प्रमाणित नहीं हुई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी छात्र को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि सक्षम अथॉरिटी से दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराना है। NSUI के हेमंत पाल के मुताबिक, सामने रखे गए 9 मामले केवल उदाहरण हैं। पूरी मेरिट लिस्ट के दस्तावेजों की जांच होने पर अन्य विसंगतियां भी सामने आ सकती हैं। इसलिए सभी अभ्यर्थियों के डोमिसाइल, जाति प्रमाण-पत्र, कैटेगरी और आवेदन रिकॉर्ड का वेरिफिकेशन कराने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि MBBS एडमिशन प्रक्रिया हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी है। यदि किसी अपात्र अभ्यर्थी को गलत दस्तावेज या कैटेगरी के आधार पर लाभ मिला है, तो उसका असर पात्र विद्यार्थियों पर पड़ सकता है। इसी वजह से समयबद्ध जांच और जरूरत पड़ने पर संशोधित मेरिट लिस्ट जारी करने की मांग की गई है।

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बिलासपुर में छात्रों के लिए बनेगी मल्टी स्टोरी बिल्डिंग, मंत्री नेताम ने हॉस्टल सुविधाएं बेहतर करने के दिए निर्देश

बिलासपुर: छात्रों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बिलासपुर में मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनाए जाने की योजना है। इस संबंध में मंत्री नेताम ने अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई और व्यवस्थाओं को बेहतर करने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने कहा कि हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए। विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भवन और अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। बैठक के दौरान उन्होंने मत्स्य विभाग समेत विभिन्न विभागों की योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पात्र लोगों तक समय पर पहुंचना चाहिए। मंत्री ने अधिकारियों को नियमित रूप से मैदानी क्षेत्रों का दौरा करने और योजनाओं की जमीनी स्थिति की निगरानी करने को कहा। साथ ही किसानों और अन्य हितग्राहियों से लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए, ताकि उनकी समस्याओं और जरूरतों की जानकारी सीधे मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का अंतिम उद्देश्य लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। इसलिए योजनाओं को लागू करते समय अधिकारियों को संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए। मंत्री नेताम ने अधिकारियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि सरकारी योजनाओं का असर जमीन पर दिखाई दे और लोगों को उनका वास्तविक लाभ मिल सके।

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CGPSC भर्ती घोटाले में जांच तेज, पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी न्यायिक हिरासत में

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले की जांच में नया मोड़ आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी को विशेष अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब जांच एजेंसी कथित मनी लॉन्ड्रिंग, वित्तीय लेन-देन और मनी ट्रेल से जुड़े पहलुओं की विस्तृत जांच करेगी। इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में टामन सोनवानी और एक कारोबारी को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान कुछ अभ्यर्थियों तक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचाया गया। आरोप है कि इस प्रक्रिया में सरकारी आवास और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। इन आरोपों की जांच अभी जारी है और अदालत में इनका परीक्षण होना बाकी है। CGPSC की 2021 राज्य सेवा परीक्षा के तहत 171 पदों पर भर्ती की गई थी। अंतिम चयन सूची जारी होने के बाद चयन प्रक्रिया में अनियमितता, पक्षपात और प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे थे। मामले की जांच अब CBI और ED दोनों एजेंसियां अलग-अलग पहलुओं से कर रही हैं। आने वाले दिनों में कई लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए जाने की संभावना है।

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छत्तीसगढ़ में 57 हजार शिक्षक पद खाली, जर्जर स्कूल भवनों को लेकर कांग्रेस का सरकार पर हमला

छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का कहना है कि नया शिक्षा सत्र शुरू हुए लगभग दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल पर्याप्त शिक्षकों और आवश्यक संसाधनों के बिना संचालित हो रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि इसका सबसे अधिक असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने आरोप लगाया कि राज्य में करीब 57 हजार शिक्षकों के पद रिक्त हैं। उनका कहना है कि भाजपा सरकार ने अपने ढाई साल के कार्यकाल में नियमित रूप से एक भी नए शिक्षक की भर्ती नहीं की। कांग्रेस के अनुसार, संविलियन प्रक्रिया के दौरान कई शिक्षक पद समाप्त कर दिए गए और 10,400 से अधिक स्कूल भी बंद कर दिए गए। कांग्रेस ने शिक्षक भर्ती को लेकर सरकार की घोषणाओं पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने विधानसभा में 35 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की थी, जबकि वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने वर्ष 2025 के बजट में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती का ऐलान किया था। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी 5 हजार शिक्षकों की भर्ती जल्द शुरू करने की बात कही थी, लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि नया शिक्षा सत्र शुरू होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी। कांग्रेस का यह भी दावा है कि हर महीने सैकड़ों शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन उनकी जगह नियमित नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं। पार्टी नेता शुक्ला ने कहा कि केवल रायपुर जिले के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में ही 250 से अधिक शिक्षक पद खाली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम के कई स्कूलों में सहायक शिक्षक ही व्याख्याता की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। पार्टी ने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया है। कांग्रेस के अनुसार, प्रदेश के 12,560 से अधिक स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं और बारिश के दौरान कई स्कूलों की छतों से पानी टपकता है। इसके अलावा अनेक स्कूलों में स्वच्छ पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी अभाव है। कांग्रेस का कहना है कि इन समस्याओं के कारण कई छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और कुछ मामलों में छात्राओं को पढ़ाई छोड़ने तक की नौबत आ रही है। कांग्रेस ने राज्य सरकार से शिक्षकों के रिक्त पदों पर जल्द नियमित भर्ती करने, जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत कराने और सभी सरकारी स्कूलों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। नोट: इस समाचार में कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए आरोप और दावे शामिल हैं। सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना चाहिए।

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छत्तीसगढ़ में 2027 से बदलेगा स्कूलों का शैक्षणिक सत्र, पहली कक्षा में प्रवेश के लिए न्यूनतम उम्र 6 वर्ष अनिवार्य

छत्तीसगढ़ सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप स्कूल शिक्षा व्यवस्था में अहम बदलाव करने का निर्णय लिया है। नए नियमों के अनुसार वर्ष 2027 से प्रदेश के सभी स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चे की न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित की गई है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही वर्ष 2027 से राज्य में नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू होगा। पहले जहां स्कूल 16 जून से खुलते थे, वहीं अब अप्रैल के पहले दिन से प्रवेश प्रक्रिया और शैक्षणिक गतिविधियां शुरू हो जाएंगी। इस दौरान विद्यार्थियों को किताबें, यूनिफॉर्म और पात्र छात्रों को साइकिल भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद 1 मई से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा। शैक्षणिक सत्र में होगा बदलाव नई व्यवस्था के तहत पूरे प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से 31 मार्च तक संचालित होगा। यह प्रणाली केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप लागू की जाएगी, जिससे सीजी बोर्ड और सीबीएसई स्कूलों के बीच सत्र का अंतर समाप्त हो सके। बदलाव की वजह वर्तमान व्यवस्था में स्कूल जून के मध्य में खुलते हैं और शुरुआती कई सप्ताह तक प्रवेश, पुस्तक वितरण, यूनिफॉर्म और अन्य योजनाओं का लाभ देने की प्रक्रिया चलती रहती है। इससे नियमित पढ़ाई देर से शुरू होती है और कई स्कूलों में जुलाई तक पढ़ाई प्रभावित रहती है। शिक्षा विभाग का मानना है कि नए कैलेंडर से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अधिक समय मिलेगा, पाठ्यक्रम समय पर पूरा होगा और बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में भी सुधार देखने को मिलेगा। आयु सीमा में विशेष छूट यदि कोई बच्चा 1 अप्रैल तक निर्धारित 6 वर्ष की आयु पूरी नहीं करता, लेकिन 1 जुलाई तक उसकी आयु 6 वर्ष हो जाती है, तो उसे अधिकतम तीन महीने की विशेष छूट देकर पहली कक्षा में प्रवेश दिया जा सकेगा। सभी स्कूलों में लागू होगा नियम नई आयु सीमा और शैक्षणिक सत्र की व्यवस्था सरकारी, निजी तथा अनुदान प्राप्त सभी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगी। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर होने वाले प्रवेश भी इसी नियम के अनुसार किए जाएंगे। इन विद्यार्थियों को मिलेगी छूट जो छात्र किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय की प्री-प्राइमरी या केजी शिक्षा पूरी करके पहली कक्षा में प्रवेश ले रहे हैं, उन पर नई आयु सीमा लागू नहीं होगी। ऐसे मामलों में विद्यालय द्वारा जारी टीसी, अंकसूची या स्कोर कार्ड में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। शिक्षा विभाग का उद्देश्य स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से विद्यार्थियों को समय पर किताबें और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा सकेगी तथा सत्र की शुरुआत से ही नियमित पढ़ाई सुनिश्चित होगी।

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रायपुर: IGKV के शिवम छात्रावास में छत का प्लास्टर गिरा, कई छात्र घायल, सुरक्षा पर उठे सवाल

रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के शिवम छात्रावास में शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक कमरे की छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे में कुछ छात्र घायल हो गए, जबकि कमरे में रखा सामान भी क्षतिग्रस्त हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्लास्टर गिरते ही कमरा मलबे और धूल से भर गया। छात्र किसी तरह बाहर निकले, जिससे बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, कई छात्रों का निजी सामान इस घटना में खराब हो गया। घटना के बाद हॉस्टल में रहने वाले छात्रों ने भवन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि छात्रावास की इमारत काफी समय से जर्जर हालत में है और इसकी जानकारी कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन को दी जा चुकी थी। इसके बावजूद समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई। छात्रों ने इस घटना को प्रशासन की लापरवाही बताते हुए पूरे हॉस्टल भवन का तकनीकी निरीक्षण कराने और जल्द से जल्द मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पहले ही आवश्यक कदम उठाए गए होते तो इस तरह की घटना से बचा जा सकता था। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच कराने की बात कही है। साथ ही छात्रावास की स्थिति का निरीक्षण किया जा रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।

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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कम अंक वाले छात्रों को प्रवेश से इनकार? शिक्षक संघ ने सरकार से की हस्तक्षेप की मांग

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दिए जाने के आरोप सामने आए हैं। इस मुद्दे को लेकर शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। शिक्षक संघ का कहना है कि बोर्ड परीक्षा के कमजोर परिणामों के बाद कई प्राचार्यों के तबादले और प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। इसी दबाव के कारण कुछ स्कूल अब कम अंक लाने वाले विद्यार्थियों का दाखिला लेने से बच रहे हैं। संघ के अनुसार, कुछ सरकारी स्कूल पिछले वर्ष के बोर्ड परीक्षा परिणाम के आधार पर छात्रों का चयन कर रहे हैं। इससे कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश से वंचित किया जा रहा है, जबकि सरकारी स्कूल सभी छात्रों के लिए खुले होने चाहिए। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बेहतर परीक्षा परिणाम दिखाने के दबाव का असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। संघ का दावा है कि कार्रवाई के डर से कुछ स्थानों पर बोर्ड परीक्षाओं में नकल जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं। उनका कहना है कि केवल अच्छे रिजल्ट पर जोर देने से शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। शिक्षक संघ ने यह भी सवाल उठाया कि राज्य सरकार एक ओर स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) की संख्या कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर यदि पढ़ने के इच्छुक छात्रों को ही प्रवेश नहीं मिलेगा तो यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। संघ ने सरकार से मांग की है कि सभी सरकारी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं ताकि हर पात्र विद्यार्थी को बिना किसी भेदभाव के प्रवेश मिल सके और किसी भी छात्र को केवल कम अंक होने के आधार पर दाखिले से वंचित न किया जाए।

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