छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दिए जाने के आरोप सामने आए हैं। इस मुद्दे को लेकर शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
शिक्षक संघ का कहना है कि बोर्ड परीक्षा के कमजोर परिणामों के बाद कई प्राचार्यों के तबादले और प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। इसी दबाव के कारण कुछ स्कूल अब कम अंक लाने वाले विद्यार्थियों का दाखिला लेने से बच रहे हैं।
संघ के अनुसार, कुछ सरकारी स्कूल पिछले वर्ष के बोर्ड परीक्षा परिणाम के आधार पर छात्रों का चयन कर रहे हैं। इससे कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश से वंचित किया जा रहा है, जबकि सरकारी स्कूल सभी छात्रों के लिए खुले होने चाहिए।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बेहतर परीक्षा परिणाम दिखाने के दबाव का असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। संघ का दावा है कि कार्रवाई के डर से कुछ स्थानों पर बोर्ड परीक्षाओं में नकल जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं। उनका कहना है कि केवल अच्छे रिजल्ट पर जोर देने से शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
शिक्षक संघ ने यह भी सवाल उठाया कि राज्य सरकार एक ओर स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) की संख्या कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर यदि पढ़ने के इच्छुक छात्रों को ही प्रवेश नहीं मिलेगा तो यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा।
संघ ने सरकार से मांग की है कि सभी सरकारी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं ताकि हर पात्र विद्यार्थी को बिना किसी भेदभाव के प्रवेश मिल सके और किसी भी छात्र को केवल कम अंक होने के आधार पर दाखिले से वंचित न किया जाए।

