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गरियाबंद में अतिक्रमण हटाने पहुंची वन टीम पर हमला, डिप्टी डायरेक्टर से धक्का-मुक्की

छत्तीसगढ़ के Gariaband जिले से एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए पहुंची वन विभाग की टीम पर स्थानीय लोगों ने हमला कर दिया। जानकारी के अनुसार, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के कोर जोन स्थित सीतानदी रेंज के जैतपुरी गांव में वन विभाग द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की जा रही थी। इसी कार्रवाई के तहत करीब 166 अतिक्रमणकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इसी सिलसिले में वन विभाग के उपनिदेशक वरुण जैन अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। कार्रवाई के दौरान स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई और कुछ अतिक्रमणकारियों ने टीम पर विरोध करते हुए धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू कर दी। घटना के बाद मौके पर पुलिस बल को बुलाया गया और स्थिति को नियंत्रित किया गया। बताया जा रहा है कि पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वन अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद और धक्का-मुक्की दिखाई दे रही है। यह मामला उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के भीतर अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जुड़ा हुआ है।

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झाड़-फूंक के नाम पर मौत: युवती की हत्या में आरोपी को उम्रकैद, धर्म बदलने का भी आरोप

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में झाड़-फूंक और कथित चमत्कारी इलाज के नाम पर 18 साल की युवती की मौत के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। रायपुर की विशेष एससी-एसटी अदालत ने आरोपी महिला Ishwari Sahu को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सरकारी पक्ष के अनुसार, आरोपी पर हत्या के साथ-साथ धर्म स्वतंत्रता कानून, टोनही प्रताड़ना अधिनियम और एससी-एसटी एक्ट के तहत भी सजा दी गई है। अदालत ने माना कि आरोपी के पास कोई मेडिकल योग्यता नहीं थी, फिर भी वह इलाज के नाम पर अमानवीय तरीके अपना रही थी। क्या था मामला?मृतका Yogita Sonwani मानसिक समस्या से जूझ रही थी और उसका इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा था। इसी दौरान परिवार को जानकारी मिली कि गरियाबंद के एक गांव में आरोपी महिला देसी तरीके से इलाज करती है। इसके बाद पीड़िता की मां Sunita Sonwani अपनी बेटी को वहां लेकर पहुंचीं। इलाज के नाम पर क्रूरताआरोप है कि Ishwari Sahu युवती के शरीर पर गर्म पानी और तेल डालती थी, उस पर चढ़कर दबाव बनाती थी और जबरन प्रार्थना करवाती थी। साथ ही परिवार पर धर्म परिवर्तन का दबाव भी बनाया जाता था। गवाही में यह भी सामने आया कि आरोपी परिवार को डराती थी और कहती थी कि अगर किसी को बताया तो “प्रभु नाराज हो जाएंगे।” इसी डर के चलते परिवार लंबे समय तक चुप रहा। मौत और जांचइलाज के दौरान 22 मई 2025 को युवती की मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सांस रुकने और गंभीर चोटों को मौत की वजह बताया गया। इसके बाद मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की और कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया। कोर्ट की टिप्पणीअदालत ने कहा कि आरोपी ने अंधविश्वास और झाड़-फूंक के जरिए पीड़िता और उसके परिवार को गुमराह किया। बिना किसी चिकित्सा योग्यता के खतरनाक तरीके अपनाए गए, जिससे युवती की जान चली गई। गवाहों के बयान एक जैसे पाए गए और बचाव पक्ष उन्हें खारिज नहीं कर सका। धर्म परिवर्तन कानून पर सख्तीराज्य में हाल ही में नए धर्म स्वतंत्रता कानून को मंजूरी मिली है। इसके तहत बल, लालच या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। ऐसे मामलों में 7 से 10 साल तक की सजा और जुर्माना लगाया जा सकता है, जबकि गंभीर मामलों में सजा और भी बढ़ सकती है। यह मामला अंधविश्वास और झोलाछाप इलाज के खतरों को उजागर करता है, साथ ही लोगों को सतर्क रहने की जरूरत पर भी जोर देता है।

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उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बड़े पैमाने पर जंगल उजाड़, 1 लाख पेड़ों की कटाई और 265 एकड़ पर अवैध कब्जा उजागर

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बड़े स्तर पर वन विनाश का मामला सामने आया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की सैटेलाइट तस्वीरों और ड्रोन सर्वे के जरिए खुलासा हुआ कि यहां करीब 1 लाख पेड़ों को काट दिया गया और लगभग 265 एकड़ (करीब 106 हेक्टेयर) वन भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया। वन विभाग की जांच में सामने आया कि पिछले 15 वर्षों से इस क्षेत्र में लगातार जंगल की कटाई हो रही थी। हाई-रेजोल्यूशन ड्रोन इमेज में साफ दिखा कि कई जगहों पर पेड़ काटकर खेत बनाए गए हैं और ठूंठ अभी भी मौजूद हैं। सैटेलाइट डेटा (2006 से 2022) से यह भी पता चला कि जहां पहले प्रति हेक्टेयर करीब 1000 पेड़ होते थे, अब वहां केवल 25 से 50 पेड़ ही रह गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, अतिक्रमणकारियों ने पेड़ों को नष्ट करने के लिए ‘गर्डलिंग’ तकनीक का इस्तेमाल किया, जिससे पेड़ धीरे-धीरे सूख जाते हैं और जमीन खेती के लिए तैयार हो जाती है। हैरानी की बात यह है कि कई लोगों के पास पहले से राजस्व भूमि होने के बावजूद उन्होंने वन क्षेत्र पर कब्जा किया। मामले में वन विभाग ने अब तक 166 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है, जिनमें से 22 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। सीतानदी कोर रेंज के घुरवाड़ इलाके में हाल ही में कार्रवाई करते हुए इन लोगों को पकड़ा गया, जो जंगल की जमीन पर कब्जा कर वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचा रहे थे। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने बताया कि अतिक्रमण हटाने के लिए विभाग डिजिटल सबूतों का सहारा ले रहा है और पुराने सैटेलाइट डेटा के आधार पर कार्रवाई तेज की जा रही है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई होगी, जिसमें 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। साथ ही लोक संपत्ति क्षति अधिनियम के तहत भी जेल और संपत्ति जब्ती जैसी कार्रवाई की जाएगी। पिछले तीन वर्षों में विभाग ने करीब 850 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है और 600 से अधिक शिकारी, तस्कर और अतिक्रमणकारियों को गिरफ्तार किया है। अब खाली कराई गई जमीन पर जल संरक्षण और बड़े पैमाने पर पौधारोपण की योजना बनाई जा रही है।

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