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कोरबा में हाईवे पर मवेशियों के शव रखकर अवैध वसूली, राहगीरों में दहशत

कोरबा। भारतमाला परियोजना के तहत निर्माणाधीन उरगा–बिलासपुर मार्ग पर असामाजिक तत्वों द्वारा खुलेआम अवैध वसूली का मामला सामने आया है। टोल टैक्स शुरू न होने के बावजूद कुछ लोगों द्वारा रास्ता रोककर वाहन चालकों से जबरन पैसे वसूले जाने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। रविवार को स्थिति और गंभीर हो गई जब कुछ लोगों ने सड़क पर मृत मवेशियों के शव रखकर मार्ग अवरुद्ध कर दिया और वहां से गुजरने वाले वाहनों से अवैध रूप से पैसे वसूलने लगे। इस घटना के दौरान रायपुर जा रही महाराणा प्रताप नगर की पूर्व पार्षद आशा जायसवाल की बेटी भी इस वसूली का शिकार बनी। उन्होंने इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसमें हाईवे पर हो रही अवैध वसूली और यात्रियों की परेशानी को उजागर किया गया है। वीडियो सामने आने के बाद निर्माणाधीन मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क पर पहले भी इस तरह की अवैध वसूली की कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं और इसके वीडियो भी वायरल हुए हैं, लेकिन अब तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। इस मार्ग का उपयोग रायपुर और बिलासपुर के बीच तेज़ आवागमन के लिए बड़ी संख्या में लोग कर रहे हैं, लेकिन असामाजिक गतिविधियों के कारण यात्रियों की सुरक्षा पर लगातार खतरा बना हुआ है। अब लोगों की नजर प्रशासन की सख्त कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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छत्तीसगढ़ में भीषण हीटवेव का कहर, मोर-चमगादड़ों समेत कई वन्यजीवों की मौत

छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। तेज गर्म हवाओं और रिकॉर्ड तापमान के कारण इंसानों के साथ-साथ वन्यजीव भी प्रभावित हो रहे हैं। कई जिलों से मोर, चमगादड़ और अन्य जीवों की मौत की खबरें सामने आई हैं। Chhattisgarh के खैरागढ़ जिले के दल्लीखोली-लछना जंगल में मोर और पाम सिवेट सहित कई वन्यजीव मृत पाए गए। डीएफओ पंकज राजपूत ने आशंका जताई है कि अत्यधिक गर्मी और हीट स्ट्रोक के कारण इन जानवरों की मौत हुई होगी। वहीं कांकेर जिले के सरोना गांव में लू के चलते करीब 500 चमगादड़ों के मरने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले कोरबा जिले के पाली क्षेत्र में भी लगभग 200 चमगादड़ मृत मिले थे। लगातार बढ़ते तापमान ने वन क्षेत्रों में भी चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले दो से तीन दिनों तक हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है। राजधानी Raipur में बुधवार को तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना जताई गई है। दिनभर तेज गर्म हवाएं चल सकती हैं। बीते 24 घंटों में प्रदेश का सबसे अधिक तापमान 45.5 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 27.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और धूप से बचाव करने की सलाह दी है। खासतौर पर नौतपा के दौरान लू और डीहाइड्रेशन का खतरा अधिक बताया गया है। हालांकि 29 मई से मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। विभाग के मुताबिक कई इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है। 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, लेकिन तापमान में ज्यादा गिरावट की उम्मीद फिलहाल नहीं है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दक्षिण बिहार से लेकर उत्तर आंध्र प्रदेश तक सक्रिय ट्रफ लाइन और बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण का असर प्रदेश के मौसम पर दिखाई दे रहा है। कृषि विभाग ने किसानों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों ने रबी मक्का, केला और पपीता की फसलों में हल्की सिंचाई करने तथा गेहूं और चना की कटाई जल्द पूरी कर उपज को सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह जारी की है।

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पाली में चमगादड़ों की मौत पर प्रशासन का बड़ा खुलासा, बीमारी नहीं भीषण गर्मी बनी वजह

कोरबा जिले के पाली क्षेत्र में बड़ी संख्या में चमगादड़ों की मौत के बाद फैली अफवाहों पर जिला प्रशासन और पशुधन विकास विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। प्रशासन ने कहा है कि चमगादड़ों की मौत किसी बीमारी, वायरस या संक्रमण से नहीं बल्कि भीषण गर्मी और हीट स्ट्रोक के कारण हुई है। जानकारी के अनुसार नगर पंचायत पाली के नौकोनिया तालाब के पास पिछले कुछ दिनों में करीब 200 प्रवासी चमगादड़ों की मौत हुई थी। घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की भ्रामक खबरें फैलने लगी थीं, जिसके बाद प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी किया। पशुधन विकास विभाग की प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अत्यधिक तापमान को मौत का मुख्य कारण बताया गया है। विभाग ने साफ किया कि किसी भी प्रकार के संक्रमण या अज्ञात वायरस के लक्षण नहीं मिले हैं। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और पशुधन विकास विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची थी। सभी मृत चमगादड़ों को सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत दफनाया गया और जांच के लिए नमूने फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक अब चमगादड़ों की मृत्यु दर में कमी आई है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें और न ही उसे सोशल मीडिया पर साझा करें। साथ ही यदि किसी वन्यजीव की असामान्य गतिविधि या मौत दिखाई दे तो तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दें।

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नवा रायपुर जंगल सफारी में 7 महीने के जेब्रा शावक की मौत, ‘कोलिक पेन’ संक्रमण बना कारण

छत्तीसगढ़ के Nava Raipur Jungle Safari में वनतारा प्रोजेक्ट से लाए गए 7 महीने के जेब्रा शावक की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि शावक पिछले पांच दिनों से ‘कोलिक पेन’ नामक बीमारी से संक्रमित था और उसका इलाज लगातार चल रहा था, लेकिन गुरुवार को उसकी हालत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। जानकारी के अनुसार शावक को विशेष निगरानी में रखा गया था और वन्यजीव डॉक्टरों की टीम उसका इलाज कर रही थी। मौत के बाद उसका पोस्टमार्टम कराया गया और जांच के लिए अंगों के नमूने सुरक्षित रखे गए हैं। पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद शावक का अंतिम संस्कार किया गया। यह जेब्रा शावक राधे कृष्णा टेम्पल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट (वनतारा प्रोजेक्ट) से लाई गई एक जोड़ी के बाद जन्मा था। साल 2025 में यह जोड़ी नवा रायपुर जंगल सफारी लाई गई थी, लेकिन 16 मई 2025 को नर जेब्रा की मौत सांप के काटने से हो गई थी। अब शावक की मौत के बाद सफारी में केवल मादा जेब्रा बची है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार जेब्रा सामाजिक जानवर होते हैं और झुंड में रहना पसंद करते हैं। ऐसे में शावक और साथी दोनों की मौत के बाद मादा जेब्रा के व्यवहार और मानसिक स्थिति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। जंगल सफारी के डायरेक्टर तेजस शेखर ने बताया कि शावक को कोलिक पेन की समस्या थी और डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज में जुटी हुई थी। मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। कोलिक पेन क्या है कोलिक पेन एक गंभीर पेट दर्द संबंधी बीमारी है, जो खासकर घोड़े, जेब्रा और खच्चर जैसे जानवरों में पाई जाती है। यह समस्या कई कारणों से हो सकती है, जैसे तापमान में बदलाव, पानी की कमी, चारे में अचानक परिवर्तन और देखभाल में कमी। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकती है।

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कान्हा टाइगर रिज़र्व में एक और बाघ की मौत, वन विभाग जांच में जुटा

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध Kanha Tiger Reserve में एक बार फिर बाघ की मौत का मामला सामने आया है। मंगलवार सुबह मुक्की सर्कल के मोहगांव बीट क्षेत्र में लगभग 5 से 6 साल की उम्र का एक बाघ मृत अवस्था में पाया गया। यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब कुछ दिन पहले ही एक बाघिन और उसके चार शावकों की कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से मौत हो चुकी थी, जिससे पूरे वन विभाग में चिंता बढ़ गई है। प्रारंभिक जांच में मृत बाघ के शरीर पर चोट के निशान मिले हैं और फेफड़ों में संक्रमण की भी पुष्टि हुई है। हालांकि वन अधिकारियों ने बताया कि बाघ के दांत, पंजे और मूंछें सुरक्षित पाए गए हैं, जिससे शिकार या तस्करी की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है। पोस्टमॉर्टम के बाद नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के प्रोटोकॉल के अनुसार बाघ के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, कुछ दिन पहले ही इस बाघ को घायल और बीमार अवस्था में देखा गया था, जिसके बाद पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया और डॉग स्क्वॉड की भी मदद ली गई थी। लगातार हो रही बाघों की मौतों ने Kanha Tiger Reserve की सुरक्षा व्यवस्था और वन्यजीव स्वास्थ्य प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि CDV जैसे वायरस पर नियंत्रण और निगरानी प्रणाली को और मजबूत करने की जरूरत है। फिलहाल वन विभाग ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है।

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पेंड्रा के जंगलों में सफेद भालू की दहशत, ग्रामीण पर हमला; वन विभाग अलर्ट पर

Pendra और मरवाही वनमंडल के जंगलों में एक दुर्लभ सफेद भालू (एल्बिनो भालू) के दिखने और हमले से इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। इस अनोखे भालू को देखकर जहां ग्रामीण हैरान हैं, वहीं उसकी गतिविधियों से लोगों में डर भी बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार, आमादांड गांव के जंगलों में काले भालुओं के बीच एक सफेद रंग का भालू देखा गया, जिसे देखकर ग्रामीणों में कौतूहल फैल गया। लेकिन इसी बीच इस भालू ने स्थानीय निवासी लल्लू ड्राइवर पर हमला कर दिया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल व्यक्ति को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में भय का माहौल बन गया है। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कोई अलग प्रजाति नहीं है, बल्कि एल्बिनो (जीन परिवर्तन) की वजह से भालू का रंग सामान्य काले रंग की बजाय सफेद हो जाता है। यह एक दुर्लभ जैविक स्थिति होती है। घटना के बाद Forest Department Chhattisgarh ने इलाके में अलर्ट जारी कर दिया है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग की टीमें लगातार जंगल क्षेत्र पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी और घटना को रोका जा सके। स्थानीय लोगों में इस दुर्लभ भालू को लेकर कौतूहल के साथ-साथ भय का माहौल भी बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से जंगलों की ओर अनावश्यक न जाने की अपील की है।

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रायगढ़ में कुत्तों के हमले से कोटरी की मौत: पानी की तलाश में गांव पहुंचा था वन्यप्राणी

Raigarh जिले में पानी की तलाश में जंगल से बस्ती की ओर पहुंचे एक कोटरी (हिरण प्रजाति) की कुत्तों के हमले के बाद मौत हो गई। घायल हालत में वन विभाग ने उसे जंगल में छोड़ा था, लेकिन बाद में वह मृत मिला। मामला रायगढ़ वन परिक्षेत्र के चिराईपानी इलाके का है। जानकारी के अनुसार जंगल में पानी की कमी के कारण कोटरी भटकते हुए गांव तक पहुंच गया था। इसी दौरान कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। जान बचाने के लिए वह ग्रामीण Manoj Dansena के घर के आंगन में घुस गया, लेकिन कुत्ते लगातार उसका पीछा करते रहे। ग्रामीणों ने लाठी-डंडों की मदद से कुत्तों को वहां से भगाया। बताया जा रहा है कि हमले में कोटरी के पिछले पैरों में गंभीर चोटें आई थीं और वह बेहद डरा हुआ था। घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वन अमले ने घायल वन्यप्राणी का पशु चिकित्सक से प्राथमिक उपचार कराया और बाद में उसे देलारी जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया। विभाग की टीम उसकी निगरानी भी कर रही थी, लेकिन शाम के समय निरीक्षण के दौरान वह मृत अवस्था में मिला। इसके बाद शव को सुरक्षित स्थान पर रखा गया और अगले दिन पशु चिकित्सकों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया। नियमानुसार वन विभाग द्वारा अंतिम प्रक्रिया पूरी की गई। रायगढ़ रेंजर Sanjay Lakda ने बताया कि कोटरी काफी संवेदनशील वन्यप्राणी होता है। हमले और डर की वजह से उसकी हालत बिगड़ गई थी, जिसके चलते उसकी मौत हो गई।

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बिलासपुर के पचपेड़ी इलाके में दिखा भालू, VIDEO वायरल: ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग अलर्ट

Bilaspur जिले के पचपेड़ी परिक्षेत्र में भालू दिखाई देने से ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया है। शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे पचपेड़ी और ध्रुवाकारी गांव के बीच नहर किनारे घूम रहे लोगों ने अचानक जंगली भालू को देखा, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने सतर्कता दिखाते हुए भालू को आबादी वाले क्षेत्र की ओर आने से रोकने की कोशिश की। इसके बाद भालू केवंतरा और सुकुलकारी गांव की तरफ बढ़ते हुए भरारी जंगल की दिशा में चला गया। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इलाके में लगातार निगरानी की जा रही है। डिप्टी रेंजर Baghel ने बताया कि भालू की लोकेशन ट्रैक करने के लिए टीम जंगल और आसपास के क्षेत्रों में सर्च अभियान चला रही है। भालू के मिलने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। वन विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। खेतों में काम करने वाले किसानों और सुबह-शाम बाहर निकलने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। विभाग ने साफ कहा है कि किसी भी स्थिति में भालू के पास जाने या उसे उकसाने की कोशिश न करें और तुरंत वन अमले को सूचना दें।

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