January 2026

35 साल की शादी में तलाक के लिए ठोस सबूत जरूरी: पत्नी के अलग रहने पर भी हाईकोर्ट ने खारिज की पति की याचिका

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि लंबे वैवाहिक संबंधों में तलाक के लिए केवल आरोप पर्याप्त नहीं होते, बल्कि क्रूरता और परित्याग के ठोस व स्पष्ट प्रमाण आवश्यक हैं। कोर्ट ने 35 साल पुरानी शादी को खत्म करने की मांग वाली पति की याचिका खारिज कर दी। यह मामला उस पति से जुड़ा है, जिसने यह कहते हुए तलाक मांगा था कि उसकी पत्नी झगड़ालु है, मानसिक रूप से प्रताड़ित करती है और पिछले करीब 14–15 वर्षों से उसे छोड़कर बेटी व दामाद के साथ रह रही है। पत्नी ने लगाए पलटवार में आरोप वहीं पत्नी ने पति की तलाक याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पति अक्सर उसके चरित्र पर शक करता था और गाली-गलौच करता था। उसने यह भी बताया कि वह बीपी और शुगर की मरीज है, लेकिन पति ने कभी उसके इलाज का खर्च नहीं उठाया। मजबूरी में उसे बेटी के घर रहना पड़ा। क्या है पूरा मामला बेमेतरा जिले के निवासी गिरधर दुबे ने फैमिली कोर्ट में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत तलाक की अर्जी दाखिल की थी। दंपती की शादी करीब 35 साल पहले हुई थी और उनके दो बच्चे हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। पति पेशे से पुजारी है। पति का दावा था कि पत्नी के अलग रहने और मानसिक प्रताड़ना के कारण वैवाहिक जीवन समाप्त हो चुका है। हालांकि, फैमिली कोर्ट ने 5 जुलाई 2023 को यह याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को ठहराया सही पति ने फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने की। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल पत्नी का अलग रहना तलाक का आधार नहीं बन सकता। क्रूरता और परित्याग साबित करने के लिए स्पष्ट घटनाएं, ठोस आरोप और पुख्ता साक्ष्य जरूरी होते हैं। कोर्ट ने पाया कि पति की ओर से पेश किए गए गवाहों के बयान सामान्य और अस्पष्ट थे, जिन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। वहीं महिला प्रकोष्ठ की काउंसलिंग रिपोर्ट में पत्नी के आरोप अधिक विश्वसनीय पाए गए। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि तलाक जैसे गंभीर मामले में केवल अंदाजों या सामान्य आरोपों के आधार पर विवाह विच्छेद नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि फैमिली कोर्ट का निर्णय रिकॉर्ड के अनुरूप और सही है। इसी आधार पर पति की अपील को खारिज कर दिया गया।

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Bilashpur, Chhattisgarh, State

ट्रेन में यात्रियों से अवैध वसूली करते चार किन्नर हिरासत में, राजनांदगांव RPF की कार्रवाई

राजनांदगांव। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने रेल मदद ऐप पर प्राप्त शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए ट्रेन में यात्रियों से जबरन वसूली और अभद्र व्यवहार के आरोप में चार किन्नरों को हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के नागपुर मंडल के अंतर्गत की गई। घटना 29 जनवरी 2026 की है। गाड़ी संख्या 22816 (बिलासपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस) में यात्रा कर रहे यात्री रोमेश कुमार ने ‘रेल मदद’ ऐप पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि जनरल कोच में कुछ लोग यात्रियों से अभद्रता कर जबरन पैसे मांग रहे हैं। प्लेटफॉर्म पर घेराबंदी कर पकड़े गए आरोपी शिकायत मिलते ही RPF की टीम राजनांदगांव रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर पहुंची और संबंधित कोच की घेराबंदी की। इस दौरान मधु (27), सोनाली (42), काजल (35) और ढिल्लू (27) को हिरासत में लिया गया। सभी साईं नगर, उरला, जिला दुर्ग के निवासी बताए गए हैं। बिना टिकट यात्रा और रेलवे एक्ट के तहत मामला जांच में सामने आया कि पकड़े गए व्यक्तियों के पास यात्रा टिकट नहीं था। ड्यूटी पर तैनात टीटीई ने नियमानुसार उनसे जुर्माना वसूला। इसके अलावा यात्रियों को परेशान करने और अवैध वसूली के आरोप में रेलवे अधिनियम की धारा 145(B) के तहत मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। यात्रियों से RPF की अपील रेलवे सुरक्षा बल ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा के दौरान किसी भी तरह की अवैध वसूली, अभद्र व्यवहार या सुरक्षा संबंधी समस्या होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 139 या ‘रेल मदद’ ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज करें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके।

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दुर्ग रेलवे स्टेशन पहुंचीं RPF डीजी सोनाली मिश्रा, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा; GRP-स्थानीय पुलिस समन्वय पर दिया जोर

दुर्ग। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की महानिदेशक सोनाली मिश्रा शुक्रवार शाम दुर्ग रेलवे स्टेशन पहुंचीं, जहां उन्होंने स्टेशन परिसर का निरीक्षण कर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की। इस दौरान दुर्ग रेंज आईजी अभिषेक शांडिल्य और दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल भी मौजूद रहे। दुर्ग रेलवे स्टेशन स्थित वीआईपी लाउंज में आयोजित समीक्षा बैठक में महानिदेशक ने रेल यात्रियों की सुरक्षा, रेलवे संपत्ति की सुरक्षा, अपराध नियंत्रण, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, मानव तस्करी की रोकथाम और संगठित अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण जैसे अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा की। RPF-GRP और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर तालमेल पर जोर बैठक के दौरान रेलवे सुरक्षा बल, शासकीय रेल पुलिस (GRP) और स्थानीय पुलिस के बीच समन्वय को और मजबूत करने की आवश्यकता पर विशेष रूप से जोर दिया गया। महानिदेशक ने कहा कि बेहतर तालमेल से ही अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और यात्रियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जा सकता है। स्टेशन परिसर और RPF पोस्ट का किया निरीक्षण बैठक के बाद सोनाली मिश्रा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दुर्ग रेलवे स्टेशन परिसर और RPF पोस्ट दुर्ग का निरीक्षण किया। इस दौरान प्लेटफार्मों पर लगे सीसीटीवी कैमरों, निगरानी व्यवस्था, ट्रेनों में सुरक्षा प्रबंध, यात्रियों की सुविधाओं और मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों की जानकारी ली गई। अपराध के नए तरीकों से निपटने की तैयारी के निर्देश निरीक्षण के दौरान महानिदेशक ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संवेदनशील स्थानों पर विशेष सतर्कता बरती जाए। उन्होंने कहा कि बदलते समय और अपराध के नए तरीकों को देखते हुए RPF को तकनीकी रूप से सशक्त, आधुनिक और प्रशिक्षित बनाए रखना जरूरी है। सोनाली मिश्रा ने स्पष्ट किया कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा RPF की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए GRP व स्थानीय पुलिस के साथ समन्वित और प्रभावी कार्रवाई बेहद आवश्यक है, ताकि रेल यात्रियों को सुरक्षित और भयमुक्त माहौल मिल सके।

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Bhilai / Durg, Chhattisgarh, State

दुर्ग में ग्राफिक्स डिजाइनर ने की आत्महत्या, फेसबुक पोस्ट में पत्नी पर गंभीर आरोप; पुलिस जांच में जुटी

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक ग्राफिक्स डिजाइनर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौत से पहले युवक ने फेसबुक पर एक टेक्स्ट पोस्ट साझा किया, जिसमें उसने आत्महत्या के लिए अपनी पत्नी को जिम्मेदार ठहराया है। युवक ने पोस्ट में खुद को घरेलू हिंसा का शिकार बताते हुए अपनी गर्लफ्रेंड को बचाने के लिए यह कदम उठाने का दावा किया है। यह मामला जामुल थाना क्षेत्र का है। मृतक की पहचान भोज नारायण (36 वर्ष) के रूप में हुई है, जो भिलाई स्थित रुंगटा कॉलेज में सीनियर ग्राफिक्स डिजाइनर के पद पर कार्यरत था। फेसबुक पोस्ट में लगाए गए आरोप जानकारी के अनुसार, भोज नारायण ने 28 जनवरी को आत्महत्या की थी, लेकिन उसका फेसबुक पोस्ट और कथित सुसाइड नोट अब सामने आया है। पोस्ट में उसने लिखा है कि वह पत्नी से परेशान होकर आत्महत्या कर रहा है और इस मामले में उसके अन्य परिजनों की कोई भूमिका नहीं है। मृतक ने अपनी पोस्ट में यह भी दावा किया है कि उसकी पत्नी ने उसकी गर्लफ्रेंड पर जादू-टोना कराए जाने का शक जताया और खुद को लंबे समय से मानसिक व घरेलू उत्पीड़न का शिकार बताया। फेसबुक पोस्ट के साथ भोज ने एक ड्राइव लिंक भी साझा किया था, जिसमें पत्नी और कुछ अन्य लोगों से संबंधित चैट के स्क्रीनशॉट होने का दावा किया गया है। क्या है पूरा मामला भोज नारायण मूल रूप से गरियाबंद जिले के राजिम का रहने वाला था और भिलाई में किराए के मकान में रह रहा था। वह शादीशुदा था और उसकी एक बेटी भी है। पुलिस जांच में सामने आया है कि उसका एक महिला प्यून के साथ प्रेम संबंध था, जो स्वयं भी शादीशुदा थी। इस संबंध की जानकारी उसकी पत्नी को थी, जिसको लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद होता रहता था। बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले भोज अपनी गर्लफ्रेंड को बाहर लेकर गया था। बाद में लौटने पर घरेलू विवाद और बढ़ गया। पत्नी ने संबंध खत्म करने की बात कही, लेकिन भोज इसके लिए तैयार नहीं हुआ। 28 जनवरी को जब वह घर में अकेला था, उसी दौरान उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, शव को नीचे उतारकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। 29 जनवरी को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पहले दर्ज हुई थी गुमशुदगी रिपोर्ट पुलिस के मुताबिक, आत्महत्या से कुछ दिन पहले भोज नारायण घर से लापता हो गया था, जिसके बाद उसकी पत्नी ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच के दौरान उसके प्रेम संबंधों और आर्थिक तनाव की जानकारी सामने आई। बताया जा रहा है कि वह कर्ज के कारण भी मानसिक दबाव में था। पुलिस कर रही हर पहलू की जांच जामुल थाना प्रभारी रामेंद्र सिंह ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है। फेसबुक पोस्ट, मोबाइल डेटा, ड्राइव लिंक और परिजनों के बयान के आधार पर जांच की जा रही है। आत्महत्या के कारणों और लगाए गए आरोपों की सत्यता की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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सोना-चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव, शादी के सीजन में बिगड़ा बजट; रायपुर में सराफा कारोबार 30% तक सिमटा

रायपुर। सोना और चांदी की कीमतों में लगातार आ रहे तेज उतार-चढ़ाव ने रायपुर के सराफा बाजार को अस्थिर कर दिया है। जहां एक ओर निवेशक इस गिरावट-बढ़त को मुनाफे का मौका मान रहे हैं, वहीं शादी-विवाह के सीजन में आम खरीदारों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। सराफा व्यापारियों के मुताबिक, भाव में रोजाना हो रहे बड़े बदलाव की वजह से रिटेल खरीदारी प्रभावित हुई है। मौजूदा हालात में बाजार का कारोबार सामान्य दिनों के मुकाबले करीब 30 प्रतिशत तक सिमट गया है। हालांकि निवेशक और स्टॉकिस्ट बाजार में सक्रिय बने हुए हैं। 25 साल में पहली बार देखी ऐसी अस्थिरता पिछले 25 वर्षों से सराफा कारोबार से जुड़े व्यापारी मोहित जैन ने बताया कि उन्होंने अपने पूरे करियर में सोने-चांदी की कीमतों में ऐसी अस्थिरता पहली बार देखी है। पहले महीने भर में करीब 2 हजार रुपए का अंतर देखने को मिलता था, लेकिन अब रोजाना भाव में बड़ा उतार-चढ़ाव हो रहा है, जिससे ग्राहक असमंजस में हैं। गिरावट का फायदा उठा रहे निवेशक रायपुर सराफा एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हरख मालू के अनुसार, बाजार में इस समय निवेशक और ज्वेलरी खरीदने वाले दोनों तरह के ग्राहक आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में कीमतें लगातार बढ़ रही थीं, लेकिन शुक्रवार को सोने-चांदी के दामों में आई गिरावट का निवेशकों ने फायदा उठाया। रेट में संशोधन के बाद यह गिरावट मुख्य रूप से मुनाफा वसूली (प्रॉफिट बुकिंग) के कारण देखने को मिली है। गोल्ड-सिल्वर मार्केट में बड़ा क्रैश 30 जनवरी को गोल्ड और सिल्वर मार्केट में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर प्रॉफिट बुकिंग के चलते चांदी करीब ₹1.10 लाख (27%) गिर गई। अब MCX पर चांदी ₹2.91 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई, जबकि 29 जनवरी को इसका भाव ₹4.01 लाख प्रति किलो था। वहीं MCX पर सोने में करीब ₹20 हजार (12%) की गिरावट आई। 10 ग्राम सोना ₹1.49 लाख पर आ गया, जो एक दिन पहले ₹1.69 लाख था। गिरावट की मुख्य वजहें सराफा बाजार में भी सस्ता हुआ सोना-चांदी इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, सराफा बाजार में चांदी ₹40,638 और सोना ₹9,545 सस्ता हुआ है।अब 1 किलो चांदी ₹3,39,350 और 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹1,65,795 पर आ गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सराफा बाजार शाम 5 बजे बंद हो जाता है, जबकि वायदा बाजार रात 12 बजे तक चलता है। इसी वजह से फिजिकल बाजार में गिरावट अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई। बाजार का मिला-जुला असर सराफा कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव से आम ग्राहक खरीदारी को लेकर दुविधा में है, जबकि निवेशक इसे अवसर के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में सोना-चांदी की दिशा अंतरराष्ट्रीय बाजार और निवेशकों की रणनीति पर निर्भर करेगी।

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रायपुर में अवैध कॉलोनियों पर निगम की सख्ती, हीरापुर–जरवाय व सोनडोंगरी में जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक

रायपुर। राजधानी रायपुर में अवैध कॉलोनियों के फैलाव और बिना अनुमति हो रहे निर्माण पर लगाम लगाने के लिए नगर पालिक निगम ने कड़ा कदम उठाया है। निगम ने हीरापुर–जरवाय और सोनडोंगरी क्षेत्र की कई जमीनों को अवैध कॉलोनी घोषित करते हुए वहां किसी भी तरह की गतिविधि पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, इन जमीनों को अधिग्रहण की प्रक्रिया में लिया गया है। अधिग्रहण पूरा होने तक संबंधित क्षेत्रों में निर्माण कार्य, जमीन की खरीद-बिक्री और नया कब्जा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इन क्षेत्रों में पाई गई अवैध प्लॉटिंग नगर निगम की ओर से जारी सूचना के अनुसार, हीरापुर–जरवाय क्षेत्र में कई खसरा नंबरों की जमीनों पर बिना वैध अनुमति के प्लॉटिंग की जा रही थी। इसी तरह सोनडोंगरी इलाके में भी कई भूखंडों को अवैध कॉलोनी की श्रेणी में चिन्हित किया गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कड़ी कार्रवाई नगर निगम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान यदि कोई व्यक्ति इन जमीनों पर निर्माण करता है, कब्जा करता है या खरीद-फरोख्त करता है, तो उससे होने वाले सभी आर्थिक और कानूनी नुकसान की जिम्मेदारी उसी व्यक्ति की होगी। ऐसे मामलों में नगर निगम किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं होगा। क्यों जरूरी हुआ यह कदम नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर में तेजी से बढ़ रहे अवैध निर्माण और बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनियों को रोकने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी। कई मामलों में लोग बिना जांच-पड़ताल के जमीन खरीद लेते हैं और बाद में कानूनी परेशानियों में फंस जाते हैं। नागरिकों से निगम की अपील नगर निगम ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे हीरापुर–जरवाय और सोनडोंगरी क्षेत्रों में जमीन या मकान खरीदने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति की पूरी जांच जरूर करें। यह सुनिश्चित करें कि जमीन नगर निगम से स्वीकृत है या नहीं। निगम ने यह भी संकेत दिया है कि अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और भविष्य में नियम तोड़ने वालों पर और अधिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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शराब घोटाला केस: जेल में बंद कवासी लखमा से मिलने पहुंचे PCC चीफ दीपक बैज

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज शुक्रवार को शराब घोटाले के मामले में जेल में बंद वरिष्ठ कांग्रेस नेता कवासी लखमा से मुलाकात करने पहुंचे। जेल में हुई इस मुलाकात के दौरान दीपक बैज ने लखमा की सेहत का हाल जाना और उनके स्वास्थ्य को लेकर जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले ही कवासी लखमा की आंखों की सर्जरी हुई थी। दीपक बैज की यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है, जब कथित शराब घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच लगातार जारी है और राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बस्तर के कद्दावर आदिवासी नेता हैं कवासी लखमा कवासी लखमा को बस्तर अंचल के सबसे प्रभावशाली और मजबूत आदिवासी नेताओं में गिना जाता है। वे सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक चुने जा चुके हैं। वर्ष 2013 में हुए दरभा घाटी नक्सली हमले में वे उन नेताओं में शामिल थे, जो बाल-बाल बच गए थे। 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कवासी लखमा को आबकारी मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 13 मंत्रियों में से केवल चार ही अपनी सीट बचा पाए थे, जिनमें कवासी लखमा भी शामिल रहे। क्या है छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला? छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की जा रही है। ED ने इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में FIR दर्ज कराई है, जिसमें करीब 3,200 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का दावा किया गया है। FIR में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। ED के मुताबिक, तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन MD एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया। फिलहाल मामले में ED की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

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रायपुर में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क का भंडाफोड़, 6 आरोपी गिरफ्तार; ₹37.50 लाख नकद व लग्जरी कारें जब्त

रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस ने ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालित करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। गंज थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर 31 जनवरी 2026 की रात कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से भारी मात्रा में नकदी, मोबाइल फोन और तीन लग्जरी कारें बरामद की गई हैं। पुलिस को सूचना मिली थी कि नागोराव गली अंडरब्रिज के पास कुछ लोग महिंद्रा थार और नेक्सा एक्सएल कारों में बैठकर मोबाइल के जरिए ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा चला रहे हैं। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी कर दो कारों में सवार 6 लोगों को हिरासत में लिया। गिरफ्तार आरोपियों में रखब देव पाहुजा, पीयूष जैन, जितेन्द्र कुमार कृपलानी उर्फ जित्तू, दीपक अग्रवाल, कमल राघवानी और सचिन जैन शामिल हैं। तलाशी में करोड़ों की संपत्ति जब्त पुलिस तलाशी के दौरान आरोपियों के कब्जे से ₹37.50 लाख नकद, 10 मोबाइल फोन, 2 महिंद्रा थार और 1 नेक्सा एक्सएल कार बरामद की गई। जब्त संपत्ति की कुल अनुमानित कीमत करीब ₹92.50 लाख बताई जा रही है। जांच में सामने आया कि आरोपी jmdbet777.com और Classic777.com जैसी ऑनलाइन सट्टा वेबसाइटों के माध्यम से मास्टर आईडी बनाकर क्रिकेट सट्टा चला रहे थे। पूछताछ के दौरान आरोपी कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला गंज थाना पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112(2) के तहत मामला दर्ज किया है। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क बड़े स्तर पर संचालित किया जा रहा था। फिलहाल आरोपियों के मोबाइल, डिजिटल लेन-देन और संपर्कों की गहन जांच जारी है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां व खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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110 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ी ट्रेन: बिलासपुर–भूपदेवपुर चौथी रेल लाइन पर हाई-स्पीड ट्रायल सफल

बिलासपुर–झारसुगुड़ा चौथी रेल लाइन परियोजना के तहत कोतरलिया–रायगढ़–किरोड़ीमल नगर–भूपदेवपुर के बीच 26.1 किलोमीटर लंबी नई चौथी रेल लाइन का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। शुक्रवार को इस खंड पर 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हाई-स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक किया गया। रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) बीके मिश्रा ने इस नई लाइन का निरीक्षण कर स्पीड ट्रायल लिया। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर रेल मंडल अंतर्गत नई रेल लाइनों, दोहरीकरण, तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण कार्य तेज़ी से किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बिलासपुर–झारसुगुड़ा रेल खंड पर लगभग 206 किलोमीटर लंबी विद्युतीकृत चौथी रेल लाइन का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। परियोजना के एक महत्वपूर्ण चरण के रूप में कोतरलिया से भूपदेवपुर तक नई लाइन तैयार कर ली गई है। इंटरलॉकिंग सहित सभी तकनीकी कार्य पूर्ण होने के बाद CRS बीके मिश्रा रायगढ़ पहुंचे। गुरुवार को उन्होंने नई चौथी लाइन का प्रारंभिक परीक्षण किया, जबकि शुक्रवार को विस्तृत निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान स्टेशनों के केबिन, पैनल रूम, यार्ड, इंटरलॉकिंग व्यवस्था, प्वाइंट, क्रॉसिंग, ओएचई लाइन, ब्रिज और सिग्नलिंग उपकरणों की गहन जांच की गई। इसके साथ ही मोटर ट्रॉली के माध्यम से भी पूरे खंड का निरीक्षण किया गया। बाद में ओएमएस कोच के साथ हाई-स्पीड ट्रेन चलाकर स्पीड ट्रायल लिया गया। इधर, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत बैकुंठ–उरकुरा खंड के बीच 26.40 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन के निर्माण को भी रेल मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना पर लगभग 426.01 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह खंड बिलासपुर–रायपुर–नागपुर मुख्य रेल मार्ग का अहम हिस्सा है और मुंबई–हावड़ा उच्च घनत्व नेटवर्क रूट में शामिल है। नई लाइनों के शुरू होने से यात्री और मालगाड़ी संचालन को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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80 करोड़ के फर्जी बिल, 14 करोड़ की GST चोरी: DGGI ने रायपुर से कारोबारी को किया गिरफ्तार

रायपुर में वस्तु एवं सेवा कर (GST) चोरी के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की रायपुर जोनल यूनिट ने करीब 80 करोड़ रुपये के फर्जी इनवॉइस बनाकर 14 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी करने के आरोप में कारोबारी संतोष वाधवानी को गिरफ्तार किया है। आरोपी को 29 जनवरी की रात लगभग 9 बजे रायपुर से हिरासत में लिया गया। DGGI की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अपने बेटे के नाम पर रजिस्टर्ड फर्म मेसर्स विजय लक्ष्मी ट्रेड कंपनी का संचालन किया और इसी फर्म के माध्यम से बिना किसी वास्तविक माल या सेवा की आपूर्ति किए फर्जी इनवॉइस जारी किए। इन इनवॉइस के आधार पर गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ उठाया गया, जिससे सरकारी खजाने को करीब 14 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई खुफिया इनपुट और उन्नत डेटा एनालिटिक्स के आधार पर की गई। जांच के दौरान बैंक स्टेटमेंट, ई-वे बिल डेटा और अन्य वित्तीय लेन-देन का गहन विश्लेषण किया गया, जिससे पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जांच में स्पष्ट हुआ कि इन लेन-देन के पीछे कोई वास्तविक व्यापारिक गतिविधि नहीं थी। आरोपी के खिलाफ CGST अधिनियम, 2017 की धारा 69 के तहत गिरफ्तारी की गई है। यह अपराध अधिनियम की धारा 132 के अंतर्गत दंडनीय है। गिरफ्तारी के बाद संतोष वाधवानी को रायपुर जिला न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में रायपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। DGGI रायपुर जोनल यूनिट ने स्पष्ट किया है कि GST चोरी और अवैध वित्तीय गतिविधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग ने कारोबारियों से GST कानूनों का सख्ती से पालन करने की अपील करते हुए चेतावनी दी है कि फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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