January 2026

180 दिन की निगरानी के बाद DRI की बड़ी कार्रवाई: रायपुर एयरपोर्ट से नाइजीरियन ड्रग पैडलर गिरफ्तार

रायपुर में डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। नाइजीरिया से कोकीन लाकर छत्तीसगढ़ में सप्लाई करने वाले एक नाइजीरियन नागरिक को रायपुर एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान हेनरी टोकहूक्यू के रूप में हुई है, जो नवा रायपुर की एक निजी यूनिवर्सिटी में छात्र था। DRI अधिकारियों ने आरोपी के पास से 245 ग्राम कोकीन बरामद की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 1.50 करोड़ रुपये बताई जा रही है। एजेंसी के मुताबिक आरोपी बीते छह महीने से उनकी रडार पर था और 180 दिनों की लगातार रेकी के बाद उसे रंगे हाथों पकड़ा गया। छात्रों को बनाता था निशाना, सिंडिकेट बनाकर करता था सप्लाई जांच में सामने आया है कि आरोपी सिर्फ ड्रग्स लाने तक सीमित नहीं था, बल्कि उसने स्थानीय स्तर पर एक नेटवर्क तैयार कर लिया था। वह निजी कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को निशाना बनाकर कोकीन की सप्लाई करता था और केवल भरोसेमंद लोगों के जरिए ही सौदा करता था। ऐसे खुला पूरा खेल DRI को लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे कि रायपुर के कुछ निजी कॉलेजों में पढ़ने वाले विदेशी छात्र नशे के कारोबार में शामिल हैं। मार्च 2025 से एजेंसी ने ऐसे छात्रों की गतिविधियों पर नजर रखना शुरू किया और संदिग्धों की एक सूची बनाई गई। जुलाई 2025 में हेनरी टोकहूक्यू का नाम सामने आया। इसके बाद DRI ने उसके संपर्कों, कॉल पैटर्न और गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी। उसके कुछ ग्राहकों को विश्वास में लेकर एजेंसी ने नेटवर्क की जानकारी जुटाई। एयरपोर्ट पर दबोचा गया आरोपी 28 जनवरी 2026 को DRI को पुख्ता सूचना मिली कि आरोपी नाइजीरिया से ड्रग्स लेकर रायपुर पहुंचने वाला है। सूचना मिलते ही DRI ने एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ मिलकर घेराबंदी की और रायपुर एयरपोर्ट परिसर में ही आरोपी को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके बैग से कोकीन बरामद हुई। पूछताछ में आरोपी ने अपने कुछ साथियों के नाम भी बताए हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है। यूनिवर्सिटी में रहकर चला रहा था नेटवर्क DRI के अनुसार, हेनरी पिछले तीन साल से नवा रायपुर स्थित श्री रावतपुरा सरकार यूनिवर्सिटी में बीएसडब्ल्यू (बैचलर ऑफ सोशल वर्क) की पढ़ाई कर रहा था और यूनिवर्सिटी हॉस्टल में रहता था। कुछ समय पहले वह नाइजीरिया गया था और लौटते वक्त ड्रग्स लेकर आया। एजेंसी को शक है कि यह खेप रायपुर, भिलाई और संभवतः नागपुर तक सप्लाई की जानी थी। मोबाइल से मिले अहम सबूत DRI ने आरोपी का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। फोन से चैट्स, कॉल रिकॉर्ड और लेनदेन से जुड़े सबूत मिले हैं। कार्रवाई वाले दिन जिन लोगों से आरोपी संपर्क में था, उन्हें नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। प्रदेश में 100 से ज्यादा विदेशी छात्र जांच एजेंसियों के मुताबिक रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में विभिन्न विश्वविद्यालयों में 100 से अधिक विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। आरोपी के संपर्क सिर्फ एक यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं थे, बल्कि कुछ अन्य निजी संस्थानों से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। 2025 में ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई साल 2025 में रायपुर पुलिस और अन्य एजेंसियों ने ड्रग्स नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की थी। विशेष अभियानों के तहत 271 मामलों में 445 आरोपियों को गिरफ्तार कर 2.78 करोड़ रुपये से ज्यादा की नशीली सामग्री जब्त की गई थी। जब्त किए गए पदार्थों में गांजा, अफीम, ब्राउन शुगर, हेरोइन, चरस, एमडीएमए, कोकीन, नशीली गोलियां, सिरप और मैजिक मशरूम शामिल थे।

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रायपुर में लेट नाइट गश्त: पुलिस ने पकड़े 23 संदिग्ध, तलाशी में बरामद चाकू और तलवार

रायपुर: राजधानी में सुरक्षा कड़ी करने के लिए पुलिस ने देर रात विशेष अभियान चलाया। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देश पर शहर के सभी थाना क्षेत्रों में रात्रि गश्त बढ़ाई गई, ताकि अपराध को होने से पहले ही रोका जा सके। 28-29 जनवरी की रात अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (वेस्ट जोन) राहुल देव शर्मा और सहायक पुलिस आयुक्त कोतवाली दीपक मिश्रा के नेतृत्व में विभिन्न इलाकों में गश्त की गई। इस दौरान थाना प्रभारियों और पुलिस टीमों ने संदिग्ध व्यक्तियों की जांच की। 23 संदिग्ध पकड़े गए चेक पोस्ट और सघन जांच पुलिस अधिकारियों ने कहा कि शहर में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए रात्रि गश्त और सघन जांच अभियान लगातार जारी रहेगा।

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छत्तीसगढ़ में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के नियम बदले, एक साल बाद मजिस्ट्रेट के पास आवेदन अनिवार्य

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब यदि प्रमाण पत्र बनवाने में एक साल से अधिक समय बीत गया हो, तो आवेदन न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास करना होगा। मजिस्ट्रेट जांच के बाद आदेश पारित करेंगे, फिर उप-रजिस्ट्रार प्रमाण पत्र जारी करेगा। पहले तक यह जिम्मेदारी कलेक्टर अधिकृत अधिकारी के पास थी, जो सीधे प्रमाण पत्र जारी करता था। अब नए नियमों के तहत गोद लिए गए बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र और मृत जन्म प्रमाण पत्र भी जारी किया जा सकेगा। नए नियमों के मुख्य बिंदु प्रमाण पत्र जारी करने की समय सीमा छत्तीसगढ़ सरकार ने यह नियम 2026 के जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत बनाए हैं। इसमें गर्भावधि की न्यूनतम अवधि 28 सप्ताह तय की गई है।

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CSEB में नए बिजली कनेक्शन के नाम पर साइबर ठगी, उपभोक्ताओं को कंपनी ने किया सतर्क

रायपुर: छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) ने उपभोक्ताओं को साइबर ठगी के प्रति सावधान किया है। हाल ही में, कंपनी के नाम पर व्हाट्सएप के जरिए नए बिजली कनेक्शन का भुगतान करने और APK फाइल भेजने के मामले सामने आए हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि नए कनेक्शन या किसी भी भुगतान के लिए वह कभी भी व्हाट्सएप पर APK फाइल नहीं भेजती और न ही 10 अंकों वाले मोबाइल नंबर से कोई लिंक या संदेश भेजती है। ऐसे किसी भी संदिग्ध संदेश को डाउनलोड या क्लिक न करने की सलाह दी गई है। साइबर ठगी के तरीके कंपनी के कार्यपालक निदेशक (ऊर्जा एवं आईटी) वी.के. साय ने बताया कि कुछ जिलों में उपभोक्ताओं को नकली APK फाइल भेजी गई, जिसे डाउनलोड करने के बाद मोबाइल हैक हो गया और बैंक खातों से पैसे चोरी हो गए। ऐसे मामलों की शिकायतें पुलिस में दर्ज कराई गई हैं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी बिजली कनेक्शन काटने या नया कनेक्शन देने के नाम पर उपभोक्ताओं को ठगने का प्रयास कर रहे हैं। इसलिए, बिजली से संबंधित भुगतान केवल निर्धारित और अधिकृत माध्यमों से ही करें। आधिकारिक संपर्क और सुरक्षा उपाय CSPDCL ने बताया कि वह संदेश भेजने के लिए केवल CSPDCL-S सेंडर आईडी का उपयोग करती है। भुगतान की सुविधा केवल संबंधित बिजली कार्यालय, ATP केंद्र, Mor Bijli App या कंपनी की अधिकृत वेबसाइट पर उपलब्ध है। संपर्क और जानकारी के लिए उपभोक्ता केंद्रीकृत कॉल सेंटर 1912 या नजदीकी वितरण केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।

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शंकराचार्य निश्चलानंद बोले- तामझाम और अव्यवस्था के कारण रोके गए अविमुक्तेश्वरानंद, हिंदू राष्ट्र किसी के विरोध में नहीं

दुर्ग: शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद हिंदू राष्ट्र अभियान के तीसरे चरण के तहत दुर्ग पहुंचे और यहां उन्होंने गोवर्धन मठ, पुरी के पीठाधीश्वर शंकराचार्य के बारे में सफाई दी। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान करने से नहीं रोका गया, बल्कि तामझाम और अव्यवस्था के चलते प्रशासन ने रोक लगाई थी। स्वामी निश्चलानंद ने जोर देकर कहा कि मामले को गलत तरीके से पेश किया गया। उनका कहना था कि हिंदू राष्ट्र किसी के विरोध में नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को मजबूत करने के लिए है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म शांति, सह-अस्तित्व और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देता है। दुर्ग में हिंदू राष्ट्र अभियान और प्रवचन स्वामी निश्चलानंद ने बताया कि हिंदू राष्ट्र अभियान के तीसरे चरण के तहत वे दुर्ग आए हैं। यहां वे भक्तों से मिलेंगे और आध्यात्मिक ज्ञान पर प्रवचन देंगे। यह कार्यक्रम दुर्ग जिले के अंडा गांव में आयोजित किया गया। अविमुक्तेश्वरानंद का प्रयागराज माघ मेला छोड़ना स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज माघ मेला बीच में ही छोड़ दिया और काशी के लिए रवाना हो गए। उन्होंने कहा कि “मन इतना व्यथित है कि बिना स्नान किए ही विदा ले रहे हैं। श्रद्धा के साथ आए थे, लेकिन घटना ने पूरी उम्मीद तोड़ दी।” उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से उन्हें सम्मानित तरीके से पालकी में स्नान कराने का प्रस्ताव आया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि दिल में दुख और गुस्सा होने पर पवित्र जल भी शांति नहीं दे सकता। अब उनका मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच चुका है, जहां वकील गौरव द्विवेदी ने CBI जांच की मांग करते हुए चीफ जस्टिस को लेटर पिटीशन भेजा है। विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को पुलिस ने रोक दिया था। शिष्य पालकी ले गए और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई। कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया, और एक साधु को चौकी में पीटा गया। शंकराचार्य नाराज हो गए और अपने समर्थकों को छुड़ाने पर अड़े रहे। पालकी को संगम से 1 किमी दूर तक ले जाया गया और यह क्षत्रप टूट गया। इसके बाद शंकराचार्य संगम के तट पर धरने पर बैठे रहे और स्नान नहीं कर पाए। प्रशासन और संत समाज की प्रतिक्रिया इस विवाद ने संत समाज को दो हिस्सों में बाँट दिया। हालांकि तीनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में रहे। शंकराचार्य की मांग थी कि प्रशासन माफी मांगे, तभी वह स्नान करेंगे। इस विवाद के बीच बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने इस्तीफा दिया और 24 घंटे बाद अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर ने भी इस्तीफा दे दिया।

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गलत कार्रवाई के आरोपों में स्मृतिनगर चौकी प्रभारी लाइन अटैच, हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद एसपी की कार्रवाई

दुर्ग जिले के स्मृतिनगर चौकी के प्रभारी उप निरीक्षक गुरविंदर सिंह संधु को बुधवार को उनके पद से हटाकर रक्षित केंद्र भेज दिया गया है। यह प्रशासनिक कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनके आचरण की जांच कराने के निर्देश पुलिस महानिदेशक (DGP) को दिए थे। गुरविंदर सिंह पर दो व्यापारियों के खिलाफ गलत और मनमानी कार्रवाई करने के गंभीर आरोप लगे थे। इन्हीं मामलों के बाद पुलिस विभाग ने चौकी प्रभारी बदलने का फैसला लिया है। उनकी जगह भिलाई भट्टी थाना प्रभारी राजेश कुमार साहू को स्मृतिनगर चौकी का नया प्रभारी बनाया गया है। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी वाला पहला मामला पहला मामला एक स्थानीय व्यवसायी सुजीत साव से जुड़ा है। इस केस में हाईकोर्ट ने चौकी प्रभारी के आचरण पर गंभीर सवाल उठाए थे। याचिकाकर्ता के अनुसार, महिला से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में गिरफ्तारी के बाद व्यवसायी को चौकी लाकर पीटा गया और फिर हथकड़ी पहनाकर सड़कों पर जुलूस निकाला गया। उसे रात करीब 9 बजे जेल दाखिल कराया गया। कोर्ट ने पाया कि इस पूरे मामले में एसआई गुरविंदर सिंह संधु की कार्रवाई नियमों के विपरीत थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने DGP को निर्देश दिया था कि उनके आचरण की उचित स्तर पर जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। दूसरा मामला: होटल कारोबारी से मारपीट, बिना FIR जेल दूसरा चर्चित मामला भिलाई के एक होटल कारोबारी से जुड़ा है। आरोप है कि जांच के नाम पर पुलिस ने होटल में दबिश दी और कारोबारी को उसकी मां के सामने ही पीटा। इसके बाद बिना एफआईआर दर्ज किए सरकारी काम में बाधा का आरोप लगाकर उसे जेल भेज दिया गया। इस मामले में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को पीड़ित को 1 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच के बाद यह राशि दोषी अधिकारियों से वसूली जा सकती है। साथ ही गृह विभाग के सचिव को निर्देश दिए गए कि पुलिसकर्मियों को मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद कार्रवाई इन दोनों मामलों में हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियों और जांच के आदेशों के बाद स्मृतिनगर चौकी प्रभारी को हटाया जाना महज संयोग नहीं माना जा रहा। पुलिस महकमे में इसे जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है। दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने आदेश जारी कर गुरविंदर सिंह संधु को लाइन अटैच कर दिया है। पुलिस विभाग में फेरबदल जारी आदेश के अनुसार—

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दुर्ग में पत्नी की जलाकर हत्या: 12 साल पुराने केस में पति को उम्रकैद, कोर्ट ने मौत की सजा से किया इनकार

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पत्नी को जिंदा जलाने के सनसनीखेज मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। नेवई थाना क्षेत्र के इस 12 साल पुराने प्रकरण में सत्र न्यायालय ने आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा दी है। हालांकि, अदालत ने इसे “विरल से विरलतम” अपराध की श्रेणी में नहीं मानते हुए मृत्युदंड देने से इनकार कर दिया। घरेलू विवाद बना हत्या की वजह अभियोजन पक्ष के मुताबिक यह घटना 15 जनवरी 2012 की रात की है। नेवई के मिनीमाता पारा निवासी ममता (25) अपने पति घांसू उर्फ झांसूराम के साथ रहती थी। आरोपी अपनी पहली पत्नी सुमन का पक्ष लेता था, जिससे पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। घटना की रात करीब 9:30 बजे आरोपी शराब के नशे में घर पहुंचा और ममता से गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद उसने जान से मारने की धमकी देते हुए एक प्लास्टिक बोतल में रखा मिट्टी का तेल ममता पर डाल दिया। आग लगाने के बाद भी नहीं रुका आरोपी अभियोजन के अनुसार, भय और तनाव की स्थिति में ममता ने खुद को आग लगा ली। इसके बावजूद आरोपी नहीं रुका और उसने जलती हुई पत्नी पर दोबारा केरोसिन डाल दिया, जिससे आग और तेज हो गई। ममता गंभीर रूप से झुलस गई। उसकी चीखें सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। मरणासन्न बयान में पति पर लगाए आरोप घटना की जानकारी नेवई थाना को रात 9:40 बजे मिली, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और ममता को दुर्ग के शासकीय अस्पताल के बर्न यूनिट में भर्ती कराया गया। अगले दिन कार्यपालिक मजिस्ट्रेट डी.आर. मरकाम ने ममता का मरणासन्न कथन दर्ज किया। अपने बयान में ममता ने साफ कहा कि उसके पति ने जान से मारने की नीयत से उस पर मिट्टी का तेल डाला और आग लगने के बाद भी केरोसिन डालता रहा। इलाज के दौरान मौत, हत्या में बदला केस पहले पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया था, लेकिन 22 जनवरी 2012 को इलाज के दौरान ममता की मौत हो गई। इसके बाद केस को धारा 302 (हत्या) में बदल दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल से जले कपड़े, जली साड़ी और मिट्टी तेल की बोतल जब्त की। 12 साल फरार रहा आरोपी, 2024 में गिरफ्तारी घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था। वर्ष 2014 में अदालत ने उसे फरार घोषित करते हुए स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया। करीब 12 साल बाद, 17 नवंबर 2024 को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। कोर्ट का निर्णय सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने गवाहों, साक्ष्यों और मरणासन्न बयान के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि अपराध बेहद गंभीर है, लेकिन इसे विरल से विरलतम श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने आरोपी घांसू उर्फ झांसूराम को आजीवन कारावास, ₹1000 का अर्थदंड और अर्थदंड नहीं देने पर 6 माह अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को दिल्ली तलब: खड़गे-राहुल संग अहम बैठक आज, आंदोलनों की बनेगी रणनीति

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की एक अहम बैठक आज दिल्ली में होने जा रही है। यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ एआईसीसी मुख्यालय में शाम 5 बजे आयोजित की जाएगी। इसके लिए प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को विशेष रूप से दिल्ली बुलाया गया है। बैठक में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत शामिल होंगे। इनके अलावा दिल्ली पहुंचे अन्य प्रदेश कांग्रेस पदाधिकारी भी इस बैठक का हिस्सा रहेंगे। संगठन और जनहित के मुद्दों पर मंथन पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस उच्चस्तरीय बैठक में संगठनात्मक नियुक्तियों, आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और मनरेगा व एसआईआर जैसे अहम जनहित से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में राज्यभर में होने वाले विरोध प्रदर्शन, धरना और आंदोलन की रूपरेखा भी इसी बैठक में तय की जा सकती है। राहुल गांधी की अध्यक्षता में होगी बैठक राहुल गांधी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ में कांग्रेस संगठन को मजबूत करना और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनज़र पार्टी की रणनीति को धार देना है। बैठक में यह भी तय होगा कि किन जिलों और क्षेत्रों में कांग्रेस को ज्यादा सक्रियता दिखानी है और किन मुद्दों को जनता के बीच प्राथमिकता से उठाया जाएगा। दीपक बैज और महंत पेश करेंगे रिपोर्ट पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बैठक में प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत संगठन की मौजूदा स्थिति और जमीनी फीडबैक पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। वहीं, भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव की मौजूदगी को रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, क्योंकि दोनों नेताओं का अनुभव और जनाधार पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। आगामी आंदोलनों को मिलेगी दिशा इस बैठक के बाद कांग्रेस छत्तीसगढ़ में आने वाले आंदोलनों और राजनीतिक कार्यक्रमों की औपचारिक घोषणा कर सकती है। पार्टी का दावा है कि बैठक में लिए गए फैसले केवल नेतृत्व तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनका सीधा असर कार्यकर्ताओं और आम जनता तक पहुंचेगा। कुल मिलाकर, आज की यह बैठक छत्तीसगढ़ कांग्रेस के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है और इसके नतीजे आने वाले हफ्तों में प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों की दिशा तय कर सकते हैं।

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मैं टोनही नहीं हूं 20–21 साल से इंसाफ की लड़ाई, कोई कोर्ट में भटक रही तो कोई समाज से जूझ रही

छत्तीसगढ़ में आज भी कई महिलाएं “टोनही” (डायन) का ठप्पा लगने के बाद अमानवीय यातनाएं झेलने को मजबूर हैं। किसी की आंखें फोड़ दी गईं, किसी को घर से बेदखल कर दिया गया, तो किसी को गांव से बहिष्कृत कर दिया गया। इन पीड़ित महिलाओं का संघर्ष केवल हमलावरों से नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था दोनों से है—और यह संघर्ष 20 से 21 सालों से जारी है। एक पीड़िता श्याम बाई जब अपने घर की खाट पर बैठी मिलीं, तो उन्होंने दर्द भरी आवाज में कहा—“मुझे टोनही कहकर मारा गया, पीटा गया। मेरी और मेरे पति की आंखें फोड़ दी गईं। घर छीन लिया गया, लेकिन आरोपी खुले घूम रहे हैं।” उनके गांव की दीवारों पर आज भी चेतावनी लिखी है—महिला को मारने पर जेल होगी, टोनही कहने पर 13 साल की सजा—लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। पुनर्वास को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं सामाजिक संगठनों का कहना है कि राज्य में टोनही पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास के लिए अब तक कोई ठोस सरकारी नीति नहीं बनी है। इसी वजह से मांग उठ रही है कि कम से कम पीड़िताओं को न्याय के साथ जीवन दोबारा शुरू करने का अवसर मिले। प्रमुख मांगें: डराने वाले आंकड़े, हकीकत और भी भयावह ये तो सिर्फ दर्ज मामले हैं, असल संख्या इससे कहीं ज्यादा बताई जाती है। विशेषज्ञों की राय: मुआवजे का अलग प्रावधान जरूरी डॉ. दिनेश मिश्रा, अध्यक्ष, अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति, कहते हैं कि टोनही प्रताड़ना के सैकड़ों मामले सालों से अदालतों में लंबित हैं। पीड़िताएं सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक तंगी झेल रही हैं, लेकिन मुआवजे और पुनर्वास को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं है।उनका सवाल है—जब सड़क हादसे, करंट या सांप के काटने पर मुआवजा मिल सकता है, तो टोनही जैसे गंभीर अपराध में क्यों नहीं? वहीं गजेंद्र सोनकर, सरकारी वकील (रायपुर कोर्ट) बताते हैं कि कानून में अधिकतम 5 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है, और जुर्माने से ही मुआवजा दिया जाता है। कानून सख्त है, लेकिन जागरूकता और प्रभावी क्रियान्वयन की भारी कमी है। 22 साल बाद भी इंसाफ अधूरा 17 नवंबर 2025 को रायपुर की अदालत ने गरियाबंद जिले के लचकेरा गांव की तीन पीड़ित महिलाओं को सूचना दी कि आरोपियों से वसूले गए जुर्माने से उन्हें 75-75 हजार रुपये मुआवजा मिलेगा। यह मामला 2003 का है, जब महिलाओं को निर्वस्त्र कर गांव में घुमाया गया, मारपीट की गई और अमानवीय यातनाएं दी गईं।22 साल बाद भी आरोपी बरी हैं और पीड़िताएं मुआवजे के लिए आज भी अदालतों के चक्कर काट रही हैं। क्या कहता है कानून? टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005 के तहत: छत्तीसगढ़ में मामलों की गंभीरता को देखते हुए अलग कानून तो बना, लेकिन उसका असर अब तक जमीन पर पूरी तरह नहीं दिखा।

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सुबह पुलिस की रेड, शाम को फिर नशे का कारोबार: 10 रुपये में बिक रहा गोगो पेपर, चिलम भी आसानी से उपलब्ध

राजधानी रायपुर में नशे के खिलाफ पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर के सेंट्रल, नॉर्थ और वेस्ट जोन के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में पुलिस की छापेमारी जारी है। अवैध शराब, गांजा, ड्रग्स और नशीली दवाइयों के तस्करों पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद नशे का सामान खुलेआम बिकता नजर आ रहा है। कई इलाकों में नशीले पदार्थ सरेआम बेचे जा रहे हैं, जबकि कुछ जगहों पर चोरी-छिपे पुड़िया बनाकर सप्लाई की जा रही है। तस्कर पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए अब होम डिलीवरी जैसे तरीकों का भी सहारा ले रहे हैं। कई इलाकों में आसानी से मिला गोगो पेपर पुलिस की सख्ती के बीच शाम के समय राजातालाब, सड्डू, डंगनिया, टिकरापारा और रायपुरा क्षेत्रों में नशे से जुड़ा सामान खरीदने की कोशिश की गई, जहां गोगो पेपर आसानी से उपलब्ध मिला। इसका इस्तेमाल गांजा पीने के साथ-साथ अन्य नशीले पदार्थों के सेवन में भी किया जा रहा है। बाजार में गोगो पेपर 10 से 25 रुपये तक में बेचा जा रहा है। पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ी कीमतें पुलिस की लगातार कार्रवाई के चलते पहले 10 रुपये में मिलने वाला गोगो पेपर अब 25 से 30 रुपये में बिकने लगा है। पहले पान ठेलों और दुकानों में गांजा लपेटकर गोगो दिया जाता था, लेकिन अब कार्रवाई के डर से केवल पेपर ही बेचा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, गोगो बेचने वालों को पुलिस की रेड की जानकारी पहले ही मिल जाती है। पुलिस के पहुंचते ही दुकानें बंद कर दी जाती हैं और कार्रवाई खत्म होते ही फिर से खोल दी जाती हैं। चिलम और हुक्का सामान भी खुलेआम गोगो पेपर के अलावा कुम्हारों के पास आज भी मिट्टी की चिलम आसानी से मिल रही है। वहीं गोलबाजार क्षेत्र में चीनी मिट्टी और प्लास्टिक की चिलम भी खुलेआम बिक रही है। प्रतिबंध के बावजूद हुक्का का सामान और फ्लेवर भी कई दुकानों पर उपलब्ध है। रायपुर नॉर्थ जोन में बड़ी कार्रवाई, 9 दुकानें सील पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद रायपुर में नशे के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। बुधवार सुबह रायपुर नॉर्थ जोन में पुलिस ने एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान 9 दुकानों और पान ठेलों से गांजा सेवन में उपयोग होने वाला गोगो पेपर और हुक्का सामग्री बरामद की गई। पुलिस ने करीब 2 लाख रुपये मूल्य का सामान जब्त कर संबंधित दुकानों को सील कर दिया है। उरला-बीर्गांव और अन्य इलाकों में भी छापेमारी इसी तरह उरला-बीर्गांव क्षेत्र में पुलिस ने चार पान ठेलों और दुकानों पर कार्रवाई करते हुए गोगो पेपर जब्त किया। दुकानों को सील कर संचालकों पर कोटपा एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। खमतराई, उरला समेत अन्य इलाकों में भी कार्रवाई जारी है। पुलिस का कहना है कि गोगो पेपर के जरिए गांजा सेवन और तस्करी को बढ़ावा मिल रहा है। नशेड़ी इसमें बीड़ी की तरह गांजा लपेटकर कश लगाते हैं। इसी वजह से पुलिस इस पर सख्ती से रोक लगाने में जुटी है।

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