Bilashpur

हाईकोर्ट ने बिलासपुर एयरपोर्ट के धीमे काम पर जताई नाराजगी, सेना ने लौटाई 291 एकड़ जमीन

बिलासपुर के बिलासा देवी एयरपोर्ट की विकास गति को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) नाराजगी जताई। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि जब नाइट लैंडिंग की अनुमति और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो उड़ान सेवाएं क्यों नहीं शुरू की जा रही हैं। कोर्ट ने मामले में नया शपथ पत्र पेश करने का निर्देश भी दिया। सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट आशीष श्रीवास्तव और सुदीप श्रीवास्तव ने बताया कि 6 फरवरी को एयरपोर्ट को नाइट लैंडिंग का लाइसेंस मिल चुका था, लेकिन अभी तक रात में एक भी उड़ान नहीं चली। कोर्ट ने केवल एलायंस एयर पर निर्भरता को लेकर भी सवाल उठाए और अन्य एयरलाइंस को जोड़ने के प्रयासों की जानकारी मांगी। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सेना ने 290.8 एकड़ जमीन जिला प्रशासन को ट्रांसफर कर दी। अब एयरपोर्ट के पास कुल 646.8 एकड़ भूमि हो गई है। इससे रनवे विस्तार और 4-सी कैटेगरी अपग्रेडेशन की राह आसान हो जाएगी, जिससे बड़े विमानों की आवाजाही संभव होगी। एयरपोर्ट विकास के लिए कुल 198 करोड़ रुपए का मास्टर प्लान तैयार है। इसमें रनवे स्ट्रिप चौड़ीकरण, रनवे लाइटिंग, एटीसी टॉवर और आईएलएस उपकरण शामिल हैं। अब भूमि मिलने के बाद इन कार्यों को तेजी से शुरू किया बिलासपुर एयरपोर्ट की धीमी प्रगति पर हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती, सेना ने सौंप दी 291 एकड़ जमीन – अब बड़े विमानों के लिए रास्ता साफ।

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छत्तीसगढ़: अवैध संबंध के शक में बुजुर्ग महिला की तलवार से हत्या, परिवार के 7 घायल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के रतनपुर थाना क्षेत्र में एक भयावह घटना सामने आई है। अवैध संबंध के शक में हुए झगड़े के दौरान एक बुजुर्ग महिला की तलवार से आंख निकालकर हत्या कर दी गई, जबकि परिवार के सात सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सभी घायलों को सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना ग्राम पेंडरवा में हुई। आरोपी सुरेश श्रीवास को शक था कि उसकी पत्नी का शेख सलीम नामक युवक से अफेयर है। बुधवार की शाम सुरेश और उसके दो नाबालिग बेटे शेख सलीम के घर गए, लेकिन वह वहां नहीं था। इसके बाद उन्होंने घर में घुसकर परिवार पर चाकू और तलवार से हमला किया। पीड़ितों ने बताया कि हमला करते समय आरोपी ने जो सामने आया उसे मारा। घायल परिवार के अनुसार, बुजुर्ग महिला मुदाद बेगम (65) का गला काटा गया और उसकी आंखें निकाल दी गईं। अन्य सदस्यों पर भी हमले किए गए। घायल छात्रा ने बताया कि भाई का चेहरा कट गया और चाची भी घायल हुई। पुलिस ने पहले शिकायत नहीं सुनी घटना से पहले शेख सलीम के परिवार ने रतनपुर थाने में शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें सुनने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि राज्यपाल का कार्यक्रम है, बाद में शिकायत दर्ज की जाएगी। इसके बाद विवाद बढ़ गया और हिंसा भड़क उठी। आरोपियों ने खुद किया सरेंडर हमले के बाद सुरेश और उसके बेटे खुद पुलिस के पास पहुंचे और सरेंडर कर दिया। घायल परिवार के सदस्य भी अस्पताल इलाज के लिए थाने पहुंचे। एसडीओपी नुपुर उपाध्याय के अनुसार, सुरेश का आरोप था कि उसकी पत्नी ने शेख सलीम के कारण तलाक ले लिया, और इसी रंजिश के चलते हमला किया गया। अस्पताल में भर्ती घायल हमले में घायल सात लोगों में पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं। घायलों में रेहाना बेगम, शहनाज बेगम, शेख सुहाना, परी परवीन, अलिशा परवीन, सना परवीन और शेख सब्बीर शामिल हैं। कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। प्रशासन ने बढ़ाया सुरक्षा सतर्कता घटना के बाद एसएसपी रजनेश सिंह और अन्य पुलिस अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

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नशे में युवती का सड़क पर हंगामा: वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस से बदसलूकी, VIDEO वायरल

Bilaspur में वाहन जांच के दौरान एक स्कूटी सवार युवती ने शराब के नशे में जमकर हंगामा किया। पुलिस द्वारा रोकने पर उसने कार्रवाई का विरोध करते हुए अभद्र व्यवहार किया और मौके पर मौजूद लोगों से भी उलझती रही। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना Rajiv Gandhi Chowk के पास की बताई जा रही है, जहां Chhattisgarh Police की टीम देर रात वाहन चेकिंग अभियान चला रही थी। ब्रेथ एनालाइजर से चालकों की जांच की जा रही थी और शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई हो रही थी। इसी दौरान करीब 10:30 बजे स्कूटी पर आ रही युवती पुलिस को देखकर भागने की कोशिश में संतुलन खो बैठी और सड़क पर गिर गई। इसके बाद वह पुलिसकर्मियों पर ही भड़क उठी और सड़क पर जोरदार हंगामा करने लगी। जब लोग वीडियो बनाने लगे तो वह और आक्रामक हो गई और गाली-गलौज करते हुए कैमरा बंद करने को कहने लगी। पुलिस ने किसी तरह उसे शांत कर ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट कराया, जिसमें शराब पीने की पुष्टि हुई। इसके बाद मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत कार्रवाई करते हुए स्कूटी को जब्त कर लिया गया।

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Bilaspur में तनाव: हिंदू संगठनों ने सरकंडा थाना घेरकर किया हंगामा, राम सिंह पर FIR का विरोध

छत्तीसगढ़ के Bilaspur में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने सरकंडा थाने का घेराव किया। यह हंगामा हिंदूवादी नेता ठाकुर राम सिंह के खिलाफ FIR दर्ज होने के विरोध में किया गया। राम सिंह पर आरोप है कि उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर आयत उल्लाह अली खामेनेई की मौत पर जश्न मनाया और मिठाइयां बांटी। सोशल मीडिया विवाद राम सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और उन्हें देशद्रोही बताया। इस पोस्ट के बाद मुस्लिम समाज के लोग नाराज हो गए और एसएसपी कार्यालय पहुंचकर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने अंततः राम सिंह के खिलाफ FIR दर्ज कर दी। गिरफ्तारी देने का ऐलान और हंगामा राम सिंह ने हिंदू नववर्ष के एक दिन पहले, बुधवार को, सरकंडा थाने में स्वयं अपनी गिरफ्तारी देने की घोषणा की। सोशल मीडिया पर उन्होंने हिंदू संगठनों और सनातनियों को एकजुट होने का आह्वान किया। इसके बाद बड़ी संख्या में समर्थक राम सिंह के साथ थाने पहुंचे और नारेबाजी करते हुए हंगामा किया। पुलिस ने रखा कड़ा इंतजाम पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और संभावित हिंसा को देखते हुए थाने परिसर में पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए। अधिकारी समझाइश और नियंत्रण के जरिए स्थिति को शांत कराने में सफल रहे। पूरा मामला 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयत उल्लाह अली खामेनेई की मौत हुई थी। इस खबर के बाद बिलासपुर में राम सिंह ने सोशल मीडिया पर विवादित टिप्पणी की और जश्न मनाते हुए मिठाई बांटी। इसी घटना को लेकर FIR दर्ज की गई और अब मामला चर्चा का केंद्र बन गया है।

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महुआ बीनने के लिए जंगलों में लगाई जा रही आग, हर साल झुलस रही छत्तीसगढ़ की हरियाली

छत्तीसगढ़ में गर्मियों के दौरान जंगलों में आग की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं। ताजा मामला बलरामपुर जिले के लमना चोटिया गांव के पास का है, जहां बिलासपुर-अंबिकापुर मार्ग के आसपास पहाड़ियों पर महुआ के फूल बीनने के लिए जंगल में आग लगा दी गई। स्थानीय लोगों द्वारा सूखी पत्तियां जलाई जाती हैं ताकि जमीन पर गिरे महुआ के फूल साफ दिखाई दें और उन्हें आसानी से इकट्ठा किया जा सके। लेकिन इस प्रक्रिया से हर साल जंगलों को भारी नुकसान पहुंचता है। वन्यजीव और जैव विविधता पर खतरा वन विभाग और सैटेलाइट निगरानी के अनुसार, ऐसी आग से न केवल पेड़-पौधे नष्ट होते हैं बल्कि छोटे जीव-जंतु, पक्षी और संपूर्ण जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। सरगुजा संभाग के कई पहाड़ी क्षेत्रों में हर वर्ष बड़े इलाके इस आग की चपेट में आ जाते हैं। मार्च से मई के बीच बढ़ते हैं मामले गर्मी के मौसम में, खासकर मार्च से मई के बीच जंगल की आग की घटनाएं सबसे ज्यादा सामने आती हैं। राज्य में हर साल औसतन 2000 से 2500 दावानल की घटनाएं दर्ज होती हैं, जिनमें अधिकांश आग मानव गतिविधियों के कारण लगती है। इस साल भी बढ़े फायर अलर्ट प्रदेश में इस वर्ष अब तक करीब 205 स्थानों पर जंगल में आग के अलर्ट दर्ज किए जा चुके हैं, जो आने वाले महीनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका को दर्शाते हैं।

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बिजली खंभों पर बेतरतीब केबल का जाल, मामूली किराये के बदले शहर की सुरक्षा खतरे में

शहर में बिजली के खंभों पर फैले इंटरनेट और टीवी केबलों का जाल अब नागरिकों के लिए खतरा बनता जा रहा है। जगह-जगह बिना मानक के लगाए गए तार न केवल अव्यवस्था पैदा कर रहे हैं, बल्कि हादसों की आशंका भी बढ़ा रहे हैं। कई इलाकों में खंभे पूरी तरह केबल से ढके नजर आते हैं। बिजली विभाग के आंकड़ों के अनुसार शहर के लगभग 51 हजार पोलों पर निजी कंपनियों और स्थानीय केबल ऑपरेटरों के तार लगे हुए हैं। इसके बदले विभाग प्रति पोल सालाना करीब 100 रुपये किराया वसूल रहा है, लेकिन सुरक्षा नियमों का पालन नहीं हो रहा। कई स्थानों पर ये केबल जमीन से काफी कम ऊंचाई पर लटक रहे हैं। इससे बड़े वाहनों के फंसने और दोपहिया चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। नागरिकों का कहना है कि लटकते तारों के कारण कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। योजनाएं बनीं, अमल नहीं बिजली विभाग ने पुराने तार हटाकर सुरक्षित एबी केबल लगाने की योजना बनाई थी, लेकिन यह कार्य वर्षों से अधूरा पड़ा है। इसी तरह केबलों को व्यवस्थित करने की योजना भी फाइलों तक सीमित बताई जा रही है। प्रमुख बाजार क्षेत्रों में स्थिति खराब शहर के कारोना चौक, सदर बाजार, गोल बाजार, सिविल लाइन और बृहस्पति बाजार जैसे व्यस्त इलाकों में खंभों पर तारों का जाल साफ देखा जा सकता है, जहां पैदल चलना भी जोखिम भरा हो जाता है। नियमों की हो रही अनदेखी नियमों के अनुसार जमीन से 3–4 मीटर तक खंभे पर खुले तार नहीं होने चाहिए और केबल को पाइप से ढंकना जरूरी है। इसके बावजूद कई स्थानों पर बिना सुरक्षा के तार लगाए गए हैं। विभाग ने जांच के दिए निर्देश अधिकारियों का कहना है कि कम ऊंचाई वाले केबलों की जांच कराई जाएगी। जहां जरूरत होगी वहां तार बदले जाएंगे और अव्यवस्थित तरीके से लगाए गए केबल हटाए जाएंगे, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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बिलासपुर में LPG की जमाखोरी का भंडाफोड़, किचन केयर व किराना स्टोर से 126 सिलेंडर जब्त

बिलासपुर में गैस सिलेंडरों की कथित किल्लत के बीच कालाबाजारी और जमाखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। जिला प्रशासन की टीम ने कोनी और सिरगिट्टी क्षेत्र में छापेमारी कर किचन केयर और किराना दुकानों से कुल 126 घरेलू गैस सिलेंडर बरामद किए हैं। कार्रवाई के दौरान सिलेंडरों से गैस निकालने वाले उपकरण भी मिले, जिसके बाद संबंधित लोगों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर खाद्य विभाग की टीम लगातार दूसरे दिन भी कार्रवाई करती रही। इससे पहले एक अन्य छापे में 72 सिलेंडर जब्त किए जा चुके थे। प्रशासन का कहना है कि जिले में गैस की कमी नहीं है, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण बुकिंग और वितरण प्रभावित होने से लोगों को परेशानी हो रही है। कोनी क्षेत्र में एक मकान से 55 खाली घरेलू सिलेंडर बरामद हुए। जांच में पता चला कि यह मकान सुनील सोनवानी का है, जिसे एक किचन केयर संचालक को किराए पर दिया गया था। स्थानीय लोगों के अनुसार इस अवैध कारोबार में परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल हो सकते हैं। वहीं सिरगिट्टी के बन्नाक चौक स्थित एक दुकान से खाली सिलेंडर और गैस निकालने के उपकरण मिले। टीम को वहां वजन मशीन और विशेष यंत्र भी मिला, जिसका उपयोग सिलेंडर से गैस निकालने में किया जाता है। देर शाम एक बंद दुकान में छापेमारी के दौरान 61 सिलेंडर और बरामद किए गए, जिनमें घरेलू, व्यावसायिक और छोटे सिलेंडर शामिल थे। यह दुकान एक प्राथमिक स्कूल के पास स्थित है, जिससे सुरक्षा को लेकर भी गंभीर खतरा बना हुआ था। सभी सिलेंडरों को जब्त कर संबंधित प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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शादी का वादा कर बनाए संबंध हर मामले में रेप नहीं: हाईकोर्ट ने 20 साल बाद आरोपी को किया बरी

Chhattisgarh High Court ने एक अहम फैसले में कहा है कि यदि कोई महिला बालिग है और उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बने हैं, तो हर मामले में इसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता, भले ही संबंध शादी के वादे के आधार पर बने हों। अदालत ने इसी आधार पर करीब 20 साल पुराने मामले में आरोपी युवक को राहत देते हुए निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया। लोअर कोर्ट का फैसला निरस्त मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एन.के. व्यास ने सत्र न्यायालय द्वारा आरोपी को दोषी ठहराने के आदेश को अवैध बताते हुए निरस्त कर दिया। इसके साथ ही दुष्कर्म के आरोप में सजा पाए युवक को दोषमुक्त कर दिया गया। क्या था पूरा मामला घटना Surguja district के धौरपुर थाना क्षेत्र की है। वर्ष 2000 में एक युवती 12वीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान किराए के मकान में रहती थी। इसी दौरान उसकी पहचान लीना राम ध्रुव नामक युवक से हुई और दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए। युवती का आरोप था कि युवक ने शादी का भरोसा दिलाकर उससे शारीरिक संबंध बनाए और यह संबंध लगभग तीन साल तक जारी रहा। बाद में युवक ने शादी से इंकार कर दिया और कहीं चला गया। शिकायत के बाद दर्ज हुआ केस युवती की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया और उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। ट्रायल के बाद अंबिकापुर की सत्र अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए 7 साल की सजा और 5 हजार रुपये जुर्माना लगाया था। हाईकोर्ट में दी गई चुनौती सत्र न्यायालय के फैसले के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर फैसले को चुनौती दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि मामले में यह साबित नहीं हो पाया कि आरोपी ने शुरू से ही शादी का झूठा वादा कर केवल शारीरिक संबंध बनाने की मंशा रखी थी। अदालत की टिप्पणी हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि महिला बालिग है और उसे संबंधों के परिणाम की समझ है, तो ऐसे मामलों में सहमति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए हर परिस्थिति में शादी का झांसा देकर बनाए गए संबंधों को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। करीब 20 साल बाद मिला फैसला इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी वर्ष 2004 में हुई थी और 2005 में ट्रायल कोर्ट ने सजा सुनाई थी। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब लगभग दो दशक बाद हाईकोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया।

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छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में अस्थायी AC-3 कोच जोड़ा गया, यात्रियों को मिलेगी राहत

बिलासपुर: गर्मी बढ़ने के साथ ट्रेनों में एसी बर्थ की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में एक अतिरिक्त AC-3 टियर कोच जोड़ने का फैसला लिया है। रेलवे प्रशासन के अनुसार, गाड़ी संख्या 18237 कोरबा–अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में यह अतिरिक्त कोच 11 मार्च को लगाया जाएगा। वहीं गाड़ी संख्या 18238 अमृतसर–बिलासपुर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में यह सुविधा 13 मार्च 2026 को उपलब्ध रहेगी। बढ़ती गर्मी और यात्रियों की मांग को देखते हुए फैसला मार्च महीने में ही तापमान कई जगहों पर 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। ऐसे में लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों की एसी कोच में सीट पाने की मांग बढ़ गई है। रेलवे के इस फैसले से यात्रियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अतिरिक्त एसी-3 कोच लगाए जाने से ज्यादा यात्रियों को कन्फर्म बर्थ मिल सकेगी। गर्मी के मौसम और छुट्टियों के कारण ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है, ऐसे में यह अस्थायी व्यवस्था यात्रियों के लिए फायदेमंद साबित होगी।

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: पूर्व आबकारी आयुक्त की जमानत याचिका खारिज

छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना कर रहे पूर्व आबकारी आयुक्त Niranjan Das को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। Chhattisgarh High Court ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस Arvind Kumar Verma की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़ा है और इसमें आरोपी की मुख्य भूमिका सामने आई है। अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपी ने अपने पद की जिम्मेदारी के विपरीत जाकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया और सार्वजनिक धन की हेराफेरी की। यह मामला राज्य के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़ा है। Enforcement Directorate ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई करते हुए 19 दिसंबर 2025 को निरंजन दास को गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ कार्रवाई Anti Corruption Bureau Chhattisgarh की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई थी। एफआईआर में आरोप है कि शराब नीति में हेरफेर कर अवैध कमीशन वसूला गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक इस घोटाले में निरंजन दास को मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक माना गया है। हाईकोर्ट में दायर दो अलग-अलग याचिकाओं में दास ने जमानत की मांग की थी और आईपीसी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा पीएमएलए के तहत अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आरोपी उस समय आबकारी विभाग के शीर्ष प्रशासनिक पद पर थे और यह एक सुनियोजित आर्थिक अपराध है, जिसने राज्य के वित्तीय ढांचे को नुकसान पहुंचाया। आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि इस मामले में 50 से अधिक अन्य आरोपियों को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है, इसलिए उन्हें भी जमानत मिलनी चाहिए। हालांकि कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि दो महीने की हिरासत को लंबी कैद नहीं माना जा सकता। सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि जांच एजेंसियों के अनुसार इस घोटाले के जरिए लगभग 18 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई है। आरोप है कि निरंजन दास से जुड़ी करीब 8.83 करोड़ रुपये की संपत्ति पहले ही कुर्क की जा चुकी है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जमानत से जुड़ी दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं।

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