BALRAMPUR

भीषण गर्मी से चमगादड़ों की मौत, जान बचाने पेड़ों पर कराया गया पानी का छिड़काव

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर में भीषण गर्मी के कारण चमगादड़ों की लगातार हो रही मौत के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। हालात को देखते हुए पेड़ों पर पानी का छिड़काव कराया गया, ताकि गर्मी से परेशान चमगादड़ों को राहत मिल सके। पुलिस चौकी के पास स्थित पेड़ों पर हजारों की संख्या में चमगादड़ रहते हैं। पिछले कुछ दिनों से बड़ी संख्या में उनके मरने की खबर सामने आने के बाद वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। जांच के दौरान टीम ने पेड़ों पर पानी का छिड़काव कराया। वहीं मृत चमगादड़ों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, ताकि उनकी मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके। इलाके में मृत चमगादड़ों से फैल रही दुर्गंध को देखते हुए प्रशासन ने उनके निष्पादन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। पशु चिकित्सक कमला आयाम ने बताया कि वर्तमान में तापमान 40 से 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि चमगादड़ों के लिए 39 डिग्री सेल्सियस एक महत्वपूर्ण सीमा होती है। इससे अधिक तापमान होने पर उनका थर्मो-रेगुलेशन सिस्टम प्रभावित हो जाता है, जिसके कारण वे पेड़ों से गिरने लगते हैं। डॉक्टर के मुताबिक अत्यधिक गर्मी और हाइपरथर्मिया की वजह से चमगादड़ों के शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं, जिससे उनकी मौत हो सकती है। हालांकि मौत की असली वजह की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।

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बलरामपुर क्रशर प्लांट हादसा: कन्वेयर बेल्ट की सफाई के दौरान युवक की मौत

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में क्रशर प्लांट में काम करने के दौरान एक 20 साल के युवक की मौत हो गई। यह हादसा राजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम भेलाई स्थित सिंघल क्रशर प्लांट में हुआ। जानकारी के अनुसार, रविवार को युवक अल्मोन कन्वेयर बेल्ट की सफाई कर रहा था। इसी दौरान उसके ऊपर लोहे की भारी जाली गिर गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। प्लांट में मौजूद अन्य मजदूरों ने उसे गैस कटर और जेसीबी की मदद से बाहर निकाला। घायल हालत में उसे अंबिकापुर मिशन अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक युवक सरगुजा जिले के लुण्ड्रा क्षेत्र के खाराकोना गांव का रहने वाला था। घटना की जानकारी मिलने पर परिजन भी अस्पताल पहुंच गए थे। मजदूरों का कहना है कि प्लांट में काम के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जाते थे। यहां तक कि प्राथमिक उपचार की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। आरोप यह भी है कि हादसे के बाद मजदूरों पर दबाव बनाया गया कि वे घटना को किसी अन्य कारण से हुआ बताएं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने क्रशर प्लांटों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर सवाल उठाए हैं और जांच की मांग की है।

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बिलासपुर का श्री बजरंग पंचायत मंदिर: जहां आस्था के साथ मिलता था न्याय

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित श्री बजरंग पंचायत मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की अनोखी परंपरा का प्रतीक भी रहा है। यहां वर्षों से हनुमानजी को साक्षी मानकर पंचायत लगाई जाती थी, जिसमें हर वर्ग और धर्म के लोग शामिल होकर फैसलों को स्वीकार करते थे। मगरपारा-तालापारा इलाके में स्थित इस मंदिर का इतिहास करीब 100 साल पुराना बताया जाता है। उस दौर में जब अदालतों तक पहुंच आसान नहीं थी, तब लोग अपने विवाद लेकर यहां आते थे और पंचायत द्वारा दिए गए निर्णय को अंतिम मानते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा अंग्रेजी शासनकाल में शुरू हुई थी। उस समय मंदिर का वर्तमान ढांचा नहीं था, बल्कि खुले स्थान पर ही हनुमानजी की स्थापना थी। वहीं पर समाज के बुजुर्ग और प्रमुख लोग बैठकर पंचायत करते थे और भगवान को साक्षी मानकर निष्पक्ष फैसला सुनाते थे। समय के साथ यह स्थान “बजरंग पंचायत मंदिर” के नाम से प्रसिद्ध हो गया, क्योंकि यहां आस्था के साथ न्याय भी मिलता था। खास बात यह थी कि इस पंचायत में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई सभी समुदाय के लोग शामिल होते थे और बिना किसी भेदभाव के निर्णय लिए जाते थे। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि उस समय शहर में केवल सिटी कोतवाली थाना ही था, लेकिन लोग पुलिस या अदालत जाने के बजाय इस पंचायत पर अधिक भरोसा करते थे। यहां दिए गए फैसले को सभी समुदायों द्वारा सम्मानपूर्वक स्वीकार किया जाता था। आज भी यह मंदिर आपसी भाईचारे, विश्वास और निष्पक्ष न्याय की उस परंपरा की याद दिलाता है, जिसने समाज को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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बलरामपुर में भगवा ध्वज को लेकर विवाद, कचरा वाहन में ले जाने के आरोप से बढ़ा आक्रोश

Balrampur जिला मुख्यालय में नवरात्रि के दौरान भगवा ध्वज के कथित अपमान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नगर पालिका परिषद के पार्षद Amit Gupta Mantu सहित कई हिंदू संगठनों ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई है। आरोप है कि पुराने ध्वज को हटाने के बाद उसे सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखने के बजाय लापरवाही से कचरा वाहन में रखकर नगर पालिका कार्यालय लाया गया और परिसर में उसी वाहन के पास छोड़ दिया गया। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय स्तर पर नाराजगी बढ़ गई। विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इसे धार्मिक प्रतीक का अपमान बताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि नवरात्रि जैसे पवित्र पर्व के दौरान ऐसी घटना से लोगों की आस्था आहत हुई है। पार्षद ने जताई कड़ी आपत्ति पार्षद Amit Gupta Mantu ने कहा कि भगवा ध्वज श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है, इसलिए उसके साथ इस प्रकार का व्यवहार अस्वीकार्य है। उन्होंने नगर पालिका पर लापरवाही और असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए धार्मिक प्रतीकों के रखरखाव और सम्मान से जुड़े स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाने चाहिए। फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।

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