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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: ओडिशा की अंजलि मुंडा ने 200 मीटर तैराकी में जीता गोल्ड, छत्तीसगढ़ की अनुष्का को सिल्वर

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) 2026 में महिला वर्ग की 200 मीटर स्विमिंग प्रतियोगिता में ओडिशा की 15 वर्षीय तैराक अंजलि मुंडा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता। अंजलि ने फाइनल में 2:53.82 मिनट का समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया, जो युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक प्रदर्शन माना जा रहा है। इस इवेंट में छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत ने भी अपनी शानदार प्रतिस्पर्धा दिखाई और 2:59.33 मिनट के समय के साथ सिल्वर मेडल पर कब्जा किया। वहीं, महाराष्ट्र की तन्वी सुखदेवो धुर्वे तीसरे स्थान पर रहीं। फाइनल में ओडिशा की ही अंजलि मलिक ने 3:06.13 मिनट के समय के साथ पांचवां स्थान हासिल किया। पूर्ण परिणाम (टॉप पोजीशन) अंजलि मुंडा का करियर और प्रदर्शन अंजलि मुंडा ओडिशा के जाजपुर जिले की रहने वाली हैं। पहले भी राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया है और ट्राइबल गेम्स में यह गोल्ड उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उनकी इस जीत ने ओडिशा के खेल प्रेमियों में उत्साह की लहर दौड़ा दी है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में स्विमिंग का रोमांच स्विमिंग पूल में पहले दिन कई राज्यों ने अपनी प्रतिभा दिखाई, लेकिन 15 साल की अंजलि मुंडा ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। युवा खिलाड़ियों का यह उत्साह और मेहनत आगामी खेलों में उनकी सफलता की संभावनाओं को और बढ़ा रही है। अनुष्का भगत के सिल्वर प्रदर्शन ने भी छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं को गौरवान्वित किया। उनका समय लगभग 2:59 मिनट रहा, जो युवा खिलाड़ियों में प्रतिस्पर्धा और प्रेरणा पैदा करता है। इस वर्ष खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में खेलों की प्रतियोगिता में युवा प्रतिभाओं को मंच मिल रहा है और ये मुकाबले उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद करेंगे। इस शानदार स्विमिंग फाइनल ने दर्शकों और प्रतियोगियों दोनों के लिए रोमांचक क्षण पैदा किए। अंजलि मुंडा की जीत ने साबित कर दिया कि भारत के युवा खिलाड़ियों में कड़ी मेहनत और प्रतिभा से बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

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48 साल बाद खुला Jagannath Temple का रत्न भंडार, कीमती गहनों की गिनती और डिजिटल रिकॉर्डिंग शुरू

Puri स्थित Jagannath Temple के रत्न भंडार में रखे बहुमूल्य आभूषणों और रत्नों की गिनती करीब 48 वर्षों बाद फिर से शुरू कर दी गई है। यह खजाना भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के उपयोग में आने वाले गहनों से जुड़ा है। मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रक्रिया शुभ मुहूर्त में शुरू की गई और केवल अधिकृत लोगों को ही अंदर जाने की अनुमति दी गई। श्रद्धालुओं के दर्शन पर पूरी तरह रोक नहीं है, लेकिन भीतरी हिस्से में प्रवेश अस्थायी रूप से बंद रखा गया है। निर्धारित योजना के तहत पहले रोजाना उपयोग होने वाले आभूषणों की सूची बनाई जा रही है, इसके बाद बाहरी कक्ष और अंत में अंदरूनी कक्ष की जांच की जाएगी। इस बार आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञ रत्नों की पहचान कर रहे हैं और हर वस्तु की डिजिटल फोटोग्राफी की जा रही है। सोने, चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं को अलग-अलग कपड़ों में लपेटकर सुरक्षित बक्सों में रखा जा रहा है। इस प्रक्रिया में मंदिर सेवक, सरकारी बैंक अधिकारी, रत्न विशेषज्ञ और भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि शामिल हैं। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी की जा रही है। गौरतलब है कि इससे पहले 1978 में गिनती के दौरान बड़ी मात्रा में सोने-चांदी और रत्नों का रिकॉर्ड बनाया गया था।

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कटक के SCB Medical College and Hospital में आग, 10 मरीजों की मौत

ओडिशा के कटक स्थित श्रीराम चंद्र भांजा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रविवार देर रात करीब 3 बजे भीषण आग लग गई। इस हादसे में 10 मरीजों की मौत हो गई। इनमें से 7 मरीजों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि 3 की मौत इलाज के दौरान हुई। आग अस्पताल की पहली मंजिल पर स्थित ट्रॉमा केयर यूनिट के आईसीयू में लगी थी। उस समय वहां लगभग 23 मरीज भर्ती थे। मरीजों को बाहर निकालने की कोशिश के दौरान अस्पताल के कम से कम 11 कर्मचारी झुलस गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। घटना के बाद Mohan Charan Majhi अस्पताल पहुंचे और घायलों का हाल जाना। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं। SCB Medical College and Hospital कटक का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां ओडिशा के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। इससे पहले अक्टूबर 2025 में Sawai Man Singh Hospital के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में भी आग लगने से 8 मरीजों की मौत हो गई थी। उस हादसे में भी शॉर्ट सर्किट को आग लगने की वजह माना गया था।

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