Puri स्थित Jagannath Temple के रत्न भंडार में रखे बहुमूल्य आभूषणों और रत्नों की गिनती करीब 48 वर्षों बाद फिर से शुरू कर दी गई है। यह खजाना भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के उपयोग में आने वाले गहनों से जुड़ा है।

मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रक्रिया शुभ मुहूर्त में शुरू की गई और केवल अधिकृत लोगों को ही अंदर जाने की अनुमति दी गई। श्रद्धालुओं के दर्शन पर पूरी तरह रोक नहीं है, लेकिन भीतरी हिस्से में प्रवेश अस्थायी रूप से बंद रखा गया है।
निर्धारित योजना के तहत पहले रोजाना उपयोग होने वाले आभूषणों की सूची बनाई जा रही है, इसके बाद बाहरी कक्ष और अंत में अंदरूनी कक्ष की जांच की जाएगी।
इस बार आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञ रत्नों की पहचान कर रहे हैं और हर वस्तु की डिजिटल फोटोग्राफी की जा रही है। सोने, चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं को अलग-अलग कपड़ों में लपेटकर सुरक्षित बक्सों में रखा जा रहा है।
इस प्रक्रिया में मंदिर सेवक, सरकारी बैंक अधिकारी, रत्न विशेषज्ञ और भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि शामिल हैं। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी की जा रही है।
गौरतलब है कि इससे पहले 1978 में गिनती के दौरान बड़ी मात्रा में सोने-चांदी और रत्नों का रिकॉर्ड बनाया गया था।

