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रायपुर ग्रामीण पुलिस का विशेष अभियान: 600 से अधिक किरायेदारों का सत्यापन, 6 संदिग्धों से पूछताछ

रायपुर। रायपुर ग्रामीण पुलिस ने क्षेत्र में अवैध प्रवासियों और किरायेदारों के सत्यापन के लिए विशेष अभियान चलाया। अभियान के दौरान 600 से अधिक किरायेदारों के दस्तावेजों की जांच की गई, जबकि 6 संदिग्ध व्यक्तियों से विस्तृत पूछताछ कर उनका सत्यापन किया गया। पुलिस अधीक्षक रायपुर (ग्रामीण) श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अभिषेक झा और अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (माना) लम्बोदर पटेल के मार्गदर्शन में थाना सिलतरा पुलिस ने यह कार्रवाई की। अभियान के तहत औद्योगिक क्षेत्र में रहने वाले श्रमिकों, किरायेदारों तथा अन्य राज्यों से आकर निवास और कार्य कर रहे लोगों के पहचान पत्रों और दस्तावेजों की जांच की गई। साथ ही आवश्यक जानकारी एकत्र कर उनका सत्यापन किया गया। विशेष जांच के दौरान सांकरा स्थित जे.के. वीडियो हॉल परिसर में लगभग 600 किरायेदारों का भौतिक सत्यापन किया गया। इस दौरान मकान मालिकों और प्रबंधन को निर्देश दिए गए कि बिना पुलिस सत्यापन किसी भी व्यक्ति को किराये पर कमरा या आवास उपलब्ध न कराएं। साथ ही बाहरी व्यक्तियों की जानकारी समय-समय पर पुलिस को उपलब्ध कराने को कहा गया। जांच के दौरान 6 संदिग्ध व्यक्तियों की विशेष तस्दीक की गई। उनसे पूछताछ कर आवश्यक जानकारी जुटाई गई है और मामले में वैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे की जांच जारी है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अभिषेक झा ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा, अपराधों की रोकथाम और कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से अवैध प्रवासियों एवं किरायेदारों का सत्यापन अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तत्काल रायपुर ग्रामीण पुलिस के टोल फ्री नंबर 1800-233-1905 पर दें, ताकि आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके। रायपुर ग्रामीण पुलिस ने नागरिकों से अपने यहां रहने वाले सभी किरायेदारों का पुलिस सत्यापन कराने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की है।

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जनगणना ड्यूटी पर शिक्षकों का विरोध, भीषण गर्मी में सर्वे को बताया अव्यवहारिक

छत्तीसगढ़ में 1 मई से शुरू होने वाली जनगणना ड्यूटी को लेकर शिक्षकों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि मई-जून की तेज गर्मी में घर-घर जाकर सर्वे करना बेहद मुश्किल और जोखिम भरा होगा। एक ओर इस समय स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां रहती हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों को फील्ड में काम करने के लिए भेजा जा रहा है, जिसे उन्होंने अव्यवहारिक बताया है। छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि इस फैसले में मौसम की गंभीरता को नजरअंदाज किया गया है। तेज धूप और उच्च तापमान में लंबे समय तक बाहर रहकर डोर-टू-डोर सर्वे करना न केवल कठिन है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। शिक्षक संघ ने मांग की है कि जनगणना ड्यूटी के समय और प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा स्मार्टफोन की अनिवार्यता को लेकर भी शिक्षकों ने आपत्ति जताई है। सरकारी निर्देश के अनुसार, जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के पास एंड्रॉयड 12.0 या उससे ऊपर का मोबाइल होना जरूरी किया गया है। ऐसे में जिनके पास पुराने फोन हैं, उन्हें नया स्मार्टफोन खरीदना पड़ेगा, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। राज्य में जनगणना 2027 का पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ के तहत हर घर, परिवार और बुनियादी सुविधाओं का डेटा एकत्र किया जाएगा। कर्मचारी निर्धारित समय में घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। इस बार जनगणना प्रक्रिया को डिजिटल किया गया है। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच लोग ऑनलाइन पोर्टल के जरिए स्वयं भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं, जिसे सेल्फ-एन्यूमरेशन कहा गया है। इसके बाद उन्हें एक यूनिक आईडी दी जाएगी, जिसे सर्वे के दौरान कर्मचारियों को दिखाना होगा। इस चरण में मकान की स्थिति, उपयोग, निर्माण की गुणवत्ता, परिवारों की संख्या समेत कुल 33 प्रकार की जानकारियां ली जाएंगी। साथ ही पेयजल, शौचालय, बिजली, खाना बनाने के ईंधन, इंटरनेट और अन्य सुविधाओं से जुड़े सवाल भी शामिल रहेंगे। घर में रहने वाले सदस्यों और उपयोग किए जाने वाले वाहनों का विवरण भी दर्ज किया जाएगा।

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