WATER SCARCITY

रायपुर में भीषण जल संकट: गिरता भूजल, कई वार्डों में सूखे नल, टैंकर के भरोसे शहर

छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur में इन दिनों गंभीर जल संकट की स्थिति बनी हुई है। लगातार गिरते भूजल स्तर और पाइपलाइन में लो-प्रेशर की समस्या के कारण शहर के कई इलाकों में नलों से पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे आम लोग काफी परेशान हैं। नगर निगम द्वारा जल आपूर्ति सुधारने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर पाइपलाइन के इंटर-कनेक्शन से राहत मिली है, लेकिन बढ़ती गर्मी और पानी की मांग ने हालात को और मुश्किल बना दिया है। कई वार्डों में अब पूरी तरह टैंकर के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है। स्थिति यह है कि मार्च से ही शहर के कई हिस्सों में टैंकर नियमित रूप से दौड़ रहे हैं। जहां पाइपलाइन के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा, वहां भी टैंकर के जरिए सप्लाई की जा रही है। अब निजी सोसायटियों से भी पानी के लिए टैंकर की मांग बढ़ने लगी है, जो आने वाले दिनों में प्रशासन के लिए चुनौती बन सकती है। जोनवार हालात:जोन-1 के ठक्कर बापा वार्ड के गुलाब नगर, दीक्षानगर और विनायक विहार जैसे इलाके पूरी तरह टैंकर पर निर्भर हैं, जहां रोजाना कई ट्रिप में पानी पहुंचाया जा रहा है। जोन-3 में खम्हारडीह क्षेत्र की स्थिति बेहद खराब है। यहां करीब 30 हजार की आबादी में से अधिकांश लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। कई जगह पाइपलाइन नहीं है और जहां है भी, वहां से पानी नहीं आ रहा। जोन-4 के रविशंकर शुक्ल और ब्राह्मण पारा वार्ड के कई हिस्सों में लो-प्रेशर के कारण जल आपूर्ति प्रभावित है। जोन-5 के चंगोराभाठा क्षेत्र के कई वार्डों में टेल एंड तक पानी नहीं पहुंच रहा, जिससे लोग परेशान हैं। जोन-6 में महामाया मंदिर वार्ड के कई मोहल्लों में आधे हिस्से तक ही पानी पहुंच पा रहा है। जोन-9 के मोवा, दलदल सिवनी, जोरा-लाभांडी, कचना और सड्‌डू जैसे इलाकों में भीषण जल संकट है। यहां भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है और कई सोसायटियां टैंकर पर निर्भर हैं। कचना स्थित जीएडी कॉलोनी में हालात ऐसे हैं कि लोगों को टैंकर से पानी लाकर बाल्टी से ऊपर की मंजिलों तक पहुंचाना पड़ रहा है। बोरवेल की मोटर खराब होने से समस्या और बढ़ गई है, जबकि कई बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं हो पाया। नगर निगम का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों को पहले से चिन्हित किया गया है और लो-प्रेशर की समस्या दूर करने के लिए पाइपलाइन इंटर-कनेक्शन का काम जारी है। साथ ही टैंकरों के जरिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

रायपुर में भीषण जल संकट: गिरता भूजल, कई वार्डों में सूखे नल, टैंकर के भरोसे शहर Read Post »

Chhattisgarh, GOVERNMENT, Raipur, State, Top News, WATER SCARCITY

रायपुर में गहराया जल संकट: घंटों लाइन में लगकर पानी भरने को मजबूर लोग

राजधानी रायपुर इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। कई इलाकों में हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों को पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। शिवनगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है, जहां बोरवेल सूख चुके हैं और लोगों को रोजाना 3 से 4 घंटे लाइन में खड़े होकर पानी भरना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी हिना महानंद के अनुसार, सुबह और शाम दोनों समय पानी के लिए दूर जाना पड़ता है और रोज का काफी समय इसी में निकल जाता है। वहीं सुरेश तांडी का कहना है कि हर साल पानी की समस्या रहती है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा गंभीर हो गए हैं। रायपुरा क्षेत्र में भी पानी की भारी किल्लत देखी जा रही है। निवासी अजय यादव ने बताया कि पाइपलाइन लीकेज के कारण कई घरों तक पानी पहुंच ही नहीं रहा। शिकायत मिलने के बाद नगर निगम की टीम ने सर्वे शुरू कर दिया है। डंगनिया इलाके में पानी की सप्लाई तो हो रही है, लेकिन प्रेशर इतना कम है कि लोग पर्याप्त पानी नहीं भर पा रहे हैं। इससे दैनिक कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, शहर के 70 वार्डों में से 60 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रों में बोरवेल फेल हो चुके हैं। ऐसे में लोगों की निर्भरता टैंकरों पर बढ़ गई है और कई जगह पानी को लेकर गंभीर स्थिति बन गई है। शहर के लगभग 3.5 लाख घरों में से करीब 20 प्रतिशत में भी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं है। हर साल मानसून के दौरान लाखों लीटर पानी बिना उपयोग के बह जाता है, जबकि यह पानी भविष्य के लिए बचाया जा सकता है। नियमों के अनुसार, 1500 वर्ग फीट से बड़े मकानों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है। इसके लिए लोगों ने नगर निगम में राशि भी जमा की थी, लेकिन अब तक कई जगह यह सिस्टम नहीं लगाया गया है। नगर निगम ने ऐसे मामलों में करोड़ों रुपये जब्त भी किए हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हर घर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग अपनाए, तो जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। एक औसत घर सालाना हजारों लीटर पानी बचा सकता है, जिससे भविष्य में पानी की कमी से राहत मिल सकती है।

रायपुर में गहराया जल संकट: घंटों लाइन में लगकर पानी भरने को मजबूर लोग Read Post »

Chhattisgarh, Development, GOVERNMENT, Raipur, State, Top News, WATER SCARCITY

दुर्ग के गांवों में पानी का संकट गहराया, ग्रामीण बोले—शराब सस्ती, पानी महंगा

दुर्ग जिले के कई गांव इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर नगपुरा के पास अंजोरा (ढाबा) गांव में हालात बेहद गंभीर हैं। यहां ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि दूसरी ओर गांव में अवैध शराब की बिक्री खुलेआम जारी है। करीब 3 हजार की आबादी वाले इस गांव में पानी का एकमात्र सहारा एक बोरवेल है, जिसकी क्षमता बेहद कम है। हालात ऐसे हैं कि सुबह 4 बजे से ही पानी भरने के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं, जो देर रात तक जारी रहती हैं। इस समस्या का असर बच्चों की पढ़ाई और लोगों के रोजगार पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं गांव में अवैध शराब आसानी से उपलब्ध है। पूर्व सरपंच सुमरन साहू ने बताया कि इस मुद्दे को कई बार प्रशासन के सामने उठाया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि अवैध शराब ने गांव का माहौल बिगाड़ दिया है। पिछले साल कलेक्ट्रेट घेराव के बाद शिवनाथ नदी से पानी लाने के लिए करीब 31 लाख रुपये की योजना बनाई गई थी, लेकिन समय पर काम शुरू नहीं होने से इसका लाभ नहीं मिल सका। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का पैसा खर्च हो गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। गांव के लोगों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे भूख हड़ताल और आंदोलन करेंगे। साथ ही पाइपलाइन निर्माण में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की जांच की मांग भी की गई है। सिर्फ अंजोरा ही नहीं, बल्कि पाटन क्षेत्र के औरी, उतई थाना इलाके के मुड़पार, मर्रा, चुनकट्टा, अचानकपुर, सेलूद और छाटा जैसे कई गांवों में भी पानी की समस्या बढ़ती जा रही है। वहीं, पुलिस प्रशासन का कहना है कि अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और ऐसे आरोप निराधार हैं। अधिकारियों के अनुसार, जिले में रोजाना अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। दुर्ग सांसद विजय बघेल ने कहा कि अवैध शराब की शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने जल संरक्षण और वाटर हार्वेस्टिंग को जरूरी बताते हुए संबंधित योजनाओं में देरी को लेकर अधिकारियों से चर्चा करने की बात कही

दुर्ग के गांवों में पानी का संकट गहराया, ग्रामीण बोले—शराब सस्ती, पानी महंगा Read Post »

Bhilai / Durg, Chhattisgarh, GOVERNMENT, State, Top News, WATER SCARCITY

रायपुर में पानी संकट पर महापौर सख्त, 2 दिन में व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम

गर्मी के बढ़ते असर के बीच रायपुर में पानी की किल्लत को लेकर नगर निगम ने सख्त रुख अपनाया है। महापौर मीनल चौबे ने जल विभाग और जल बोर्ड के अधिकारियों की बैठक लेकर पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि सप्लाई में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। महापौर ने अधिकारियों को दो दिन के भीतर शहर की पानी सप्लाई व्यवस्था सुधारने का निर्देश दिया है। खासतौर पर तालाबों और अन्य जल स्रोतों के आसपास अधिक संख्या में हाइड्रेंट लगाने पर जोर दिया गया है, ताकि पानी की उपलब्धता बेहतर हो सके। उन्होंने अधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड में उतरकर वार्डों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। टंकियों वाले क्षेत्रों में जाकर स्थिति का आकलन करने और मौके पर ही समस्याओं का समाधान करने को कहा गया है। महापौर ने यह भी निर्देश दिए कि पानी से जुड़ी शिकायतों का तुरंत समाधान किया जाए। जोन स्तर की टीमें मिलकर तेजी से काम करें, जिससे नागरिकों को राहत मिल सके। साथ ही, शहरवासियों से भी पानी का समझदारी से उपयोग करने और बर्बादी रोकने की अपील की गई है। बढ़ती गर्मी के कारण पानी की मांग में इजाफा हो रहा है, ऐसे में निगम व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सक्रिय हो गया है।

रायपुर में पानी संकट पर महापौर सख्त, 2 दिन में व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम Read Post »

Chhattisgarh, GOVERNMENT, Raipur, State, Top News, WATER SCARCITY

राजनांदगांव में बेजुबान पशु-पक्षियों के लिए जल सेवा अभियान, स्वास्तिक समिति ने बांटे कोटना

राजनांदगांव में बढ़ती गर्मी के बीच मूक पशु-पक्षियों के लिए पानी का संकट गहराने लगा है। इस समस्या को देखते हुए स्वास्तिक जनसमर्पण सेवा समिति ने ‘कोटना (जल पात्र) वितरण अभियान’ की शुरुआत की है, ताकि बेजुबान जीवों को गर्मी में राहत मिल सके। भदोरिया चौक स्थित समिति कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जनसहयोग से एकत्र किए गए जल पात्रों का वितरण किया गया। अभियान की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ की गई। इस दौरान उन लोगों को जल पात्र सौंपे गए, जिन्होंने उनकी नियमित साफ-सफाई और पानी भरने की जिम्मेदारी लेने का संकल्प लिया। समिति ने सभी से यह वचन भी लिया कि इन पात्रों का उपयोग केवल पशु-पक्षियों के लिए जल उपलब्ध कराने में ही किया जाएगा। समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, यह पहल कोविड काल में छोटे स्तर पर शुरू हुई थी, लेकिन अब यह जिले में एक बड़े जन अभियान का रूप ले चुकी है। इस बार भी व्यवस्थित योजना के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में जल पात्रों का वितरण किया जा रहा है। इस सामाजिक पहल में शहर के कई जनप्रतिनिधि और नागरिक भी शामिल हुए। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के सदस्य उपस्थित रहे और उन्होंने इस कार्य की सराहना की। समिति ने बताया कि यह अभियान केवल वितरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल पात्रों की नियमित निगरानी भी की जाएगी, ताकि उनका सही उपयोग सुनिश्चित हो सके। साथ ही भविष्य में पर्यावरण संरक्षण और जल बचाने को लेकर नई योजनाओं पर भी काम किया जाएगा, जिसमें युवाओं की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

राजनांदगांव में बेजुबान पशु-पक्षियों के लिए जल सेवा अभियान, स्वास्तिक समिति ने बांटे कोटना Read Post »

Chhattisgarh, RAJNANDGAON, State, Top News, WATER SCARCITY

नारायणपुर में तोते को उतारने के लिए फायर ब्रिगेड का इस्तेमाल, हजारों लीटर पानी बर्बाद होने पर विवाद

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां एक पालतू तोते को पेड़ से नीचे उतारने के लिए फायर ब्रिगेड को बुलाया गया। तोता काफी ऊंचाई पर बैठा हुआ था और लंबे समय तक नीचे नहीं आ रहा था, जिसके बाद उसे उतारने के लिए पानी की तेज धार का इस्तेमाल किया गया। जानकारी के मुताबिक यह घटना ओबीसी बॉयज हॉस्टल के पास की है। फायर ब्रिगेड की टीम ने पाइप के जरिए लगातार पानी की बौछारें कीं, जिसके बाद काफी प्रयासों के बाद तोता नीचे आया। इस पूरी प्रक्रिया में हजारों लीटर पानी खर्च हो गया। बताया जा रहा है कि यह तोता किसी अधिकारी का था, हालांकि अभी तक उस अधिकारी की पहचान सामने नहीं आई है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। भीषण गर्मी और पानी की कमी के बीच इस तरह पानी के इस्तेमाल को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि फायर ब्रिगेड जैसी जरूरी सेवा का उपयोग आग और आपात स्थितियों के लिए होना चाहिए, न कि ऐसे कामों के लिए। सोशल मीडिया यूजर्स भी इस मामले को लेकर सवाल उठा रहे हैं और इसे सरकारी संसाधनों के गलत इस्तेमाल के तौर पर देख रहे हैं। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई है और अब इस पर कार्रवाई को लेकर नजर बनी हुई है।

नारायणपुर में तोते को उतारने के लिए फायर ब्रिगेड का इस्तेमाल, हजारों लीटर पानी बर्बाद होने पर विवाद Read Post »

Chhattisgarh, Political, Top News, WATER SCARCITY

रायपुर में जल संकट पर कांग्रेस का प्रदर्शन, मटका लेकर निगम जोन दफ्तर का घेराव

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बढ़ते जल संकट को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। मोवा स्थित नगर निगम के जोन कार्यालय का घेराव करते हुए कार्यकर्ता मटका लेकर पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। उनका आरोप है कि तेज गर्मी के बावजूद इलाके में पानी की समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, मोवा क्षेत्र की अशोका इम्प्रेशन और दुबे कॉलोनी में करीब 84 परिवार पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं। जल सप्लाई बाधित होने के कारण लोगों को पीने का पानी तक मुश्किल से मिल पा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल फरवरी से जुलाई के बीच यह समस्या गंभीर रूप ले लेती है। नल सूख जाते हैं और टंकियों में पानी नहीं पहुंचता, जिससे लंबे समय तक संकट बना रहता है। मजबूरी में लोगों को टैंकर या पैकेज्ड पानी खरीदना पड़ रहा है, जिससे घरेलू खर्च बढ़ गया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार शिकायत के बाद भी स्थायी समाधान नहीं किया गया। उन्होंने जल्द से जल्द पानी की आपूर्ति बहाल करने की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर समस्या दूर नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

रायपुर में जल संकट पर कांग्रेस का प्रदर्शन, मटका लेकर निगम जोन दफ्तर का घेराव Read Post »

Chhattisgarh, GOVERNMENT, Raipur, State, Top News, WATER SCARCITY

रायपुर में अप्रैल में ही पेयजल संकट, बोरवेल सूखने और लो प्रेशर से लोगों को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है

रायपुर शहर में अप्रैल की तेज गर्मी के साथ ही पेयजल संकट गंभीर रूप ले रहा है। कई बोरवेल सूख चुके हैं और अधिकांश वार्डों में नलों का पानी लो प्रेशर से आ रहा है, जिससे टेल एंड तक सप्लाई पहुंच नहीं पा रही है। जोन-9 के वार्ड सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां रोजाना टैंकरों से पानी सप्लाई करनी पड़ रही है और लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं। लाभांडी, खम्हारडीह, कचना, दलदल सिवनी, सड्डू, हीरापुर, मोवा और जोरा सहित कई इलाकों में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। शहर के आउटर क्षेत्रों की सोसायटियों और मोहल्लों में टैंकरों के फेरे लगातार बढ़ रहे हैं। अधिकांश वार्डों में पानी लो प्रेशर से आ रहा है, जबकि कुछ बड़े इलाकों में पानी की टंकी बनने के बावजूद पाइपलाइन अधूरी है। पुरानी टंकियों से ही सप्लाई होने के कारण प्रेशर और कम हो रहा है। चंगोराभाठा के करन नगर, ब्रह्मदेव नगर (लाभांडी), कचना के स्वास्तिक नगर, पं. रविशंकर शुक्ल वार्ड के यादवपारा, धोबीपारा और अर्जुन चौक समेत कई क्षेत्रों में पानी बेहद कम प्रेशर से मिल रहा है। लाभांडी के ब्रह्मदेव नगर में लोग सार्वजनिक बोर से छोटे टैंकों में पानी भरकर अपनी जरूरत पूरी कर रहे हैं। कई सालों से भूजल स्तर गिरने के कारण बोरवेल का पानी भी कम हो गया है। टैंकर पहुंचते ही भीड़ लग जाती है और कई बार विवाद की स्थिति भी बनती है। भूजल स्तर में गिरावट और पाइपलाइन नेटवर्क अधूरा होना मुख्य वजह बताई जा रही है। टेल एंड इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं और वहां नियमित सप्लाई नहीं पहुँच पा रही। गर्मियों में हर साल दोहराई जाने वाली यह समस्या स्थायी समाधान के अभाव में बनी रहती है। टैंकर पर बढ़ती निर्भरता से लागत और विवाद भी बढ़ रहे हैं। शहर में किन वार्डों में पानी की समस्या है, इसकी रिपोर्ट रोज ली जा रही है। एमआईसी सदस्यों के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम बनाई गई है। जरूरत के अनुसार पाइपलाइन बिछाने के साथ ही टैंकरों से पानी सप्लाई की जा रही है। जोन-9 क्षेत्र में सबसे ज्यादा टैंकर भेजे जा रहे हैं। जोन-3 और जोन-7 के वार्डों में भी पानी की कमी है। वर्तमान में टैंकर सप्लाई के लिए नया टेंडर नहीं हुआ है और पुराने टेंडर से ही सप्लाई जारी है। नवा रायपुर में बढ़ती आबादी के साथ पानी की मांग तीन गुना बढ़ गई है। गर्मियों में कटौती से राहत के लिए कोडापार एनीकट से 33 एमएलडी अतिरिक्त पानी लाने की योजना पर काम तेजी से चल रहा है। पिछले 10 साल में सप्लाई 11 एमएलडी से बढ़कर 33 एमएलडी तक पहुंच गई है, लेकिन गर्मियों में महानदी का जलस्तर घटने से नियमित सप्लाई प्रभावित होती है। स्थायी समाधान के लिए एनआरडीए अभनपुर के कोडापार एनीकट से नई पाइपलाइन के जरिए पानी लाएगा। करीब 10 किमी पाइपलाइन बिछ चुकी है और 5 किमी का काम बाकी है, जिसे अगस्त 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल टीला एनीकट से पानी पचेड़ा फिल्टर प्लांट तक लाया जाता है। जलस्तर घटने पर सुबह-शाम तीन-तीन घंटे कटौती करनी पड़ती है। नई योजना के पूरा होने के बाद वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध होगा। वर्तमान में 52 एमएलडी क्षमता का प्लांट संचालित है और लेयर-वन के 10 हजार घरों को 24 घंटे पानी मिल रहा है। हर साल पानी संकट की मुख्य वजह महानदी पर निर्भरता, गर्मियों में गंगरेल से कम पानी छोड़ना, तेजी से बढ़ती आबादी और खपत, और वैकल्पिक स्रोत की कमी बताई जा रही है।

रायपुर में अप्रैल में ही पेयजल संकट, बोरवेल सूखने और लो प्रेशर से लोगों को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है Read Post »

Chhattisgarh, GOVERNMENT, Health, Political, Raipur, State, Top News, WATER SCARCITY
Scroll to Top