राजधानी रायपुर इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। कई इलाकों में हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों को पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। शिवनगर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है, जहां बोरवेल सूख चुके हैं और लोगों को रोजाना 3 से 4 घंटे लाइन में खड़े होकर पानी भरना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासी हिना महानंद के अनुसार, सुबह और शाम दोनों समय पानी के लिए दूर जाना पड़ता है और रोज का काफी समय इसी में निकल जाता है। वहीं सुरेश तांडी का कहना है कि हर साल पानी की समस्या रहती है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा गंभीर हो गए हैं।
रायपुरा क्षेत्र में भी पानी की भारी किल्लत देखी जा रही है। निवासी अजय यादव ने बताया कि पाइपलाइन लीकेज के कारण कई घरों तक पानी पहुंच ही नहीं रहा। शिकायत मिलने के बाद नगर निगम की टीम ने सर्वे शुरू कर दिया है।

डंगनिया इलाके में पानी की सप्लाई तो हो रही है, लेकिन प्रेशर इतना कम है कि लोग पर्याप्त पानी नहीं भर पा रहे हैं। इससे दैनिक कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, शहर के 70 वार्डों में से 60 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रों में बोरवेल फेल हो चुके हैं। ऐसे में लोगों की निर्भरता टैंकरों पर बढ़ गई है और कई जगह पानी को लेकर गंभीर स्थिति बन गई है।
शहर के लगभग 3.5 लाख घरों में से करीब 20 प्रतिशत में भी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं है। हर साल मानसून के दौरान लाखों लीटर पानी बिना उपयोग के बह जाता है, जबकि यह पानी भविष्य के लिए बचाया जा सकता है।
नियमों के अनुसार, 1500 वर्ग फीट से बड़े मकानों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है। इसके लिए लोगों ने नगर निगम में राशि भी जमा की थी, लेकिन अब तक कई जगह यह सिस्टम नहीं लगाया गया है। नगर निगम ने ऐसे मामलों में करोड़ों रुपये जब्त भी किए हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हर घर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग अपनाए, तो जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। एक औसत घर सालाना हजारों लीटर पानी बचा सकता है, जिससे भविष्य में पानी की कमी से राहत मिल सकती है।

