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सरगुजा संभाग में दर्दनाक सड़क हादसे, ट्रैक्टर और कार की टक्कर में 6 लोगों की मौत

छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में रविवार को हुए अलग-अलग सड़क हादसों में 6 लोगों की जान चली गई। बलरामपुर जिले में एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर और बाइक की टक्कर में चार मजदूरों की मौत हो गई, जबकि अंबिकापुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे पर कार की टक्कर से दो ग्रामीणों की मौके पर ही मौत हो गई। पहली घटना बलरामपुर जिले के सनावल थाना क्षेत्र के ग्राम पीपरपान के पास हुई। बताया जा रहा है कि ईंट से लदा ट्रैक्टर तेज रफ्तार में जा रहा था, तभी मजदूरों से भरी बाइक उससे टकरा गई। हादसे में बाइक सवार चारों युवकों की मौत हो गई। मृतकों में सभी एक ही परिवार के चचेरे भाई बताए जा रहे हैं और मजदूरी का काम करते थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद ट्रैक्टर चालक ने वाहन नहीं रोका और घायलों को करीब 100 मीटर तक घसीटता रहा। बाद में घायलों को सड़क किनारे छोड़कर फरार हो गया। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। मृतकों की पहचान राकेश पंडो (17), रमेश पंडो (19), नरेश पंडो (19) और मनोज पंडो (21) के रूप में हुई है। परिजनों ने ट्रैक्टर चालक और मालिक पर वाहन छिपाने तथा सबूत मिटाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दूसरी घटना सरगुजा जिले के लखनपुर थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे-130 पर जजगा के पास हुई। यहां तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार दो ग्रामीणों को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और दोनों युवक सड़क पर दूर तक घिसटते चले गए। हादसे में जय सिंह (50) और रामकुमार (60) निवासी महुआटिकरा की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों किसी परिचित के यहां से लौट रहे थे। घटना के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है। दोनों हादसों के बाद इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है।

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सरगुजिहा बोली पर एडमिशन से इनकार, स्कूल को नोटिस; दूसरे स्कूल ने दिया फ्री प्रवेश

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक बच्चे को स्थानीय सरगुजिहा बोली बोलने के कारण प्री-प्राइमरी स्कूल में प्रवेश नहीं देने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जबकि एक अन्य स्कूल ने बच्चे को निःशुल्क प्रवेश देकर मिसाल पेश की है। जानकारी के अनुसार, अभिभावक अपने 4 वर्षीय बेटे का दाखिला कराने चोपड़ापारा स्थित एक प्राइवेट स्कूल पहुंचे थे। प्रवेश प्रक्रिया के दौरान बच्चे ने सवालों के जवाब सरगुजिहा बोली में दिए। आरोप है कि डेमो क्लास के बाद स्कूल ने यह कहते हुए एडमिशन से इनकार कर दिया कि अन्य बच्चे उसकी भाषा से प्रभावित हो सकते हैं। इस मामले की शिकायत कलेक्टर अजीत वसंत से की गई, जिसके बाद जांच के आदेश दिए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने भी सख्त रुख अपनाते हुए स्कूल को नोटिस जारी किया है और पूछा है कि नियमों के उल्लंघन पर उसकी मान्यता क्यों न समाप्त कर दी जाए। साथ ही स्कूल से संबंधित दस्तावेज भी तलब किए गए हैं। दूसरी ओर, एक अन्य प्ले स्कूल ने पहल करते हुए बच्चे को मुफ्त में प्रवेश दिया है, ताकि उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो और वह स्थानीय बोली के साथ-साथ हिंदी भी सीख सके। स्कूल प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि शिक्षा के क्षेत्र में भाषा के आधार पर भेदभाव उचित नहीं है। मामले को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की बात कही है, वहीं छात्र संगठन ने संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द करने की मांग उठाई है। शिक्षा विभाग के अनुसार, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

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