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रायपुर में ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट का भंडाफोड़, नमन जग्गी-आयुष जैन समेत 3 गिरफ्तार

राजधानी Raipur में पुलिस ने ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नमन जग्गी, आयुष जैन और मोहम्मद सरफराज को गिरफ्तार किया है। इनकी निशानदेही पर पुलिस ने 9 अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। मामला Telibandha थाना क्षेत्र का है और पुलिस जल्द पूरे नेटवर्क का खुलासा कर सकती है। जांच में सामने आया है कि आरोपी संगठित तरीके से ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहे थे। वे “तीन पैनल 777” नाम से अलग-अलग वेबसाइट और पैनल चलाते थे, जिनके जरिए मास्टर आईडी बनाकर खिलाड़ियों को जोड़ा जाता था। यह नेटवर्क सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से तेजी से फैलाया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से सट्टा-पट्टी, मोबाइल फोन, लैपटॉप समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। इसके अलावा करोड़ों रुपए के लेनदेन से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए हैं, जिनकी जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस सट्टा नेटवर्क के तार शहर के कुछ बड़े कारोबारियों और सर्राफा व्यापारियों से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है। पुलिस ने इस मामले में 2 कार, 5 मोबाइल फोन और करीब 6 हजार रुपए नकद भी जब्त किए हैं। फिलहाल पूरे मामले की गहन जांच जारी है। इससे पहले 17 अप्रैल को रायपुर पुलिस ने ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट के कथित मास्टरमाइंड बाबू खेमानी को मुंबई से गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि वह हाई-प्रोफाइल लोगों को टारगेट कर ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क से जोड़ता था। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के देश और विदेश तक फैले कनेक्शन की पड़ताल कर रही हैं।

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जनगणना के नाम पर ठगी का खतरा: फर्जी कर्मियों से रहें सावधान, जानिए कौन से सवाल सही और कौन से नहीं

देश में 1 अप्रैल 2026 से जनगणना का पहला चरण शुरू हो चुका है, जो 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान घर-घर जाकर जानकारी जुटाई जा रही है, जिसमें हाउस लिस्टिंग और ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन भी शामिल है। जनगणनाकर्मी लोगों से मकान, परिवार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी लेते हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान साइबर ठग और असामाजिक तत्व सक्रिय हो सकते हैं। रायपुर पुलिस ने चेतावनी दी है कि फर्जी जनगणनाकर्मी बनकर लोग आपकी निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। ये ठग कॉल, मैसेज या घर पहुंचकर खुद को सरकारी कर्मचारी बताते हैं और फर्जी लिंक या ऐप के जरिए डेटा चुराने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में OTP, बैंक डिटेल्स, आधार नंबर जैसी संवेदनशील जानकारी मांगी जा सकती है, जो पूरी तरह से धोखाधड़ी का संकेत है। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, जनगणनाकर्मी केवल सामान्य जानकारी ही पूछते हैं, जैसे: मकान से जुड़े सवाल:मकान नंबर, फर्श-दीवार-छत का मटेरियल, मकान का उपयोग, उसकी स्थिति आदि। परिवार से जुड़े सवाल:परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम और जेंडर, सामाजिक वर्ग, घर किराए का है या खुद का, कुल कमरे और शादीशुदा जोड़ों की संख्या। सुविधाओं से जुड़े सवाल:पानी और बिजली का स्रोत, शौचालय और बाथरूम की उपलब्धता, रसोई और गैस कनेक्शन, खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला ईंधन। डिजिटल और सामान से जुड़े सवाल:घर में टीवी, मोबाइल, इंटरनेट, कंप्यूटर जैसी सुविधाएं हैं या नहीं। वाहन और अन्य जानकारी:साइकिल, बाइक, कार जैसी सुविधाएं और उपयोग किए जाने वाले अनाज की जानकारी, साथ ही मोबाइल नंबर। ध्यान रखें – ये सवाल कभी नहीं पूछे जाते:जनगणनाकर्मी आपकी बैंक डिटेल्स, OTP, पासवर्ड, एटीएम पिन, आधार से जुड़ी गोपनीय जानकारी या किसी भी प्रकार की वित्तीय जानकारी नहीं मांग सकते। पुलिस और प्रशासन की सलाह है कि किसी भी अजनबी पर तुरंत भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध लगे या जरूरत से ज्यादा निजी जानकारी मांगे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दें। जनगणना में सही जानकारी देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है, लेकिन अपनी निजी और वित्तीय सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।

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आईपीएल 2026: रायपुर स्टेडियम में दिखेगी छत्तीसगढ़ी संस्कृति, RCB की एंट्री, टिकट फैसला जल्द

आईपीएल 2026 के मुकाबलों से पहले नया रायपुर का शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम इस बार सिर्फ क्रिकेट का मैदान नहीं रहेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने पेश करने का मंच बनेगा। 10 और 13 मई को होने वाले मुकाबलों के लिए स्टेडियम के करीब 40 कॉर्पोरेट बॉक्स को छत्तीसगढ़ी थीम पर सजाया जा रहा है। जब मैच का प्रसारण 100 से ज्यादा देशों में होगा, तब यहां की लोक कला, परंपरा और रंगों की झलक भी वैश्विक दर्शकों तक पहुंचेगी। इसी बीच रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) के अधिकारी रायपुर पहुंच चुके हैं। फ्रेंचाइजी जल्द प्रेस कॉन्फ्रेंस कर टिकट, एंट्री सिस्टम और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर जानकारी साझा करेगी। अगले तीन से चार दिनों में टिकट की कीमतों पर भी अंतिम फैसला लिया जाएगा। मैदान और सुविधाओं में बदलावस्टेडियम में इस बार खेल का अंदाज भी बदला हुआ नजर आएगा। बाउंड्री का आकार 90 यार्ड से घटाकर करीब 71 से 75 यार्ड कर दिया गया है, जिससे ज्यादा रन बनने की संभावना बढ़ गई है। क्यूरेटर के अनुसार पिच बल्लेबाजों के लिए अनुकूल तैयार की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए बिना आईडी कार्ड के किसी भी दर्शक को प्रवेश नहीं मिलेगा। स्टेडियम की क्षमता लगभग 60 हजार दर्शकों के हिसाब से रखी गई है। ड्रेनेज सिस्टम और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार का काम भी अंतिम चरण में है। कॉर्पोरेट बॉक्स में स्थानीय कला की झलकस्टेडियम के कॉर्पोरेट बॉक्स को छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से सजाया जा रहा है। इसमें मिट्टी के रंग, लोक डिज़ाइन और स्थानीय कलाकृतियों को शामिल किया जाएगा, ताकि मैच देखने वाले दर्शकों को प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का अनुभव मिल सके। डिजिटल टिकटिंग से एंट्रीइस बार टिकटिंग पूरी तरह डिजिटल होगी। दर्शकों को ऑनलाइन टिकट बुक करने के बाद मोबाइल पर क्यूआर कोड मिलेगा, जिसे स्टेडियम के प्रवेश द्वार पर स्कैन कर एंट्री दी जाएगी। इस व्यवस्था से फर्जी टिकट और कालाबाजारी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

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रायपुर में साइबर ठगी का बड़ा खेल: 3 लोगों से 8 लाख की ठगी, लोन-रिवॉर्ड पॉइंट के नाम पर जाल

एक तरफ छत्तीसगढ़ में गर्मी के साथ “वार्म नाइट” का खतरा बढ़ रहा है, वहीं राजधानी रायपुर में साइबर ठग भी सक्रिय हो गए हैं। अलग-अलग तरीकों से तीन लोगों को निशाना बनाकर करीब 8 लाख रुपए की ठगी की गई है। पुलिस ने तीनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ितों में टिकरापारा के विशाल गुप्ता, सरस्वती नगर क्षेत्र के सूबेदार हरिश्चंद्र सिंह और अमलीडीह निवासी कारोबारी जयकुमार वाधवानी शामिल हैं। पहले मामले में विशाल गुप्ता ने ऑनलाइन लोन के लिए आवेदन किया था। ठगों ने अधिक रकम मंजूर होने का लालच देकर उनके मोबाइल का डेटा एक्सेस कर लिया। इसके बाद उनकी निजी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर वायरल करने की धमकी दी गई और ब्लैकमेल कर करीब 6 लाख रुपए वसूल लिए गए। दूसरे मामले में एक महिला ने खुद को बैंक कर्मचारी बताकर सूबेदार हरिश्चंद्र सिंह को कॉल किया। क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम कराने के बहाने उन्हें एक फर्जी वेबसाइट पर ले जाकर कार्ड डिटेल भरवाई गई। जानकारी डालते ही उनके खाते से लगभग 2 लाख रुपए निकल गए। पीड़ित ने तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। तीसरे मामले में जयकुमार वाधवानी को बीमा पॉलिसी में नुकसान का डर दिखाया गया। ठगों ने कंज्यूमर कोर्ट में केस करने का झांसा देकर नया प्लान और “फ्रीजिंग कोड” के नाम पर लिंक भेजा। लिंक पर क्लिक करते ही उनके खाते से 55 हजार रुपए ट्रांसफर हो गए। पुलिस का कहना है कि सभी मामलों की गंभीरता से जांच की जा रही है और आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश जारी है।

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फर्जी RTO चालान के नाम पर 7.42 लाख की ठगी, APK फाइल से मोबाइल हैक कर खाली किया खाता

राजधानी रायपुर में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां फर्जी RTO चालान के बहाने एक युवक से 7.42 लाख रुपए ठग लिए गए। ठगों ने APK फाइल भेजकर मोबाइल हैक किया और खाते से पूरी रकम ट्रांसफर कर ली। घटना टिकरापारा थाना क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार, पीड़ित रोहित पाल, जो आरडीए कॉलोनी का निवासी है, को 10 से 16 अप्रैल के बीच एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को RTO अधिकारी बताया और लंबित चालान का हवाला देकर भुगतान करने के लिए कहा। इसके बाद ठगों ने रोहित के मोबाइल पर एक APK फाइल भेजी और उसे डाउनलोड करने के लिए कहा। जैसे ही उसने फाइल इंस्टॉल की, साइबर अपराधियों ने उसके फोन का कंट्रोल हासिल कर लिया। इसके कुछ ही समय बाद उसके बैंक खाते से कुल 7,42,209 रुपए निकाल लिए गए। शुरुआत में पीड़ित को इस ठगी की जानकारी नहीं हो पाई, लेकिन अगले दिन बैंक से ट्रांजैक्शन मैसेज आने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद परिवार में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। मामले में पवित्र पाल की शिकायत पर IT एक्ट की धारा 66D के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस साइबर सेल की मदद से कॉल डिटेल्स, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश कर रही है।

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रायपुर में ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार

रायपुर के राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में ऑनलाइन सट्टे के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने संयुक्त रूप से यह ऑपरेशन चलाया। देर रात की गई इस छापेमारी में आरोपियों को उस समय पकड़ा गया, जब वे मोबाइल फोन के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपी तकनीक का इस्तेमाल कर सट्टेबाजी का नेटवर्क चला रहे थे। वे अलग-अलग मोबाइल नंबर और विभिन्न एप्लिकेशन के जरिए लोगों को जोड़कर सट्टा खिलाते थे। इस दौरान लेन-देन और रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जाता था, ताकि गतिविधियों को आसानी से छिपाया जा सके। हालांकि, पुलिस की सतर्क निगरानी के चलते इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो गया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन, डिजिटल डेटा और सट्टे से जुड़ी अन्य सामग्री जब्त की है। जब्त किए गए उपकरणों की जांच की जा रही है, जिससे इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित बड़े कनेक्शन का पता लगाया जा सके। शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क काफी समय से सक्रिय था और इसके तार शहर के अन्य हिस्सों से भी जुड़े हो सकते हैं। फिलहाल तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के आधार पर इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। रायपुर पुलिस लगातार ऑनलाइन सट्टेबाजी और अवैध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। इस कार्रवाई को शहर में बढ़ते डिजिटल अपराधों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे इस तरह की अवैध गतिविधियों से दूर रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

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बिलासपुर में म्यूल अकाउंट का खुलासा, बिल्डिंग सप्लायर के खाते से 10 राज्यों की ठगी का पैसा ट्रांसफर

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े एक म्यूल अकाउंट का पर्दाफाश किया है। मामले में एक बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर पर आरोप है कि वह पिछले कुछ महीनों से अपने बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम के लेनदेन के लिए कर रहा था। उसके खाते से देश के कई राज्यों से आए लाखों रुपये ट्रांसफर किए गए। यह कार्रवाई कोनी थाना क्षेत्र में की गई। केंद्र सरकार के पुलिस पोर्टल के जरिए संदिग्ध खाते की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस की तकनीकी टीम ने जांच शुरू की। जांच में आईडीबीआई बैंक के एक खाते पर संदेह हुआ, जिसके ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड खंगाले गए। जांच के दौरान पता चला कि इस खाते से जुड़े 10 से ज्यादा साइबर फ्रॉड की शिकायतें देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज हैं। खाते में ठगी की रकम जमा कर उसे तुरंत आगे ट्रांसफर किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार आरोपी ने 20 जनवरी 2026 को यह बैंक खाता खुलवाया था। इसके बाद से ही इसमें लगातार संदिग्ध लेनदेन हो रहे थे। आशंका है कि आरोपी ने साइबर ठगों के साथ मिलकर यह अकाउंट उपलब्ध कराया और इसके बदले कमीशन लेता था। तफ्तीश में यह भी सामने आया कि खाते में पैसा आते ही उसे यूपीआई और एटीएम के जरिए निकालकर अन्य खातों में भेज दिया जाता था, जिससे ट्रेस करना मुश्किल हो सके। पुलिस का कहना है कि म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल ठगी की रकम को छिपाने और पीड़ितों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया। आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है।

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इंस्टाग्राम दोस्ती से दुष्कर्म तक: शादी का झांसा देकर युवती से संबंध, आरोपी पर केस दर्ज

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सोशल मीडिया के जरिए दोस्ती कर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। मोहन नगर थाना पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़िता ने शिकायत में बताया कि उसकी पहचान वर्ष 2025 में इंस्टाग्राम के माध्यम से दुर्ग निवासी सौरभ राजपूत से हुई थी। बातचीत बढ़ने के बाद युवक ने उसे शादी का भरोसा दिलाया और मिलने के लिए दुर्ग बुलाया। 5 मार्च 2026 को युवती उससे मिलने पहुंची, जहां आरोपी उसे सिकोला भाटा स्थित अपने परिचित के घर ले गया। वहां उसने जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता के अनुसार, घटना के बाद वह कुछ दिनों तक पाटन में अपने रिश्तेदार के घर रही। इसी दौरान आरोपी लगातार संपर्क में रहा और शादी का वादा करता रहा। बाद में 28 मार्च को युवक उसे उज्जैन घुमाने के बहाने ले गया, जहां भी उसने उसके साथ संबंध बनाए। दुर्ग लौटने के बाद भी आरोपी उसे अपने पास रखकर शादी का झांसा देकर बार-बार शारीरिक शोषण करता रहा। शिकायत के मुताबिक, 11 अप्रैल को आरोपी उसे अपने ननिहाल ग्राम संबलपुर ले गया, जहां एक रात रुकने के दौरान फिर से दुष्कर्म किया गया। इसके बाद युवक उसे उसके गांव छोड़कर चला गया। जब युवती के परिवार ने शादी की बात उठाई, तो आरोपी पहले टालता रहा और बाद में साफ तौर पर इंकार कर फरार हो गया। इसके बाद पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश जारी है।

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सीबीएसई का बड़ा कदम: कक्षा 3 से 8 तक AI और कंप्यूटेशनल थिंकिंग कोर्स शुरू

Central Board of Secondary Education ने स्कूली शिक्षा को आधुनिक और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने कक्षा 3 से 8 तक के छात्रों के लिए ‘कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (CT&AI) नाम से नया कोर्स शुरू किया है। इस पहल का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश के छात्रों को एआई के प्रति जागरूक और सक्षम बनाना है। नए सत्र 2026-27 से कक्षा 9 में चल रहे पुराने एआई कोर्स को बंद कर दिया जाएगा। वहीं 9वीं से 12वीं तक के लिए National Council of Educational Research and Training विशेष मॉड्यूल तैयार कर रहा है। सीबीएसई के अनुसार, यह नया कोर्स छात्रों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालेगा। इसके लिए बनाई गई रिसोर्स बुक्स एनसीईआरटी की गणित की किताबों के साथ जुड़ी होंगी। गणित के हर अध्याय के साथ संबंधित एआई और कंप्यूटेशनल गतिविधियां कराई जाएंगी, जिससे छात्रों को अवधारणाएं बेहतर तरीके से समझ आएंगी। इस पाठ्यक्रम में रटने की बजाय समझ और सोच पर जोर दिया जाएगा। इसमें ऐसे प्रश्न और गतिविधियां शामिल होंगी, जो छात्रों की तार्किक क्षमता और समस्या समाधान कौशल को विकसित करेंगी। सीबीएसई ने छात्रों और शिक्षकों के लिए अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर हैंडबुक्स भी जारी कर दी हैं और स्कूलों को इन्हें लागू करने के निर्देश दिए हैं। शिक्षकों के लिए भी नई गाइडलाइन जारी की गई है। अब पारंपरिक पढ़ाने के बजाय ‘फैसिलिटेटर’ की भूमिका पर जोर दिया जाएगा। शिक्षकों को सलाह दी गई है कि वे छात्रों को सीधे जवाब देने के बजाय उन्हें खुद सोचने और सीखने के लिए प्रेरित करें। कक्षा 9 से 12 के लिए तैयार किए जा रहे एनसीईआरटी मॉड्यूल 2026-27 सत्र से इंटरनल असेसमेंट का हिस्सा होंगे। हालांकि वर्तमान में 10वीं के छात्र पुराने पाठ्यक्रम के अनुसार ही अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे। इस नए कोर्स में साइबर सिक्योरिटी, बेसिक नेटवर्किंग, डेटा आधारित निर्णय, और एआई के नैतिक पहलुओं जैसे विषय शामिल होंगे। साथ ही पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए गेमिंग, वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी जैसी तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा।

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अबूझमाड़ में बदलाव की शुरुआत: नक्सल प्रभाव खत्म होने के बाद 239 गांवों में पहली बार पहुंचा प्रशासन

बस्तर का Abujhmad क्षेत्र, जो कभी नक्सल गतिविधियों का गढ़ माना जाता था, अब धीरे-धीरे मुख्यधारा से जुड़ रहा है। केंद्र सरकार द्वारा इस क्षेत्र को नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किए जाने के बाद यहां प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पहली बार यहां के 239 गांवों में सरकारी सर्वे शुरू किया गया है। इस सर्वे के जरिए गांवों में रहने वाले परिवारों की संख्या, सदस्यों का विवरण, खेती करने वाले लोगों की जानकारी और जमीन के उपयोग का आकलन किया जा रहा है। राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम इस काम में जुटी हुई है। सर्वे को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए Indian Institute of Technology Roorkee की मदद से पूरे क्षेत्र का सैटेलाइट मैप तैयार किया जा रहा है। सैटेलाइट इमेज के आधार पर गांवों और आबादी का प्रारंभिक नक्शा बनाया जा रहा है, जिसके बाद फील्ड टीम मौके पर जाकर हर घर और जमीन का सत्यापन करेगी। सर्वे पूरा होने के बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके आधार पर जो परिवार जहां निवास कर रहा है और जिस जमीन पर खेती कर रहा है, उसे उसी के अनुसार मालिकाना हक प्रदान किया जाएगा। इससे लंबे समय से बिना अधिकार के रह रहे वनवासियों को कानूनी पहचान और जमीन का अधिकार मिल सकेगा। नारायणपुर जिले का ओरछा ब्लॉक, जिसे अबूझमाड़ के नाम से जाना जाता है, दशकों तक प्रशासन की पहुंच से बाहर रहा। आजादी के बाद भी यहां कई गांव सड़क और संचार सुविधाओं से कटे हुए थे। जैसे ही सड़क निर्माण शुरू हुआ, नक्सली गतिविधियां बढ़ गईं, जिससे यह इलाका उनका सुरक्षित ठिकाना बन गया। इसी वजह से यहां गांवों, आबादी और जमीन का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार नहीं हो पाया था। अब सुरक्षा बलों की मौजूदगी और सड़क विस्तार के बाद हालात बदल रहे हैं और प्रशासन पहली बार गांवों तक पहुंच पा रहा है। करीब 3 लाख हेक्टेयर में फैले इस घने जंगल क्षेत्र में वन विभाग की गतिविधियां भी दोबारा शुरू की जा रही हैं। जिन इलाकों में वर्षों पहले नक्सलियों द्वारा वन विभाग के भवनों को नष्ट कर दिया गया था, वहां फिर से काम शुरू हो रहा है। प्रशासन के अनुसार, सर्वे के साथ-साथ ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा। नक्शा और खसरा तैयार होने के बाद जमीन के अधिकार देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह पहल न केवल विकास को गति देगी, बल्कि क्षेत्र के लोगों को स्थायी पहचान और अधिकार भी दिलाएगी।

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