Cyber Crime

प्रेमिका के प्राइवेट फोटो-VIDEO वायरल कर किया ब्लैकमेल, युवक गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में एक युवक द्वारा नाबालिग प्रेमिका को शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और बाद में उसके प्राइवेट फोटो-वीडियो वायरल कर ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामला गांधीनगर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, पीड़िता की पहचान सरगुजा जिले के सलका पतराटोली निवासी अनोज दास से एक शादी समारोह के दौरान हुई थी। दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और बाद में प्रेम संबंध बन गया। आरोप है कि युवक ने शादी का वादा कर युवती को अंबिकापुर के पटपरिया स्थित अपने किराए के मकान में बुलाया और कई बार शारीरिक संबंध बनाए। इसी दौरान आरोपी ने युवती के निजी फोटो और वीडियो भी बना लिए। कुछ समय बाद युवक ने बिना बताए दूसरी लड़की से शादी कर ली। जब पीड़िता ने इसका विरोध किया, तो आरोपी ने उसके प्राइवेट फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। पीड़िता का आरोप है कि फोटो-वीडियो वायरल करने के बाद युवक उसे दोबारा संबंध बनाने के लिए दबाव डालने लगा और लगातार ब्लैकमेल कर रहा था। परेशान होकर युवती ने पुलिस से शिकायत की। पहले मामला लटोरी पुलिस चौकी में दर्ज किया गया, बाद में इसे गांधीनगर थाने भेजा गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और आईटी एक्ट समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया है। गांधीनगर पुलिस ने आरोपी को उसके गांव से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है। कोर्ट में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया है।

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बिलासपुर में स्मार्ट मीटर के नाम पर साइबर ठगी: बिजली विभाग बनकर महिला के खाते से उड़ाए 70 हजार रुपए

बिलासपुर में साइबर ठगी का एक नया मामला सामने आया है, जहां ठग ने खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताकर एक महिला से करीब 70 हजार रुपए की ठगी कर ली। आरोपी ने स्मार्ट बिजली मीटर लगाने का झांसा देकर महिला के बैंक खाते से रकम पार कर दी। मामला सिरगिट्टी थाना क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक बजरंग नगर आवासपारा सिरगिट्टी निवासी सरस्वती देवी का पंजाब नेशनल बैंक की सिरगिट्टी शाखा में खाता है। उनके खाते में लगभग 70 हजार 693 रुपए जमा थे। 17 मार्च को उनके बेटे के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताते हुए कहा कि विभाग की ओर से नया स्मार्ट मीटर लगाया जा रहा है। इसके लिए 13 रुपए का ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करना जरूरी बताया गया। ठग ने बातचीत के दौरान परिवार का भरोसा जीत लिया और एटीएम कार्ड के आखिरी चार अंक पूछ लिए। परिवार को यह सामान्य प्रक्रिया लगी, इसलिए उन्होंने जानकारी साझा कर दी। इसके बाद आरोपी ने महिला के खाते से दो अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 69 हजार 998 रुपए निकाल लिए। हैरानी की बात यह रही कि उस समय खाते से पैसे कटने का कोई मैसेज भी नहीं आया। ठगी का खुलासा तब हुआ जब 8 मई को महिला ने बैंक जाकर स्टेटमेंट निकलवाया। खाते से रकम गायब देखकर परिवार के होश उड़ गए। इसके बाद पीड़िता ने सिरगिट्टी थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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मंत्रालय में नौकरी दिलाने के नाम पर 23 लाख की ठगी, फर्जी जॉइनिंग लेटर देकर दंपती फरार

रायपुर में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 23 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। कारोबारी आकाश साहू ने एक दंपती पर मंत्रालय में पहचान होने का दावा कर पैसे लेने और फर्जी नियुक्ति पत्र देने का आरोप लगाया है। मामले में डीडी नगर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित आकाश साहू रायपुरा स्थित शिवोम विहार कॉलोनी का रहने वाला है और वाहन खरीदी-बिक्री का कारोबार करता है। उसने पुलिस को बताया कि करीब दो साल पहले उसकी पहचान जितेंद्र बघेल के माध्यम से विश्वनाथ गुप्ता उर्फ विष्णु गुप्ता से हुई थी। आरोपी खुद को नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों का करीबी बताकर मंत्रालय में नौकरी लगवाने का भरोसा देता था। शिकायत के मुताबिक, अगस्त 2024 में आरोपी ने आकाश साहू को नवा रायपुर मंत्रालय बुलाया, जहां उसकी मुलाकात आरोपी की पत्नी चंदा गुप्ता से हुई। दोनों ने जल संसाधन विभाग और मंत्रालय में कंप्यूटर ऑपरेटर समेत अन्य पदों पर भर्ती कराने की बात कही। इसके बाद पीड़ित ने अपनी पत्नी रेशमी साहू और रिश्तेदार शेषनारायण साहू व रविशंकर साहू के दस्तावेज जमा कराए। आरोपियों ने अलग-अलग तारीखों में फोन-पे और नकद के जरिए करीब 23 लाख रुपए ले लिए। दिसंबर 2024 में आरोपियों ने मोबाइल पर कथित नियुक्ति पत्र भेजा, जबकि जनवरी 2025 में व्हाट्सएप के जरिए इम्प्लॉय आईडी भेजी गई। जब पीड़ित अपने परिजनों के साथ मंत्रालय पहुंचा, तब अधिकारियों ने जांच में दस्तावेजों को फर्जी बताया। पीड़ित के अनुसार, जब उसने आरोपियों से जवाब मांगा तो उन्होंने मंत्रालय में छापा पड़ने का बहाना बनाकर कुछ समय इंतजार करने को कहा। बाद में आरोपियों के मोबाइल बंद आने लगे। आकाश साहू जब आरोपी के पत्थलगांव स्थित घर पहुंचा तो वहां उसकी पत्नी मिली, जिसने पैसे लौटाने का भरोसा दिया। तय समय बीतने के बाद भी रकम वापस नहीं की गई, जिसके बाद पीड़ित ने डीडी नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।

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जनगणना के नाम पर ठगी का खतरा: फर्जी कर्मियों से रहें सावधान, जानिए कौन से सवाल सही और कौन से नहीं

देश में 1 अप्रैल 2026 से जनगणना का पहला चरण शुरू हो चुका है, जो 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान घर-घर जाकर जानकारी जुटाई जा रही है, जिसमें हाउस लिस्टिंग और ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन भी शामिल है। जनगणनाकर्मी लोगों से मकान, परिवार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी लेते हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान साइबर ठग और असामाजिक तत्व सक्रिय हो सकते हैं। रायपुर पुलिस ने चेतावनी दी है कि फर्जी जनगणनाकर्मी बनकर लोग आपकी निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। ये ठग कॉल, मैसेज या घर पहुंचकर खुद को सरकारी कर्मचारी बताते हैं और फर्जी लिंक या ऐप के जरिए डेटा चुराने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में OTP, बैंक डिटेल्स, आधार नंबर जैसी संवेदनशील जानकारी मांगी जा सकती है, जो पूरी तरह से धोखाधड़ी का संकेत है। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, जनगणनाकर्मी केवल सामान्य जानकारी ही पूछते हैं, जैसे: मकान से जुड़े सवाल:मकान नंबर, फर्श-दीवार-छत का मटेरियल, मकान का उपयोग, उसकी स्थिति आदि। परिवार से जुड़े सवाल:परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम और जेंडर, सामाजिक वर्ग, घर किराए का है या खुद का, कुल कमरे और शादीशुदा जोड़ों की संख्या। सुविधाओं से जुड़े सवाल:पानी और बिजली का स्रोत, शौचालय और बाथरूम की उपलब्धता, रसोई और गैस कनेक्शन, खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला ईंधन। डिजिटल और सामान से जुड़े सवाल:घर में टीवी, मोबाइल, इंटरनेट, कंप्यूटर जैसी सुविधाएं हैं या नहीं। वाहन और अन्य जानकारी:साइकिल, बाइक, कार जैसी सुविधाएं और उपयोग किए जाने वाले अनाज की जानकारी, साथ ही मोबाइल नंबर। ध्यान रखें – ये सवाल कभी नहीं पूछे जाते:जनगणनाकर्मी आपकी बैंक डिटेल्स, OTP, पासवर्ड, एटीएम पिन, आधार से जुड़ी गोपनीय जानकारी या किसी भी प्रकार की वित्तीय जानकारी नहीं मांग सकते। पुलिस और प्रशासन की सलाह है कि किसी भी अजनबी पर तुरंत भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध लगे या जरूरत से ज्यादा निजी जानकारी मांगे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दें। जनगणना में सही जानकारी देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है, लेकिन अपनी निजी और वित्तीय सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।

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गुवाहाटी में हिरासत में रायपुर पुलिस टीम, 24 घंटे बाद रिहा; डिजिटल अरेस्ट केस में पैसों के लेन-देन के आरोप

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से गई पुलिस टीम को असम की राजधानी Guwahati में हिरासत में लिए जाने की घटना ने पुलिस महकमे में हलचल पैदा कर दी। यह मामला टिकरापारा थाने में दर्ज डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी ठगी की जांच के दौरान सामने आया, जिसमें करीब 17.15 लाख रुपए की धोखाधड़ी हुई थी। जानकारी के अनुसार, इस केस में आरोपियों की तलाश में रायपुर पुलिस की टीम Raipur से गुवाहाटी पहुंची थी। टीम में थाना प्रभारी रविंद्र यादव सहित चार पुलिसकर्मी शामिल थे। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान टीम ने कुछ आरोपियों को पकड़ने के बाद कथित रूप से पैसों के बदले दो अन्य संदिग्धों को छोड़ दिया। इसी आरोप के आधार पर असम पुलिस ने रायपुर पुलिस टीम को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। कार्रवाई के दौरान करीब 2.50 लाख रुपए भी जब्त किए गए, जिन्हें स्थानीय पुलिस ने संदिग्ध लेन-देन से जुड़ा बताया है। वहीं, जिन आरोपियों को छोड़े जाने का दावा किया गया, उनकी शिकायत पर एफआईआर भी दर्ज की गई। हालांकि, छत्तीसगढ़ पुलिस का कहना है कि यह रकम ठगी के केस में रिकवरी का हिस्सा थी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों से पूछताछ के दौरान ठगी गई राशि वापस ली जा रही थी, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसे रिश्वत का मामला बताकर विरोध किया और पुलिस को सूचना दे दी। पूरे घटनाक्रम के बाद दोनों राज्यों की पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बन गई। वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद करीब 24 घंटे की पूछताछ के पश्चात असम पुलिस ने रायपुर पुलिस टीम को छोड़ दिया। इसके बाद टीम वापस छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हो गई। यह मामला टिकरापारा क्षेत्र के एक निवासी शरद कुमार से जुड़ा है, जिन्हें वीडियो कॉल के जरिए खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले ठग ने डराकर बैंक डिटेल हासिल कर ली थी। आरोपी ने अलग-अलग किश्तों में करीब 17 लाख 15 हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिए थे। जब पीड़ित को रकम वापस नहीं मिली, तब उसने थाने में शिकायत दर्ज करवाई। फिलहाल इस मामले की जांच दोनों राज्यों की पुलिस अपने-अपने स्तर पर कर रही है और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आने का इंतजार है।

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