जनगणना के नाम पर ठगी का खतरा: फर्जी कर्मियों से रहें सावधान, जानिए कौन से सवाल सही और कौन से नहीं

देश में 1 अप्रैल 2026 से जनगणना का पहला चरण शुरू हो चुका है, जो 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान घर-घर जाकर जानकारी जुटाई जा रही है, जिसमें हाउस लिस्टिंग और ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन भी शामिल है। जनगणनाकर्मी लोगों से मकान, परिवार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी लेते हैं।

हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान साइबर ठग और असामाजिक तत्व सक्रिय हो सकते हैं। रायपुर पुलिस ने चेतावनी दी है कि फर्जी जनगणनाकर्मी बनकर लोग आपकी निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। ये ठग कॉल, मैसेज या घर पहुंचकर खुद को सरकारी कर्मचारी बताते हैं और फर्जी लिंक या ऐप के जरिए डेटा चुराने की कोशिश करते हैं।

कई मामलों में OTP, बैंक डिटेल्स, आधार नंबर जैसी संवेदनशील जानकारी मांगी जा सकती है, जो पूरी तरह से धोखाधड़ी का संकेत है।

सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, जनगणनाकर्मी केवल सामान्य जानकारी ही पूछते हैं, जैसे:

मकान से जुड़े सवाल:
मकान नंबर, फर्श-दीवार-छत का मटेरियल, मकान का उपयोग, उसकी स्थिति आदि।

परिवार से जुड़े सवाल:
परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम और जेंडर, सामाजिक वर्ग, घर किराए का है या खुद का, कुल कमरे और शादीशुदा जोड़ों की संख्या।

सुविधाओं से जुड़े सवाल:
पानी और बिजली का स्रोत, शौचालय और बाथरूम की उपलब्धता, रसोई और गैस कनेक्शन, खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला ईंधन।

डिजिटल और सामान से जुड़े सवाल:
घर में टीवी, मोबाइल, इंटरनेट, कंप्यूटर जैसी सुविधाएं हैं या नहीं।

वाहन और अन्य जानकारी:
साइकिल, बाइक, कार जैसी सुविधाएं और उपयोग किए जाने वाले अनाज की जानकारी, साथ ही मोबाइल नंबर।

ध्यान रखें – ये सवाल कभी नहीं पूछे जाते:
जनगणनाकर्मी आपकी बैंक डिटेल्स, OTP, पासवर्ड, एटीएम पिन, आधार से जुड़ी गोपनीय जानकारी या किसी भी प्रकार की वित्तीय जानकारी नहीं मांग सकते।

पुलिस और प्रशासन की सलाह है कि किसी भी अजनबी पर तुरंत भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध लगे या जरूरत से ज्यादा निजी जानकारी मांगे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दें।

जनगणना में सही जानकारी देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है, लेकिन अपनी निजी और वित्तीय सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।

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