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बिलासपुर में 180 क्विंटल अमानक खाद जब्त, कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई

बिलासपुर जिले में किसानों को गुणवत्तायुक्त खाद और बीज उपलब्ध कराने के दावों के बीच कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 180 क्विंटल अमानक खाद जब्त की है। यह कार्रवाई कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर की गई। कृषि विभाग की टीम ने रतनपुर और आसपास के क्षेत्रों में खाद-बीज विक्रेताओं की जांच की। जांच के दौरान सेवा सहकारी समिति चपोरा, महेश्वरी कृषि केंद्र रतनपुर, मेंसर्स गुप्ता ग्रेन मर्चेंट रतनपुर, सेवा सहकारी समिति रतनपुर और उन्नत कृषि सेवा केंद्र रतनपुर में रिकॉर्ड और भंडारण से जुड़ी कई अनियमितताएं सामने आईं। अधिकारियों के मुताबिक मेंसर्स गुप्ता ग्रेन मर्चेंट रतनपुर में लगभग 180 क्विंटल अमानक उर्वरक एनपीके 20:20:0:13 भंडारित पाया गया। इसके बाद संबंधित खाद के विक्रय पर तत्काल रोक लगा दी गई है। जांच के दौरान पाए गए नियम उल्लंघन को लेकर संबंधित दुकानदारों और संस्थाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। कृषि विभाग ने साफ कहा है कि किसानों के हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। कृषि विभाग के उप संचालक पीडी हथेश्वर ने कहा कि गुणवत्ताहीन और अमानक कृषि आदानों की बिक्री करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। विभाग लगातार खाद-बीज दुकानों की जांच कर रहा है ताकि किसानों को सही और प्रमाणित उत्पाद उपलब्ध हो सकें।

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प्रति एकड़ एक बोरी यूरिया-डीएपी देने के फैसले पर भड़का किसान संगठन, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

खरीफ सीजन 2026-27 से पहले छत्तीसगढ़ में खाद वितरण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन ने राज्य सरकार की नई व्यवस्था का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पाएगी और उन्हें निजी दुकानों पर निर्भर होना पड़ेगा। यूनियन के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि सरकार ने सहकारी समितियों में खाद और नगद वितरण का अनुपात बदल दिया है। पहले किसानों को 40 प्रतिशत उर्वरक और 60 प्रतिशत नगद राशि दी जाती थी, जबकि अब इसे 30 प्रतिशत उर्वरक और 70 प्रतिशत नगद कर दिया गया है। उनका कहना है कि इस बदलाव से समितियों में खाद की उपलब्धता कम हो जाएगी। किसान संगठन का आरोप है कि खाद की कमी होने पर किसानों को निजी दुकानों से ज्यादा कीमत पर यूरिया और डीएपी खरीदनी पड़ेगी। साथ ही निजी विक्रेता किसानों पर अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव भी बनाते हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता है। तेजराम विद्रोही ने सरकार के प्रति एकड़ एक बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी देने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल समय पर खाद नहीं मिलने की वजह से धान उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत तक गिरावट आई थी और इस बार स्थिति और गंभीर हो सकती है। किसान यूनियन ने सरकार की नीति को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि सीमित खाद वितरण से उत्पादन घटेगा, जिससे समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का दबाव भी कम हो जाएगा। संगठन ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

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प्रदेश में खरीफ सीजन से फार्मर आईडी अनिवार्य: बिना आईडी नहीं मिलेगा यूरिया और अन्य खाद

प्रदेश में आने वाले खरीफ सीजन से खाद वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब यूरिया, पोटाश और डीएपी जैसे खाद केवल उन्हीं किसानों को मिलेंगे, जिनके पास फार्मर आईडी होगी। नई व्यवस्था के तहत Urea Fertilizer सहित सभी प्रमुख खाद समितियों से केवल फार्मर आईडी दिखाने पर ही उपलब्ध होंगे। जिन किसानों के पास आईडी नहीं होगी, उन्हें खाद नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, निजी दुकानों से खाद खरीदने पर भी किसान की जानकारी जैसे नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस प्रणाली का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाना और अनियमितता तथा कालाबाजारी को रोकना है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में खाद की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए यह व्यवस्था पहले से लागू की जा रही है ताकि वास्तविक किसानों तक समय पर खाद पहुंच सके। यदि किसान फार्मर आईडी नहीं बनवाते हैं, तो उन्हें न केवल खाद बल्कि अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित होना पड़ सकता है। प्रदेश में इस समय बड़ी संख्या में किसान अभी भी एग्री-टेक रजिस्ट्रेशन से नहीं जुड़े हैं, जिन्हें जल्द से जल्द पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है। यह नियम 2026-27 के खरीफ सीजन से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

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प्रदेश में आने वाले खरीफ सीजन से खाद वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब यूरिया, पोटाश और डीएपी जैसे खाद केवल उन्हीं किसानों को मिलेंगे, जिनके पास फार्मर आईडी होगी। नई व्यवस्था के तहत Urea Fertilizer सहित सभी प्रमुख खाद समितियों से केवल फार्मर आईडी दिखाने पर ही उपलब्ध होंगे। जिन किसानों के पास आईडी नहीं होगी, उन्हें खाद नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, निजी दुकानों से खाद खरीदने पर भी किसान की जानकारी जैसे नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस प्रणाली का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाना और अनियमितता तथा कालाबाजारी को रोकना है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में खाद की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए यह व्यवस्था पहले से लागू की जा रही है ताकि वास्तविक किसानों तक समय पर खाद पहुंच सके। यदि किसान फार्मर आईडी नहीं बनवाते हैं, तो उन्हें न केवल खाद बल्कि अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित होना पड़ सकता है। प्रदेश में इस समय बड़ी संख्या में किसान अभी भी एग्री-टेक रजिस्ट्रेशन से नहीं जुड़े हैं, जिन्हें जल्द से जल्द पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है। यह नियम 2026-27 के खरीफ सीजन से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

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खरीफ से पहले किसानों की मांग: पर्याप्त खाद, कालाबाजारी रोक और श्वेतपत्र जारी करे सरकार

अंतरराष्ट्रीय तनाव और ईरान-इज़राइल हालात के बीच किसानों ने खरीफ सीजन से पहले पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। किसान नेता तेजराम विद्रोही ने कहा कि सरकार को पहले से पता होता है कि कितनी खेती होगी, इसलिए खाद का स्टॉक पहले से तैयार रखना चाहिए। पिछले खरीफ में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारी कमी के कारण किसानों को यूरिया, डीएपी और पोटाश के लिए भटकना पड़ा था। इस बार कांग्रेस ने भी सरकार से श्वेतपत्र जारी कर खाद की उपलब्धता और कालाबाजारी रोकने की अपील की है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि शुरुआती दो महीनों में 4.5 लाख मीट्रिक टन की जरूरत के मुकाबले केवल 80 हजार मीट्रिक टन ही उपलब्ध कराया गया। इससे बिचौलियों ने फायदा उठाया और किसानों को तीन से चार गुना ज्यादा कीमत पर खाद खरीदनी पड़ी। कांग्रेस ने कृषि मंत्री रामविचार नेताम से सवाल किया है कि इस साल कुल कितनी मांग है और अब तक कितना स्टॉक तैयार किया गया। पार्टी ने कहा कि सरकार को पारदर्शिता दिखाते हुए श्वेतपत्र जारी करना चाहिए, बजाय विपक्ष पर आरोप लगाने के।

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