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अबूझमाड़ में बदलाव की शुरुआत: नक्सल प्रभाव खत्म होने के बाद 239 गांवों में पहली बार पहुंचा प्रशासन

बस्तर का Abujhmad क्षेत्र, जो कभी नक्सल गतिविधियों का गढ़ माना जाता था, अब धीरे-धीरे मुख्यधारा से जुड़ रहा है। केंद्र सरकार द्वारा इस क्षेत्र को नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किए जाने के बाद यहां प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पहली बार यहां के 239 गांवों में सरकारी सर्वे शुरू किया गया है। इस सर्वे के जरिए गांवों में रहने वाले परिवारों की संख्या, सदस्यों का विवरण, खेती करने वाले लोगों की जानकारी और जमीन के उपयोग का आकलन किया जा रहा है। राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम इस काम में जुटी हुई है। सर्वे को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए Indian Institute of Technology Roorkee की मदद से पूरे क्षेत्र का सैटेलाइट मैप तैयार किया जा रहा है। सैटेलाइट इमेज के आधार पर गांवों और आबादी का प्रारंभिक नक्शा बनाया जा रहा है, जिसके बाद फील्ड टीम मौके पर जाकर हर घर और जमीन का सत्यापन करेगी। सर्वे पूरा होने के बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके आधार पर जो परिवार जहां निवास कर रहा है और जिस जमीन पर खेती कर रहा है, उसे उसी के अनुसार मालिकाना हक प्रदान किया जाएगा। इससे लंबे समय से बिना अधिकार के रह रहे वनवासियों को कानूनी पहचान और जमीन का अधिकार मिल सकेगा। नारायणपुर जिले का ओरछा ब्लॉक, जिसे अबूझमाड़ के नाम से जाना जाता है, दशकों तक प्रशासन की पहुंच से बाहर रहा। आजादी के बाद भी यहां कई गांव सड़क और संचार सुविधाओं से कटे हुए थे। जैसे ही सड़क निर्माण शुरू हुआ, नक्सली गतिविधियां बढ़ गईं, जिससे यह इलाका उनका सुरक्षित ठिकाना बन गया। इसी वजह से यहां गांवों, आबादी और जमीन का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार नहीं हो पाया था। अब सुरक्षा बलों की मौजूदगी और सड़क विस्तार के बाद हालात बदल रहे हैं और प्रशासन पहली बार गांवों तक पहुंच पा रहा है। करीब 3 लाख हेक्टेयर में फैले इस घने जंगल क्षेत्र में वन विभाग की गतिविधियां भी दोबारा शुरू की जा रही हैं। जिन इलाकों में वर्षों पहले नक्सलियों द्वारा वन विभाग के भवनों को नष्ट कर दिया गया था, वहां फिर से काम शुरू हो रहा है। प्रशासन के अनुसार, सर्वे के साथ-साथ ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा। नक्शा और खसरा तैयार होने के बाद जमीन के अधिकार देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह पहल न केवल विकास को गति देगी, बल्कि क्षेत्र के लोगों को स्थायी पहचान और अधिकार भी दिलाएगी।

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रायपुर में साइबर ठगी: IES अफसर के पिता से बेटे की गिरफ्तारी का झांसा देकर ठगे पैसे

रायपुर के डीडी नगर इलाके में रहने वाले एक रिटायर्ड इंजीनियर साइबर ठगी का शिकार हो गए। ठगों ने उनके बेटे को गिरफ्तार करने का झूठा दावा कर उनसे पैसे ऐंठ लिए। आरोपी ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताकर संपर्क किया और बताया कि उनके बेटे को दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के अनुसार 4 अप्रैल को पीड़ित को व्हाट्सऐप कॉल आया। कॉल करने वाले ने पुलिस अधिकारी बनकर बात की और बेटे को छुड़ाने के नाम पर 1.60 लाख रुपए की मांग की। इस दौरान आरोपी ने वीडियो कॉल के जरिए बुजुर्ग पर दबाव बनाया, जिससे वे घबरा गए और स्थिति को सच मान बैठे। घबराहट में पीड़ित ने तुरंत 80 हजार रुपए आरोपी के बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए और बाकी रकम बाद में देने की बात कही। कुछ समय बाद जब उन्होंने अपने बेटे से संपर्क किया, तब पता चला कि वह पूरी तरह सुरक्षित है और उसकी गिरफ्तारी जैसी कोई घटना नहीं हुई है। इसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ। बताया जा रहा है कि पीड़ित का बेटा दिल्ली में भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (IES) में कार्यरत है, इसी वजह से ठगों की बातों पर उन्होंने जल्दी भरोसा कर लिया। शिकायत मिलने के बाद डीडी नगर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि इस तरह के कॉल आने पर घबराएं नहीं और पहले अपने परिजनों से संपर्क कर सच्चाई की पुष्टि करें। किसी भी अनजान व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर करने से बचें। साइबर ठगी से बचने के उपाय:

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बलरामपुर में दुष्कर्म पीड़िता के परिवार का सामाजिक बहिष्कार, पंचायत ने रखीं अपमानजनक शर्तें

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में दुष्कर्म पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाय पंचायत द्वारा उसके परिवार के खिलाफ सामाजिक दंड सुनाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पंचायत ने पीड़िता के परिवार को 12 साल तक समाज से अलग रखने का फैसला किया और कई अपमानजनक शर्तें भी रख दीं। यह मामला वाड्रफनगर विकासखंड के बसंतपुर थाना क्षेत्र के एक गांव का है। पीड़िता के परिजनों के अनुसार, पंचायत की बैठक में सरपंच और पंचों ने आरोपी युवक को सजा देने के बजाय पीड़िता के परिवार को ही दोषी ठहराते हुए उनके बहिष्कार का निर्णय लिया। पंचायत के कथित फैसले के मुताबिक, पीड़िता का परिवार अगले 12 वर्षों तक गांव के सामाजिक कार्यक्रमों, धार्मिक आयोजनों और अन्य सामुदायिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकेगा। पंचायत की विवादित शर्तें परिजनों का आरोप है कि पंचायत ने समाज में दोबारा शामिल होने के लिए अपमानजनक शर्तें रखीं। सरपंच जवाहिर लाल के अनुसार, अगर परिवार समाज में वापस आना चाहता है तो उन्हें पूरे गांव के लोगों के पैर धोकर उसी पानी से स्नान करना होगा। इसके अलावा पूरे गांव को बकरा-भात और शराब का भोज देने की भी बात कही गई। पंचायत के इस फैसले से पीड़ित परिवार काफी डरा और परेशान है। उन्होंने इस मामले की शिकायत एसडीओपी कार्यालय में करते हुए प्रशासन से न्याय की मांग की है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन मामले की जानकारी लेकर पंचायत को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। सरपंच ने आरोपों से किया इनकार इस मामले में सरपंच जवाहिर लाल का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पंचायत द्वारा परिवार के बहिष्कार की बात कही जा रही है। हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद सरपंच ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि पंचायत ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है और यह पंचायत को बदनाम करने की साजिश है। सात महीने की गर्भवती है पीड़िता जानकारी के अनुसार युवक और युवती एक ही गांव के रहने वाले हैं और पिछले करीब एक साल से दोनों के बीच संबंध थे। युवती का आरोप है कि युवक ने उससे शादी का वादा किया था, लेकिन बाद में शादी से इंकार करता रहा। इस दौरान युवती गर्भवती हो गई। जब युवती ने परिवार को इस बारे में बताया, तो परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। 18 फरवरी को बसंतपुर थाने में मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने 22 फरवरी को आरोपी युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बताया जा रहा है कि 25 फरवरी को गांव में पंचायत की बैठक हुई, जिसके बाद पीड़िता के परिवार के सामाजिक बहिष्कार की बात सामने आई। वाड्रफनगर एसडीएम नीरनिधि नंदेहा ने कहा कि मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन जांच कर रहा है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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रायपुर में गर्भवती इंटीरियर डिजाइनर से मारपीट, डॉग रेस्क्यू टीम पर थप्पड़ और मोबाइल छीनने का आरोप

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पालतू कुत्ते की देखभाल को लेकर हुए विवाद में एक गर्भवती महिला के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि खुद को पशु प्रेमी रेस्क्यू संस्था की सदस्य बताने वाली महिलाओं ने बीच सड़क महिला को थप्पड़ मारा, उसकी टी-शर्ट खींची और धक्का दिया। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दो महिलाएं गर्भवती से मारपीट करती दिखाई दे रही हैं। यह पूरा मामला रायपुर के पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। पीड़िता गुरप्रीत कौर, जो भिलाई के नेहरू नगर की रहने वाली हैं और इंटीरियर डिजाइनिंग का काम करती हैं, ने रेस्क्यू संस्था की सदस्य किरण घनश्याम आहूजा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, 27 फरवरी को गुरप्रीत कौर रायपुर के भाठागांव इलाके में स्थित कृष्णा होटल में ठहरी हुई थीं। उनके साथ दो पालतू कुत्ते भी थे। किसी निजी काम से बाहर जाने के दौरान उन्होंने अपने दोनों डॉग होटल में ही छोड़ दिए थे। दोपहर करीब डेढ़ बजे जब गुरप्रीत होटल वापस पहुंचीं, तब वहां खुद को पशु प्रेमी संस्था की पदाधिकारी बताने वाली किरण आहूजा और उनकी टीम मौजूद थी। आरोप है कि उन्होंने गुरप्रीत पर कुत्तों की सही तरीके से देखभाल न करने का आरोप लगाते हुए बहस शुरू कर दी। इसी दौरान किरण आहूजा ने गुरप्रीत को थप्पड़ मार दिया। पीड़िता का आरोप है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो संस्था की एक अन्य महिला सदस्य भी आगे आई और उसने भी उन्हें थप्पड़ मार दिया। इतना ही नहीं, उनकी टी-शर्ट खींचकर धक्का दिया गया। इसके बाद संस्था के सदस्यों ने उनके पालतू कुत्ते और मोबाइल फोन भी अपने साथ ले लिए। गुरप्रीत कौर का कहना है कि विवाद के दौरान संस्था के लोगों ने उन पर अपने डॉग्स को मारने का आरोप लगाया और उन्हें अपने साथ ले जाने का दबाव बनाया। मना करने पर उनके पालतू कुत्तों को जबरन अपने साथ ले जाया गया और अब तक वापस नहीं किया गया है। घटना के बाद पीड़िता ने पुरानी बस्ती थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 27 फरवरी को ही आवेदन दिया गया था और पिछले कई दिनों से वह थाने के चक्कर लगा रही हैं। इस मामले में पुरानी बस्ती थाना प्रभारी शील आदित्य सिंह का कहना है कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर किरण आहूजा के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज भी सामने आए हैं और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

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बिजली कर्मचारियों को होली का तोहफा: 2700 अधिकारियों को 3 करोड़ तक का बीमा कवरेज, बैंक ऑफ बड़ौदा से हुआ समझौता

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी ने अपने कर्मचारियों को होली से पहले बड़ा लाभ दिया है। कंपनी ने बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ एक महत्वपूर्ण अनुबंध (एमओयू) किया है, जिसके तहत करीब 2700 अधिकारी और कर्मचारियों को उन्नत बैंकिंग सुविधाएं और उच्च बीमा कवरेज मिलेगा। इस समझौते पर कंपनी के प्रबंध निदेशक एस.के. कटियार और बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रतिनिधि देवाकर ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और बैंक के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। कर्मचारियों के हित में विशेष पैकेज जनरेशन कंपनी के मुख्यालय, हसदेव ताप विद्युत गृह, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह और अटल बिहारी वाजपेयी ताप विद्युत संयंत्र में कार्यरत कुल 2700 कर्मचारियों को इस समझौते का सीधा लाभ मिलेगा। कंपनी प्रबंधन के अनुसार, यह पहल कर्मचारियों की मांग पर की गई है ताकि उन्हें एक ही बैंक में सैलरी पैकेज के साथ आधुनिक और किफायती सुविधाएं मिल सकें। बीमा और लोन सुविधा समझौते के तहत कर्मचारियों को 12 लाख रुपये तक का सामान्य बीमा कवर मिलेगा। इसके अतिरिक्त दुर्घटना या विमान दुर्घटना की स्थिति में 1 से 2 करोड़ रुपये तक का कवरेज प्रदान किया जाएगा। कुल मिलाकर कुछ स्थितियों में 3 करोड़ रुपये तक का सुरक्षा कवच उपलब्ध रहेगा। इसके अलावा कर्मचारियों को कम ब्याज दर पर ऋण सुविधा भी दी जाएगी, जिससे वे वित्तीय रूप से अधिक सुरक्षित रह सकें। कंपनी प्रबंधन ने इसे कर्मचारी कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

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तस्करों के मोबाइल से बड़ा खुलासा: रायपुर के 620 लोगों की ‘ड्रग्स लिस्ट’ तैयार, नव्या-विधि गैंग को महीने में 20 लाख तक भुगतान

रायपुर में ड्रग्स नेटवर्क की जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। ड्रग्स क्वीन नव्या मलिक और विधि अग्रवाल समेत गिरफ्तार 43 तस्करों के मोबाइल फोन, चैट और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच में 620 से अधिक लोगों के नंबर सामने आए हैं। ये लोग ड्रग्स और सूखा नशा खरीदने के लिए तस्करों के संपर्क में थे। इनमें से करीब 320 युवक-युवतियां सीधे नव्या और विधि के गिरोह से जुड़े पाए गए हैं। जानकारी के मुताबिक यह गिरोह हर महीने 10 से 20 लाख रुपए तक का ड्रग्स सप्लाई करता था। पुलिस ने कॉल डिटेल, ऑनलाइन चैट और लेन-देन के रिकॉर्ड के आधार पर पहली बार ऐसे उपभोक्ताओं की सूची तैयार की है। इस सूची को गृह विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग को भेजा गया है, ताकि नशे के आदी युवाओं की काउंसिलिंग कराई जा सके। हालांकि कई लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया, लेकिन ठोस सबूत न होने और रसूखदार पृष्ठभूमि के चलते उन्हें छोड़ दिया गया। ऐसे खुला नेटवर्क का राज 23 अगस्त 2025 को हरियाणा का तस्कर मोनू विश्नोई ट्रेन से ड्रग्स लेकर रायपुर पहुंचा। उसने नव्या मलिक से संपर्क किया, जो उस समय शहर में मौजूद नहीं थी। नव्या ने हर्ष आहूजा और दीप धनोरिया को ड्रग्स लेने भेजा। एक्सप्रेस-वे के पास जैसे ही सौदा हुआ, पहले से सूचना पर तैनात पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद कॉल डिटेल और डिजिटल डेटा खंगालने पर पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। चार महीने से लंबित है सूची सूत्रों के अनुसार, ड्रग्स लेने वालों की यह सूची पिछले चार महीने से विभागीय स्तर पर लंबित है। अब तक काउंसिलिंग या पुनर्वास को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। पुलिस का मानना है कि कई लोग आज भी नशे के जाल में फंसे हुए हैं। हर वार्ड में नशा मुक्ति केंद्र की जरूरत पुलिस ने सुझाव दिया है कि शहर के हर वार्ड में नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किए जाएं, ताकि स्थानीय स्तर पर काउंसिलिंग और पुनर्वास की सुविधा मिल सके। विशेषज्ञों की मदद से युवाओं और उनके परिवारों को जागरूक करने की भी योजना प्रस्तावित की गई है। फिलहाल इस दिशा में ठोस पहल का इंतजार है।

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रायपुर में हीट वेव से निपटने की तैयारी, जिला अस्पताल में बनाया गया विशेष हीट स्ट्रोक रूम

शहर में बढ़ती गर्मी और संभावित हीट वेव को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर जिला चिकित्सालय पंडरी में विशेष “हीट स्ट्रोक रूम” स्थापित किया गया है, ताकि लू से प्रभावित गंभीर मरीजों को तत्काल और प्रभावी उपचार मिल सके। अस्पताल प्रशासन ने अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की है। मरीजों के शरीर का तापमान तेजी से नियंत्रित करने के लिए दो विशेष बाथटब लगाए गए हैं, जिनमें ठंडे पानी और बर्फ की मदद से इमर्शन कूलिंग की जाएगी। बर्फ की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आइस मेकिंग मशीन भी स्थापित की गई है। साथ ही डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को हीट स्ट्रोक के इलाज से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने बताया कि गर्मी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। स्वास्थ्य विभाग की अपील: क्या करें? हीट स्ट्रोक के लक्षण क्या हैं? चिकित्सकों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की त्वचा लाल और सूखी हो जाए, शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो, उल्टी, चक्कर, सांस लेने में तकलीफ, तेज धड़कन या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए। आपातकालीन सहायता के लिए कंट्रोल रूम नंबर 0771-3519250 पर संपर्क किया जा सकता है।

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उरला–बेंद्री रोड पर सुबह-सुबह सनसनी, निशाद ढाबा के पास अज्ञात व्यक्ति का शव मिला

रायपुर। राजधानी रायपुर के उरला थाना क्षेत्र अंतर्गत बेंद्री रोड पर बुधवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब निशाद ढाबा के पास एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद किया गया। शव कंबल से ढका हुआ था और प्रथम दृष्टया शरीर पर चोट के निशान दिखाई दे रहे थे, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, निशाद ढाबा का मालिक सुबह करीब 7 बजे ढाबा खोलने पहुंचा। इसी दौरान उसकी नजर ढाबे के पास पड़े शव पर पड़ी। शव को देखकर वह घबरा गया और तुरंत उरला पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र को घेराबंदी कर जांच शुरू की। पुलिस द्वारा शव की तलाशी लेने पर मृतक का आधार कार्ड बरामद हुआ, जिससे उसकी पहचान तमिलनाडु निवासी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि मृतक पेशे से ट्रक चालक था। प्रारंभिक जांच में मृतक के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं, वहीं मुंह से खून की उल्टी होने के संकेत भी मिले हैं। उरला पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हो रहा है। आशंका जताई जा रही है कि किसी हादसे में घायल होने के बाद व्यक्ति यहां आकर सो गया होगा और रात के दौरान उसकी मौत हो गई। हालांकि, जिस स्थिति में शव मिला है, उसे पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पुलिस को घटनास्थल से खून के स्पष्ट निशान नहीं मिले हैं, जिससे हत्या की आशंका भी पूरी तरह खारिज नहीं की जा रही है। इसी वजह से पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उरला पुलिस का कहना है कि मौत दुर्घटना से हुई है या फिर यह हत्या का मामला है, इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और मामले की गहन जांच जारी है।

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छत्तीसगढ़ में 4708 शिक्षकों की भर्ती जल्द, हिंदी और संस्कृत जैसे विषयों के पद शामिल

राज्य में 4708 पदों पर शिक्षकों की भर्ती जल्द आयोजित की जाएगी। वित्त विभाग से अनुमति मिलने के बाद इसके लिए तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। इस भर्ती का खास पहलू यह है कि इसमें हिंदी, संस्कृत और अन्य महत्वपूर्ण विषयों के व्याख्याता पद भी शामिल होंगे, जो पिछले दस साल में दो बार आयोजित हुई भर्तियों में नहीं थे। स्कूल शिक्षा विभाग ने हाल ही में व्यापमं को भर्ती के आयोजन के लिए पत्र भेजा है। संभावना है कि आने वाले दिनों में आधिकारिक विज्ञापन जारी किया जाएगा। इस बार भर्ती के तहत सहायक शिक्षक, विज्ञान प्रयोगशाला शिक्षक, व्याख्याता और पीटीआई के पद भरे जाएंगे। पहले जुलाई में 5000 पदों पर भर्ती की योजना बनाई गई थी, लेकिन कंप्यूटर और योग के 146-146 पदों को घटाकर कुल 4708 पदों पर मंजूरी दी गई। भर्ती में विभिन्न विषयों में पद इस प्रकार होंगे: छत्तीसगढ़ में पिछली भर्तियों पर नजर डालें तो 2019 में लगभग 14 हजार और 2023 में 12,489 पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी। 2019 में व्याख्याता पदों में अंग्रेजी, रसायन, वाणिज्य, गणित, भौतिकी और जीवविज्ञान शामिल थे। इस भर्ती की परीक्षा सत्र 2025-26 में आयोजित करने की योजना है।

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भार्गवास्त्र मिसाइल सिस्टम का सफल परीक्षण: भारत की ड्रोन हमलों के खिलाफ बड़ी कामयाबी

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। इसके जवाब में पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों के जरिए हमला करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों ने सभी हमलों को नाकाम कर दिया। इसी बीच भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करते हुए स्वदेशी विकसित हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम “भार्गवास्त्र” का सफल परीक्षण किया है। गोपालपुर में हुआ परीक्षण भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारियों की निगरानी में 13 मई को गोपालपुर रेंज में भार्गवास्त्र के तीन परीक्षण किए गए। इनमें से दो परीक्षणों में एक-एक रॉकेट दागा गया, जबकि तीसरे में साल्वो मोड का प्रयोग करते हुए महज दो सेकंड में दो रॉकेट दागे गए। सभी चार रॉकेटों ने उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन किया और बड़े पैमाने पर ड्रोन हमलों को नष्ट करने की अपनी क्षमता साबित की। भार्गवास्त्र की विशेषताएं सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया यह अत्याधुनिक सिस्टम स्वार्म ड्रोनों को खत्म करने में सक्षम है। यह 2.5 किलोमीटर तक प्रभावी है और एक बार में 64 गाइडेड माइक्रो-मिसाइल दाग सकता है। इसका रडार 6 से 10 किलोमीटर की दूरी तक हवाई खतरों को ट्रैक कर सकता है और कुछ ही सेकंड में कार्रवाई कर सकता है। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक भार्गवास्त्र को भारत में ही डिजाइन और विकसित किया गया है। इसे विशेष रूप से ड्रोन हमलों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। यह सिस्टम समुद्र तल से लेकर 5,000 मीटर की ऊंचाई तक के क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है और विभिन्न भौगोलिक स्थितियों में प्रभावी ढंग से कार्य कर सकता है। सुरक्षा में नया अध्याय भार्गवास्त्र भारत की सुरक्षा प्रणाली में एक बड़ी छलांग साबित हो सकता है। हाल ही में पाकिस्तान ने चीन और तुर्की निर्मित ड्रोनों और मिसाइलों का प्रयोग किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि आने वाले समय में ड्रोन युद्ध का स्वरूप बदलने वाला है। ऐसे में भार्गवास्त्र जैसी तकनीकें भारत को नई चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाएंगी।

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