रायपुर में अप्रैल में ही पेयजल संकट, बोरवेल सूखने और लो प्रेशर से लोगों को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है

रायपुर शहर में अप्रैल की तेज गर्मी के साथ ही पेयजल संकट गंभीर रूप ले रहा है। कई बोरवेल सूख चुके हैं और अधिकांश वार्डों में नलों का पानी लो प्रेशर से आ रहा है, जिससे टेल एंड तक सप्लाई पहुंच नहीं पा रही है। जोन-9 के वार्ड सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां रोजाना टैंकरों से पानी सप्लाई करनी पड़ रही है और लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं।

लाभांडी, खम्हारडीह, कचना, दलदल सिवनी, सड्डू, हीरापुर, मोवा और जोरा सहित कई इलाकों में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। शहर के आउटर क्षेत्रों की सोसायटियों और मोहल्लों में टैंकरों के फेरे लगातार बढ़ रहे हैं। अधिकांश वार्डों में पानी लो प्रेशर से आ रहा है, जबकि कुछ बड़े इलाकों में पानी की टंकी बनने के बावजूद पाइपलाइन अधूरी है। पुरानी टंकियों से ही सप्लाई होने के कारण प्रेशर और कम हो रहा है।

चंगोराभाठा के करन नगर, ब्रह्मदेव नगर (लाभांडी), कचना के स्वास्तिक नगर, पं. रविशंकर शुक्ल वार्ड के यादवपारा, धोबीपारा और अर्जुन चौक समेत कई क्षेत्रों में पानी बेहद कम प्रेशर से मिल रहा है। लाभांडी के ब्रह्मदेव नगर में लोग सार्वजनिक बोर से छोटे टैंकों में पानी भरकर अपनी जरूरत पूरी कर रहे हैं। कई सालों से भूजल स्तर गिरने के कारण बोरवेल का पानी भी कम हो गया है। टैंकर पहुंचते ही भीड़ लग जाती है और कई बार विवाद की स्थिति भी बनती है।

भूजल स्तर में गिरावट और पाइपलाइन नेटवर्क अधूरा होना मुख्य वजह बताई जा रही है। टेल एंड इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं और वहां नियमित सप्लाई नहीं पहुँच पा रही। गर्मियों में हर साल दोहराई जाने वाली यह समस्या स्थायी समाधान के अभाव में बनी रहती है। टैंकर पर बढ़ती निर्भरता से लागत और विवाद भी बढ़ रहे हैं।

शहर में किन वार्डों में पानी की समस्या है, इसकी रिपोर्ट रोज ली जा रही है। एमआईसी सदस्यों के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम बनाई गई है। जरूरत के अनुसार पाइपलाइन बिछाने के साथ ही टैंकरों से पानी सप्लाई की जा रही है। जोन-9 क्षेत्र में सबसे ज्यादा टैंकर भेजे जा रहे हैं। जोन-3 और जोन-7 के वार्डों में भी पानी की कमी है। वर्तमान में टैंकर सप्लाई के लिए नया टेंडर नहीं हुआ है और पुराने टेंडर से ही सप्लाई जारी है।

नवा रायपुर में बढ़ती आबादी के साथ पानी की मांग तीन गुना बढ़ गई है। गर्मियों में कटौती से राहत के लिए कोडापार एनीकट से 33 एमएलडी अतिरिक्त पानी लाने की योजना पर काम तेजी से चल रहा है। पिछले 10 साल में सप्लाई 11 एमएलडी से बढ़कर 33 एमएलडी तक पहुंच गई है, लेकिन गर्मियों में महानदी का जलस्तर घटने से नियमित सप्लाई प्रभावित होती है।

स्थायी समाधान के लिए एनआरडीए अभनपुर के कोडापार एनीकट से नई पाइपलाइन के जरिए पानी लाएगा। करीब 10 किमी पाइपलाइन बिछ चुकी है और 5 किमी का काम बाकी है, जिसे अगस्त 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल टीला एनीकट से पानी पचेड़ा फिल्टर प्लांट तक लाया जाता है। जलस्तर घटने पर सुबह-शाम तीन-तीन घंटे कटौती करनी पड़ती है। नई योजना के पूरा होने के बाद वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध होगा। वर्तमान में 52 एमएलडी क्षमता का प्लांट संचालित है और लेयर-वन के 10 हजार घरों को 24 घंटे पानी मिल रहा है।

हर साल पानी संकट की मुख्य वजह महानदी पर निर्भरता, गर्मियों में गंगरेल से कम पानी छोड़ना, तेजी से बढ़ती आबादी और खपत, और वैकल्पिक स्रोत की कमी बताई जा रही है।

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