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​दक्षिण कोरिया में मार्च 2025 के दौरान भीषण जंगल की आग ने देश के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों को प्रभावित किया है

दक्षिण कोरिया में मार्च 2025 के दौरान भीषण जंगल की आग ने देश के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों को प्रभावित किया है, जिससे व्यापक विनाश और जनजीवन में अवरोध उत्पन्न हुआ है। इन आगजनी घटनाओं ने न केवल संपत्ति का नुकसान किया है, बल्कि मानवीय जीवन पर भी गंभीर प्रभाव डाला है।​ आग की उत्पत्ति और प्रसार: सबसे बड़ी आग सांचेओंग काउंटी में शुक्रवार को शुरू हुई, जो दक्षिण ग्योंगसांग प्रांत में स्थित है। तेज हवाओं और सूखी परिस्थितियों के कारण, यह आग तेजी से फैलकर 500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैल गई। इस आग के कारण 260 से अधिक लोगों को अपने घर छोड़कर अस्थायी आश्रयों में शरण लेनी पड़ी। ​ प्रभावित क्षेत्र और जनसंख्या: उत्तरी ग्योंगसांग प्रांत के यूसेओंग काउंटी में भी आग ने 300 हेक्टेयर से अधिक भूमि को प्रभावित किया, जिससे 400 से अधिक लोगों को अपने घरों से निकलना पड़ा। इसके अलावा, गिम्हे शहर में भी आग के कारण दर्जनों निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। इन आगजनी घटनाओं ने दक्षिण-पूर्वी कोरिया प्रायद्वीप के कई हिस्सों में हाईवे बंद होने जैसी समस्याएं उत्पन्न कीं, जिससे आवागमन में बाधा आई। ​ सरकारी प्रतिक्रिया और राहत कार्य: आग की गंभीरता को देखते हुए, कोरिया फॉरेस्ट सर्विस ने 1,600 से अधिक आपातकालीन कर्मियों, 35 हेलीकॉप्टरों और दर्जनों वाहनों को आग बुझाने के कार्य में लगाया है। हालांकि, पहाड़ी इलाकों और तेज हवाओं के कारण केवल 35% आग पर ही काबू पाया जा सका है। सरकार ने उत्तरी और दक्षिणी ग्योंगसांग प्रांतों और उल्सान शहर में आपातकाल की घोषणा की है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से राहत और बचाव कार्य किए जा सकें। ​ मौसम और पर्यावरणीय चुनौतियाँ: तेज हवाओं और सूखी मौसम स्थितियों ने आग के प्रसार को बढ़ावा दिया है, जिससे आग बुझाने के प्रयासों में कठिनाई हो रही है। इन प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण, आग पर पूर्ण नियंत्रण पाने में अधिक समय लग सकता है, जिससे पर्यावरणीय नुकसान की संभावना बढ़ गई है। ​ आगे की चुनौतियाँ: दक्षिण कोरिया की सरकार और आपातकालीन सेवाएँ वर्तमान में आग पर काबू पाने और प्रभावित लोगों की सहायता करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। हालांकि, तेज हवाओं और सूखी परिस्थितियों के कारण आग बुझाने में चुनौतियाँ बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और राहत कार्यों की प्रगति पर निर्भर करेगा कि आग पर कब तक पूर्ण नियंत्रण पाया जा सकेगा।​ इस संकट ने न केवल दक्षिण कोरिया के पर्यावरण पर, बल्कि वहां के निवासियों के जीवन पर भी गहरा प्रभाव डाला है। आग से प्रभावित लोगों की सुरक्षा, पुनर्वास और पर्यावरण की बहाली के लिए सरकार और संबंधित एजेंसियों को दीर्घकालिक रणनीतियाँ बनानी होंगी।

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रावाभाठा बंजारी बाजार में हंगामा: सब्ज़ी विक्रेता के थप्पड़ से बेहोश हुआ व्यक्ति, मौत की उड़ी अफ़वाह

रायपुर, शनिवार 22 मार्च 2025 – रावाभाठा स्थित बंजारी बाजार में शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक सब्ज़ी विक्रेता ने कथित तौर पर एक खरीदार को जोरदार थप्पड़ मार दिया, जिससे वह व्यक्ति मौके पर ही बेहोश हो गया। चश्मदीदों के अनुसार, घटना के तुरंत बाद बाजार में यह अफवाह फैल गई कि वह व्यक्ति मर गया है, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। NEWS22 BHARAT की टीम जब मौके पर पहुँची और घटनास्थल का जायजा लिया, तो कई प्रत्यक्षदर्शियों से बात की। उन्होंने बताया कि बेहोश हुआ व्यक्ति आए दिन बाजार में गाली-गलौज और मारपीट करता है तथा सब्ज़ी चोरी कर ले जाता था। इस बार भी वह वही करने आया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब सब्ज़ी विक्रेता ने उसे ऐसा करने से रोका, तो उस व्यक्ति ने बदसलूकी शुरू कर दी और गाली-गलौज करने लगा। इसी दौरान सब्ज़ी विक्रेता ने उसे एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। बताया जा रहा है कि वह व्यक्ति नशे में था और थप्पड़ सह नहीं पाया, जिससे वह वहीं बेहोश हो गया। घटना के बाद लोगों ने यह अफवाह उड़ा दी कि उसकी मृत्यु हो गई है, जिससे बाजार में भगदड़ की स्थिति बन गई। हालांकि, खमतराई पुलिस मौके पर समय पर पहुंच गई और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने घायल व्यक्ति को पास के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने पुष्टि की कि वह केवल बेहोश हुआ था और उसकी स्थिति स्थिर है। फिलहाल उसका इलाज चल रहा है। खमतराई थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घायल व्यक्ति का आपराधिक इतिहास है या नहीं। इस घटना ने बाजार में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय दुकानदारों ने प्रशासन से बाजार में निगरानी बढ़ाने और ऐसे असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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रायपुर। लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने एम्स रायपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, मरीजों के रेफरल और अस्पताल प्रशासन की उदासीनता को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।

रायपुर। लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने एम्स रायपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, मरीजों के रेफरल और अस्पताल प्रशासन की उदासीनता को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने लोकसभा में एम्स रायपुर की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए बिस्तरों की उपलब्धता, मरीजों के रेफरल, संसाधनों की बढ़ोतरी और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर जवाब मांगा। 6 महीने में 2546 मरीज रेफर, 150 बिस्तरों के क्रिटिकल केयर ब्लॉक को मंजूरी लोकसभा में सांसद के सवाल पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि एम्स रायपुर में 33 विभागों में कुल 1098 बिस्तर उपलब्ध हैं। इसके बावजूद, मई 2024 से सितंबर 2024 तक 6 महीनों में 2546 मरीजों को अन्य अस्पतालों में रेफर किया गया। मंत्री ने कहा कि मरीजों का रेफरल चिकित्सा प्रोटोकॉल और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। मंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) के तहत 150 बिस्तरों वाले क्रिटिकल केयर अस्पताल ब्लॉक की स्थापना को मंजूरी दी गई है। एम्स प्रशासन पर गंभीर आरोप सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने एम्स रायपुर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिस्तर उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को भर्ती करने से मना किया जाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एम्स स्टाफ द्वारा मरीजों और उनके परिजनों के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है, और कई बार आपातकालीन वार्ड में भर्ती मरीजों को चार घंटे बाद जबरन छुट्टी दे दी जाती है। एम्स डायरेक्टर की कार्यशैली पर सवाल सांसद अग्रवाल ने एम्स रायपुर के डायरेक्टर अशोक जिंदल की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब भी उन्होंने या उनके कार्यालय से एम्स प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की गई, डायरेक्टर ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने इसे गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताया और कहा कि यह जनता के स्वास्थ्य अधिकारों के साथ खिलवाड़ है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए उठाए जाएंगे कदम सांसद अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के नागरिकों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। एम्स रायपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर अब प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है, और आने वाले दिनों में इस मामले में और सख्त कदम उठाए जाने की संभावना है।

रायपुर। लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने एम्स रायपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, मरीजों के रेफरल और अस्पताल प्रशासन की उदासीनता को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। Read Post »

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पंजाब सरकार ने शुक्रवार को तीन भाइयों की दो मंजिला अवैध इमारत को ध्वस्त किया

​पंजाब सरकार के ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के तहत, जालंधर के भार्गव कैंप इलाके में शुक्रवार को तीन भाइयों—वरिंदर कुमार, जतिंदर कुमार, और रोहित कुमार—की दो मंजिला अवैध इमारत को ध्वस्त किया गया। ये तीनों वर्तमान में जेल में हैं और इनके खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, एक्साइज एक्ट और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत कुल 15 मामले दर्ज हैं। वरिंदर पर सात, रोहित पर छह, और जतिंदर पर दो मामले दर्ज हैं।​ पुलिस आयुक्त धनप्रीत कौर ने बताया कि नगर निगम को सरकारी भूमि पर इन भाइयों द्वारा अवैध निर्माण की सूचना मिली थी, जो मादक पदार्थों की अवैध तस्करी से अर्जित धन से बनाया गया था। इस कार्रवाई का उद्देश्य नशा तस्करों के वित्तीय नेटवर्क को तोड़ना और उन्हें जवाबदेह ठहराना है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस अभियान के तहत फिल्लौर और जालंधर के ढंकेया मोहल्ला में भी नशा तस्करों से जुड़े अवैध ढांचों को ध्वस्त किया गया है। इसी तरह की एक अन्य कार्रवाई में, जालंधर ग्रामीण पुलिस ने फिल्लौर के खानपुर और मंडी गांवों में पंचायत भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किए गए ढांचों को ध्वस्त किया। ये ढांचे जसवीर सिंह उर्फ शीरा और भोली नामक व्यक्तियों के थे, जिन पर मादक पदार्थों की तस्करी के कई मामले दर्ज हैं।​ इन कार्रवाइयों का उद्देश्य नशा तस्करों के अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर उनके वित्तीय नेटवर्क को कमजोर करना है, ताकि नशे के खिलाफ लड़ाई में प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकें।

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मेरे बेटे को खेलते समय बार-बार गिरने की समस्या हो रही थी; 24 घंटे बाद, वह कोमा में चला गया!

​गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) एक दुर्लभ लेकिन गंभीर ऑटोइम्यून विकार है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से परिधीय तंत्रिकाओं पर हमला करती है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी, सुन्नता और गंभीर मामलों में लकवा हो सकता है। लक्षण: कारण: GBS का सटीक कारण अज्ञात है, लेकिन यह अक्सर श्वसन या जठरांत्र संबंधी संक्रमण के बाद विकसित होता है। कुछ मामलों में, सर्जरी, टीकाकरण या अन्य बीमारियां भी ट्रिगर के रूप में कार्य कर सकती हैं। उपचार: निष्कर्ष: गिलियन-बैरे सिंड्रोम एक गंभीर स्थिति है, लेकिन समय पर निदान और उचित उपचार से अधिकांश लोग पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं। यदि आप या आपके परिचितों में उपरोक्त लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।​ अधिक जानकारी के लिए, आप इस वीडियो को देख सकते हैं

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