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​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को म्यांमार के सैन्य नेतृत्व वाले सरकार के प्रमुख, मिन आंग हलाइंग, से फोन पर बातचीत की और विनाशकारी भूकंप से हुई जनहानि पर गहरी संवेदना व्यक्त की

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को म्यांमार के सैन्य नेतृत्व वाले सरकार के प्रमुख, मिन आंग हलाइंग, से फोन पर बातचीत की और विनाशकारी भूकंप से हुई जनहानि पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, “वरिष्ठ जनरल मिन आंग हलाइंग से बातचीत की। विनाशकारी भूकंप में हुई जनहानि पर गहरी संवेदना प्रकट की। एक करीबी मित्र और पड़ोसी के रूप में, भारत इस कठिन समय में म्यांमार के लोगों के साथ खड़ा है।”​ भारत ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ शुरू किया है, जिसके तहत आपदा राहत सामग्री, मानवीय सहायता, और खोज एवं बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से भेजे जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “आपदा राहत सामग्री, मानवीय सहायता, खोज एवं बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से भेजे जा रहे हैं।” ​ इस अभियान के तहत, भारत ने पहले ही 15 टन राहत सामग्री म्यांमार भेजी है, जिसमें टेंट, स्लीपिंग बैग, कंबल, तैयार-खाने के पैकेट, जल शुद्धिकरण उपकरण, स्वच्छता किट, सौर लैंप, जनरेटर सेट और आवश्यक दवाएं शामिल हैं। शुक्रवार को म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,000 से अधिक हो गई है, क्योंकि ढही हुई इमारतों के मलबे से और शव बरामद किए गए हैं। म्यांमार की सैन्य सरकार ने बताया कि अब तक 1,002 लोगों की मौत हुई है, 2,376 घायल हुए हैं, और 30 अन्य लापता हैं। ​ भूकंप का केंद्र मंडाले के निकट था, और इसके झटके 640 मील दूर बैंकॉक तक महसूस किए गए, जहां इमारतें हिल गईं और कई लोग घायल हुए। म्यांमार और पड़ोसी देशों में बचाव और राहत कार्य जारी हैं, और कई देशों से सहायता पहुंच रही है। ​ भारत की इस त्वरित सहायता से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों में तेजी आएगी और म्यांमार के लोगों को इस कठिन समय में आवश्यक समर्थन मिलेगा।

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को म्यांमार के सैन्य नेतृत्व वाले सरकार के प्रमुख, मिन आंग हलाइंग, से फोन पर बातचीत की और विनाशकारी भूकंप से हुई जनहानि पर गहरी संवेदना व्यक्त की Read Post »

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​दुर्ग जिले के सरकारी अस्पतालों में डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) फंड से कार्यरत 7 डॉक्टरों और 40 अन्य स्टाफ सदस्यों की सेवाएं 31 मार्च को समाप्त हो रही हैं। इनमें मनोरोग, न्यूरोसर्जरी, शिशु रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल हैं।

​दुर्ग जिले के सरकारी अस्पतालों में डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) फंड से कार्यरत 7 डॉक्टरों और 40 अन्य स्टाफ सदस्यों की सेवाएं 31 मार्च को समाप्त हो रही हैं। इनमें मनोरोग, न्यूरोसर्जरी, शिशु रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। सेवा विस्तार के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। यदि विस्तार नहीं हुआ, तो मरीजों को असुविधा हो सकती है​दुर्ग जिले के सरकारी अस्पतालों में डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) फंड से कार्यरत 7 डॉक्टरों और 40 अन्य स्टाफ सदस्यों की सेवाएं 31 मार्च को समाप्त हो रही हैं। इनमें मनोरोग, न्यूरोसर्जरी, शिशु रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। सेवा विस्तार के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। यदि विस्तार नहीं हुआ, तो मरीजों को असुविधा हो सकती है।​ डीएमएफ फंड का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए किया जाता है। इस फंड से नियुक्त कर्मचारियों की सेवाएं अनुबंध के आधार पर होती हैं, जो हर साल नवीनीकृत की जाती हैं। इस बार, 31 मार्च को इनका अनुबंध समाप्त हो रहा है, और नए आदेशों की प्रतीक्षा की जा रही है।​ जिला अस्पताल दुर्ग में मनोरोग और न्यूरोसर्जरी विभाग में प्रतिदिन क्रमशः 40 और 30 मरीज ओपीडी में आते हैं। यदि इन विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त हो जाती हैं, तो मरीजों को इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।​ स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में अस्पतालों का निरीक्षण किया था और डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए 5 नए चिकित्सकों की भर्ती की घोषणा की थी। हालांकि, वर्तमान स्थिति में डीएमएफ फंड से कार्यरत डॉक्टरों और स्टाफ की सेवाओं का निरंतरता सुनिश्चित करना आवश्यक है।​ डीएमएफ फंड के उपयोग और प्रबंधन को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भी समय-समय पर निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने खनिज न्यास से मिलने वाली राशि के उपयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया है। ​ सरकार और संबंधित विभागों को चाहिए कि वे इस मुद्दे पर शीघ्र निर्णय लें, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से चलती रहें। डीएमएफ फंड का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए किया जाता है। इस फंड से नियुक्त कर्मचारियों की सेवाएं अनुबंध के आधार पर होती हैं, जो हर साल नवीनीकृत की जाती हैं। इस बार, 31 मार्च को इनका अनुबंध समाप्त हो रहा है, और नए आदेशों की प्रतीक्षा की जा रही है।​ जिला अस्पताल दुर्ग में मनोरोग और न्यूरोसर्जरी विभाग में प्रतिदिन क्रमशः 40 और 30 मरीज ओपीडी में आते हैं। यदि इन विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त हो जाती हैं, तो मरीजों को इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।​ स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में अस्पतालों का निरीक्षण किया था और डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए 5 नए चिकित्सकों की भर्ती की घोषणा की थी। हालांकि, वर्तमान स्थिति में डीएमएफ फंड से कार्यरत डॉक्टरों और स्टाफ की सेवाओं का निरंतरता सुनिश्चित करना आवश्यक है।​ डीएमएफ फंड के उपयोग और प्रबंधन को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भी समय-समय पर निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने खनिज न्यास से मिलने वाली राशि के उपयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया है। सरकार और संबंधित विभागों को चाहिए कि वे इस मुद्दे पर शीघ्र निर्णय लें, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से चलती रहें।

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ओडिशा के देवगढ़ जिले में होम गार्ड भर्ती के लिए शारीरिक परीक्षा के दौरान 19 वर्षीय अभ्यर्थी साहेब दहुरी की मृत्यु हो गई।

साहेब, जो रेमाल ब्लॉक के बुडिडो गांव के निवासी थे, ने बुधवार शाम को दौड़ परीक्षा में हिस्सा लिया। दौड़ पूरी करने के बाद, उन्होंने अस्वस्थता की शिकायत की और उन्हें तुरंत जिला मुख्यालय अस्पताल (डीएचएच) ले जाया गया, जहां गुरुवार तड़के उनका निधन हो गया। उनके पिता, प्रदीप दहुरी, ने आरोप लगाया कि अस्पताल में उचित चिकित्सा देखभाल की कमी के कारण उनके बेटे की मृत्यु हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि परीक्षा अत्यधिक गर्मी के दौरान आयोजित की गई थी, जिससे उनके बेटे की तबीयत बिगड़ गई। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया और मृतक के परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। इस महीने की शुरुआत में, ओडिशा में इसी तरह की घटनाएं हुई थीं, जहां दो अभ्यर्थियों की शारीरिक परीक्षा के दौरान मृत्यु हो गई थी। यह घटनाएं भर्ती प्रक्रियाओं के दौरान अभ्यर्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता को उजागर करती हैं, विशेषकर अत्यधिक गर्मी के मौसम में।

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​दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार, 28 मार्च 2025 को फैसला सुनाया कि रेस्तरां और होटल भोजन बिलों में अनिवार्य रूप से सेवा शुल्क नहीं लगा सकते हैं, क्योंकि यह उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन करता है और अनुचित व्यापार प्रथा है।

​दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार, 28 मार्च 2025 को फैसला सुनाया कि रेस्तरां और होटल भोजन बिलों में अनिवार्य रूप से सेवा शुल्क नहीं लगा सकते हैं, क्योंकि यह उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन करता है और अनुचित व्यापार प्रथा है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह की एकल पीठ ने इस निर्णय में राष्ट्रीय रेस्तरां संघ (NRAI) और होटल और रेस्तरां संघ महासंघ (FHRAI) द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिन्होंने केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के दिशानिर्देशों को चुनौती दी थी। ​ न्यायालय ने CCPA के उन दिशानिर्देशों को बरकरार रखा, जो होटल और रेस्तरां को भोजन बिलों में स्वचालित या डिफ़ॉल्ट रूप से सेवा शुल्क लगाने से रोकते हैं। इन दिशानिर्देशों के अनुसार:​ न्यायालय ने कहा कि सेवा शुल्क या टिप उपभोक्ता द्वारा स्वैच्छिक भुगतान है और इसे अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता। रेस्तरां द्वारा इसे अनिवार्य रूप से वसूलना उपभोक्ता हितों के खिलाफ है और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन करता है। ​ इसके अलावा, न्यायालय ने NRAI और FHRAI पर प्रत्येक पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया, जिसे उपभोक्ता कल्याण के लिए CCPA के पास जमा करना होगा। ​www.ndtv.com यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करता है और रेस्तरां और होटल उद्योग में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देता है। अब उपभोक्ताओं को यह स्वतंत्रता होगी कि वे सेवा से संतुष्ट होने पर अपनी इच्छा से टिप दें, बिना किसी अनिवार्य शुल्क के।

​दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार, 28 मार्च 2025 को फैसला सुनाया कि रेस्तरां और होटल भोजन बिलों में अनिवार्य रूप से सेवा शुल्क नहीं लगा सकते हैं, क्योंकि यह उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन करता है और अनुचित व्यापार प्रथा है। Read Post »

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​म्यांमार में शुक्रवार, 28 मार्च 2025 को दोपहर 12:50 बजे (स्थानीय समयानुसार) 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसका केंद्र सागाइंग शहर से 16 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था और गहराई 10 किलोमीटर थी।

​28 मार्च 2025 को दोपहर 12:50 बजे (स्थानीय समयानुसार), म्यांमार में 7.7 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप आया, जिसका केंद्र सागाइंग शहर से 16 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था और गहराई 10 किलोमीटर थी। इस भूकंप के झटके थाईलैंड, बांग्लादेश, भारत, और चीन के कई हिस्सों में महसूस किए गए, जिससे व्यापक दहशत और नुकसान हुआ।​ म्यांमार में, विशेष रूप से मांडले क्षेत्र में, भारी तबाही हुई है। मांडले में कई ऐतिहासिक स्थलों और इमारतों को नुकसान पहुंचा है, जिसमें 90 साल पुराना एवा ब्रिज का ढहना शामिल है। राजधानी नेपीदा में भी कई इमारतें गिर गईं, जिससे सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। सरकारी प्रसारणों के अनुसार, अब तक म्यांमार में 144 लोगों की मौत हो चुकी है और 700 से अधिक लोग घायल हैं। म्यांमार की सैन्य सरकार ने छह क्षेत्रों में आपातकाल घोषित किया है और अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील की है।​ थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भी भूकंप के प्रभाव से एक निर्माणाधीन 30 मंजिला इमारत गिर गई, जिसमें कम से कम तीन लोगों की मौत हुई और 81 लोग मलबे में फंस गए। बचाव कार्य जारी है, और शहर को आपदा क्षेत्र घोषित किया गया है। प्रधानमंत्री पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा ने स्थिति की समीक्षा के लिए अपनी आधिकारिक यात्रा को रद्द कर दिया है और आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय कर दिया है।​ भारत में, कोलकाता और मणिपुर के कुछ हिस्सों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रभावित देशों को सहायता की पेशकश की है और भारतीय अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। ​ बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने और घायलों को चिकित्सा सहायता प्रदान करने में जुटे हैं। अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों से सतर्क रहने और आफ्टरशॉक्स से बचने की सलाह दी है। इस आपदा के कारण क्षेत्र में व्यापक नुकसान हुआ है, और राहत कार्यों में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

​म्यांमार में शुक्रवार, 28 मार्च 2025 को दोपहर 12:50 बजे (स्थानीय समयानुसार) 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसका केंद्र सागाइंग शहर से 16 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था और गहराई 10 किलोमीटर थी। Read Post »

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छत्तीसगढ़ में चावल घोटाला: अब खाद्य विभाग के अधिकारियों से होगी पूछताछ

​छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत चावल वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिससे राज्य में कई घोटालों का पर्दाफाश हुआ है। इन घोटालों में सरकारी अधिकारियों, राशन दुकानदारों और अन्य संबंधित पक्षों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई है। 2024 में, राज्य में 219 करोड़ रुपये से अधिक के चावल घोटाले की जांच के लिए विधानसभा समिति का गठन किया गया। इस समिति ने खाद्य विभाग के अधिकारियों से पूछताछ की और संचालनालय के अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका की भी जांच की। समिति की बैठकों में राशन दुकानों के स्टॉक मिलान, नियमों के विपरीत बाजार से चावल खरीदने और बिना उचित प्रक्रिया के वसूली जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके अलावा, एक फर्जी संघ के अध्यक्ष द्वारा कार्डधारकों की जगह दीवार की फोटो अपलोड करके एपीएल चावल चोरी करने का मामला भी सामने आया, जिसमें उसने एक दिन में 433 मिनट में 460 से अधिक लोगों को राशन वितरित किया। इस फर्जी अध्यक्ष ने चोरी किए गए चावल से संपत्ति बनाई और अब अपने बेटे के साथ मिलकर हवाला का कारोबार कर रहा है, जिसकी शिकायत आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) में की गई है।​ खाद्य विभाग ने इस घोटाले में शामिल 39 राशन दुकानों में से 4 को निलंबित कर दिया और अन्य के खिलाफ कुर्की के आदेश जारी किए हैं। इन दुकानों से 7971 क्विंटल चावल की रिकवरी होनी बाकी है। इसके अलावा, अभनपुर की दो सरकारी दुकानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। खाद्य विभाग ने राशन दुकानों के संचालकों से स्टॉक की कमी का कारण पूछा है, जिसमें कुछ दुकानदारों ने टेबलेट व ई-पोस मशीन के माध्यम से खाद्यान्न वितरण के कारण स्टॉक का सही मिलान नहीं होने की बात कही है। ​ एक अन्य मामले में, 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 175 करोड़ रुपये के कथित चावल मिल घोटाले में छत्तीसगढ़ चावल मिल मालिक एसोसिएशन के पूर्व कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर को गिरफ्तार किया। ईडी ने आरोप लगाया कि खरीफ विपणन सत्र 2021-22 के दौरान चावल मिल मालिकों से अवैध वसूली की जा रही थी, जिसमें चंद्राकर की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इस घोटाले में चावल मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने राज्य विपणन महासंघ लिमिटेड (मार्कफेड) के अधिकारियों के साथ मिलकर धान की कस्टम मिलिंग के लिए चावल मिल मालिकों से रिश्वत ली। इसके अलावा, 2020 में, अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने खुलासा किया कि अप्रैल 2013 से दिसंबर 2018 के बीच 10 लाख फर्जी राशन कार्डों के माध्यम से लगभग 11 लाख टन चावल की हेराफेरी की गई, जिससे राज्य को 2718 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले में तत्कालीन खाद्य अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया। ​ इन घोटालों ने छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सरकार और जांच एजेंसियों द्वारा इन मामलों की गहन जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोका जा सके और जनता का विश्वास बहाल किया जा सके।​

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Durg: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के काफिले में चल रही गाड़ियों में टक्कर, तीन कार क्षतिग्रस्त

​छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के काफिले में दुर्ग जिले में एक सड़क दुर्घटना हुई, जिसमें तीन वाहन आपस में टकरा गए। यह घटना स्मृति नगर स्थित हाईटेक अस्पताल के पास उस समय हुई जब मंत्री जिला अस्पताल और चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण के लिए जा रहे थे। ​ दुर्घटना में शामिल वाहनों में पूर्व विधायक सावला राम डहारे, दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, और अहिवारा विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा की गाड़ियाँ थीं। सौभाग्य से, इस टक्कर में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन तीनों वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। ​ यह घटना प्रोटोकॉल नियमों के उल्लंघन को दर्शाती है, क्योंकि काफिले में अनुशासनहीनता के कारण यह टक्कर हुई। स्थानीय पुलिस को इस मामले की जानकारी नहीं दी गई है। ​ गौरतलब है कि इससे पहले भी दुर्ग में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के काफिले में एक गाय के अचानक आ जाने से एक वाहन क्षतिग्रस्त हुआ था। इसी तरह, उप मुख्यमंत्री अरुण साव के काफिले में भी एक निजी वाहन के घुसने की घटना सामने आई थी। ​ इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि सरकारी काफिलों की सुरक्षा और प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

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तम्बाकू मुक्त भारत अभियान में तेलंगाना ने रचा इतिहास, राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित

तम्बाकू मुक्त भारत अभियान में तेलंगाना ने रचा इतिहास, राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित तेलंगाना ने टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए ‘न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (NAAT) टेस्टिंग’ श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ राज्य का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने विश्व टीबी दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में एनएचएम-तेलंगाना के प्रबंध निदेशक आर.वी. कर्णन और राज्य टीबी जॉइंट डायरेक्टर डॉ. ए. राजेशम को यह पुरस्कार प्रदान किया। अभियान की प्रमुख उपलब्धियां: डॉ. राजेशम ने बताया कि इस सफलता के पीछे स्वास्थ्य कर्मियों, जिला प्रशासन और कॉर्पोरेट भागीदारों का समन्वित प्रयास रहा। उन्होंने कहा, “AI तकनीक से लैस ये पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी की त्वरित पहचान में क्रांतिकारी साबित होंगी।” यह पुरस्कार तेलंगाना के 2025 तक टीबी उन्मूलन के संकल्प को और मजबूती प्रदान करता है। राज्य सरकार ने अभियान को जारी रखते हुए स्क्रीनिंग और पोषण सहायता कार्यक्रमों के दायरे को विस्तार देने की योजना बनाई है।

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​मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में आरोपी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला वर्तमान में जेल में गंभीर नशा मुक्ति लक्षणों से जूझ रहे हैं। जेल अधिकारियों के अनुसार, दोनों की बेचैनी और अस्वस्थता का मुख्य कारण नशे की लत से अचानक दूरी है।

​मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में आरोपी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला वर्तमान में जेल में गंभीर नशा मुक्ति लक्षणों से जूझ रहे हैं। जेल अधिकारियों के अनुसार, दोनों की बेचैनी और अस्वस्थता का मुख्य कारण नशे की लत से अचानक दूरी है। ​ दोनों आरोपियों को 19 मार्च को मेरठ की चौधरी चरण सिंह जिला जेल में लाया गया था। जेल में आने के बाद से ही उनकी हालत बिगड़ने लगी। जेल सूत्रों के अनुसार, मुस्कान और साहिल रातों को सो नहीं पा रहे हैं और खाने-पीने से भी इनकार कर रहे हैं। उनकी बेचैनी और घबराहट नशा न मिलने के कारण है। ​ जेल प्रशासन ने उनकी स्थिति को देखते हुए चिकित्सकीय सहायता प्रदान की है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि दोनों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है और उनकी काउंसलिंग भी की जा रही है। इसके अलावा, मुस्कान का प्रेग्नेंसी टेस्ट भी कराया जाएगा। ​ गौरतलब है कि मुस्कान और साहिल पर सौरभ राजपूत की हत्या का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने सौरभ की हत्या कर उसके शव के टुकड़े कर सीमेंट से भरे ड्रम में छिपा दिया था। हत्या के बाद दोनों हिमाचल प्रदेश घूमने चले गए थे। ​ जेल में उनकी वर्तमान स्थिति को देखते हुए, जेल प्रशासन ने विशेष ध्यान दिया है ताकि उनकी सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। दोनों को अलग-अलग बैरकों में रखा गया है और उनकी कड़ी निगरानी की जा रही है। ​ यह मामला न केवल अपराध की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि नशे की लत के खतरों और उसके परिणामों पर भी प्रकाश डालता है। जेल प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम सराहनीय हैं, जो आरोपियों की सेहत और पुनर्वास के लिए आवश्यक हैं।

​मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में आरोपी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला वर्तमान में जेल में गंभीर नशा मुक्ति लक्षणों से जूझ रहे हैं। जेल अधिकारियों के अनुसार, दोनों की बेचैनी और अस्वस्थता का मुख्य कारण नशे की लत से अचानक दूरी है। Read Post »

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​बेंगलुरु में शनिवार को हुई मूसलाधार बारिश ने शहर में व्यापक अव्यवस्था फैला दी।

​बेंगलुरु में शनिवार को हुई मूसलाधार बारिश ने शहर में व्यापक अव्यवस्था फैला दी। बारिश के साथ तेज़ हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ गिर गए, जिससे यातायात बाधित हुआ और जलभराव की स्थिति उत्पन्न हुई। दुर्भाग्यवश, पूर्वी बेंगलुरु में एक पेड़ गिरने से तीन वर्षीय बच्ची की मृत्यु हो गई। ​ भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, शहर में 3.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि उत्तरी बेंगलुरु में 53 मिमी तक वर्षा हुई। इस भारी बारिश के कारण हंसमरनहल्ली में जलभराव से यातायात प्रभावित हुआ, जिससे केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर जाने वाले मार्ग पर गंभीर जाम लग गया। ​ खराब मौसम के चलते कम से कम 19 उड़ानों को अन्य गंतव्यों की ओर मोड़ना पड़ा, जिनमें से 10 उड़ानें चेन्नई की ओर डायवर्ट की गईं। इनमें 11 इंडिगो, 4 एयर इंडिया एक्सप्रेस, 2 अकासा और 2 एयर इंडिया की उड़ानें शामिल थीं। ​ हेलस्टॉर्म की घटनाएँ भी सामने आईं, विशेष रूप से बेंगलुरु ग्रामीण जिले के होसकोटे में, जहाँ ओले गिरने से फसलों और संपत्ति को नुकसान पहुँचा। बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति में अस्थायी व्यवधान भी देखा गया। ​ बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस ने नागवारा-हेब्बल मार्ग पर जलभराव के कारण गंभीर यातायात जाम की चेतावनी जारी की और यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी। IMD ने 22 और 23 मार्च को बेंगलुरु और आसपास के जिलों में हल्की बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना जताई थी। इसके अलावा, दक्षिण कन्नड़, चिक्कमगलुरु, मैसूरु, कोडागु, हासन, चामराजनगर, बीदर, कलबुर्गी, यादगीर, विजयपुरा और रायचूर में भी इसी तरह के मौसम की संभावना है। इस अप्रत्याशित बारिश ने शहरवासियों को गर्मी से राहत दी, लेकिन साथ ही अवसंरचना और नागरिक सेवाओं पर दबाव भी डाला। नगर निगम और संबंधित एजेंसियाँ स्थिति को सामान्य करने के लिए सक्रिय रूप से कार्यरत हैं।

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