Health

लैंसेट स्टडी: हृदय रोग के इलाज में बड़े बदलाव की जरूरत

नई दिल्ली: दुनिया भर में कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) मृत्यु और बीमारी के प्रमुख कारणों में से एक बनी हुई है। लैंसेट कमीशन की नई रिपोर्ट में हृदय रोग के इलाज में बड़े बदलाव की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, धमनियों में प्लाक जमा होने के पहले संकेत मिलते ही तुरंत कार्रवाई शुरू कर देनी चाहिए, न कि “वेट एंड वॉच” का रुख अपनाना चाहिए। मुख्य सिफारिशें: भारत के लिए महत्व: भविष्य की रणनीति: निष्कर्ष: इस नए दृष्टिकोण से न केवल लाखों जानें बचाई जा सकती हैं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को भी कम किया जा सकता है।

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IMD की चेतावनी: इस साल गर्मी होगी और भी भीषण, बढ़ेंगे लू के दिन

नई दिल्ली: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने ग्रीष्मकालीन पूर्वानुमान में चेतावनी दी है कि इस साल अप्रैल से जून तक सामान्य से अधिक गर्मी पड़ेगी और लू के दिनों में भी वृद्धि होगी। विभाग के अनुसार, विशेषकर उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत में लू के दिनों की संख्या बढ़ सकती है। मुख्य बिंदु: लू की परिभाषा: IMD के अनुसार, मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान 40°C या उससे अधिक होने और सामान्य से 4.5°C से 6.4°C अधिक होने पर लू घोषित की जाती है। यदि तापमान 47°C या उससे अधिक हो जाए, तो इसे भीषण लू माना जाता है। स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर प्रभाव: IMD ने चेतावनी दी है कि लू के कारण बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, बिजली ग्रिड और परिवहन प्रणाली पर भी दबाव बढ़ सकता है। विभाग ने राज्य और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के दिशा-निर्देशों के अनुसार कदम उठाने की सलाह दी है। बारिश से राहत की उम्मीद: हालांकि, अप्रैल में सामान्य बारिश (लंबी अवधि के औसत का 88-112%) होने की संभावना है। उत्तर-पश्चिम भारत, प्रायद्वीपीय भारत और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। एल नीनो और ला नीना का प्रभाव: IMD के अनुसार, एल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) की स्थिति वर्तमान में तटस्थ है और गर्मी और मानसून के दौरान भी ऐसी ही रहने की संभावना है। भारत में एल नीनो की स्थिति आमतौर पर कमजोर मानसून और अधिक गर्मी से जुड़ी होती है, जबकि ला नीना मजबूत मानसून और अधिक बारिश लाती है। कमजोर पश्चिमी विक्षोभ भी एक कारण: मोहापात्रा ने बताया कि मार्च में पश्चिमी विक्षोभ की संख्या कम होने के कारण बारिश में कमी देखी गई। सामान्यतः मार्च में 4-5 पश्चिमी विक्षोभ आते हैं, लेकिन इस बार केवल 2 सक्रिय विक्षोभ देखे गए। IMD ने अप्रैल के मध्य में मानसून का प्रारंभिक पूर्वानुमान जारी करने की भी घोषणा की है।

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प्रधानमंत्री मोदी के बिलासपुर कार्यक्रम में जा रहे SUV का पुल से गिरने से दो की मौत, सात घायल

एक दुखद घटना में, दो लोगों की जान चली गई और सात अन्य घायल हो गए जब एक SUV, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिलासपुर कार्यक्रम में जा रही थी, पुल से गिरकर नदी में समा गई। यह घटना सुबह लगभग 9 बजे गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के कोटमी गांव के पास हुई, जो पेंड्रा पुलिस थाना क्षेत्र में आता है। SUV में आठ लोग सवार थे और यह मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भारतपुर (MCB) जिले से बिलासपुर जा रही थी। पुलिस के अनुसार, जैसे ही वाहन सोन नदी पर बने पुल के पास पहुंचा, चालक ने वाहन पर नियंत्रण खो दिया और एक महिला पैदल यात्री को टक्कर मारते हुए वाहन पुल से गिरकर नदी में गिर गया। हादसे में महिला और चालक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। महिला की पहचान रामिता बाई (पंडरीखार गांव) के रूप में हुई, और चालक बाबू लाल चौधरी था। SUV में सवार सात अन्य लोग घायल हो गए, जिनमें से पांच की हालत गंभीर थी और उन्हें गौरेला जिला अस्पताल भेजा गया। यह हादसा उसी दिन हुआ, जब प्रधानमंत्री मोदी का बिलासपुर दौरा था, जिसमें वे कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करने वाले थे। ये परियोजनाएं 33,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत की हैं, जो पावर, तेल और गैस, रेलवे, सड़कों, शिक्षा और आवास के क्षेत्रों में फैली हुई हैं। प्रधानमंत्री मोदी को हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) द्वारा विजाख-रायपुर पाइपलाइन (VRPL) परियोजना का शिलान्यास भी करना था। इसके साथ ही वे अभनपुर-रायपुर खंड में MEMU ट्रेन सेवा को झंडी दिखाने वाले थे और छत्तीसगढ़ में भारतीय रेलवे के पूरे नेटवर्क का विद्युतीकरण समर्पित करने वाले थे।

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मध्य प्रदेश मौसम अपडेट: 1, 2, 3 अप्रैल को आंधी, बारिश और गरज के आसार

भोपाल: मौसम विभाग के अनुसार, 1 अप्रैल से मध्य प्रदेश के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के कई जिलों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जो आने वाले दिनों में होने वाले मौसमी परिवर्तन का संकेत दे रही है। फिलहाल, प्रदेश में उत्तरी हवाओं का प्रभाव है, जिसके कारण तापमान लगातार नीचे जा रहा है। 1 अप्रैल से राज्य के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगले 48 घंटों में मध्य महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में एक चक्रवाती हवाओं का प्रभाव बन सकता है, जिसका असर मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ सकता है। प्रदेश में तापमान का हाल रविवार को नर्मदापुरम में प्रदेश का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 40 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि टीकमगढ़ में 38.7°C, खरगोन में 38.2°C, नरसिंहपुर में 38°C और मलाजखंड (बालाघाट) में 37.5°C तापमान रिकॉर्ड हुआ। वहीं, शहडोल के कल्याणपुर में सबसे कम न्यूनतम तापमान 10.2°C देखा गया। राजधानी भोपाल में शनिवार को अधिकतम तापमान 2 डिग्री गिरकर 34.5°C पर पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान में करीब 4 डिग्री की गिरावट दर्ज हुई और यह 16.8°C रहा। ग्वालियर संभाग के जिलों में सबसे ज्यादा 4.4 डिग्री तक तापमान में कमी आई है। प्रमुख शहरों का तापमान प्रदेश के बड़े शहरों में इंदौर और उज्जैन में सबसे ज्यादा 36.8°C तापमान दर्ज किया गया। इसके अलावा, भोपाल और जबलपुर में 35.8°C तथा ग्वालियर में 35.3°C अधिकतम तापमान रहा। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि अगले कुछ दिनों में आंधी, बारिश और गरज-चमक की संभावना है।

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​अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को नए परमाणु समझौते पर सहमति न देने की स्थिति में बमबारी की धमकी देने के बाद, ईरान ने अपनी भूमिगत मिसाइल सुविधाओं में मिसाइलों को लॉन्च के लिए तैयार स्थिति में रखा है

​अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को नए परमाणु समझौते पर सहमति न देने की स्थिति में बमबारी की धमकी देने के बाद, ईरान ने अपनी भूमिगत मिसाइल सुविधाओं में मिसाइलों को लॉन्च के लिए तैयार स्थिति में रखा है। तेहरान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ये मिसाइलें देशभर में स्थित उन भूमिगत ठिकानों में तैनात हैं, जो हवाई हमलों को सहने के लिए बनाए गए हैं।​ रविवार को एनबीसी न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “यदि वे समझौता नहीं करते हैं, तो बमबारी होगी। यह ऐसी बमबारी होगी जैसी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी होगी।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ईरान पर “सेकेंडरी टैरिफ” लगाए जाएंगे। ​ इन धमकियों के जवाब में, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने टेलीविजन पर प्रसारित एक संबोधन में कहा, “हम वार्ता से नहीं बचते हैं; यह वादों का उल्लंघन है जिसने अब तक हमारे लिए समस्याएं पैदा की हैं।” उन्होंने आगे कहा, “उन्हें यह साबित करना होगा कि वे विश्वास बना सकते हैं।” ​ इन बढ़ते तनावों के बीच, ईरान ने हाल ही में एक वीडियो जारी किया है जिसमें उसकी भूमिगत मिसाइल सुविधाओं को दिखाया गया है। “मिसाइल सिटी” कहे जाने वाले इन ठिकानों में उन्नत हथियार प्रणाली और सैनिकों को इजरायली झंडे पर कदम रखते हुए दिखाया गया है। इसके अलावा, ईरान के सरकारी मीडिया प्रेस टीवी ने एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें संभावित हमले की स्थिति में मध्य पूर्व में स्थित विभिन्न अमेरिकी ठिकानों को लक्षित करने की संभावना जताई गई है।​ इन घटनाओं से पता चलता है कि अमेरिका और ईरान के बीच संबंध कितने नाजुक हो गए हैं, दोनों देश अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं और परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है

​अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को नए परमाणु समझौते पर सहमति न देने की स्थिति में बमबारी की धमकी देने के बाद, ईरान ने अपनी भूमिगत मिसाइल सुविधाओं में मिसाइलों को लॉन्च के लिए तैयार स्थिति में रखा है Read Post »

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​30 मार्च 2025 को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के मणिकर्ण में एक दर्दनाक भूस्खलन हुआ, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए।

​30 मार्च 2025 को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के मणिकर्ण में एक दर्दनाक भूस्खलन हुआ, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए। यह हादसा शाम लगभग 5 बजे गुरुद्वारा मणिकर्ण साहिब के सामने हुआ, जब भूस्खलन और तेज आंधी के कारण एक विशाल पेड़ उखड़कर सड़क किनारे खड़े वाहनों और रेहड़ियों पर गिर गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुरुद्वारे के सामने पहाड़ पर खड़ा एक बड़ा पेड़ भूस्खलन और आंधी की वजह से अचानक गिर पड़ा, जिससे कई लोग इसकी चपेट में आ गए। मृतकों में तीन महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं, जिनमें से एक बेंगलुरु से आया पर्यटक और दो स्थानीय निवासी थे। अन्य मृतकों की पहचान की जा रही है। ​ घायलों को तुरंत जरी के स्थानीय सामुदायिक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। कुल्लू के उपमंडलीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) विकास शुक्ला ने बताया कि चिकित्सा दल, पुलिस और राजस्व अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और बचाव एवं राहत कार्यों का समन्वय कर रहे हैं। ​ हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने इस दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को पीड़ितों और उनके परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करने और घायलों के सर्वोत्तम उपचार की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। ​ मणिकर्ण, हिमाचल प्रदेश की एक प्रमुख धार्मिक नगरी है, जहां गुरुद्वारा मणिकर्ण साहिब स्थित है। यह स्थान अपने गर्म पानी के चश्मों और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, जो हर साल हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। हालांकि, पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित होने के कारण, यह क्षेत्र भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील रहता है। इस घटना के बाद, स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान सतर्क रहें और पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करते समय आवश्यक सावधानी बरतें। इसके अलावा, अधिकारियों ने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने और सुरक्षा उपायों को सख्त करने का निर्णय लिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।​ इस दुखद घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के प्रति हमारी संवेदनशीलता को उजागर किया है और यह आवश्यक बनाता है कि हम सतर्क रहें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

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​30 मार्च 2025 को सुबह लगभग 11:54 बजे, बेंगलुरु-कामाख्या एसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस के 11 डिब्बे ओडिशा के कटक जिले में निरगुंडी स्टेशन के पास पटरी से उतर गए। इस दुर्घटना में एक यात्री की मृत्यु हो गई और आठ अन्य घायल हो गए।

​30 मार्च 2025 को सुबह लगभग 11:54 बजे, बेंगलुरु-कामाख्या एसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस के 11 डिब्बे ओडिशा के कटक जिले में निरगुंडी स्टेशन के पास पटरी से उतर गए। इस दुर्घटना में एक यात्री की मृत्यु हो गई और आठ अन्य घायल हो गए। दुर्घटना के तुरंत बाद, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और अग्निशमन सेवाओं को घटनास्थल पर भेजा गया। रेलवे अधिकारियों ने राहत और चिकित्सा सहायता ट्रेनें भी मौके पर भेजीं घायलों को कटक के श्रीराम चंद्र भंज मेडिकल कॉलेज (SCBMCH) में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई है। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है, और रेलवे अधिकारी प्रभावित यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं कर रहे हैं। ​ इस दुर्घटना के कारण तीन ट्रेनों—धौली एक्सप्रेस, नीलांचल एक्सप्रेस और पुरुलिया एक्सप्रेस—का मार्ग परिवर्तित किया गया है। रेलवे ने यात्रियों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 8991124238 जारी किया है। ​ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस घटना पर चिंता व्यक्त की और अधिकारियों को शीघ्र राहत और बहाली कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि उनके राज्य के दो लोग इस दुर्घटना में घायल हुए हैं और उनका इलाज चल रहा है।

​30 मार्च 2025 को सुबह लगभग 11:54 बजे, बेंगलुरु-कामाख्या एसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस के 11 डिब्बे ओडिशा के कटक जिले में निरगुंडी स्टेशन के पास पटरी से उतर गए। इस दुर्घटना में एक यात्री की मृत्यु हो गई और आठ अन्य घायल हो गए। Read Post »

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​छत्तीसगढ़ में गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। राज्य के मध्य भागों में आगामी दो दिनों तक ‘हॉट डे’ की स्थिति बनी रहने की संभावना है। राजनांदगांव में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो इस मौसम में अब तक का उच्चतम स्तर है।

राजधानी रायपुर में भी तापमान में वृद्धि देखी गई है। शनिवार को अधिकतम तापमान 40.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 23.7 डिग्री सेल्सियस रहा। ​ मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक मध्य छत्तीसगढ़ में गर्म दिन की स्थिति बनी रहेगी। उत्तर और दक्षिणी भागों में अधिकतम तापमान में विशेष परिवर्तन की संभावना नहीं है, जबकि मध्य भागों में दिन के तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हो सकती है। ​ अधिक गर्मी के कारण स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे धूप में बाहर निकलने से बचें, हल्के और सूती कपड़े पहनें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और अपने घरों को ठंडा रखें। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि वे गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।​ राज्य के अन्य शहरों में भी तापमान में वृद्धि देखी गई है। बिलासपुर में 41 डिग्री सेल्सियस, जगदलपुर और पेंड्रा रोड में 38 डिग्री सेल्सियस तथा रायगढ़ में भी तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ​ मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक तापमान में और वृद्धि हो सकती है। इसलिए, सभी नागरिकों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है।

​छत्तीसगढ़ में गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। राज्य के मध्य भागों में आगामी दो दिनों तक ‘हॉट डे’ की स्थिति बनी रहने की संभावना है। राजनांदगांव में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो इस मौसम में अब तक का उच्चतम स्तर है। Read Post »

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​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को म्यांमार के सैन्य नेतृत्व वाले सरकार के प्रमुख, मिन आंग हलाइंग, से फोन पर बातचीत की और विनाशकारी भूकंप से हुई जनहानि पर गहरी संवेदना व्यक्त की

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को म्यांमार के सैन्य नेतृत्व वाले सरकार के प्रमुख, मिन आंग हलाइंग, से फोन पर बातचीत की और विनाशकारी भूकंप से हुई जनहानि पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, “वरिष्ठ जनरल मिन आंग हलाइंग से बातचीत की। विनाशकारी भूकंप में हुई जनहानि पर गहरी संवेदना प्रकट की। एक करीबी मित्र और पड़ोसी के रूप में, भारत इस कठिन समय में म्यांमार के लोगों के साथ खड़ा है।”​ भारत ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ शुरू किया है, जिसके तहत आपदा राहत सामग्री, मानवीय सहायता, और खोज एवं बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से भेजे जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “आपदा राहत सामग्री, मानवीय सहायता, खोज एवं बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से भेजे जा रहे हैं।” ​ इस अभियान के तहत, भारत ने पहले ही 15 टन राहत सामग्री म्यांमार भेजी है, जिसमें टेंट, स्लीपिंग बैग, कंबल, तैयार-खाने के पैकेट, जल शुद्धिकरण उपकरण, स्वच्छता किट, सौर लैंप, जनरेटर सेट और आवश्यक दवाएं शामिल हैं। शुक्रवार को म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,000 से अधिक हो गई है, क्योंकि ढही हुई इमारतों के मलबे से और शव बरामद किए गए हैं। म्यांमार की सैन्य सरकार ने बताया कि अब तक 1,002 लोगों की मौत हुई है, 2,376 घायल हुए हैं, और 30 अन्य लापता हैं। ​ भूकंप का केंद्र मंडाले के निकट था, और इसके झटके 640 मील दूर बैंकॉक तक महसूस किए गए, जहां इमारतें हिल गईं और कई लोग घायल हुए। म्यांमार और पड़ोसी देशों में बचाव और राहत कार्य जारी हैं, और कई देशों से सहायता पहुंच रही है। ​ भारत की इस त्वरित सहायता से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों में तेजी आएगी और म्यांमार के लोगों को इस कठिन समय में आवश्यक समर्थन मिलेगा।

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को म्यांमार के सैन्य नेतृत्व वाले सरकार के प्रमुख, मिन आंग हलाइंग, से फोन पर बातचीत की और विनाशकारी भूकंप से हुई जनहानि पर गहरी संवेदना व्यक्त की Read Post »

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​दुर्ग जिले के सरकारी अस्पतालों में डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) फंड से कार्यरत 7 डॉक्टरों और 40 अन्य स्टाफ सदस्यों की सेवाएं 31 मार्च को समाप्त हो रही हैं। इनमें मनोरोग, न्यूरोसर्जरी, शिशु रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल हैं।

​दुर्ग जिले के सरकारी अस्पतालों में डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) फंड से कार्यरत 7 डॉक्टरों और 40 अन्य स्टाफ सदस्यों की सेवाएं 31 मार्च को समाप्त हो रही हैं। इनमें मनोरोग, न्यूरोसर्जरी, शिशु रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। सेवा विस्तार के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। यदि विस्तार नहीं हुआ, तो मरीजों को असुविधा हो सकती है​दुर्ग जिले के सरकारी अस्पतालों में डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) फंड से कार्यरत 7 डॉक्टरों और 40 अन्य स्टाफ सदस्यों की सेवाएं 31 मार्च को समाप्त हो रही हैं। इनमें मनोरोग, न्यूरोसर्जरी, शिशु रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। सेवा विस्तार के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। यदि विस्तार नहीं हुआ, तो मरीजों को असुविधा हो सकती है।​ डीएमएफ फंड का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए किया जाता है। इस फंड से नियुक्त कर्मचारियों की सेवाएं अनुबंध के आधार पर होती हैं, जो हर साल नवीनीकृत की जाती हैं। इस बार, 31 मार्च को इनका अनुबंध समाप्त हो रहा है, और नए आदेशों की प्रतीक्षा की जा रही है।​ जिला अस्पताल दुर्ग में मनोरोग और न्यूरोसर्जरी विभाग में प्रतिदिन क्रमशः 40 और 30 मरीज ओपीडी में आते हैं। यदि इन विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त हो जाती हैं, तो मरीजों को इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।​ स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में अस्पतालों का निरीक्षण किया था और डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए 5 नए चिकित्सकों की भर्ती की घोषणा की थी। हालांकि, वर्तमान स्थिति में डीएमएफ फंड से कार्यरत डॉक्टरों और स्टाफ की सेवाओं का निरंतरता सुनिश्चित करना आवश्यक है।​ डीएमएफ फंड के उपयोग और प्रबंधन को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भी समय-समय पर निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने खनिज न्यास से मिलने वाली राशि के उपयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया है। ​ सरकार और संबंधित विभागों को चाहिए कि वे इस मुद्दे पर शीघ्र निर्णय लें, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से चलती रहें। डीएमएफ फंड का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए किया जाता है। इस फंड से नियुक्त कर्मचारियों की सेवाएं अनुबंध के आधार पर होती हैं, जो हर साल नवीनीकृत की जाती हैं। इस बार, 31 मार्च को इनका अनुबंध समाप्त हो रहा है, और नए आदेशों की प्रतीक्षा की जा रही है।​ जिला अस्पताल दुर्ग में मनोरोग और न्यूरोसर्जरी विभाग में प्रतिदिन क्रमशः 40 और 30 मरीज ओपीडी में आते हैं। यदि इन विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त हो जाती हैं, तो मरीजों को इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।​ स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में अस्पतालों का निरीक्षण किया था और डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए 5 नए चिकित्सकों की भर्ती की घोषणा की थी। हालांकि, वर्तमान स्थिति में डीएमएफ फंड से कार्यरत डॉक्टरों और स्टाफ की सेवाओं का निरंतरता सुनिश्चित करना आवश्यक है।​ डीएमएफ फंड के उपयोग और प्रबंधन को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भी समय-समय पर निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने खनिज न्यास से मिलने वाली राशि के उपयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया है। सरकार और संबंधित विभागों को चाहिए कि वे इस मुद्दे पर शीघ्र निर्णय लें, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से चलती रहें।

​दुर्ग जिले के सरकारी अस्पतालों में डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) फंड से कार्यरत 7 डॉक्टरों और 40 अन्य स्टाफ सदस्यों की सेवाएं 31 मार्च को समाप्त हो रही हैं। इनमें मनोरोग, न्यूरोसर्जरी, शिशु रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। Read Post »

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