​दुर्ग जिले के सरकारी अस्पतालों में डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) फंड से कार्यरत 7 डॉक्टरों और 40 अन्य स्टाफ सदस्यों की सेवाएं 31 मार्च को समाप्त हो रही हैं। इनमें मनोरोग, न्यूरोसर्जरी, शिशु रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल हैं।

​दुर्ग जिले के सरकारी अस्पतालों में डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) फंड से कार्यरत 7 डॉक्टरों और 40 अन्य स्टाफ सदस्यों की सेवाएं 31 मार्च को समाप्त हो रही हैं। इनमें मनोरोग, न्यूरोसर्जरी, शिशु रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। सेवा विस्तार के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। यदि विस्तार नहीं हुआ, तो मरीजों को असुविधा हो सकती है​दुर्ग जिले के सरकारी अस्पतालों में डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) फंड से कार्यरत 7 डॉक्टरों और 40 अन्य स्टाफ सदस्यों की सेवाएं 31 मार्च को समाप्त हो रही हैं। इनमें मनोरोग, न्यूरोसर्जरी, शिशु रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। सेवा विस्तार के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। यदि विस्तार नहीं हुआ, तो मरीजों को असुविधा हो सकती है।​

डीएमएफ फंड का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए किया जाता है। इस फंड से नियुक्त कर्मचारियों की सेवाएं अनुबंध के आधार पर होती हैं, जो हर साल नवीनीकृत की जाती हैं। इस बार, 31 मार्च को इनका अनुबंध समाप्त हो रहा है, और नए आदेशों की प्रतीक्षा की जा रही है।​

जिला अस्पताल दुर्ग में मनोरोग और न्यूरोसर्जरी विभाग में प्रतिदिन क्रमशः 40 और 30 मरीज ओपीडी में आते हैं। यदि इन विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त हो जाती हैं, तो मरीजों को इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।​

स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में अस्पतालों का निरीक्षण किया था और डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए 5 नए चिकित्सकों की भर्ती की घोषणा की थी। हालांकि, वर्तमान स्थिति में डीएमएफ फंड से कार्यरत डॉक्टरों और स्टाफ की सेवाओं का निरंतरता सुनिश्चित करना आवश्यक है।​

डीएमएफ फंड के उपयोग और प्रबंधन को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भी समय-समय पर निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने खनिज न्यास से मिलने वाली राशि के उपयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया है। ​

सरकार और संबंधित विभागों को चाहिए कि वे इस मुद्दे पर शीघ्र निर्णय लें, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से चलती रहें।

डीएमएफ फंड का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए किया जाता है। इस फंड से नियुक्त कर्मचारियों की सेवाएं अनुबंध के आधार पर होती हैं, जो हर साल नवीनीकृत की जाती हैं। इस बार, 31 मार्च को इनका अनुबंध समाप्त हो रहा है, और नए आदेशों की प्रतीक्षा की जा रही है।​

जिला अस्पताल दुर्ग में मनोरोग और न्यूरोसर्जरी विभाग में प्रतिदिन क्रमशः 40 और 30 मरीज ओपीडी में आते हैं। यदि इन विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त हो जाती हैं, तो मरीजों को इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।​

स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में अस्पतालों का निरीक्षण किया था और डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए 5 नए चिकित्सकों की भर्ती की घोषणा की थी। हालांकि, वर्तमान स्थिति में डीएमएफ फंड से कार्यरत डॉक्टरों और स्टाफ की सेवाओं का निरंतरता सुनिश्चित करना आवश्यक है।​

डीएमएफ फंड के उपयोग और प्रबंधन को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भी समय-समय पर निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने खनिज न्यास से मिलने वाली राशि के उपयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया है।

सरकार और संबंधित विभागों को चाहिए कि वे इस मुद्दे पर शीघ्र निर्णय लें, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से चलती रहें।

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