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ITSA अस्पताल में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम, 150 से अधिक लोगों को यातायात नियमों की दी गई जानकारी

रायपुर। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और लोगों को सुरक्षित यातायात व्यवहार के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ITSA अस्पताल में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें 150 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया और यातायात नियमों के पालन की आवश्यकता के बारे में जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम में सहायक पुलिस आयुक्त (यातायात) श्रीमती सीमा अहिरवार ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रत्येक व्यक्ति को वाहन चलाते समय अपनी सुरक्षा के साथ-साथ सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना चाहिए। हेलमेट, सीट बेल्ट और गति सीमा पर जोर कार्यक्रम के दौरान लोगों को दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने, चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने और निर्धारित गति सीमा का पालन करने की समझाइश दी गई। इन नियमों का पालन सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण माना गया। ITSA निदेशक ने की नियमों के पालन की अपील ITSA अस्पताल के निदेशक सुनील बलानी ने लोगों से सुरक्षित यातायात व्यवहार को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने और यातायात नियमों का जिम्मेदारीपूर्वक पालन करने की अपील की। इस जागरूकता कार्यक्रम में सुरक्षित भवः फाउंडेशन के सदस्यों के साथ ITSA अस्पताल के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और सुरक्षित यातायात व्यवहार को बढ़ावा देना रहा।

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रायपुर के प्रयास विद्यालय में यातायात और साइबर सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम, 300 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

रायपुर। पुलिस कमिश्नरेट रायपुर की ओर से सड्डू स्थित प्रयास विद्यालय में यातायात नियमों और साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में करीब 300 विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों के पालन और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के उपायों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एसीपी ट्रैफिक सीमा अहिरवार उपस्थित रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को यातायात नियमों का पालन करने और सड़क पर सुरक्षित व्यवहार अपनाने की समझाइश दी। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों को अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया। साइबर अपराधों से बचाव के बताए तरीके कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा को लेकर भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने, अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचने और फर्जी कॉल व संदेशों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई। साथ ही, पासवर्ड, ओटीपी और निजी जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने के महत्व को समझाया गया। चित्रकला प्रतियोगिता के विजेता सम्मानित जागरूकता कार्यक्रम के तहत यातायात और साइबर सुरक्षा विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार के साथ सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए। विद्यार्थियों ने अपनी कलाकृतियों के माध्यम से सड़क सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव के संदेश प्रस्तुत किए। पुलिस कमिश्नरेट रायपुर के इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी बढ़ाना, साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूक करना और उन्हें सुरक्षित एवं जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना रहा।

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रायपुर में ई-रिक्शा और ऑटो के QR कोड सिस्टम को लेकर बड़ा फैसला, सितंबर तक पंजीयन रहेगा मुफ्त

रायपुर में ई-रिक्शा और ऑटो वाहनों की पहचान और यात्रियों की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए QR कोड व्यवस्था को और प्रभावी किया जा रहा है। इसी सिलसिले में 8 सितंबर 2026 को रायपुर पुलिस कमिश्नरेट और ई-रिक्शा डीलर्स के बीच संयुक्त बैठक आयोजित की गई। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त यातायात के कार्यालय स्थित सभागार में हुई बैठक में वाहनों और चालकों की जानकारी को QR कोड के माध्यम से व्यवस्थित एवं अपडेट रखने को लेकर चर्चा हुई। पुलिस अधिकारियों ने डीलर्स को वाहन और चालक से संबंधित जानकारी समय-समय पर अपडेट करने तथा पंजीयन व्यवस्था को मजबूत बनाने के निर्देश दिए। बैठक में फैसला लिया गया कि ई-रिक्शा की नई खरीदी और सर्विसिंग के दौरान वाहन मालिक या चालक से निर्धारित फॉर्म भरवाना जरूरी होगा। इससे वाहन और चालक की जानकारी रिकॉर्ड में अपडेट रखी जा सकेगी। इसके अलावा जिन ई-रिक्शा और ऑटो का अब तक पंजीयन नहीं हुआ है, उनके लिए पंजीयन पोर्टल दोबारा खोला जाएगा। वाहन मालिकों को पंजीयन पूरा करने का मौका दिया जाएगा। सबसे अहम निर्णय के तहत सितंबर 2026 तक ई-रिक्शा और ऑटो का पंजीयन निशुल्क रखा गया है। पुलिस ने वाहन मालिकों और चालकों से अपील की है कि वे तय समय सीमा के भीतर अपना पंजीयन पूरा करा लें। बैठक में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त यातायात राम कुमार बर्मन, सहायक पुलिस आयुक्त रमेश येरेवार, सहायक पुलिस आयुक्त यातायात सतीश ठाकुर, कमल पांडेय, ई-रिक्शा एवं ऑटो संघ के अध्यक्ष सुरेश तिवारी सहित करीब 25 डीलर्स मौजूद रहे। पुलिस के अनुसार QR कोड व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों को वाहन और चालक से जुड़ी जरूरी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना है। इससे नागरिक सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ रायपुर की यातायात व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

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घटनास्थल के फिंगरप्रिंट से अपराधियों तक पहुंचेगी पुलिस, रायपुर कमिश्नरेट में NAFIS ट्रेनिंग

रायपुर, 22 अगस्त 2026। अपराध की जांच को ज्यादा वैज्ञानिक और तकनीकी बनाने के लिए रायपुर कमिश्नरेट पुलिस ने फिंगरप्रिंट और राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS) को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें रायपुर कमिश्नरेट और रायपुर ग्रामीण पुलिस के अधिकारी-कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम यातायात मुख्यालय, कालीबाड़ी रायपुर के प्रथम तल पर आयोजित किया गया। फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ अजय कुमार साहू ने नोडल अधिकारी एवं अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त पीताम्बर पटेल के मार्गदर्शन में पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया। घटनास्थल पर फिंगरप्रिंट की भूमिका प्रशिक्षण में बताया गया कि अपराधी घटनास्थल पर कई बार ऐसी निशानियां छोड़ जाता है, जो उसकी पहचान तक पहुंचने में अहम साबित हो सकती हैं। दरवाजे, खिड़की, कांच, वाहन, अलमारी और अन्य सतहों से मिले फिंगरप्रिंट को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। पुलिसकर्मियों को चांस प्रिंट यानी अदृश्य, अधूरे या अस्पष्ट फिंगरप्रिंट को खोजने, विकसित करने, वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित करने और जांच के लिए भेजने की तकनीक समझाई गई। फिंगरप्रिंट किट के इस्तेमाल की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान थानों में उपलब्ध फिंगरप्रिंट किट का सही तरीके से उपयोग करने की प्रक्रिया भी बताई गई। साथ ही घटनास्थल को सुरक्षित रखने, फिंगरप्रिंट को विकसित करने, उसे उठाने और सुरक्षित पैकिंग करने के व्यावहारिक तरीके सिखाए गए। NAFIS से डिजिटल मिलान राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली यानी NAFIS के जरिए घटनास्थल से मिले फिंगरप्रिंट का उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड से मिलान किया जा सकता है। इससे संदिग्ध की पहचान करने और उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी हासिल करने में पुलिस को मदद मिल सकती है। खासतौर पर दूसरे राज्यों से जुड़े अपराधियों की पहचान में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। प्रशिक्षण में फिंगरप्रिंट के साथ-साथ DNA, CCTV और डिजिटल साक्ष्यों जैसी आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। पुलिस के मुताबिक, इस प्रशिक्षण का उद्देश्य अपराध की विवेचना को ज्यादा वैज्ञानिक और सटीक बनाना है, ताकि घटनास्थल से मिले तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया को तेज किया जा सके।

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रायपुर में साइबर जागरूकता अभियान, 1200 विद्यार्थियों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति किया जागरूक

छत्तीसगढ़ पुलिस के साइबर जागृति अभियान के तहत रायपुर कमिश्नरेट सेंट्रल जोन के विभिन्न थाना क्षेत्रों में स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थानों में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से करीब 1200 विद्यार्थियों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार, साइबर हाइजीन और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव की जानकारी दी गई। अभियान के दौरान सिविल लाइन थाना क्षेत्र के सालेम इंग्लिश मीडियम स्कूल, तेलीबांधा थाना क्षेत्र के जे.आर. नायडू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रविग्राम, देवेंद्र नगर के बालाजी स्कूल, कालीबाड़ी स्थित शासकीय पोस्ट मैट्रिक गर्ल्स हॉस्टल, मौदहापारा स्थित शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज और गंज थाना क्षेत्र के विवेक कॉन्वेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में APK फाइल से होने वाले साइबर फ्रॉड को लेकर विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई। पुलिस ने बताया कि सरकारी योजना, नौकरी, KYC, शुभकामना संदेश या निमंत्रण के नाम पर WhatsApp के जरिए संदिग्ध फाइल भेजी जा सकती है। किसी भी फाइल को खोलने या इंस्टॉल करने से पहले उसका पूरा नाम और extension जांचने की सलाह दी गई। पुलिस ने लोगों को अनजान APK फाइल इंस्टॉल नहीं करने और परिचित व्यक्ति के WhatsApp नंबर से आई संदिग्ध फाइल को भी बिना पुष्टि किए नहीं खोलने की समझाइश दी, क्योंकि साइबर अपराधी किसी के compromised account का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इसके अलावा Digital Arrest Scam को लेकर भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। पुलिस, CBI, ED या NCB अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के जरिए डराने और पैसे ट्रांसफर कराने वाले ठगों से सावधान रहने की सलाह दी गई। ऐसे मामलों में कॉल काटकर संबंधित विभाग से स्वतंत्र रूप से सत्यापन करने को कहा गया। कार्यक्रम में OTP और UPI PIN साझा नहीं करने, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने, WhatsApp Two-Step Verification सक्रिय रखने, सोशल मीडिया Privacy Settings का ध्यान रखने तथा Gaming Apps में Age Rating और Parental Controls का इस्तेमाल करने जैसे जरूरी साइबर सुरक्षा उपाय बताए गए। अभियान का मुख्य संदेश रहा: STOP, THINK, ACT यानी किसी भी डिजिटल गतिविधि में जल्दबाजी न करें, पहले रुकें, सोचें और जांच करने के बाद ही कार्रवाई करें।

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उरला के स्कूल में साइबर जागरूकता कार्यक्रम, 300 छात्रों को ऑनलाइन ठगी से बचाव के बताए तरीके

छत्तीसगढ़ पुलिस के साइबर जागृति अभियान के तहत रायपुर कमिश्नरेट के नॉर्थ जोन अंतर्गत थाना उरला क्षेत्र में साइबर जागरूकता और “संवाद से समाधान” कार्यक्रम आयोजित किया गया। रायपुर पब्लिक स्कूल, गाजीनगर में हुए इस कार्यक्रम में करीब 300 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के नए तरीकों की जानकारी देते हुए उनसे बचने के व्यावहारिक उपाय बताए। कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा के साथ-साथ यातायात नियमों और नए आपराधिक कानूनों को लेकर भी जागरूक किया गया। छात्रों को समझाया गया कि किसी भी संदिग्ध लिंक या मैसेज पर क्लिक न करें। अनजान APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल करने से बचें। इसके अलावा OTP, PIN, CVV और पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी गई। पुलिस ने विद्यार्थियों को फर्जी KYC, बैंक अधिकारी बनकर ठगी, ऑनलाइन निवेश के नाम पर धोखाधड़ी और सोशल मीडिया फ्रॉड जैसे साइबर अपराधों से भी सतर्क रहने की जानकारी दी। कार्यक्रम के “संवाद से समाधान” हिस्से के तहत बच्चों से गुड टच-बैड टच और व्यक्तिगत सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत की गई। विद्यार्थियों को अपनी किसी भी परेशानी को छिपाने के बजाय माता-पिता, भरोसेमंद लोगों या पुलिस के साथ साझा करने के लिए प्रेरित किया गया। पुलिस ने विद्यार्थियों से अपने परिवार और परिचितों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की अपील की। साइबर ठगी का शिकार होने पर लोगों को बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी गई, ताकि समय रहते ठगी की रकम को रोकने के प्रयास किए जा सकें। कार्यक्रम का आयोजन पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला (IPS) के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित तुकाराम कांबले (IPS) के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में पुलिस उपायुक्त नॉर्थ जोन श्रीमती दीपमाला कश्यप और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त नॉर्थ जोन श्री आदित्य पांडे के पर्यवेक्षण में पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को जागरूक किया।

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रायपुर कमिश्नरेट में स्मार्ट पुलिसिंग की नई पहल, 21 थानों में शुरू हुआ e-मालखाना 2.0

रायपुर, 13 अगस्त 2026। रायपुर कमिश्नरेट ने पुलिसिंग को तकनीक से जोड़ते हुए मालखाना प्रबंधन में एक बड़ा डिजिटल बदलाव किया है। कमिश्नरेट के सभी 21 थानों में अब e-मालखाना 2.0 व्यवस्था लागू हो गई है। गुरुवार को एक साथ 10 नए थानों में इस प्रणाली की शुरुआत की गई, जिसके बाद 100 प्रतिशत थाने डिजिटल मालखाना प्रणाली से जुड़ गए हैं। पुलिस आयुक्त संजीव शुक्ला के मार्गदर्शन और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित कांबले के निर्देशन में शुरू की गई इस व्यवस्था को रायपुर पश्चिम पुलिस उपायुक्त रॉबिंसन गुड़िया ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य मालखाने में रखी जब्त संपत्तियों और केस प्रॉपर्टी के रिकॉर्ड को व्यवस्थित, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। पश्चिम जोन के विभिन्न थानों में e-मालखाना 2.0 का शुभारंभ किया गया। थाना टिकरापारा और न्यू राजेंद्र नगर में पुलिस आयुक्त संजीव शुक्ला ने प्रणाली का उद्घाटन किया। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित कांबले, पुलिस उपायुक्त पश्चिम रॉबिंसन गुड़िया, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त पश्चिम राहुल देव शर्मा सहित संबंधित अधिकारी और थाना प्रभारी मौजूद रहे। थाना खमतराई में e-मालखाना 2.0 की शुरुआत अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित कांबले ने की। इस अवसर पर पुलिस उपायुक्त उत्तर दीपमाला कश्यप, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त उत्तर आदित्य पाण्डेय और पुलिस स्टाफ उपस्थित रहा। बारकोड से होगी केस प्रॉपर्टी की डिजिटल ट्रैकिंग e-मालखाना 2.0 की प्रमुख विशेषता बारकोड आधारित डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम है। मालखाने में जमा होने वाली प्रत्येक जब्त वस्तु और केस प्रॉपर्टी को एक यूनिक बारकोड दिया जाएगा। बारकोड स्कैन करने पर संबंधित प्रकरण, जब्ती का विवरण, जमा करने की तारीख और वस्तु की वर्तमान स्थिति जैसी जानकारी तुरंत देखी जा सकेगी। इस व्यवस्था से मालखाने में रखी सामग्री को ढूंढने, उसकी निगरानी करने और रिकॉर्ड को अपडेट रखने में आसानी होगी। साथ ही मैनुअल रिकॉर्ड पर निर्भरता कम होने से व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। पुलिस विभाग के अनुसार, डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से मालखाना प्रबंधन अधिक तेज, व्यवस्थित और सुरक्षित बनाया जा सकेगा। यह पहल रायपुर कमिश्नरेट में स्मार्ट पुलिसिंग और डिजिटल प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इन 10 थानों में शुरू हुआ नया e-मालखाना 13 अगस्त को टिकरापारा, न्यू राजेंद्र नगर, मुजगहन, पुरानी बस्ती, डीडी नगर, आमानाका, आजाद चौक, सरस्वती नगर और खमतराई समेत पश्चिम जोन के 10 थानों में e-मालखाना 2.0 की शुरुआत की गई।

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रायपुर के पंडरी-उरला थाने में E-Malkhana शुरू, अब डिजिटल होगा जब्त सामान का रिकॉर्ड

रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने पुलिसिंग को तकनीक आधारित और ज्यादा पारदर्शी बनाने की दिशा में एक और कदम उठाया है। उत्तर जोन के थाना पंडरी और थाना उरला में ई-मालखाना प्रणाली की शुरुआत की गई है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रायपुर अमित तुकाराम कांबले IPS ने दोनों थानों में ई-मालखाना प्रणाली का शुभारंभ किया। यह पहल पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन में की गई है। ई-मालखाना प्रणाली के तहत अपराधों और अन्य मामलों में जब्त किए गए माल-मशरूका का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। जब्त सामान की एंट्री, सुरक्षित रख-रखाव, आवक-जावक, संबंधित केस से लिंकिंग और न्यायालयीन प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज होगी। इस व्यवस्था से किसी भी केस में जब्त सामान की स्थिति और उससे जुड़ी जानकारी आसानी से और तेजी से हासिल की जा सकेगी। साथ ही मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होने के साथ मालखाना प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। पुलिस के मुताबिक, ई-मालखाना से जब्त संपत्ति की चेन ऑफ कस्टडी भी मजबूत होगी। इससे जब्त सामान को कोर्ट में पेश करने और उसके निस्तारण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा चरणबद्ध तरीके से अन्य थानों में भी ई-मालखाना प्रणाली लागू की जा रही है। पंडरी और उरला थानों में इसकी शुरुआत इसी योजना का हिस्सा है।

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तिल्दा-नेवरा में बाइक चोर गिरोह का खुलासा, 3 आरोपी गिरफ्तार; 2 लाख की 5 मोटरसाइकिल बरामद

रायपुर। रायपुर ग्रामीण पुलिस ने मोटरसाइकिल चोरी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तिल्दा-नेवरा थाना पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर की सूचना के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे और उनकी निशानदेही पर करीब 2 लाख रुपये कीमत की पांच चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। पुलिस के अनुसार, बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के हथबंद निवासी 55 वर्षीय संजीव त्यागी अपनी हीरो पैशन प्रो मोटरसाइकिल से तिल्दा-नेवरा के बुधवारी साप्ताहिक बाजार पहुंचे थे। उन्होंने बाइक सड़क किनारे खड़ी की और सामान खरीदने बाजार चले गए। कुछ समय बाद लौटने पर बाइक मौके से गायब मिली। काफी तलाश के बाद भी वाहन का पता नहीं चला, जिसके बाद उन्होंने तिल्दा-नेवरा थाने में शिकायत दर्ज कराई। मामले में पुलिस ने अपराध क्रमांक 342/2026 के तहत धारा 303(2), 238 और 3(5) बीएनएस में मामला दर्ज कर जांच शुरू की। CCTV और तकनीकी जांच से आरोपियों तक पहुंची पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर विशेष टीम बनाई गई। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान की। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि परवाना देवार जोगी और अजीत जोगी अपने साथियों के साथ चोरी की मोटरसाइकिलों की पहचान और स्वरूप बदलकर उनका इस्तेमाल कर रहे हैं और उन्हें बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहे हैं। पुलिस ने संदेहियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने अपने साथी बीरबल देवार के साथ मिलकर जनवरी 2026 से 7 अगस्त 2026 के बीच तिल्दा-नेवरा, बगदई, बैकुंठ स्थित शराब दुकान परिसर और तिल्दा-नेवरा साप्ताहिक बाजार से पांच मोटरसाइकिलें चोरी करना स्वीकार किया। घर के पास छिपाकर रखी थीं चोरी की बाइक पुलिस पूछताछ में सामने आया कि चोरी की मोटरसाइकिलों को अजय कुमार यदु के घर के पास छिपाकर रखा गया था। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने वहां से पांच बाइक बरामद कीं। बरामद वाहनों में एक हीरो पैशन प्रो बाइक क्रमांक CG 22 AB 3766 और चार हीरो HF Deluxe मोटरसाइकिलें शामिल हैं, जिन पर नंबर प्लेट नहीं थी। पुलिस ने सभी वाहनों को जब्त कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। गिरफ्तार आरोपी जब्त वाहन

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रायपुर के गंज थाने में शुरू हुआ ई-मालखाना, जब्त सामान का अब बारकोड से होगा डिजिटल रिकॉर्ड

रायपुर। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के सेंट्रल जोन में जब्त सामान के प्रबंधन को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक और कदम उठाया गया है। थाना गंज में अब “ई-मालखाना” प्रणाली शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही सेंट्रल जोन का यह पांचवां थाना बन गया है, जहां मालखाने को डिजिटल सिस्टम से जोड़ा गया है। ई-मालखाना प्रणाली का शुभारंभ रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के एडिशनल पुलिस कमिश्नर अमित तुकाराम कांबले (IPS) ने किया। इससे पहले कोतवाली, गोलबाजार, मौदहापारा और देवेंद्र नगर थानों में यह व्यवस्था लागू की जा चुकी है। चारों थानों का मालखाना हुआ डिजिटल थाना गंज में ई-मालखाना शुरू होने के बाद एसीपी कोतवाली डिवीजन के अंतर्गत आने वाले चारों थानों—कोतवाली, गोलबाजार, मौदहापारा और गंज—के मालखाने डिजिटल व्यवस्था से जुड़ गए हैं। पुलिस का कहना है कि इससे जब्त सामान के रिकॉर्ड और रखरखाव में एक समान और व्यवस्थित प्रणाली विकसित होगी। हर जब्त सामान को मिलेगा यूनिक बारकोड ई-मालखाना के तहत थाने में रखी जब्त सामग्री का पहले भौतिक सत्यापन किया गया। इसके बाद सामान की सुरक्षित पैकेजिंग, लेबलिंग और रैक के अनुसार व्यवस्थित किया गया। प्रत्येक जब्त सामग्री के लिए यूनिक बारकोड तैयार किया गया है, जिसे संबंधित सामान और उसके दस्तावेज पर लगाया गया है। इससे किसी भी सामान की पहचान और उसे रखे जाने वाले स्थान की जानकारी आसानी से हासिल की जा सकेगी। इसके अलावा जब्त सामग्री का ऑनलाइन पंजीयन और डेटा एंट्री की गई है। सुपुर्दनामा, पावती सहित अन्य जरूरी दस्तावेजों को स्कैन कर डिजिटल रिकॉर्ड में सुरक्षित किया गया है। चेन ऑफ कस्टडी होगी मजबूत पुलिस के अनुसार ई-मालखाना प्रणाली से जब्त सामान की पहचान, लोकेशन, जमा करने और निकालने की प्रक्रिया की डिजिटल निगरानी संभव होगी। इससे चेन ऑफ कस्टडी को मजबूत करने के साथ रिकॉर्ड की उपलब्धता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में डीसीपी पीतांबर पटेल, डीसीपी सेंट्रल जोन तारकेश्वर पटेल, एडिशनल डीसीपी विवेक शुक्ला, एसीपी कोतवाली दीपक मिश्रा और एसीपी ट्रैफिक कमलजीत पाटले सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। थाना गंज प्रभारी निरीक्षक दीपक पासवान और उनकी टीम द्वारा मालखाने को व्यवस्थित करने तथा ई-मालखाना प्रणाली लागू करने के लिए किए गए प्रयासों की अधिकारियों ने सराहना की। एडिशनल पुलिस कमिश्नर अमित तुकाराम कांबले ने टीम का उत्साहवर्धन करते हुए विभागीय प्रक्रिया के तहत प्रोत्साहन स्वरूप इनाम देने की घोषणा भी की। पुलिस का कहना है कि सेंट्रल जोन के पांच थानों में ई-मालखाना लागू होना मालखाना प्रबंधन के डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य जब्त सामान के रिकॉर्ड और रखरखाव को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी, तेज और विश्वसनीय बनाना है।

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