
5 जून 2024 को सुनीता और बुच बोइंग स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए रवाना हुए थे। यह मिशन केवल 8 दिनों का होना था, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण उन्हें अंतरिक्ष में 9 महीने से अधिक समय बिताना पड़ा।
अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने से मानव शरीर पर कई प्रभाव पड़ते हैं। माइक्रोग्रैविटी के कारण मांसपेशियों और हड्डियों की कमजोरी, दृष्टि समस्याएं, और प्रतिरक्षा प्रणाली में परिवर्तन हो सकते हैं। इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है, जैसे अकेलापन और तनाव। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए सुनीता और बुच को विशेष पुनर्वास कार्यक्रमों से गुजरना होगा।
सुनीता विलियम्स की सुरक्षित वापसी पर भारत में खुशी की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा, “धरती ने आपको याद किया।” राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी उनकी दृढ़ता और समर्पण की सराहना की।
अंतरिक्ष में 9 महीने बिताने के बाद, सुनीता और बुच की वापसी मानव धैर्य और साहस का प्रतीक है, जो भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी
