बजरंग दल ने अखिलेश यादव के बयान पर बिरगांव, रायपुर में किया विरोध प्रदर्शन, पुतला जलाया

आज 29 मार्च बिरगांव में स्थित बुधवारी बाजार चौक में शाम करीब 5 बजे , अखिलेश यादव के पुतला दहन कर बजरंग दल के सदस्यों द्वारा समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव का बहिष्कार किया गया है।

रायपुर, 29 मार्च 2025: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के गौशालाओं पर दिए गए विवादित बयान के बाद पूरे देश में हिंदू संगठनों और गौसेवकों में आक्रोश फैल गया है। इसी क्रम में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बिरगांव, रायपुर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और अखिलेश यादव का पुतला जलाया।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब अखिलेश यादव ने कहा, “इस सरकार को दुर्गंध पसंद है, इसलिए वे गौशालाएं बनवा रहे हैं, जबकि हमें (समाजवादी पार्टी) सुगंध पसंद है, इसलिए हम इत्र पार्क बना रहे हैं।” उनके इस बयान से हिंदू संगठनों और गौसेवकों में नाराजगी फैल गई, जिन्होंने इसे गौशालाओं और हिंदू परंपराओं का अपमान बताया।

बिरगांव में हुए इस विरोध प्रदर्शन के दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अखिलेश यादव के खिलाफ नारेबाजी की और उनके बयान की कड़ी निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि गाय हिंदू संस्कृति में पूजनीय है, और इस तरह की अपमानजनक टिप्पणी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मांग की कि अखिलेश यादव तुरंत अपना बयान वापस लें और सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

विरोध प्रदर्शन के दौरान बजरंग दल के एक नेता ने कहा, “अखिलेश यादव का बयान न केवल गौशालाओं का अपमान है, बल्कि हमारे धार्मिक विश्वासों पर हमला भी है। हम इस बयान का कड़ा विरोध करते हैं और उनसे तत्काल स्पष्टीकरण और माफी की मांग करते हैं।”

बिरगांव में हुआ यह प्रदर्शन पूरे देश में हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया का एक हिस्सा है। कई गौशाला संचालकों और हिंदू कार्यकर्ताओं ने इस बयान पर कड़ी नाराजगी जताई है और इसे गाय संरक्षण के प्रयासों का अपमान बताया है।

वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद देश की राजनीति को और अधिक ध्रुवीकृत कर सकता है, खासकर उन राज्यों में जहां गौ संरक्षण एक महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा है। समाजवादी पार्टी की ओर से इस विरोध प्रदर्शन पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि अखिलेश यादव का बयान सरकार की प्राथमिकताओं को उजागर करने के लिए था, न कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए।

फिलहाल, स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और यदि अखिलेश यादव माफी नहीं मांगते हैं, तो हिंदू संगठन आगे और बड़े विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। रायपुर प्रशासन ने विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया है।

यह घटना भारत में गौ संरक्षण और शासन की प्राथमिकताओं को लेकर जारी राजनीतिक और सांस्कृतिक विभाजन को उजागर करती है।

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