रायपुर के गोलबाजार थाना क्षेत्र स्थित रिलायंस ज्वेलर्स में लाखों रुपये के सोने के आभूषणों की हेराफेरी का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में स्टोर के पूर्व कर्मचारी मनोज यादव को गिरफ्तार किया है। आरोपी की निशानदेही पर करीब 80 ग्राम सोने के आभूषण, जिनकी कीमत लगभग 14.50 लाख रुपये बताई जा रही है, बरामद किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, रिलायंस ज्वेलर्स के स्टोर मैनेजर की शिकायत पर गोलबाजार थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया। शिकायत में बताया गया कि स्टोर में रखे करीब 103.832 ग्राम वजन के तीन सेट (पांच नग) 22 कैरेट सोने के कंगनों की जगह समान वजन और डिजाइन के नकली कंगन रख दिए गए थे। इस हेराफेरी से कंपनी को लगभग 17.50 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
मामले की जांच डीसीपी सेंट्रल जोन तारकेश्वर पटेल के निर्देश पर परिवीक्षाधीन उप पुलिस अधीक्षक अमित कोसमा और थाना प्रभारी स्वराज त्रिपाठी के नेतृत्व में की गई। जांच के दौरान संदेह स्टोर के पूर्व कर्मचारी मनोज यादव पर गया। शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन स्टॉक ऑडिट, दस्तावेजी साक्ष्य, तकनीकी विश्लेषण और लगातार पूछताछ के बाद उसने महत्वपूर्ण जानकारी स्वीकार कर ली।
पूछताछ में सामने आया कि मनोज यादव वर्ष 2017 से रिलायंस ज्वेलर्स में कार्यरत था और स्टोर की कार्यप्रणाली से पूरी तरह परिचित था। पुलिस के मुताबिक, आर्थिक तंगी और कर्ज के दबाव में उसने पहले ग्राहकों द्वारा जमा कराई गई मासिक योजना की रकम का निजी उपयोग किया। बाद में जब ग्राहकों ने आभूषण की मांग की तो उसने स्टोर से असली सोने के कंगन निकालकर उनकी जगह नकली कंगन रख दिए।

जांच में यह भी पता चला कि आरोपी कंपनी की नियमित प्रक्रिया का फायदा उठाकर अधिकृत मेल्टिंग यूनिट में आधिकारिक यूनिफॉर्म पहनकर पहुंचता था। वहां असली सोना गलवाकर उसका उपयोग अलग-अलग लेन-देन में करता रहा। कुछ मामलों में उसने ग्राहकों को ऐसे आभूषण भी दिए जिन्हें बाद में स्टोर में एक्सचेंज कराने की बात कही गई।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने किश्तों पर सोने के आभूषण खरीदने वाली दो महिला ग्राहकों के साथ भी धोखाधड़ी की। उनके पैसों और आभूषणों में हेराफेरी करने के बाद फर्जी बिलों के जरिए आभूषण सौंपे गए। रिलायंस ज्वेलर्स से सत्यापन कराने पर ये बिल फर्जी पाए गए, जिसके बाद मामले में बीएनएस की धारा 336(3), 318(4), 338 और 340(2) भी जोड़ी गईं।
विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन भी जांचा। तकनीकी विश्लेषण में सामने आया कि वह पुलिस जांच, गिरफ्तारी, जमानत और पूछताछ की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी इंटरनेट और AI आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से जुटा रहा था। पुलिस आरोपी के आर्थिक लेन-देन और अन्य संभावित पीड़ितों की भी जांच कर रही है।
आरोपी की निशानदेही पर एक रेडमी मोबाइल फोन और फर्जी बिलों के जरिए बेचे गए लगभग 80 ग्राम सोने के आभूषण बरामद किए गए हैं। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद मनोज यादव को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस मामले से जुड़े अन्य लोगों की संभावित संलिप्तता और आर्थिक लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है।

