
छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस ने मंगलवार को मिशन अमृत 2.0 के कार्यान्वयन की समीक्षा करते हुए परियोजना में हुई देरी और लापरवाही पर गंभीर असंतोष व्यक्त किया। राजधानी रायपुर में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाते हुए मानसून से पहले सभी लंबित कार्यों को पूरा करने के स्पष्ट निर्देश दिए।
इस अवसर पर सचिव ने बताया कि मिशन अमृत 2.0 के तहत प्रदेश के 36 नगरीय निकायों में पेयजल आपूर्ति से संबंधित महत्वाकांक्षी परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें से 29 को कार्यादेश जारी किया जा चुका है। हालांकि, जमीनी स्तर पर कार्य की गति निराशाजनक है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समयसीमा का पालन नहीं किया गया तो केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करने में कठिनाई होगी, जिससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ेगा।
डॉ. बसवराजु ने राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से मैदानी निरीक्षण करके कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति सुनिश्चित करें। साथ ही, उन्होंने निर्माण एजेंसियों को कुशल कार्यबल की तैनाती, तकनीकी डिजाइनों और सर्वेक्षण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस योजना को मार्च 2026 तक पूरा करना है और यह केंद्र व राज्य सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल है।
बैठक में यह भी उजागर हुआ कि जनवरी 2024 से अब तक परियोजना के लिए 300 करोड़ रुपये आवंटित किए जा चुके हैं, फिर भी कार्य प्रगति संतोषजनक नहीं है। सचिव ने इस संदर्भ में सभी हितधारकों से अधिक गंभीरता और जवाबदेही के साथ काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आगामी समीक्षा बैठक में भौतिक प्रगति और समयसीमा की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस कार्यक्रम में नोडल अधिकारियों, अभियंताओं और निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
