छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में रेप के आरोपों में सजा काट रहे CAF (Chhattisgarh Armed Force) के जवान रूपेश कुमार पुरी को हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने कहा कि यह मामला प्रेम संबंध का था, न कि बलात्कार या शादी का झांसा देकर यौन शोषण का।

📌 मामले का विवरण
- साल 2020 में युवती ने रूपेश कुमार पुरी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
- शिकायत में कहा गया कि युवती की शादी 28 जून 2020 को किसी और से तय थी, लेकिन 27 जून 2020 को रूपेश उसे अपने घर ले गया और शादी का झांसा देकर संबंध बनाए।
- आरोप था कि उसने युवती को लगभग 2 महीने तक अपने घर रखा और बाद में धमकाकर निकाल दिया।
- फास्ट ट्रैक कोर्ट, जगदलपुर ने 2022 में 10 साल की सजा और 10,000 रुपए जुर्माना सुनाया।
⚖️ अपील और बचाव पक्ष
रूपेश कुमार पुरी ने हाईकोर्ट में अपील की। उनके वकील ने बताया:
- दोनों एक ही गांव के रहने वाले हैं और 2013 से प्रेम संबंध में थे।
- पहले भी पीड़िता ने रूपेश के खिलाफ छेड़छाड़ का मामला दर्ज कराया था, जिसमें वह बरी हो चुके थे।
- युवती ने स्वेच्छा से उनके घर आकर संबंध बनाए, और आरोप झूठे थे।
- रूपेश CAF में पदस्थ था, ड्यूटी के दौरान घर से दूर रहा, और इस बीच पारिवारिक विवाद के कारण FIR दर्ज कराई गई।
📲 साक्ष्य और गवाही
- हाईकोर्ट ने पाया कि पीड़िता ने खुद फेसबुक पर रूपेश को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी।
- दोनों के बीच लंबे समय तक लगातार संपर्क और बातचीत हुई।
- युवती के माता-पिता ने भी अदालत में कहा कि अगर आरोपी का परिवार ठीक व्यवहार करता, तो रिपोर्ट दर्ज नहीं होती।
- मेडिकल और FSL रिपोर्ट में बलात्कार के ठोस प्रमाण नहीं मिले।
🏛️ हाईकोर्ट का निष्कर्ष
- मामला जबरदस्ती का नहीं, बल्कि आपसी सहमति और प्रेम संबंध का था।
- पीड़िता खुद आरोपी के घर गई और बार-बार संबंध बनाए।
- न्यायमूर्ति ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि शादी का झांसा देने पर होने वाले संबंध को बलात्कार नहीं माना जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि शुरू से ही शादी का इरादा नहीं था।
- इसके आधार पर फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला रद्द किया गया और रूपेश कुमार पुरी को सभी आरोपों से बरी किया गया।



