छत्तीसगढ़ में दवा कारोबार के GST रिटर्न की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। स्टेट GST विभाग पिछले सात महीनों से राज्यभर के सभी दवा कारोबारियों के रिटर्न की पड़ताल कर रहा है। शुरुआती जांच के अनुसार, पिछले तीन साल में दवा कारोबार में 300 करोड़ से ज्यादा की GST चोरी हुई है।
💊 कैसे होती रही GST की चोरी?
- निजी अस्पताल वाले दवा कंपनियों से बल्क में दवाएं खरीदते हैं, जिससे उन्हें अधिकतर दवाएं आधी कीमत या उससे भी कम में मिलती हैं।
- इसके बावजूद वे यही दवाएं अपने मेडिकल स्टोर से पूरी MRP पर बेचते हैं।
- रिटर्न में बिक्री की कीमत MRP के हिसाब से दिखाई जाती है, जिससे उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) वापस मिल जाता है।
- इससे अस्पताल और मेडिकल स्टोर वालों को 100% से अधिक का मुनाफा होता है।
📉 मेडिकल स्टोर की रिपोर्टिंग में गड़बड़ी
- स्टेट GST विभाग ने पाया कि मेडिकल स्टोर वाले अपनी असली बिक्री का आधा या उससे अधिक दिखाते नहीं।
- बिल में GST जरूर दिखाया जाता है, लेकिन वास्तविक बिक्री का केवल 25-30% ही रिटर्न में दर्ज होता है।
- यानी, लोगों से पूरा GST लिया जाता है, लेकिन सरकार को केवल कुछ ही रकम दी जाती है।
🏥 MRP सभी जगह एक जैसी, कोई शक नहीं
- निजी अस्पतालों से खरीदी गई दवाओं की कीमत उनके मेडिकल स्टोर में और बाहरी स्टोर में समान रहती है।
- इसलिए कोई शक नहीं करता कि अस्पताल वाले सीधे कंपनी से सस्ते में दवा ले रहे हैं।
- अस्पताल अपने मरीजों को बाहरी स्टोर से नहीं, बल्कि अपने स्टोर से दवा खरीदने के लिए मजबूर करते हैं।
📊 जांच में मिले सबूत
- दैनिक भास्कर ने रायपुर के तीन बड़े अस्पतालों के ICU में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली पांच दवाओं की कीमतों का अध्ययन किया।
- बाहर के मेडिकल स्टोर से ये दवाएं 20% तक सस्ती मिलती हैं।
- यदि बल्क में सीधे कंपनियों से खरीदी जाए, तो छूट 45% तक हो सकती है।
- कुछ एंटीबायोटिक दवाएं तो इतनी बड़ी मात्रा में खरीदी जाती हैं कि वह पूरे छत्तीसगढ़ में अन्य स्टोरों में मिलने वाली बिक्री से भी ज्यादा हैं।
🔎 अगले कदम
- GST विभाग ने 100 से ज्यादा बड़े और छोटे दवा कारोबारियों की सूची तैयार कर ली है।
- जल्द ही राज्यभर में एक साथ छापेमारी की जाएगी।
- छत्तीसगढ़ में लगभग 20,000 दवा कारोबारी हैं, जिनमें रायपुर में करीब 3,000 हैं।

