अबूझमाड़ में राजस्व सर्वे के बीच बढ़ी जंगलों की कटाई, सरकारी पट्टे की उम्मीद में साफ किए जा रहे वन क्षेत्र

छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र में पहली बार हो रहे राजस्व सर्वे के बीच बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई का मामला सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि सरकारी भूमि पट्टे मिलने की संभावना को देखते हुए कई स्थानों पर वन क्षेत्र साफ किए जा रहे हैं, ताकि जमीन पर कब्जे और दावे को मजबूत किया जा सके।

पहली बार हो रहा राजस्व सर्वे

आजादी के बाद पहली बार अबूझमाड़ क्षेत्र का राजस्व सर्वे कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सर्वे के बाद पात्र लोगों को भूमि अधिकार और पट्टे दिए जा सकते हैं। इसी को लेकर क्षेत्र में यह धारणा फैल गई है कि अधिक जमीन पर कब्जा दिखाने से भविष्य में उसका लाभ मिल सकता है।

कई गांवों में दिखी पेड़ों की कटाई

जांच के दौरान नारायणपुर, ओरछा, इरकभट्टी, कच्चापाल, कोडलियार, पदमकोट, कुतुल और नेलांगूर सहित कई गांवों के आसपास बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और जंगल जलाने की घटनाएं सामने आईं। कई स्थानों पर पेड़ों को पहले आंशिक रूप से काटकर सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है, बाद में उन्हें गिराकर या जलाकर जमीन खाली की जा रही है।

स्थानीय और लौटे हुए लोग भी कर रहे हैं कब्जे की तैयारी

जानकारी के अनुसार, जंगल साफ करने वालों में स्थानीय आदिवासियों के साथ वे लोग भी शामिल हैं, जो नक्सल हिंसा, रोजगार या अन्य कारणों से वर्षों पहले गांव छोड़ चुके थे और अब वापस लौट रहे हैं। आरोप है कि कुछ लोग अधिक जमीन पर दावा मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र साफ कर रहे हैं।

नक्सल प्रभाव कम होने के बाद बढ़ी गतिविधियां

अबूझमाड़ लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा, जहां सुरक्षा कारणों से विकास कार्य सीमित थे। हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ने और नए कैंप स्थापित होने के बाद इलाके में सरकारी गतिविधियां तेज हुई हैं। इसके साथ ही जंगलों की कटाई की घटनाओं में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर उठी चिंता

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि अबूझमाड़ का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र की श्रेणी में आता है और यहां अनियंत्रित कटाई से जैव विविधता और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है।

वन विभाग ने शुरू किए रोकथाम के प्रयास

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अबूझमाड़ क्षेत्र के बेहतर प्रबंधन के लिए नए वन परिक्षेत्र के गठन का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। इसके अलावा जंगलों की निगरानी और अवैध कटाई रोकने के लिए करीब 30 स्थानों पर स्थानीय युवाओं की नियुक्ति की गई है। अधिकारियों का कहना है कि वन संरक्षण के लिए आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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