रायपुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी और गहराई, प्रोफेसर बनने के बाद 17 शिक्षकों का हुआ तबादला

रायपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों की कमी लगातार बनी हुई है। हाल ही में 21 डॉक्टरों को प्रोफेसर पद पर पदोन्नत किया गया, लेकिन इनमें से 17 डॉक्टरों का विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में तबादला कर दिया गया। इससे पहले से स्टाफ की कमी से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

417 में से 166 पद अब भी खाली

मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों के कुल 417 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 166 पद अभी भी रिक्त हैं। वर्तमान में 251 डॉक्टर शिक्षण कार्य कर रहे हैं। इनमें 156 नियमित और 95 संविदा पर कार्यरत हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षकों की कमी का सीधा असर मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और पीजी सीटों की संख्या पर पड़ता है।

पहले भी घट चुकी हैं पीजी सीटें

शिक्षकों की कमी का असर पहले भी देखने को मिला है। वर्ष 2025 में सर्जरी विभाग में पर्याप्त फैकल्टी नहीं होने के कारण पीजी की दो सीटें कम करनी पड़ी थीं। ऐसे में यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो भविष्य में अन्य विभाग भी प्रभावित हो सकते हैं।

प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों में भी स्टाफ की कमी

केवल रायपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेज भी फैकल्टी की कमी से जूझ रहे हैं। राज्य के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेज और एक सरकारी डेंटल कॉलेज में कुल 1,934 स्वीकृत शिक्षकों के पद हैं, जिनमें से 985 पद खाली हैं। यानी लगभग 51 प्रतिशत पदों पर अब भी नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं।

सुपरस्पेशलिटी अस्पतालों में भी डॉक्टरों की कमी

रायपुर के डीकेएस सुपरस्पेशलिटी अस्पताल और बिलासपुर के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल की स्थिति भी चिंताजनक है। दोनों संस्थानों में कुल 139 स्वीकृत पदों में से 81 पद खाली हैं, जिससे मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में भी चुनौतियां सामने आ रही हैं।

ढाई साल में 100 से अधिक डॉक्टरों ने छोड़ी नौकरी

नियमित भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से लंबित रहने के कारण कई डॉक्टर सरकारी सेवा छोड़ चुके हैं। पिछले करीब ढाई वर्षों में आंबेडकर अस्पताल और डीकेएस अस्पताल से 100 से अधिक डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें से कई डॉक्टर बेहतर अवसर मिलने पर मध्यप्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों के मेडिकल संस्थानों में कार्यरत हो गए।

इन विभागों के डॉक्टरों का हुआ तबादला

पदोन्नति के बाद जिन डॉक्टरों का तबादला किया गया है, वे फॉरेंसिक मेडिसिन, फार्माकोलॉजी, एनाटॉमी, माइक्रोबायोलॉजी, मेडिसिन, गायनिक, ईएनटी, सर्जरी, दंत रोग, एनेस्थीसिया, चर्म रोग और रेडियोथेरेपी विभाग से जुड़े हैं। इनकी नई पदस्थापना कवर्धा, जांजगीर-चांपा, दंतेवाड़ा, मनेंद्रगढ़, महासमुंद, दुर्ग, कांकेर और बिलासपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में की गई है.

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