रायपुर।
बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की कथित निर्मम हत्या को लेकर देशभर में रोष देखा जा रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के 📍पंडरी मंडी गेट पर आज रायपुर युवा मोर्चा द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद पर बैठे मोहम्मद यूनुस का पुतला दहन किया।
पुलिस हिरासत में था दीपू, फिर भी नहीं बचाई गई जान
इस मामले में बांग्लादेश की चर्चित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, दीपू चंद्र दास की हत्या से पहले वह पुलिस की हिरासत में था, लेकिन इसके बावजूद उसे कट्टरपंथी भीड़ से नहीं बचाया गया। तस्लीमा नसरीन ने दावा किया कि दीपू पर दो बार हमला हुआ—पहली बार भीड़ द्वारा और दूसरी बार उसकी हत्या कर दी गई।
उन्होंने इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिसमें घटना से पहले के हालात दिखाई देने का दावा किया गया है।

झूठे ईशनिंदा आरोप का दावा
तस्लीमा नसरीन ने कहा कि दीपू के साथ काम करने वाले एक मुस्लिम सहकर्मी ने निजी रंजिश के चलते उस पर पैगंबर के खिलाफ टिप्पणी करने का झूठा आरोप लगाया था। दीपू ने इस पूरे मामले की शिकायत पहले ही पुलिस से की थी, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
बताया जा रहा है कि दीपू चंद्र दास अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसकी आमदनी से उसके दिव्यांग पिता, मां, पत्नी और बच्चे का भरण-पोषण होता था। तस्लीमा नसरीन ने सवाल उठाते हुए कहा कि अब इस परिवार का भविष्य क्या होगा और उन्हें न्याय कौन दिलाएगा।
फैक्ट्री का वीडियो भी आया सामने
घटना से पहले का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें कपड़ा फैक्ट्री के अंदर दीपू को भीड़ द्वारा घेरते हुए देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर अव्रो नील हिंदू द्वारा साझा किए गए वीडियो में दावा किया गया है कि दीपू अपने बकाया पैसे मांग रहा था, इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और बाद में हिंसा भड़क गई।
रायपुर में कड़ा विरोध, न्याय की मांग
रायपुर में हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ हो रही हिंसा मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
पुलिस की मौजूदगी में यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। फिलहाल यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में बना हुआ है और लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।



