छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल पर विवादित बयान देने के बाद मामला गरमाता जा रहा है।
अग्रवाल और सिंधी समाज के विरोध के बाद रायपुर की सिटी कोतवाली पुलिस ने उनके खिलाफ FIR दर्ज की है।
अमित बघेल ने एक बयान में कहा था कि “पंडित दीनदयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अग्रसेन महाराज की मूर्ति क्यों नहीं टूटती, उन पर पेशाब क्यों नहीं करते?”
इस टिप्पणी के बाद अग्रवाल समाज और सिंधी समाज ने इसे आस्था पर हमला बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई।
समाज के प्रतिनिधियों ने रायपुर, रायगढ़ और सरगुजा में विरोध प्रदर्शन कर अमित बघेल की गिरफ्तारी की मांग की।
आखिरकार, 28 अक्टूबर की रात रायपुर पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 के तहत मुकदमा दर्ज किया — जो धार्मिक भावनाएं आहत करने से जुड़ी है।

अग्रवाल समाज का विरोध और चेतावनी
छत्तीसगढ़ अग्रवाल समाज के केंद्रीय अध्यक्ष दाऊ अनुराग अग्रवाल ने कहा कि बघेल का बयान समाज के लिए असहनीय है।
उन्होंने याद दिलाया कि अग्रसेन महाराज और उनके वंशजों का राज्य के विकास में बड़ा योगदान रहा है —
जैसे DKS अस्पताल, एम्स के लिए दी गई जमीन, और दुधाधारी मंदिर का निर्माण।
समाज ने स्पष्ट कहा कि अगर बघेल माफी नहीं मांगते या पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

रायगढ़ और सरगुजा में भी विरोध प्रदर्शन
रायगढ़ में अग्रवाल समाज के लोगों ने SP ऑफिस पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और कार्रवाई की मांग की।
वहीं सरगुजा में समाज के लोग कोतवाली थाने के बाहर धरने पर बैठ गए और कहा कि जब तक FIR दर्ज नहीं होगी, वे नहीं हटेंगे।
अग्रवाल सभा के उपाध्यक्ष शुभम अग्रवाल और मुख्य सचिव संजय अग्रवाल ने कहा कि बघेल का बयान सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाला है और ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।

क्या है मूर्ति विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब रायपुर के VIP चौक पर छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़ दी गई।
घटना के बाद क्रांति सेना ने हंगामा किया और पुलिस से झड़प भी हुई।
पुलिस ने बाद में आरोपी मनोज सतनामी को गिरफ्तार किया, जो मानसिक रूप से अस्वस्थ पाया गया।
लेकिन इसी घटना के बाद बघेल के विवादित बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया।
प्रदेशभर में दो दिनों तक चले विरोध के बाद आखिरकार पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।



