छत्तीसगढ़ में बुधवार सुबह एसीबी (ACB) और ईओडब्ल्यू (EOW) की संयुक्त टीम ने राज्य के कई जिलों में एक साथ छापेमारी की। रायपुर, दुर्ग, धमतरी और राजनांदगांव में यह कार्रवाई डीएमएफ (District Mineral Fund) घोटाले से जुड़ी जांच के तहत की गई है।
रायपुर में पचपेड़ी नाका स्थित वॉलफोर्ट इंक्लेव में अशोक और अमित कोठारी के घर छापा मारा गया। दोनों का इक्विपमेंट सप्लाई का कारोबार है।
राजनांदगांव में राधाकृष्ण अग्रवाल, ललित भंसाली और यश नाहटा के यहां दबिश दी गई। इनमें राधाकृष्ण अग्रवाल कोल कारोबार से जुड़े हैं, जबकि ललित भंसाली सरकारी स्कूलों के सामान सप्लाई करते हैं। यश नाहटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे कंप्यूटर और टीवी की सप्लाई करते हैं।
दुर्ग के महावीर नगर में कारोबारी नीलेश पारख के घर जांच हुई, वहीं धमतरी के सिर्री गांव में ठेकेदार अभिषेक त्रिपाठी के यहां पांच घंटे तक तलाशी चली। सुबह 7 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में टीम ने कई दस्तावेज जब्त किए।
सूत्रों के अनुसार, यह जांच DMF फंड से जुड़ी सरकारी सप्लाई और कमीशन लेनदेन में अनियमितताओं को लेकर की जा रही है। टीमों ने कई वित्तीय रिकॉर्ड और दस्तावेज जब्त किए हैं। अब तक इस मामले में किसी अधिकारी की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया है।
⚖️ क्या है DMF घोटाला?
ईडी (ED) की रिपोर्ट के आधार पर ईओडब्ल्यू ने आईपीसी की धारा 120बी और 420 के तहत मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया है कि डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड (DMF) के तहत टेंडर आवंटन में भारी गड़बड़ियां की गईं। ठेकेदारों और बिचौलियों ने मिलकर करोड़ों रुपये का घोटाला किया।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि DMF प्रोजेक्ट में फंड खर्च के नियमों को इस तरह बदला गया कि अधिक कमीशन वाले प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा सके।
इस घोटाले में कलेक्टर को 40%, सीईओ को 5%, एसडीओ को 3% और सब-इंजीनियर को 2% तक कमीशन दिया गया।
कोरबा जिले में हुए 575 करोड़ रुपये के DMF स्कैम की जांच में यह सब उजागर हुआ है। एसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक 76.50 लाख रुपये नकद, कई डिजिटल डिवाइस, फर्जी फर्मों से जुड़े दस्तावेज और 8 बैंक खाते जब्त किए गए हैं, जिनमें करीब 35 लाख रुपये जमा थे।
ईडी की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ठेकेदारों ने अधिकारियों और नेताओं को 25% से 40% तक कमीशन दिया था। घूस की रकम को फर्जी अकाउंट्स और डमी कंपनियों के जरिए छिपाया गया था।

