छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत निर्मित लगभग 26 करोड़ रुपये के रेलवे ओवरब्रिज में पहली ही बारिश के बाद गंभीर निर्माण संबंधी खामियां सामने आई हैं। जून में लोकार्पण के कुछ समय बाद हुई बारिश में ओवरब्रिज की सड़क धंस गई और उस पर बड़ी दरारें दिखाई देने लगीं।
मामले को गंभीर मानते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
बारिश के बाद सड़क में आई बड़ी दरारें
डोंगरगढ़-राजनांदगांव रेलखंड पर बने इस ओवरब्रिज में 4 और 5 जुलाई की बारिश के बाद करीब 60 से 70 फीट लंबी तथा 15 से 20 सेंटीमीटर चौड़ी दरारें दिखाई दीं। सड़क का एक हिस्सा धंसने से ओवरब्रिज की संरचना पर सवाल उठने लगे हैं।
निर्माण सामग्री को लेकर आरोप
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि टेंडर की शर्तों के अनुसार बेस में उच्च गुणवत्ता की मुरुम का उपयोग किया जाना था, लेकिन उसकी जगह साधारण मिट्टी का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि बारिश के कारण मिट्टी बैठने से सड़क धंस गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
गुणवत्ता जांच पर भी उठे सवाल
मामले में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच और तकनीकी परीक्षण की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि पर्याप्त परीक्षण के बिना ही ओवरब्रिज को यातायात के लिए खोल दिया गया था।
अस्थायी मरम्मत के बाद भी जारी है आवाजाही
प्रशासन ने फिलहाल दरारों को सीमेंट से भरकर अस्थायी मरम्मत की है। इसके बावजूद ओवरब्रिज से भारी वाहनों का आवागमन जारी है, जिससे स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
रेल मंत्री से की गई प्रमुख मांगें
डॉ. रमन सिंह ने अपने पत्र में पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, कंसल्टेंट और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा तकनीकी सुरक्षा परीक्षण के बाद आवश्यक मरम्मत या पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।