रेल पर मोंथा तूफान का असर: 10 दिन में दूसरी बार भूस्खलन, सुरंग के अंदर गिरे बोल्डर, सुबह तक बहाल हुआ रेल यातायात

बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान मोंथा अब भी अपना असर दिखा रहा है। दस दिनों के भीतर एक बार फिर किरंदुल-कोत्तवालसा रेललाइन पर भूस्खलन हुआ है। इस बार हादसा टायडा-चिमिड़ीपल्ली के बीच हुआ, जहां सुरंग के अंदर बड़े-बड़े बोल्डर पटरियों पर गिर पड़े। यह घटना मंगलवार-बुधवार की दरम्यानी रात हुई।

सौभाग्य से उस समय कोई ट्रेन इस रूट से नहीं गुजर रही थी। रातभर चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुबह तक बोल्डर हटा दिए गए और रेल यातायात को बहाल कर दिया गया। बताया जा रहा है कि मोंथा तूफान के कारण लगातार भारी बारिश हो रही है, जिससे क्षेत्र में बार-बार भूस्खलन की स्थिति बन रही है।

वाल्टेयर रेलमंडल ने एहतियात के तौर पर बुधवार को 14 ट्रेनों को रद्द कर दिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इसी जगह पर 10 दिन पहले भी भूस्खलन हुआ था, जब एक बड़ा पत्थर पटरियों पर गिरा था और उसे हटाने में कई घंटे लगे थे।

टायडा-चिमिड़ीपल्ली सेक्शन में 10 दिन के अंदर यह दूसरी घटना है, जिससे यह इलाका भूस्खलन की दृष्टि से बेहद संवेदनशील बन गया है। बावजूद इसके, वाल्टेयर रेलमंडल अब तक इस सेक्शन में रोकथाम की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं कर सका है।

मौसम वैज्ञानिक एच.पी. चंद्रा के अनुसार, चक्रवाती तूफान मोंथा उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है और वर्तमान में जगदलपुर से लगभग 220 किमी दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित है। इसके आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और दक्षिण छत्तीसगढ़ से होकर गुजरने तथा अवदाब में बदलने की संभावना है। गुरुवार को कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है।

वाल्टेयर रेलमंडल ने तूफान के चलते 8 ट्रेनों को रद्द, 3 ट्रेनों को री-शेड्यूल और 5 ट्रेनों को डायवर्ट किया है। विशाखापट्टनम-किरंदुल पैसेंजर और नाइट एक्सप्रेस को गुरुवार के लिए भी रद्द रखा गया है।

इधर बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। बुधवार को अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.7 डिग्री कम है, जबकि न्यूनतम तापमान 22.9 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। बीते 24 घंटों में 13 मिमी बारिश दर्ज हुई है और हवा में नमी का स्तर 89% तक पहुंच गया है, जिससे लोगों को हल्की ठंड का एहसास हो रहा है।

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